41 में से पाठ 41 · उपयुक्त शब्द-चयन

रिक्त स्थान भरने की विधि: अर्थ, लिंग-वचन-कारक, परसर्ग और मुहावरेदार प्रयोग

AI की सहायता से तैयार किया गया और 28 अक्टूबर 2026 को तथ्यों की जाँच की गई; किसी मानव संपादक ने इसे अभी पंक्ति-दर-पंक्ति नहीं पढ़ा है। कोई गलती दिखे तो हमें बताइए। संपादकीय मानक और सुधार

रिक्त स्थान भरने के चरण

इस प्रश्न में चार विकल्पों में से प्रायः दो-तीन किसी न किसी कसौटी पर गलत होते हैं, इसलिए सही उत्तर ढूँढ़ने से अधिक काम गलत विकल्प हटाने का है। पहला चरण: पूरा वाक्य, रिक्त स्थान के बाद वाला भाग भी, पढ़कर समझिए कि बात क्या है। दूसरा चरण: पहचानिए कि रिक्त स्थान पर संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, क्रियाविशेषण, परसर्ग या समुच्चयबोधक में से क्या चाहिए। तीसरा चरण: लिंग, वचन और कारक का मेल देखकर व्याकरण की दृष्टि से गलत विकल्प हटाइए। चौथा चरण: बचे विकल्पों में अर्थ, भाव और भाषा-स्तर देखकर सबसे सटीक शब्द चुनिए। पाँचवाँ चरण: चुना हुआ शब्द रखकर पूरा वाक्य फिर पढ़िए। कई अभ्यर्थी रिक्त स्थान के आगे-पीछे के दो शब्द पढ़कर ही उत्तर दे देते हैं, जबकि वाक्य का अंतिम भाग अक्सर निर्णायक संकेत देता है; जैसे ‘...... के कारण वह परीक्षा में नहीं बैठ सका’ में ‘के कारण’ बताता है कि यहाँ संज्ञा चाहिए।

शब्द-भेद और शब्द-रूप का मेल

एक ही मूल से बने संज्ञा, विशेषण और क्रियाविशेषण अक्सर साथ-साथ विकल्प बनते हैं। ‘वह एक ...... व्यक्ति है’ (ईमानदार, ईमानदारी, ईमानदारी से) में ‘व्यक्ति’ से पहले विशेषण चाहिए, इसलिए ईमानदार। ‘...... सबसे अच्छी नीति है’ में कर्ता के रूप में संज्ञा चाहिए, इसलिए ईमानदारी। ‘उसने ...... काम किया’ में क्रिया की विशेषता बतानी है, इसलिए ‘ईमानदारी से’। इसी तरह ‘अच्छा ...... ही सबसे बड़ा धन है’ (स्वस्थ, स्वास्थ्य, स्वस्थता) में ‘अच्छा’ के बाद पुल्लिंग संज्ञा चाहिए: स्वस्थ विशेषण है और स्वस्थता स्त्रीलिंग होने से ‘अच्छी’ माँगती, इसलिए उत्तर स्वास्थ्य है। ‘व्यायाम करने वाला व्यक्ति ...... रहता है’ में विशेषण स्वस्थ आएगा। ‘मैं आपका ...... हूँ’ (आभार, आभारी) में आभारी, क्योंकि ‘हूँ’ से पहले व्यक्ति का गुण बताने वाला विशेषण चाहिए।

लिंग और वचन का मेल

क्रिया, विशेषण और का-के-की संज्ञा के लिंग-वचन के अनुसार बदलते हैं, इसलिए संज्ञा का लिंग जानना ज़रूरी है। मानक हिंदी में दही, पानी, घी, मोती, हाथी और व्यक्ति पुल्लिंग हैं: ‘दही खट्टा है’, ‘वह एक अच्छा व्यक्ति है’ (‘अच्छी व्यक्ति’ गलत; कुछ बोलियों में दही स्त्रीलिंग बोला जाता है, पर परीक्षा मानक हिंदी की होती है)। आत्मा, चाय, सरसों, जनता, आग और प्रतीक्षा स्त्रीलिंग हैं: ‘जनता आ गई’, ‘मैं आपकी प्रतीक्षा कर रहा हूँ’; पर इसी अर्थ का ‘इंतज़ार’ पुल्लिंग है: ‘मैं आपका इंतज़ार कर रहा हूँ’। प्राण, दर्शन (भेंट के अर्थ में), हस्ताक्षर और होश सदा बहुवचन में चलते हैं: ‘उसके प्राण निकल गए’, ‘आपके दर्शन हुए’, ‘उसने हस्ताक्षर कर दिए’। आदरणीय व्यक्ति के लिए एक होने पर भी बहुवचन क्रिया आती है: ‘पिताजी आ गए हैं’। ‘ने’ वाले वाक्य में सकर्मक क्रिया कर्ता के नहीं, कर्म के अनुसार चलती है: ‘सीता ने आम खाया’, ‘राम ने रोटी खाई’; और कर्म के साथ ‘को’ लगा हो तो क्रिया पुल्लिंग एकवचन रहती है: ‘सीता ने बच्चों को बुलाया’।

कारक और परसर्ग का सही चुनाव

परसर्ग वाले रिक्त स्थान में क्रिया देखकर कारक पहचानिए। ‘मुझे घर जाना है’ सही है, ‘मैं घर जाना है’ या ‘मैंने घर जाना है’ नहीं। ‘वह मुझसे दो वर्ष बड़ा है’ में तुलना के लिए से; ‘मैंने उससे रास्ता पूछा’ में पूछना के साथ से (‘उसको पूछा’ गलत); ‘पेड़ से पत्ते गिरते हैं’ में अलग होने का भाव (अपादान); ‘कलम से लिखो’ में साधन (करण); ‘रावण राम द्वारा मारा गया’ में कर्मवाच्य का द्वारा; ‘बच्चों के लिए मिठाई लाओ’ में संप्रदान; ‘मेज़ पर पुस्तक रखी है’ और ‘घड़े में पानी है’ में अधिकरण; ‘वह शाम को आएगा’ में समय के साथ को। ‘ने’ सामान्यतः सकर्मक क्रिया के भूतकाल में ही आता है (खाया, खाया है, खाया था; पर ‘खा रहा था’ में नहीं), इसलिए ‘वह हँसा’ और ‘वह आया’ सही हैं, ‘उसने हँसा’ गलत; और ‘लाना’ सकर्मक होते हुए भी ‘ने’ नहीं लेता: ‘वह फल लाया’ सही है, ‘उसने फल लाया’ गलत। मानक व्याकरण-ग्रंथ छींकना, खाँसना और थूकना जैसी कुछ अकर्मक क्रियाओं के साथ भी ‘ने’ का प्रयोग बताते हैं (‘उसने छींका’); यह अपवाद है, नियम नहीं।

मुहावरेदार प्रयोग और शब्द-संगति

कई रिक्त स्थान किसी मुहावरे का एक शब्द माँगते हैं, और मुहावरे का शब्द पर्यायवाची से भी नहीं बदला जा सकता। ‘चोर पुलिस को देखते ही नौ दो ...... हो गया’ में ग्यारह; ‘सैनिकों ने शत्रु के दाँत ...... कर दिए’ में खट्टे; ‘इकलौता बेटा माँ की आँखों का ...... है’ में तारा; ‘राम के लौटने पर अयोध्या में घी के ...... जलाए गए’ में दीये; ‘परीक्षा के लिए उसने ...... कस ली’ में कमर; ‘भूखे हाथी को दो केले देना ऊँट के मुँह में ...... है’ में जीरा। ‘आँखों का सितारा’ या ‘नौ दो बारह’ जैसा बदला रूप गलत है। संज्ञा और विशेषण की संगति भी देखी जाती है: मूसलाधार वर्षा, कट्टर शत्रु, घनिष्ठ मित्र, गहरी नींद, घना अंधकार; और संज्ञा-क्रिया की भी: शपथ लेना, भाषण देना, निर्णय लेना, आज्ञा का पालन करना, श्रद्धांजलि अर्पित करना। ‘शपथ देना’ के बजाय दूसरे को शपथ ग्रहण कराने के लिए ‘शपथ दिलाना’ आता है।

भाषा का स्तर और जोड़ीदार अव्यय

एक ही अर्थ के शब्द अलग प्रसंग में अलग उपयुक्त होते हैं। ‘युद्ध में सैनिक ने देश के लिए ...... पाई’ में वीरगति; ‘प्रसिद्ध कवि का कल ...... हो गया’ में सम्मानसूचक निधन या देहावसान; सामान्य प्रसंग में मृत्यु। औपचारिक पत्र में ‘सविनय निवेदन है’ और ‘आपका आभारी रहूँगा’ जैसे वाक्यांश आते हैं। कई रिक्त स्थान जोड़ीदार समुच्चयबोधक का दूसरा भाग माँगते हैं: यद्यपि के साथ तथापि (या तो भी, फिर भी), जैसे के साथ वैसे, ज्यों ही के साथ त्यों ही, जब के साथ तब, यदि के साथ तो, और न के साथ न। ‘यद्यपि वह गरीब है, ...... ईमानदार है’ (तथापि, इसलिए, अन्यथा) में तथापि; ‘ज्यों ही घंटी बजी, ...... बच्चे दौड़ पड़े’ में त्यों ही। कारण बताने के लिए क्योंकि, परिणाम के लिए इसलिए और चेतावनी के लिए अन्यथा आता है: ‘परिश्रम करो, अन्यथा पछताओगे’।

मिश्रित अभ्यास और हल

‘नदी के ...... पर बैठकर साधु ध्यान कर रहे थे’ (कुल, कूल, कुली, कूप): प्रसंग किनारे का है, उत्तर कूल। ‘मुझे ...... है कि मैं आपके समारोह में नहीं आ सका’ (शोक, खेद, क्षोभ, विषाद): औपचारिक प्रसंग और हल्का दुख, उत्तर खेद। ‘बच्चे ...... दूध पी लिया’ (ने, को, से, का): सकर्मक क्रिया का भूतकाल है, उत्तर ने। ‘उसने मुझ ...... सौ रुपये उधार लिए’ (को, से, पर, में): जिससे कुछ लिया जाए उसके साथ से, उत्तर से। ‘मंदिर में ...... बँट रहा था’ (प्रसाद, प्रासाद): भोग की बात है, उत्तर प्रसाद। ‘गुरु के प्रति शिष्य की ...... देखकर सब प्रभावित हुए’ (स्नेह, श्रद्धा, वात्सल्य, ईर्ष्या): भाव बड़ों के प्रति है, उत्तर श्रद्धा। ‘ज्यों ही बिजली गई, ...... पूरा मोहल्ला अँधेरे में डूब गया’ (तब, त्यों ही, तो, वैसे): ज्यों ही का जोड़ा, उत्तर त्यों ही। ‘शेर को सामने देखकर उसके होश ......’ (उड़ गया, उड़ गई, उड़ गए): होश सदा बहुवचन में चलता है, इसलिए उत्तर ‘उड़ गए’।

मुख्य तथ्य

  • चरण: पूरा वाक्य पढ़ें, शब्द-भेद पहचानें, लिंग-वचन-कारक से गलत विकल्प हटाएँ, अर्थ और भाषा-स्तर से सटीक शब्द चुनें, फिर वाक्य दोबारा पढ़ें।
  • ‘वह एक ...... व्यक्ति है’ → ईमानदार (विशेषण); ‘...... सबसे अच्छी नीति है’ → ईमानदारी (संज्ञा); ‘अच्छा ...... ही सबसे बड़ा धन है’ → स्वास्थ्य।
  • पुल्लिंग: दही, पानी, घी, मोती, हाथी, व्यक्ति; स्त्रीलिंग: आत्मा, चाय, सरसों, जनता, आग, प्रतीक्षा (पर इंतज़ार पुल्लिंग)।
  • सदा बहुवचन: प्राण, दर्शन (भेंट के अर्थ में), हस्ताक्षर, होश: ‘उसके प्राण निकल गए’, ‘आपके दर्शन हुए’, ‘उसके होश उड़ गए’।
  • ‘ने’ वाले वाक्य में क्रिया कर्म के अनुसार: ‘राम ने रोटी खाई’, ‘सीता ने आम खाया’; कर्म के साथ ‘को’ हो तो पुल्लिंग एकवचन: ‘सीता ने बच्चों को बुलाया’।
  • परसर्ग: ‘मुझे घर जाना है’, ‘वह मुझसे बड़ा है’, ‘मैंने उससे पूछा’, ‘पेड़ से पत्ते गिरते हैं’, ‘वह फल लाया’ (लाना के साथ ने नहीं)।
  • मुहावरे का शब्द नहीं बदलता: नौ दो ग्यारह होना, दाँत खट्टे करना, आँखों का तारा, घी के दीये जलाना, कमर कसना, ऊँट के मुँह में जीरा।
  • संगति: मूसलाधार वर्षा, कट्टर शत्रु, घनिष्ठ मित्र, गहरी नींद; शपथ लेना, शपथ दिलाना, निर्णय लेना, आज्ञा का पालन करना।
  • जोड़ीदार अव्यय: यद्यपि-तथापि, जैसे-वैसे, ज्यों ही-त्यों ही, जब-तब, यदि-तो, न-न: ‘यद्यपि वह गरीब है, ...... ईमानदार है’ (तथापि, इसलिए, अन्यथा) → तथापि।
  • भाषा-स्तर: युद्ध में वीरगति, प्रतिष्ठित व्यक्ति का निधन या देहावसान, सामान्य प्रसंग में मृत्यु; औपचारिक पत्र में ‘सविनय निवेदन है’।

एक नज़र में दोहराव

रिक्त स्थान: पूरा वाक्य पढ़ें, शब्द-भेद पहचानें, लिंग-वचन-कारक मिलाएँ, अर्थ और भाषा-स्तर देखें; ईमानदार-ईमानदारी, स्वस्थ-स्वास्थ्य; दही, व्यक्ति पुल्लिंग; आत्मा, जनता, प्रतीक्षा स्त्रीलिंग; प्राण, दर्शन, हस्ताक्षर, होश बहुवचन; ने वाले वाक्य में क्रिया कर्म के अनुसार; मुझे जाना है, मुझसे बड़ा, उससे पूछा, वह फल लाया; मुहावरे का शब्द नहीं बदलता; यद्यपि-तथापि, ज्यों ही-त्यों ही; वीरगति, निधन, मृत्यु का प्रसंग।

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