12 में से पाठ 4 · सामान्य विज्ञान (भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान)
प्रकाश: दर्पण, लेंस, अपवर्तन और मानव नेत्र
AI की सहायता से तैयार किया गया और 28 अक्टूबर 2026 को तथ्यों की जाँच की गई; किसी मानव संपादक ने इसे अभी पंक्ति-दर-पंक्ति नहीं पढ़ा है। कोई गलती दिखे तो हमें बताइए। संपादकीय मानक और सुधार
परावर्तन और समतल दर्पण
प्रकाश एक विद्युतचुंबकीय तरंग है जो निर्वात में लगभग 3 x 10^8 मी/से की चाल से सीधी रेखा में चलती है; सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुँचने में लगभग 8 मिनट 20 सेकंड लगते हैं। आपतन कोण परावर्तन कोण के बराबर होता है, और आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा अभिलंब एक ही तल में होते हैं। समतल दर्पण आभासी, सीधा और वस्तु के बराबर आकार का प्रतिबिंब बनाता है, जो दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर होता है जितनी वस्तु आगे है, और पार्श्व-परिवर्तित (laterally inverted) होता है; इसीलिए एम्बुलेंस पर AMBULANCE उलटे अक्षरों में लिखा जाता है। θ कोण पर झुके दो दर्पण (360/θ) - 1 प्रतिबिंब बनाते हैं, इसलिए 90 डिग्री पर रखे दर्पण 3 प्रतिबिंब बनाते हैं।
गोलीय दर्पण
अवतल (concave) दर्पण प्रकाश को अभिसरित और उत्तल (convex) दर्पण अपसरित करता है; फोकस दूरी वक्रता त्रिज्या की आधी होती है (f = R/2) और दर्पण सूत्र 1/v + 1/u = 1/f है। अवतल दर्पण वास्तविक, उल्टे प्रतिबिंब बनाता है, सिवाय तब के जब वस्तु फोकस और दर्पण के बीच हो, तब यह बड़ा, सीधा, आभासी प्रतिबिंब देता है; इसलिए यह दाढ़ी बनाने और दंत चिकित्सक के दर्पण के रूप में, तथा फोकस पर रखे बल्ब से समांतर किरण-पुंज भेजते हुए टॉर्च, हेडलाइट और सर्चलाइट के परावर्तक के रूप में प्रयुक्त होता है। उत्तल दर्पण सदैव आभासी, सीधा, छोटा प्रतिबिंब बनाता है और उसका दृष्टि-क्षेत्र विस्तृत होता है, इसलिए वाहनों में पीछे देखने के दर्पण के रूप में प्रयुक्त होता है।
अपवर्तन और अपवर्तनांक
एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने पर प्रकाश मुड़ जाता है (अपवर्तन, refraction) क्योंकि उसकी चाल बदलती है; विरल से सघन माध्यम में जाते समय यह अभिलंब की ओर मुड़ता है। स्नेल का नियम कहता है कि माध्यमों के किसी युग्म के लिए sin i / sin r स्थिर रहता है। अपवर्तनांक (refractive index), n = निर्वात में प्रकाश की चाल / माध्यम में प्रकाश की चाल, जल के लिए लगभग 1.33, काँच के लिए लगभग 1.5 और हीरे के लिए 2.42 है। अपवर्तन में आवृत्ति नहीं बदलती, जबकि चाल और तरंगदैर्ध्य बदल जाते हैं। अपवर्तन के कारण तालाब वास्तविक गहराई से उथला और पानी में डूबी छड़ी मुड़ी हुई दिखती है। वायुमंडलीय अपवर्तन से तारे टिमटिमाते हैं (ग्रह, निकट होने के कारण, नहीं टिमटिमाते) और सूर्य हमें वास्तविक सूर्योदय से लगभग 2 मिनट पहले तथा वास्तविक सूर्यास्त के बाद भी दिखाई देता है।
लेंस और प्रकाशीय यंत्र
उत्तल लेंस, जो बीच में मोटा होता है, प्रकाश को अभिसरित करता है; अवतल लेंस, जो बीच में पतला होता है, अपसरित करता है। लेंस सूत्र 1/v - 1/u = 1/f है, और क्षमता P = 1/f (f मीटर में) डाइऑप्टर में मापी जाती है, जो उत्तल लेंस के लिए धनात्मक और अवतल के लिए ऋणात्मक होती है; अतः 0.5 मीटर फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस की क्षमता +2 D है। उत्तल लेंस आवर्धक लेंस, कैमरे और प्रोजेक्टर में प्रयुक्त होते हैं। संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में अभिदृश्यक और नेत्रिका दोनों की फोकस दूरी कम होती है; खगोलीय दूरदर्शी के अभिदृश्यक की फोकस दूरी और द्वारक (एपर्चर) दोनों बड़े होते हैं। लेंस का प्रभाव उसके परिवेश पर निर्भर करता है: जल में वायु का बुलबुला अपसारी लेंस की तरह कार्य करता है।
पूर्ण आंतरिक परावर्तन (total internal reflection)
जब प्रकाश सघन से विरल माध्यम में क्रांतिक कोण (critical angle) से बड़े आपतन कोण पर जाता है, तो वह पूरा का पूरा वापस परावर्तित हो जाता है। काँच का क्रांतिक कोण लगभग 42 डिग्री और हीरे का लगभग 24 डिग्री है; यही छोटा कोण तराशे हुए हीरे के भीतर प्रकाश को फँसाकर उसे चमकाता है। दूरसंचार में और शरीर के भीतर देखने वाले एंडोस्कोप में प्रयुक्त प्रकाशीय तंतु बार-बार पूर्ण आंतरिक परावर्तन द्वारा प्रकाश ले जाते हैं। गर्म सड़क या रेगिस्तान में दिखने वाली मरीचिका, और दूरबीन (बाइनोक्यूलर) के प्रिज्म, इसके अन्य उदाहरण हैं।
वर्ण-विक्षेपण, इंद्रधनुष और प्रकीर्णन
प्रिज्म श्वेत प्रकाश को सात रंगों, VIBGYOR (बैनीआहपीनाला), में विभाजित करता है (वर्ण-विक्षेपण, dispersion), जैसा न्यूटन ने दिखाया था; लाल रंग सबसे कम विचलित होता है और उसकी तरंगदैर्ध्य सबसे लंबी (लगभग 700 nm) है, बैंगनी सबसे अधिक विचलित होता है और उसकी तरंगदैर्ध्य सबसे छोटी (लगभग 400 nm) है। इंद्रधनुष वर्षा की बूँदों में वर्ण-विक्षेपण, अपवर्तन और आंतरिक परावर्तन से बनता है, इसलिए यह तभी दिखता है जब सूर्य प्रेक्षक के पीछे हो, और इसके बाहरी किनारे पर लाल रंग होता है। वायु के सूक्ष्म कण छोटी तरंगदैर्ध्य को लंबी तरंगदैर्ध्य की तुलना में कहीं अधिक प्रकीर्णित करते हैं (प्रकीर्णन, scattering), इसलिए आकाश नीला दिखता है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय प्रकाश वायु में लंबा मार्ग तय करता है, नीला रंग प्रकीर्णित होकर हट जाता है और सूर्य लाल दिखता है; खतरे के संकेत लाल होते हैं क्योंकि लाल रंग सबसे कम प्रकीर्णित होता है और कोहरे में दूर तक दिखता है। सी. वी. रमन ने 28 फरवरी 1928 को रमन प्रभाव, यानी अणुओं द्वारा प्रकाश का एक प्रकार का प्रकीर्णन, खोजा; यह दिन अब राष्ट्रीय विज्ञान दिवस है, और उन्हें 1930 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला।
मानव नेत्र और उसके दोष
नेत्र में अधिकांश अपवर्तन स्वच्छ मंडल (कॉर्निया) पर होता है; परितारिका (आइरिस) पुतली का आकार नियंत्रित करती है; उत्तल नेत्र लेंस दृष्टिपटल (रेटिना) पर वास्तविक, उल्टा प्रतिबिंब बनाता है, जिसकी छड़ें मंद प्रकाश को और शंकु रंगों को पहचानते हैं। पक्ष्माभी पेशियाँ लेंस की फोकस दूरी बदलती हैं (समंजन क्षमता, power of accommodation), इसलिए सामान्य नेत्र 25 सेमी (निकट बिंदु) से अनंत तक स्पष्ट देखता है। दृष्टिपटल पर प्रतिबिंब लगभग 1/16 सेकंड तक बना रहता है (दृष्टि-निर्बंध, persistence of vision), जिससे सिनेमा संभव होता है। निकट-दृष्टि दोष (मायोपिया) में प्रतिबिंब दृष्टिपटल के आगे बनता है और अवतल लेंस इसे ठीक करता है; दीर्घ-दृष्टि दोष (हाइपरमेट्रोपिया) में प्रतिबिंब दृष्टिपटल के पीछे बनता है और उत्तल लेंस इसे ठीक करता है; जरा-दूरदृष्टिता (प्रेसबायोपिया), यानी आयु के साथ समंजन क्षमता का घटना, द्विफोकसी लेंस माँगती है; अबिंदुकता (एस्टिग्मैटिज्म) में बेलनाकार लेंस लगता है; मोतियाबिंद, यानी नेत्र लेंस का धुंधला हो जाना, शल्य-चिकित्सा से ठीक किया जाता है।
मुख्य तथ्य
- निर्वात में प्रकाश की चाल लगभग 3 x 10^8 मी/से; सूर्य का प्रकाश लगभग 8 मिनट 20 सेकंड में पृथ्वी तक पहुँचता है।
- समतल दर्पण का प्रतिबिंब: आभासी, सीधा, समान आकार, पार्श्व-परिवर्तित; 90 डिग्री पर रखे दो दर्पण (360/θ) - 1 सूत्र से 3 प्रतिबिंब बनाते हैं।
- अवतल दर्पण: दाढ़ी बनाने का दर्पण, दंत चिकित्सक का दर्पण, टॉर्च और हेडलाइट के परावर्तक, सौर भट्ठी। उत्तल दर्पण: पीछे देखने का दर्पण (विस्तृत क्षेत्र, छोटा सीधा प्रतिबिंब)।
- अपवर्तनांक n = c/v: जल 1.33, काँच लगभग 1.5, हीरा 2.42; अपवर्तन से तालाब उथले दिखते हैं और तारे टिमटिमाते हैं।
- लेंस की क्षमता P = 1/f (f मीटर में), मात्रक डाइऑप्टर; उत्तल लेंस धनात्मक, अवतल लेंस ऋणात्मक; जल में वायु का बुलबुला अपसारी लेंस की तरह कार्य करता है।
- पूर्ण आंतरिक परावर्तन के लिए प्रकाश सघन से विरल माध्यम में क्रांतिक कोण से अधिक कोण पर जाए (काँच लगभग 42 डिग्री, हीरा लगभग 24 डिग्री): हीरे की चमक, प्रकाशीय तंतु, मरीचिका।
- VIBGYOR: लाल की तरंगदैर्ध्य सबसे लंबी और विचलन सबसे कम, बैंगनी की तरंगदैर्ध्य सबसे छोटी और विचलन सबसे अधिक; इंद्रधनुष तब दिखता है जब सूर्य आपके पीछे हो।
- नीला आकाश और लाल सूर्यास्त प्रकीर्णन के कारण; खतरे के संकेत लाल क्योंकि लाल सबसे कम प्रकीर्णित होता है; रमन प्रभाव की खोज 28 फरवरी 1928 (राष्ट्रीय विज्ञान दिवस), नोबेल पुरस्कार 1930।
- निकट-दृष्टि दोष: अवतल लेंस; दीर्घ-दृष्टि दोष: उत्तल; जरा-दूरदृष्टिता: द्विफोकसी; अबिंदुकता: बेलनाकार; मोतियाबिंद: शल्य-चिकित्सा; सामान्य नेत्र का निकट बिंदु: 25 सेमी।
- दूरदर्शी का अभिदृश्यक: बड़ी फोकस दूरी; सूक्ष्मदर्शी का अभिदृश्यक: छोटी फोकस दूरी; लगभग 1/16 सेकंड का दृष्टि-निर्बंध सिनेमा को संभव बनाता है।
एक नज़र में दोहराव
c = 3 x 10^8 मी/से; आपतन कोण = परावर्तन कोण; समतल दर्पण का प्रतिबिंब पार्श्व-परिवर्तित; अवतल दर्पण हेडलाइट और दाढ़ी बनाने में, उत्तल पीछे देखने में; n = c/v, जल 1.33, हीरा 2.42; P = 1/f डाइऑप्टर में; पूर्ण आंतरिक परावर्तन: हीरा, प्रकाशीय तंतु, मरीचिका; VIBGYOR, लाल सबसे कम विचलित; नीला आकाश प्रकीर्णन से; रमन प्रभाव 1928; निकट-दृष्टि दोष अवतल, दीर्घ-दृष्टि दोष उत्तल, जरा-दूरदृष्टिता द्विफोकसी, अबिंदुकता बेलनाकार; निकट बिंदु 25 सेमी।