10 में से पाठ 6 · भौतिक एवं विश्व भूगोल
वायुदाब पेटियाँ, ग्रहीय और स्थानीय पवनें, जेट धाराएँ, चक्रवात और वर्षा
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वायुदाब
किसी स्थान के ऊपर वायु के स्तंभ का भार वायुदाब है। इसे 1643 में इवेंजेलिस्टा टॉरिसेली द्वारा आविष्कृत पारद बैरोमीटर या निर्द्रव (एनेरॉइड) बैरोमीटर से मापा जाता है; समुद्र तल पर औसत वायुदाब 1013.25 मिलीबार है। सतह के निकट ऊँचाई के प्रत्येक 10 मीटर पर वायुदाब लगभग 1 मिलीबार घटता है। समान वायुदाब वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखाएँ समदाब रेखाएँ हैं, और पास-पास की समदाब रेखाएँ तेज़ पवनों की सूचक हैं, क्योंकि वायु सदा उच्च दाब से निम्न दाब की ओर चलती है।
वायुदाब पेटियाँ और ग्रहीय पवनें
विषुवतीय निम्न दाब पेटी (लगभग 5 डिग्री उत्तर से 5 डिग्री दक्षिण) ऊपर उठती गर्म वायु का शांत क्षेत्र, डोलड्रम, है, जहाँ दोनों गोलार्धों की व्यापारिक पवनें अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) में मिलती हैं। उपोष्ण उच्च दाब पेटियों (लगभग 30 डिग्री उत्तर और दक्षिण), यानी अश्व अक्षांशों, में शुष्क वायु नीचे उतरती है, और अधिकांश गर्म मरुस्थल इन्हीं के नीचे हैं। उपध्रुवीय निम्न दाब पेटियाँ लगभग 60 डिग्री पर और ध्रुवीय उच्च दाब पेटियाँ ध्रुवों पर हैं। व्यापारिक पवनें उपोष्ण उच्च दाब से विषुवत रेखा की ओर चलती हैं, उत्तरी गोलार्ध में उत्तर-पूर्व से और दक्षिणी गोलार्ध में दक्षिण-पूर्व से। पछुआ पवनें उपोष्ण उच्च दाब से उपध्रुवीय निम्न दाब की ओर चलती हैं, उत्तर में दक्षिण-पश्चिम से और दक्षिण में उत्तर-पश्चिम से; खुले दक्षिणी महासागरों पर ये इतनी प्रबल होती हैं कि नाविकों ने इन्हें गरजती चालीसा, प्रचंड पचासा और चीखती साठा (रोअरिंग फ़ोर्टीज़, फ़्यूरियस फ़िफ़्टीज़, श्रीकिंग सिक्स्टीज़) नाम दिए। ध्रुवीय पुरवा पवनें ध्रुवों से चलती हैं। सूर्य की लंबवत किरणों के साथ ये पेटियाँ उत्तरी ग्रीष्म में उत्तर की ओर और शीत ऋतु में दक्षिण की ओर खिसकती हैं, जिससे मानसून और भूमध्यसागरीय प्रदेशों की शीतकालीन वर्षा को समझने में सहायता मिलती है।
कोरिऑलिस प्रभाव
पृथ्वी के घूर्णन के कारण चलती वायु उत्तरी गोलार्ध में दाईं ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर मुड़ जाती है। 1835 में गैस्पार्ड-गुस्ताव डी कोरिऑलिस द्वारा वर्णित यह कोरिऑलिस बल विषुवत रेखा पर शून्य और ध्रुवों पर सबसे अधिक होता है; विक्षेपण का यह नियम फ़ेरल का नियम कहलाता है। बाइस बैलट के नियम के अनुसार उत्तरी गोलार्ध में यदि आप पवन की ओर पीठ करके खड़े हों तो निम्न दाब आपके बाईं ओर होगा।
संसार की स्थानीय पवनें
पर्वतों के पवनविमुख ढाल से उतरने वाली गर्म, शुष्क पवनों में रॉकी की चिनूक (हिम भक्षक), आल्प्स की फ़ॉन, अर्जेंटीना के एंडीज़ की ज़ोंडा और दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया की सांता एना हैं। गर्म मरुस्थलीय पवनों में सहारा से इटली की ओर चलने वाली सिरॉको, मिस्र की ख़मसिन, अरब और सहारा की सिमूम, पश्चिम अफ्रीका की हरमट्टन, जिसे डॉक्टर कहते हैं क्योंकि इसकी शुष्कता उमस भरी गर्मी से राहत देती है, दक्षिण-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया की ब्रिकफ़ील्डर और उत्तर भारत की लू हैं। ठंडी पवनों में फ़्रांस की रोन घाटी में उतरने वाली मिस्ट्रल, एड्रियाटिक तट की बोरा, अर्जेंटीना के पम्पास की पैम्पेरो, न्यू साउथ वेल्स की सदर्ली बस्टर, साइबेरिया की पुर्गा और उत्तरी अमेरिका तथा ध्रुवीय प्रदेशों का हिमयुक्त ब्लिज़र्ड हैं।
जेट धाराएँ
जेट धाराएँ क्षोभमंडल के शीर्ष के पास, लगभग 9 से 16 किमी ऊँचाई पर, अत्यंत तेज़ पवनों की संकरी पट्टियाँ हैं, जो अधिकतर पछुआ होती हैं। ये शीत ऋतु में सबसे तेज़ चलती हैं: NCERT के अनुसार इनकी गति ग्रीष्म ऋतु में लगभग 110 किमी प्रति घंटा और शीत ऋतु में लगभग 184 किमी प्रति घंटा होती है, और इनके केंद्रीय भाग की गति 300 किमी प्रति घंटा से भी अधिक हो सकती है। शीत ऋतु में उपोष्ण पछुआ जेट धारा हिमालय के दक्षिण में चलती है और उन पश्चिमी विक्षोभों को दिशा देती है जो उत्तर-पश्चिम भारत में वर्षा और हिमपात लाते हैं; ग्रीष्म के आरंभ में यह तिब्बत के पठार के उत्तर में खिसक जाती है, जिससे मानसून के प्रस्फोट में सहायता मिलती है, और तब प्रायद्वीपीय भारत के ऊपर उष्णकटिबंधीय पुरवा जेट धारा चलती है।
चक्रवात और प्रतिचक्रवात
चक्रवात निम्न दाब का तंत्र है जिसमें पवनें भीतर की ओर घूमती हैं, उत्तरी गोलार्ध में वामावर्त और दक्षिणी गोलार्ध में दक्षिणावर्त; प्रतिचक्रवात उच्च दाब का तंत्र है जिसमें वायु नीचे उतरती है, पवनें बाहर की ओर चलती हैं और मौसम साफ़ रहता है। उष्णकटिबंधीय चक्रवात लगभग 27 डिग्री सेल्सियस से अधिक गर्म समुद्रों पर, लगभग 5 से 30 डिग्री अक्षांशों के बीच बनते हैं, क्योंकि घुमाव शुरू करने के लिए आवश्यक कोरिऑलिस बल विषुवत रेखा के पास नहीं होता। ये संघनन से मुक्त गुप्त ऊष्मा से ऊर्जा पाते हैं, इसलिए स्थल पर पहुँचने के बाद कमज़ोर पड़ जाते हैं। शांत चक्षु (आँख) के चारों ओर चक्षु-भित्ति होती है, जहाँ पवन और वर्षा सबसे प्रचंड होती है, और तूफ़ानी महोर्मि (स्टॉर्म सर्ज) सबसे अधिक मौतों का कारण बनती है। उत्तर हिंद महासागर में ये सबसे अधिक बंगाल की खाड़ी में, मानसून से पहले और बाद में आते हैं। शीतोष्ण चक्रवात मध्य अक्षांशों में उन वाताग्रों पर बनते हैं जहाँ गर्म और ठंडी वायुराशियाँ मिलती हैं; ये अधिक बड़े होते हैं, पछुआ पवनों के साथ पश्चिम से पूर्व चलते हैं और कई दिनों तक वर्षा लाते हैं, और पश्चिमी विक्षोभ इसी प्रकार के हैं।
आर्द्रता, बादल और वर्षा
सापेक्ष आर्द्रता वायु में उपस्थित जलवाष्प को उस तापमान पर उसकी अधिकतम धारण क्षमता के प्रतिशत के रूप में बताती है; 100 प्रतिशत पर वायु संतृप्त होती है, और जिस तापमान पर ऐसा होता है वह ओसांक है। पक्षाभ (सिरस) बादल ऊँचे (8,000 से 12,000 मीटर), पंख जैसे और हिम-कणों से बने होते हैं; कपासी (क्यूम्यलस) बादल रुई के ढेर जैसे, साफ़ मौसम के बादल हैं; और ऊँचे उठे कपासी-वर्षी (क्यूम्यलोनिम्बस) बादल गरज, बिजली और ओले लाते हैं। संवहनीय वर्षा तेज़ी से गर्म हुई वायु के ऊपर उठने से होती है, जैसे विषुवतीय पेटी में दोपहर बाद की गरज-वर्षा। पर्वतीय वर्षा तब होती है जब नम पवनें पर्वतों पर चढ़ने को बाध्य होती हैं: पवनाभिमुख ढाल पर भारी वर्षा होती है और पवनविमुख ढाल वृष्टि-छाया में रहता है, जैसे पश्चिमी घाट और शुष्क दक्कन का भीतरी भाग। चक्रवाती या वाताग्री वर्षा तब होती है जब वाताग्रों पर गर्म वायु ठंडी वायु के ऊपर उठा दी जाती है।
मुख्य तथ्य
- वायुदाब पेटियाँ: विषुवतीय निम्न (डोलड्रम, ITCZ), लगभग 30 डिग्री पर उपोष्ण उच्च (अश्व अक्षांश, गर्म मरुस्थल), लगभग 60 डिग्री पर उपध्रुवीय निम्न, ध्रुवीय उच्च।
- कोरिऑलिस बल: विषुवत रेखा पर शून्य, ध्रुवों पर सबसे अधिक; उत्तर में दाईं ओर और दक्षिण में बाईं ओर विक्षेपण (फ़ेरल का नियम)। बाइस बैलट: पवन की ओर पीठ, निम्न दाब बाईं ओर (उत्तरी गोलार्ध)।
- व्यापारिक पवनें: उत्तर-पूर्वी (उत्तर में) और दक्षिण-पूर्वी (दक्षिण में), विषुवत रेखा की ओर। पछुआ: दक्षिण-पश्चिमी (उत्तर में) और उत्तर-पश्चिमी (दक्षिण में)। गरजती चालीसा, प्रचंड पचासा, चीखती साठा।
- उतरती गर्म पवनें: चिनूक (रॉकी, हिम भक्षक), फ़ॉन (आल्प्स), ज़ोंडा (अर्जेंटीना), सांता एना (कैलिफ़ोर्निया)।
- गर्म पवनें: सिरॉको (सहारा से इटली), ख़मसिन (मिस्र), सिमूम (अरब और सहारा), हरमट्टन (पश्चिम अफ्रीका, डॉक्टर), ब्रिकफ़ील्डर (ऑस्ट्रेलिया), लू (उत्तर भारत)।
- ठंडी पवनें: मिस्ट्रल (रोन घाटी, फ़्रांस), बोरा (एड्रियाटिक), पैम्पेरो (अर्जेंटीना), सदर्ली बस्टर (न्यू साउथ वेल्स), पुर्गा (साइबेरिया), ब्लिज़र्ड (उत्तरी अमेरिका और ध्रुवीय प्रदेश)।
- उपोष्ण पछुआ जेट: शीत ऋतु में हिमालय के दक्षिण में, पश्चिमी विक्षोभों को दिशा देती है; मानसून प्रस्फोट के समय तिब्बत के उत्तर में खिसकती है; ग्रीष्म में प्रायद्वीपीय भारत पर उष्णकटिबंधीय पुरवा जेट।
- उष्णकटिबंधीय चक्रवात: 27 डिग्री सेल्सियस से गर्म समुद्र, 5 से 30 डिग्री अक्षांश, शांत चक्षु, सबसे प्रचंड चक्षु-भित्ति; उत्तर में वामावर्त, दक्षिण में दक्षिणावर्त; स्थल पर पहुँचकर कमज़ोर।
- बादल: पक्षाभ ऊँचे और पंख जैसे (हिम-कण), कपासी साफ़ मौसम के ढेर, स्तरी धूसर परतें, कपासी-वर्षी गरज, बिजली और ओले।
- वर्षा के प्रकार: संवहनीय (विषुवतीय दोपहर), पर्वतीय (पवनाभिमुख ढाल गीला, पवनविमुख ढाल वृष्टि-छाया में), चक्रवाती या वाताग्री (वाताग्रों पर)।
एक नज़र में दोहराव
समुद्र तल पर औसत दाब 1013.25 मिलीबार; वायु उच्च से निम्न दाब की ओर; डोलड्रम विषुवत रेखा पर, अश्व अक्षांश 30 डिग्री पर, उपध्रुवीय निम्न 60 डिग्री पर; व्यापारिक पवनें उत्तर-पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी, पछुआ दक्षिण-पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी, ध्रुवीय पुरवा; कोरिऑलिस बल विषुवत रेखा पर शून्य; गरजती चालीसा; चिनूक, फ़ॉन, ज़ोंडा, सांता एना गर्म; मिस्ट्रल, बोरा, पैम्पेरो ठंडी; सिरॉको, ख़मसिन, हरमट्टन गर्म; जेट धाराएँ पश्चिमी विक्षोभों को दिशा देती हैं; उष्णकटिबंधीय चक्रवात 27 डिग्री सेल्सियस से गर्म समुद्र पर; शीतोष्ण चक्रवात वाताग्रों पर; पक्षाभ ऊँचे, कपासी-वर्षी से ओले; संवहनीय, पर्वतीय, चक्रवाती वर्षा।