10 में से पाठ 8 · राजस्थान सामान्य ज्ञान
राजस्थान की कृषि, खनिज और उद्योग
AI की सहायता से तैयार किया गया और 28 अक्टूबर 2026 को तथ्यों की जाँच की गई; किसी मानव संपादक ने इसे अभी पंक्ति-दर-पंक्ति नहीं पढ़ा है। कोई गलती दिखे तो हमें बताइए। संपादकीय मानक और सुधार
शुष्क भूमि में खेती
राजस्थान की अधिकांश खेती वर्षा पर निर्भर है, इसलिए फसलें सूखा सहने की क्षमता के आधार पर चुनी जाती हैं। जून-जुलाई में मानसून के साथ बोई जाने वाली खरीफ फसलों में बाजरा, ज्वार, मक्का, मूंग, मोठ, ग्वार, मूँगफली, तिल, कपास और सोयाबीन हैं; अक्टूबर-नवंबर में बोई जाने वाली रबी फसलों में गेहूँ, जौ, सरसों, चना, जीरा, धनिया और ईसबगोल हैं। कुओं और नलकूपों, उत्तर-पश्चिम में इंदिरा गांधी नहर और गंगनहर तथा हाड़ौती में चंबल की नहरों से होने वाली सिंचाई तय करती है कि गेहूँ और कपास कहाँ उग सकते हैं। नहरों से सिंचित श्रीगंगानगर राजस्थान का अन्न भंडार (अन्न का कटोरा) कहलाता है।
जिन फसलों में राजस्थान आगे है
दशकों से राजस्थान बाजरा, राई-सरसों, ग्वार और मोठ का भारत में सबसे बड़ा उत्पादक रहा है, और ईसबगोल, धनिया, जीरा, मेथी तथा चने का भी प्रमुख उत्पादक है। बाजरा मरुस्थल का मुख्य अनाज है। भरतपुर में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) का राई-सरसों अनुसंधान निदेशालय है। ग्वार के बीज से ग्वार गम बनता है, जो खाद्य प्रसंस्करण और तेल की खुदाई में काम आता है, और इसका बड़ा भाग जोधपुर में संसाधित होता है। धनिया हाड़ौती में केंद्रित है, जहाँ कोटा की रामगंजमंडी इसकी प्रमुख मंडी है, और नागौर मेथी के लिए प्रसिद्ध है।
पशुधन
मरुस्थल में पशु भी फसलों जितने ही महत्त्वपूर्ण हैं। भारत में सबसे अधिक ऊँट राजस्थान में हैं, और यह देश का एक प्रमुख ऊन उत्पादक है। प्रसिद्ध नस्लों में राठी गाय, जिसे राजस्थान की कामधेनु कहते हैं, थारपारकर और कांकरेज मवेशी तथा नागौरी बैल; 'भारत की मेरिनो' कहलाने वाली चोकला भेड़ और मारवाड़ी तथा मगरा भेड़; जमनापरी, बरबरी और मारवाड़ी बकरियाँ; तथा बीकानेरी और जैसलमेरी ऊँट शामिल हैं। राष्ट्रीय ऊष्ट्र अनुसंधान केंद्र बीकानेर में और केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान अविकानगर (टोंक) में है।
खनिजों का अजायबघर
राजस्थान की प्राचीन चट्टानों के कारण यह खनिजों में इतना समृद्ध है कि इसे खनिजों का अजायबघर कहा जाता है। सीसा और जस्ता उदयपुर के दक्षिण में स्थित जावर में निकाला जाता है, जो विश्व के सबसे पुराने जस्ता-प्रगलन स्थलों में से एक है, और भीलवाड़ा के रामपुरा आगूचा में, जो विश्व की सबसे बड़ी जस्ता-सीसा खानों में से एक है; उप-उत्पाद के रूप में चाँदी प्राप्त होती है, और जस्ता प्रगलक देबारी (उदयपुर) तथा चंदेरिया (चित्तौड़गढ़) में हैं। ताँबा शेखावाटी क्षेत्र की खेतड़ी पट्टी से आता है, जहाँ 1967 में स्थापित हिंदुस्तान कॉपर का संयंत्र है, और टंगस्टन नागौर क्षेत्र के डेगाना से। सीसा-जस्ता, चाँदी, वोलेस्टोनाइट, जिप्सम, रॉक फॉस्फेट, कैल्साइट और जैस्पर के उत्पादन में राजस्थान भारत में अग्रणी या एकमात्र उत्पादक है।
अधात्विक खनिज और इमारती पत्थर
रॉक फॉस्फेट उदयपुर के पास झामरकोटड़ा में, वोलेस्टोनाइट सिरोही और डूंगरपुर में, और जिप्सम बीकानेर, नागौर, बाड़मेर तथा जैसलमेर में निकाला जाता है; जिप्सम सीमेंट में काम आता है और क्षारीय मिट्टियों के सुधार में प्रयुक्त होता है। लिग्नाइट पलाना (बीकानेर) और गिरल तथा कपूरड़ी (बाड़मेर) से आता है। इमारती पत्थर यहाँ की विशेषता है: मकराना के सफ़ेद संगमरमर का उपयोग ताजमहल और विक्टोरिया मेमोरियल में हुआ, धौलपुर और करौली का लाल और गुलाबी बलुआ पत्थर नई दिल्ली की अनेक सरकारी इमारतों में लगा, कोटा स्टोन (एक प्रकार का चूना पत्थर) फ़र्श में प्रयुक्त होता है, और जैसलमेर पीला पत्थर देता है।
ऊर्जा
बाड़मेर बेसिन के मंगला क्षेत्र में 2004 में तेल मिला और 2009 में उत्पादन शुरू हुआ; जैसलमेर में प्राकृतिक गैस भी है। कनाडा की सहायता से बना रावतभाटा (चित्तौड़गढ़) का राजस्थान परमाणु बिजलीघर 1973 में चालू हुआ। ताप बिजलीघर कोटा, सूरतगढ़ और छबड़ा में हैं। भारत की सबसे तेज़ धूप वाले क्षेत्रों में होने और विशाल खुली भूमि के कारण राजस्थान सौर ऊर्जा का प्रमुख केंद्र है, और फलोदी के पास भड़ला सोलर पार्क विश्व के सबसे बड़े सौर पार्कों में से एक है। पवन ऊर्जा संयंत्र जैसलमेर और बाड़मेर में हैं।
उद्योग और हस्तशिल्प
राजस्थान की पहली आधुनिक सूती मिल, कृष्णा मिल्स, 1889 में ब्यावर में खुली, और पहला सीमेंट कारखाना 1915 में लाखेरी (बूंदी) में। अनेक कपड़ा मिलों वाला भीलवाड़ा राजस्थान का मैनचेस्टर कहलाता है। राज्य अपने हस्तशिल्प के लिए भी उतना ही प्रसिद्ध है: जयपुर की ब्लू पॉटरी, जो मिट्टी के बजाय क्वार्ट्ज़ से बनती है और फ़ारसी मूल की है; सांगानेर (सफ़ेद पृष्ठभूमि पर बारीक फूल-पत्तियाँ) और बगरू (प्राकृतिक रंगों से दाबू यानी मिट्टी-प्रतिरोधी छपाई) की हाथ-ठप्पा छपाई; जोधपुर और जयपुर का बंधेज (बाँधकर रंगाई) और इसका लहरदार रूप लहरिया, जो तीज पर पहना जाता है; कैथून का हल्का, चौखानेदार सूती-रेशमी कपड़ा कोटा डोरिया; प्रतापगढ़ की थेवा कला, जिसमें काँच पर सोने का काम जड़ा जाता है; नाथद्वारा के पास मोलेला की देव-प्रतिमाओं वाली टेराकोटा पट्टिकाएँ; और बीकानेर की उस्ता कला, जिसमें ऊँट की खाल पर सोने का उभरा काम होता है। इनमें से कई, जैसे कोटा डोरिया, जयपुर की ब्लू पॉटरी और सांगानेर तथा बगरू की छपाई, को GI टैग मिला है।
मुख्य तथ्य
- राजस्थान लंबे समय से बाजरा, राई-सरसों, ग्वार और मोठ में भारत में अग्रणी है; श्रीगंगानगर राज्य का अन्न भंडार है।
- खरीफ: बाजरा, ज्वार, मक्का, मूंग, मोठ, ग्वार, मूँगफली; रबी: गेहूँ, जौ, सरसों, चना, जीरा, ईसबगोल।
- सबसे अधिक ऊँट और एक प्रमुख ऊन उत्पादक; राठी गाय = राजस्थान की कामधेनु; चोकला भेड़ = भारत की मेरिनो; ऊष्ट्र अनुसंधान केंद्र बीकानेर में।
- जस्ता-सीसा: जावर (उदयपुर के पास) और रामपुरा आगूचा (भीलवाड़ा); ताँबा: खेतड़ी (शेखावाटी); टंगस्टन: डेगाना।
- रॉक फॉस्फेट: झामरकोटड़ा; वोलेस्टोनाइट: सिरोही और डूंगरपुर; जिप्सम: बीकानेर, नागौर, बाड़मेर; लिग्नाइट: पलाना और गिरल।
- मकराना का सफ़ेद संगमरमर: ताजमहल और विक्टोरिया मेमोरियल; कोटा स्टोन फ़र्श के लिए; धौलपुर का बलुआ पत्थर इमारतों के लिए।
- बाड़मेर का तेल: मंगला क्षेत्र 2004 में मिला, 2009 से उत्पादन; रावतभाटा परमाणु संयंत्र 1973 से; फलोदी के पास भड़ला सोलर पार्क।
- पहली सूती मिल: कृष्णा मिल्स, ब्यावर, 1889; पहला सीमेंट कारखाना: लाखेरी, 1915; भीलवाड़ा राजस्थान का मैनचेस्टर है।
- हस्तशिल्प और स्थान: ब्लू पॉटरी (जयपुर), सांगानेरी और बगरू छपाई, कोटा डोरिया (कैथून), थेवा (प्रतापगढ़), मोलेला टेराकोटा, उस्ता कला (बीकानेर)।
एक नज़र में दोहराव
वर्षा-आधारित खेती; बाजरा, सरसों, ग्वार, मोठ में अग्रणी; गंगानगर अन्न भंडार; सबसे अधिक ऊँट, प्रमुख ऊन उत्पादक; राठी, थारपारकर, चोकला नस्लें; खनिजों का अजायबघर: जावर और रामपुरा आगूचा जस्ता-सीसा, खेतड़ी ताँबा, डेगाना टंगस्टन, झामरकोटड़ा रॉक फॉस्फेट, जिप्सम, वोलेस्टोनाइट, मकराना संगमरमर; बाड़मेर तेल 2004/2009; रावतभाटा 1973; भड़ला सौर पार्क; कृष्णा मिल्स ब्यावर 1889; लाखेरी सीमेंट 1915; ब्लू पॉटरी, सांगानेर, बगरू, थेवा, कोटा डोरिया।