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प्राचीन और मध्यकालीन उत्तर प्रदेश: हड़प्पा स्थलों से अवध के नवाबों तक
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प्रागैतिहासिक और हड़प्पा स्थल
प्रयागराज और मिर्जापुर की बेलन घाटी में पाषाण युग का लंबा क्रम सुरक्षित है। चोपानी मांडो एक मध्यपाषाणकालीन स्थल है जहाँ हाथ से बने सबसे प्राचीन मृद्भांडों में से कुछ मिले हैं, कोल्डिहवा में उपमहाद्वीप में चावल की खेती के सबसे प्राचीन साक्ष्यों में से कुछ मिले हैं, और प्रतापगढ़ के सराय नाहर राय और महदहा में मध्यपाषाणकालीन शवाधान मिले हैं। हड़प्पा सभ्यता राज्य के केवल पश्चिमी छोर तक पहुँची: मेरठ जिले में हिंडन नदी के किनारे स्थित आलमगीरपुर सबसे पूर्वी हड़प्पा स्थल है, जबकि हुलास (सहारनपुर) और सनौली (बागपत) का विशाल शवाधान स्थल उत्तर हड़प्पा चरण के हैं। पश्चिमी गंगा मैदान में हस्तिनापुर, अहिच्छत्र, मथुरा और अतरंजीखेड़ा (एटा) जैसी चित्रित धूसर मृद्भांड (PGW) बस्तियाँ उत्तर वैदिक काल की पहचान हैं।
महाजनपद
ईसा पूर्व छठी शताब्दी तक बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय में वर्णित सोलह महाजनपदों में से छह मुख्यतः वर्तमान उत्तर प्रदेश में थे, और कुरु (हस्तिनापुर के आसपास) तथा चेदि (बुंदेलखंड में) के कुछ भाग भी इसी क्षेत्र में आते थे। काशी की राजधानी वाराणसी थी; कोसल श्रावस्ती से शासित था और अयोध्या (साकेत) उसका दूसरा बड़ा नगर था, जहाँ बुद्ध के समकालीन प्रसेनजित राजा थे; वत्स की राजधानी यमुना तट पर कौशाम्बी थी, जहाँ उदयन का शासन था; पांचाल की उत्तरी राजधानी अहिच्छत्र (बरेली) और दक्षिणी राजधानी काम्पिल्य (फर्रुखाबाद) थी; शूरसेन की राजधानी मथुरा थी; और मल्लों के केंद्र कुशीनगर और पावा थे। कोसल ने काशी को अपने में मिला लिया और बाद में मगध ने दोनों को मिला लिया, जो गंगा के मैदान में एक साम्राज्य बनने की पहली सीढ़ी थी।
बौद्ध और जैन स्थल
बौद्ध तीर्थयात्रा के आठ महान स्थलों में से चार इसी राज्य में हैं। बुद्ध ने वाराणसी के निकट सारनाथ के मृगदाव में अपना प्रथम उपदेश (धर्मचक्र प्रवर्तन) दिया, कुशीनगर में महापरिनिर्वाण प्राप्त किया, श्रावस्ती में व्यापारी अनाथपिंडक द्वारा दान किए गए जेतवन विहार में अनेक वर्षावास बिताए, और माना जाता है कि वे संकिसा (फर्रुखाबाद) में स्वर्ग से अवतरित हुए। कौशाम्बी में घोषिताराम विहार था। जैनों के लिए अयोध्या प्रथम तीर्थंकर ऋषभनाथ तथा चार अन्य तीर्थंकरों की जन्मभूमि है; वाराणसी तेईसवें तीर्थंकर पार्श्वनाथ की, श्रावस्ती संभवनाथ की, कौशाम्बी पद्मप्रभ की, और हस्तिनापुर शांतिनाथ, कुंथुनाथ और अरनाथ की जन्मभूमि है। मथुरा के कंकाली टीला से एक जैन स्तूप मिला है, और देवगढ़ (ललितपुर) में जैन मंदिरों का बड़ा समूह है।
मौर्य, कुषाण और गुप्त
चमकदार चुनार बलुआ पत्थर से तराशा गया सारनाथ का अशोक सिंह स्तंभ-शीर्ष भारत का राष्ट्रीय प्रतीक बना। इलाहाबाद स्तंभ, जिसके बारे में माना जाता है कि वह पहले कौशाम्बी में खड़ा था, पर अशोक के अभिलेख (रानी अभिलेख सहित), समुद्रगुप्त की प्रशंसा में हरिषेण की प्रयाग प्रशस्ति और जहाँगीर का एक अभिलेख अंकित है; मिर्जापुर के अहरौरा में अशोक का एक लघु शिलालेख है। कनिष्क के समय कुषाणों ने मथुरा को दूसरी राजधानी बनाया, और मथुरा कला शैली ने चित्तीदार लाल बलुआ पत्थर में बौद्ध, जैन और हिंदू मूर्तियाँ गढ़ीं, जिनमें माट से मिली कनिष्क की सिरविहीन प्रतिमा भी है। गुप्त काल में सारनाथ शैली ने बुद्ध की सर्वश्रेष्ठ आसीन प्रतिमाएँ बनाईं; स्कंदगुप्त का भितरी स्तंभ (गाजीपुर) हूणों के विरुद्ध उसके संघर्ष का उल्लेख करता है; देवगढ़ का दशावतार मंदिर शिखर वाले प्राचीनतम मंदिरों में है; और भीतरगाँव (कानपुर) भारत के सबसे पुराने बचे हुए ईंट के मंदिरों में से एक है।
कन्नौज और त्रिपक्षीय संघर्ष
गुप्तों के बाद मौखरियों ने कन्नौज से शासन किया, और हर्षवर्धन (606-647) अपनी राजधानी थानेसर से कन्नौज ले आए। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने कन्नौज में हर्ष की सभा और प्रयाग में हर पाँच वर्ष पर किए जाने वाले उनके दान का वर्णन किया है, और उनके दरबारी कवि बाणभट्ट ने हर्षचरित लिखा। महोदय भी कहलाने वाला कन्नौज उत्तर भारत की सत्ता का प्रतीक बन गया: आठवीं शताब्दी के अंत से दसवीं शताब्दी तक गुर्जर-प्रतिहारों, बंगाल के पालों और दक्कन के राष्ट्रकूटों ने इसके लिए संघर्ष किया। प्रतिहारों ने नागभट्ट द्वितीय के समय इसे जीता और मिहिर भोज के समय वे अपने चरम पर पहुँचे। बाद में गहड़वालों ने कन्नौज और वाराणसी से शासन किया, जब तक कि 1194 में वर्तमान फिरोजाबाद के निकट चंदावर में मुहम्मद गोरी ने जयचंद को पराजित नहीं कर दिया, जबकि चंदेल महोबा और कालिंजर दुर्ग से बुंदेलखंड पर शासन करते थे।
सल्तनत और मुगल केंद्र
फिरोज शाह तुगलक ने जौनपुर बसाया और उसका नाम मुहम्मद बिन तुगलक (जौना खाँ) के नाम पर रखा; 1394 में मलिक-उस-शर्क की उपाधि वाले मलिक सरवर ने वहाँ स्वतंत्र शर्की राज्य स्थापित किया। इब्राहिम शाह शर्की ने 1408 में अटाला मस्जिद पूरी कराई, और जौनपुर विद्या का केंद्र बनकर शिराज-ए-हिंद कहलाया, जब तक कि बहलोल लोदी ने उसे अपने राज्य में नहीं मिला लिया। सिकंदर लोदी ने 1504 में आगरा बसाया और उसे अपनी राजधानी बनाया, और 1540 में शेरशाह ने कन्नौज के निकट हुमायूँ को हराया। अकबर ने 1565 से आगरा किले का पुनर्निर्माण कराया, 1571 में फतेहपुर सीकरी बसाई और 1583 में इलाहाबाद का किला बनवाकर प्रयाग का नाम इलाहाबास रखा; शाहजहाँ ने अपनी राजधानी दिल्ली ले जाने से पहले ताजमहल बनवाया।
अवध के नवाब
सआदत खान बुरहान-उल-मुल्क 1722 में अवध के सूबेदार बने और एक लगभग स्वतंत्र वंश की नींव रखी। शुजाउद्दौला 1764 में बक्सर में हारे और 1765 में इलाहाबाद की संधि पर हस्ताक्षर किए; आसफुद्दौला ने 1775 में राजधानी फैजाबाद से लखनऊ स्थानांतरित की; सआदत अली खान ने 1801 में रुहेलखंड और निचला दोआब ईस्ट इंडिया कंपनी को सौंप दिया; गाजीउद्दीन हैदर ने 1819 में बादशाह की उपाधि धारण की; और वाजिद अली शाह अंतिम शासक थे। रुहेलखंड में रुहेला अफगानों ने 1774 के रुहेला युद्ध तक बरेली से शासन किया, जिसके बाद उनके पास केवल रामपुर की छोटी रियासत बची।
मुख्य तथ्य
- आलमगीरपुर (मेरठ जिला, हिंडन तट) सबसे पूर्वी हड़प्पा स्थल है; हुलास (सहारनपुर) और सनौली (बागपत) उत्तर हड़प्पा स्थल हैं।
- बेलन घाटी: कोल्डिहवा में चावल की खेती के सबसे प्राचीन साक्ष्यों में से कुछ; चोपानी मांडो में हाथ से बने सबसे प्राचीन मृद्भांडों में से कुछ।
- उत्तर प्रदेश के महाजनपद: काशी (वाराणसी), कोसल (श्रावस्ती), वत्स (कौशाम्बी), पांचाल (अहिच्छत्र और काम्पिल्य), शूरसेन (मथुरा), मल्ल (कुशीनगर और पावा)।
- बौद्ध तीर्थयात्रा के आठ महान स्थलों में से चार उत्तर प्रदेश में: सारनाथ (प्रथम उपदेश), कुशीनगर (महापरिनिर्वाण), श्रावस्ती (जेतवन) और संकिसा (स्वर्ग से अवतरण)।
- उत्तर प्रदेश में जन्मे जैन तीर्थंकर: अयोध्या में ऋषभनाथ, वाराणसी में पार्श्वनाथ, श्रावस्ती में संभवनाथ, कौशाम्बी में पद्मप्रभ, हस्तिनापुर में शांतिनाथ।
- इलाहाबाद स्तंभ: अशोक के अभिलेख और रानी अभिलेख, समुद्रगुप्त की हरिषेण रचित प्रयाग प्रशस्ति, और जहाँगीर का एक अभिलेख।
- उत्तर प्रदेश में गुप्त स्मारक: देवगढ़ (ललितपुर) का दशावतार मंदिर, भीतरगाँव (कानपुर) का ईंट मंदिर, स्कंदगुप्त का भितरी स्तंभ (गाजीपुर)।
- कन्नौज: हर्ष की राजधानी; त्रिपक्षीय संघर्ष (प्रतिहार, पाल, राष्ट्रकूट) का केंद्र; कन्नौज का जयचंद 1194 में चंदावर में मुहम्मद गोरी से हारा।
- जौनपुर: फिरोज शाह तुगलक ने बसाया; 1394 से शर्की राज्य (मलिक सरवर); अटाला मस्जिद 1408 में पूरी हुई; शिराज-ए-हिंद कहलाया।
- आगरा 1504 में सिकंदर लोदी ने बसाया; फतेहपुर सीकरी 1571 में अकबर ने बसाई; अवध की राजधानी 1775 में फैजाबाद से लखनऊ गई।
एक नज़र में दोहराव
आलमगीरपुर सबसे पूर्वी हड़प्पा स्थल; कोल्डिहवा प्राचीन चावल; मुख्यतः उत्तर प्रदेश में छह महाजनपद (काशी, कोसल, वत्स, पांचाल, शूरसेन, मल्ल); सारनाथ प्रथम उपदेश, कुशीनगर महापरिनिर्वाण, श्रावस्ती जेतवन, संकिसा अवतरण; सारनाथ सिंह शीर्ष चुनार बलुआ पत्थर का; मथुरा कला (कुषाण); देवगढ़ और भीतरगाँव (गुप्त); हर्ष की राजधानी कन्नौज; चंदावर 1194; शर्की जौनपुर 1394; आगरा 1504; फतेहपुर सीकरी 1571; अवध 1722 से, लखनऊ राजधानी 1775।