10 में से पाठ 3 · उत्तर प्रदेश सामान्य ज्ञान
उत्तर प्रदेश का गठन, प्रशासन और राजव्यवस्था
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प्रांतों से राज्य तक
यह राज्य कई ब्रिटिश इकाइयों से मिलकर बना। बनारस (1775), सत्तांतरित प्रांत (1801) और विजित प्रांत (1803) पहले बंगाल से शासित होते थे; 1833 के चार्टर अधिनियम में आगरा प्रेसीडेंसी का प्रावधान किया गया, और 1836 में यह क्षेत्र आगरा में एक लेफ्टिनेंट-गवर्नर के अधीन पश्चिमोत्तर प्रांत बना। 1857 के बाद शासन का केंद्र इलाहाबाद चला गया। 1856 में विलय किया गया अवध लखनऊ में एक मुख्य आयुक्त के अधीन अलग से शासित था। 1877 में दोनों पद एक कर दिए गए, 1902 में प्रांत का नाम आगरा व अवध संयुक्त प्रांत रखा गया, और भारत शासन अधिनियम 1919 के तहत यह गवर्नर का प्रांत बना, जहाँ 1921 से द्वैध शासन लागू हुआ। 1920 और 1930 के दशकों में शासन का केंद्र इलाहाबाद से लखनऊ स्थानांतरित हुआ, जो आज राजधानी है।
स्वायत्तता और राज्य का दर्जा
भारत शासन अधिनियम 1935 के तहत प्रांत को द्विसदनीय विधानमंडल मिला; 1937 में प्रांतीय स्वायत्तता शुरू हुई, जब नाम छोटा करके संयुक्त प्रांत किया गया और गोविंद बल्लभ पंत प्रधानमंत्री (प्रीमियर) बने। 1947 में सरोजिनी नायडू राज्यपाल बनीं, जो भारत की प्रथम महिला राज्यपाल थीं। 24 जनवरी 1950 को प्रांत का नाम उत्तर प्रदेश हुआ और संविधान के तहत यह भाग क राज्य बना, जिसके प्रथम मुख्यमंत्री पंत थे; 1963 में सुचेता कृपलानी किसी भी भारतीय राज्य की प्रथम महिला मुख्यमंत्री बनीं। 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 द्वारा पर्वतीय जिलों को अलग करके उत्तरांचल बनाया गया, जिसका नाम 2007 में उत्तराखंड हुआ।
विधानमंडल
उत्तर प्रदेश द्विसदनीय विधानमंडल वाले गिने-चुने राज्यों में से एक है (अनुच्छेद 168)। विधान सभा में 403 निर्वाचित सदस्य हैं; उत्तराखंड बनने से पहले यह संख्या 425 थी। इसका कार्यकाल पाँच वर्ष है, जब तक कि इसे पहले भंग न कर दिया जाए। विधान परिषद में 100 सदस्य हैं, जो अनुच्छेद 171 के अनुसार चुने जाते हैं: 38 विधान सभा के सदस्यों द्वारा निर्वाचित, 36 स्थानीय प्राधिकरणों द्वारा, 8 स्नातकों द्वारा, 8 शिक्षकों द्वारा, और 10 राज्यपाल द्वारा साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता या समाज सेवा का विशेष ज्ञान रखने वाले व्यक्तियों में से मनोनीत। परिषद एक स्थायी सदन है जिसे भंग नहीं किया जा सकता: सदस्य छह वर्ष के लिए चुने जाते हैं और हर दो वर्ष पर एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं। अनुच्छेद 171 के अनुसार परिषद की सदस्य संख्या विधान सभा की एक-तिहाई से अधिक नहीं और कम से कम 40 होनी चाहिए, और अनुच्छेद 169 के तहत विधान सभा के संकल्प पर संसद परिषद का सृजन या उत्सादन कर सकती है। विधानमंडल लखनऊ के विधान भवन में बैठता है।
संसद में प्रतिनिधित्व
उत्तर प्रदेश लोक सभा में 80 सदस्य भेजता है, जो किसी भी राज्य से अधिक हैं, और राज्य सभा में 31; 2000 से पहले ये संख्याएँ 85 और 34 थीं। 2008 के परिसीमन के तहत इसकी 80 लोक सभा सीटों में से 17 अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित हैं और अनुसूचित जनजातियों के लिए कोई नहीं। दोनों सदनों में, और इसलिए राष्ट्रपति का चुनाव करने वाले निर्वाचक मंडल में, इसकी बड़ी हिस्सेदारी के कारण इस राज्य को प्रायः राष्ट्रीय राजनीति का हृदय-स्थल कहा जाता है।
उच्च न्यायालय और प्रयागराज की संस्थाएँ
उच्च न्यायालय 17 मार्च 1866 को आगरा में पश्चिमोत्तर प्रांत के उच्च न्यायालय के रूप में स्थापित हुआ और 1869 में इलाहाबाद स्थानांतरित हुआ; 1919 में इसका नाम इलाहाबाद उच्च न्यायालय रखा गया। अवध का अपना अवध मुख्य न्यायालय (अवध चीफ कोर्ट) 1925 से लखनऊ में था, और 1948 में दोनों का विलय हुआ, जिससे लखनऊ का न्यायालय इलाहाबाद उच्च न्यायालय की स्थायी खंडपीठ बन गया। प्रयागराज में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (1 अप्रैल 1937 को स्थापित), राजस्व परिषद, महालेखाकार कार्यालय और 1921 में स्थापित माध्यमिक शिक्षा परिषद (हाई स्कूल और इंटरमीडिएट शिक्षा परिषद) भी हैं। लखनऊ राज्यपाल, विधानमंडल और सचिवालय का केंद्र है।
जमीनी प्रशासन
राज्य राजस्व मंडलों में बँटा है, जिनके प्रमुख मंडलायुक्त होते हैं। प्रत्येक जिले का प्रमुख जिलाधिकारी (कलेक्टर) होता है, और जिला राजस्व कार्य के लिए तहसीलों तथा ग्रामीण विकास के लिए विकास खंडों में बँटा होता है। ग्रामीण स्थानीय शासन त्रिस्तरीय है: ग्राम पंचायतें उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 के तहत हैं, जो 73वें संशोधन से पुराना है, और क्षेत्र पंचायतें तथा जिला पंचायतें क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम, 1961 के तहत हैं। नगरीय क्षेत्रों में नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत हैं।
राज्य प्रतीक
राज्य के प्रतीक-चिह्न में मछलियों का एक जोड़ा, धनुष-बाण और गंगा-यमुना के संगम को दर्शाने वाली लहरदार रेखाएँ हैं; मछलियाँ अवध के नवाबों का राजचिह्न थीं। राज्य पशु बारहसिंगा, राज्य पक्षी सारस, राज्य पुष्प पलाश (टेसू) और राज्य वृक्ष अशोक है। राज्य मछली चिताला है।
मुख्य तथ्य
- 1836 पश्चिमोत्तर प्रांत; 1856 अवध का विलय; 1877 पश्चिमोत्तर प्रांत और अवध एक प्रमुख के अधीन; 1902 आगरा व अवध संयुक्त प्रांत; 1937 संयुक्त प्रांत; 1950 उत्तर प्रदेश।
- उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के तहत 9 नवंबर 2000 को उत्तरांचल अलग हुआ; 2007 में उसका नाम उत्तराखंड हुआ।
- विधान सभा: 403 निर्वाचित सदस्य (2000 से पहले 425); विधान परिषद: 100 सदस्य; अनुच्छेद 168 के तहत द्विसदनीय।
- विधान परिषद 100 = 38 विधायकों द्वारा + 36 स्थानीय प्राधिकरणों द्वारा + 8 स्नातकों द्वारा + 8 शिक्षकों द्वारा + 10 राज्यपाल द्वारा मनोनीत।
- लोक सभा 80 सीटें (17 अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित, अनुसूचित जनजातियों के लिए कोई नहीं); राज्य सभा 31 सीटें; 2000 से पहले 85 और 34।
- उच्च न्यायालय: आगरा 1866, इलाहाबाद 1869; लखनऊ में अवध चीफ कोर्ट 1925; 1948 में विलय, लखनऊ स्थायी खंडपीठ बना।
- प्रयागराज की संस्थाएँ: उच्च न्यायालय, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (1 अप्रैल 1937), राजस्व परिषद, महालेखाकार, माध्यमिक शिक्षा परिषद (1921)।
- प्रथम: गोविंद बल्लभ पंत प्रथम मुख्यमंत्री; सरोजिनी नायडू स्वतंत्रता के बाद प्रथम राज्यपाल और भारत की प्रथम महिला राज्यपाल; सुचेता कृपलानी भारत की प्रथम महिला मुख्यमंत्री (1963)।
- उत्तर प्रदेश में पंचायती राज: उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947 (ग्राम पंचायत); क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम 1961।
- राज्य प्रतीक-चिह्न: दो मछलियाँ, धनुष-बाण, गंगा-यमुना की लहरदार रेखाएँ; प्रतीक: बारहसिंगा, सारस, पलाश, अशोक; राज्य मछली चिताला।
एक नज़र में दोहराव
पश्चिमोत्तर प्रांत 1836 (आगरा), 1857 के बाद शासन केंद्र इलाहाबाद; आगरा व अवध संयुक्त प्रांत 1902; द्वैध शासन 1921; 1935 अधिनियम से द्विसदनीय; उत्तर प्रदेश नाम 24 जनवरी 1950; उत्तराखंड 9 नवंबर 2000 को अलग; विधान सभा 403, परिषद 100 (38+36+8+8+10); लोक सभा 80 (17 अनुसूचित जाति), राज्य सभा 31; उच्च न्यायालय आगरा 1866, इलाहाबाद 1869, लखनऊ खंडपीठ 1948; लोक सेवा आयोग 1937; माध्यमिक शिक्षा परिषद 1921; पंचायत राज अधिनियम 1947; प्रतीक-चिह्न मछली, धनुष-बाण, लहरें।