ई-संजीवनी ने 50 करोड़ टेलीकंसल्टेशन का आंकड़ा पार किया, AI-संचालित क्लिनिकल निर्णय सहायता प्रणाली एकीकृत
भारत की राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा ई-संजीवनी (eSanjeevani) ने 15 सितंबर 2026 को 50 करोड़ (500 मिलियन) टेलीकंसल्टेशन का पड़ाव पार कर लिया; उस दिन तक सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 50,00,92,730 परामर्श दर्ज हो चुके थे। प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा में दुनिया का सबसे बड़ा टेलीमेडिसिन कार्यान्वयन माना जाने वाला यह मंच डिजिटल साधनों के ज़रिए अच्छी स्वास्थ्य सेवा को अधिक सुलभ, किफायती और न्यायसंगत बनाने के सरकारी प्रयास का हिस्सा है। इसके कुल उपयोग में लगभग 57% हिस्सा महिलाओं का है। हाल के उन्नयनों में परामर्श के दौरान डॉक्टरों की सहायता करने वाली AI-आधारित क्लिनिकल निर्णय सहायता प्रणाली और आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS-112) से जुड़ाव शामिल हैं। सेवा अब प्राथमिक स्तर से आगे भी बढ़ रही है: AIIMS जोधपुर, AIIMS जम्मू और AIIMS पटना में चुनिंदा विशेषज्ञताओं के लिए OPD टेलीकंसल्टेशन शुरू हो चुके हैं, और आगे अन्य प्रमुख सरकारी संस्थानों को जोड़ने की योजना है।
ऊपर दी गई PIB की आधिकारिक विज्ञप्ति से AI की सहायता से तैयार, और AI की दूसरी जाँच में उसी विज्ञप्ति से मिलाया गया। किसी व्यक्ति ने इसका पंक्ति-दर-पंक्ति संपादन नहीं किया है।
पढ़ाई के लिए संदर्भ
ई-संजीवनी को C-DAC मोहाली ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के लिए विकसित किया है और यह दो रूपों में चलती है। प्रदाता-से-प्रदाता (provider-to-provider) रूप नवंबर 2019 में शुरू हुआ और हब-एंड-स्पोक मॉडल पर काम करता है: आयुष्मान आरोग्य मंदिर (पहले हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर), यानी स्पोक, पर मौजूद स्वास्थ्यकर्मी मरीज़ को हब के डॉक्टर या विशेषज्ञ से जोड़ता है। मरीज़-से-डॉक्टर रूप, ई-संजीवनी OPD, 13 अप्रैल 2020 को कोविड-19 के पहले लॉकडाउन के दौरान शुरू हुआ, जिसमें लोग घर बैठे परामर्श ले सकते हैं।
संदर्भ: ई-संजीवनी का आधिकारिक पोर्टल (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय)
खुद जाँचें: क्या हब-एंड-स्पोक रूप में मरीज़ घर से सीधे डॉक्टर से परामर्श करता है?
नहीं। प्रदाता-से-प्रदाता रूप में मरीज़ स्पोक (आयुष्मान आरोग्य मंदिर) पर जाता है, जहाँ स्वास्थ्यकर्मी उसे हब के डॉक्टर से जोड़ता है। घर से परामर्श मरीज़-से-डॉक्टर (OPD) रूप में होता है।
अभ्यास: विज्ञप्ति के शब्दों के आधार पर तय करें कि AIIMS जोधपुर, जम्मू और पटना की नई विशेषज्ञ टेलीकंसल्टेशन सेवा मरीज़-से-डॉक्टर है या प्रदाता-से-प्रदाता।
खुद को परखें
राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा ई-संजीवनी ने 15 सितंबर 2026 को कितने टेलीपरामर्श का आँकड़ा पार किया?
उत्तर देखें
उत्तर: 50 करोड़
ई-संजीवनी ने 50 करोड़ (500 मिलियन) टेलीपरामर्श पार किए (कुल 50,00,92,730), जो सभी 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में हुए; इसके उपयोगकर्ताओं में लगभग 57% महिलाएँ हैं, और इसे प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा में दुनिया का सबसे बड़ा टेलीमेडिसिन कार्यान्वयन बताया गया है।