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2026-11-03 · 13 खबरें

भारतीय नौसेना ने सोमालिया के तट के पास अपहृत मछली पकड़ने वाले जहाज 'अजिनी' को सशस्त्र समुद्री लुटेरों से मुक्त कराया; चालक दल के सभी 20 सदस्य सुरक्षित

रक्षा मंत्रालय ने 3 नवंबर 2026 को बताया कि भारतीय नौसेना ने 48 घंटे से अधिक समय तक चले त्वरित और सुव्यवस्थित अभियान में सोमालिया के तट के पास मछली पकड़ने वाले जहाज अजिनी (Azini) को सशस्त्र समुद्री लुटेरों के कब्जे से मुक्त कराया; चालक दल के सभी 20 सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया और कोई हताहत या घायल नहीं हुआ। अजिनी के पिछले महीने सोमालिया के उत्तर-पूर्वी तट के पास सशस्त्र समुद्री लुटेरों के एक समूह द्वारा अपहरण किए जाने की सूचना मिली थी; मंत्रालय के अनुसार यह अपहरण समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा था, क्योंकि इस जहाज का इस्तेमाल क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर समुद्री लुटेरों के और हमलों के लिए 'मदर शिप' (मुख्य जहाज) के रूप में किया जा सकता था। नौसेना ने मिशन पर तैनात एक युद्धपोत को कार्रवाई के लिए भेजा, जिसे एक समुद्री निगरानी विमान का सहयोग मिला; लगातार निगरानी के बाद जहाज का पता लगाया गया, उसकी गतिविधियों पर नजर रखी गई और उसकी गतिविधि को सीमित करने तथा उसे भागने से रोकने के लिए सुनियोजित गैर-घातक उपाय अपनाए गए। भारतीय वायु सेना के सी-17 विमान द्वारा सटीक एयरड्रॉप के माध्यम से मरीन कमांडो की अतिरिक्त तैनाती की गई, जिसके बाद नौसेना ने जहाज को अपने नियंत्रण में लिया, समुद्री लुटेरों के खतरे को निष्प्रभावी किया और चालक दल के सभी 20 सदस्यों की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित की। मंत्रालय के अनुसार यह अभियान नौसेना की उच्च परिचालन तत्परता और सेनाओं के बीच निर्बाध समन्वय के माध्यम से जटिल समुद्री सुरक्षा अभियान चलाने की क्षमता को दर्शाता है, और हिंद महासागर क्षेत्र में प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता (फर्स्ट रिस्पॉन्डर) और पसंदीदा सुरक्षा भागीदार बने रहने की भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

पढ़ाई के लिए संदर्भ

23 मार्च 2024 को PIB ने बताया था कि भारतीय नौसेना ने 'ऑपरेशन संकल्प' के तहत अपने समुद्री सुरक्षा अभियानों के 100 दिन पूरे कर लिए हैं; समुद्री क्षेत्र में इज़राइल-हमास संघर्ष के असर को देखते हुए नौसेना ने दिसंबर 2023 के मध्य से इन अभियानों को नई दिशा दी थी और इनका दायरा काफी बढ़ाया था, और 14 दिसंबर 2023 को माल्टा के ध्वज वाले थोक मालवाहक जहाज (बल्क कैरियर) एमवी रुएन (MV Ruen) के अपहरण के दौरान सक्रिय कार्रवाई की थी। इन 100 दिनों में नौसेना ने तीन अभियान क्षेत्रों - अदन की खाड़ी और आसपास के क्षेत्र, अरब सागर और सोमालिया के पूर्वी तट के पास - में 18 घटनाओं पर कार्रवाई की, जिसमें समुद्र में 5000 से अधिक कर्मी और 21 से अधिक जहाज तैनात किए गए (युद्धपोतों के 450 से अधिक कार्य दिवस) और समुद्री निगरानी विमानों ने 900 घंटे उड़ान भरी। रिलीज़ के अनुसार 110 से अधिक लोगों की जान बचाई गई, जिनमें 45 भारतीय नाविक थे, और नौसेना की भूमिका को हिंद महासागर क्षेत्र में 'प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता' (फर्स्ट रिस्पॉन्डर) और 'पसंदीदा सुरक्षा भागीदार' के रूप में बताया गया; गुरुग्राम स्थित सूचना संलयन केंद्र - हिंद महासागर क्षेत्र (आईएफसी-आईओआर) सूचना के आदान-प्रदान का प्रमुख केंद्र रहा।

संदर्भ: PIB (रक्षा मंत्रालय), 'भारतीय नौसेना द्वारा 14 दिसंबर, 2023 से 23 मार्च, 2024 तक संचालित किये जा रहे समुद्री सुरक्षा अभियान ('ऑपरेशन संकल्प')', 23 मार्च 2024

खुद जाँचें: 'ऑपरेशन संकल्प' के तहत समुद्री सुरक्षा अभियानों के 14 दिसंबर 2023 से 23 मार्च 2024 तक के 100 दिनों में भारतीय नौसेना ने कितनी घटनाओं पर कार्रवाई की, और ये अभियान किन तीन क्षेत्रों में चलाए गए?

18 घटनाएं; अदन की खाड़ी और आसपास के क्षेत्र, अरब सागर और सोमालिया के पूर्वी तट के पास।

अभ्यास: इस रिलीज़ से जहाज का नाम, उसका अपहरण कहाँ हुआ, अभियान की अवधि, बचाए गए चालक दल के सदस्यों की संख्या, इस्तेमाल किए गए प्लेटफॉर्म (युद्धपोत, समुद्री निगरानी विमान और मरीन कमांडो को एयरड्रॉप करने वाला भारतीय वायु सेना का विमान) और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बताई गई भूमिकाएं लिखें; नोट से अभियान का नाम, 14 दिसंबर 2023 को अपहृत जहाज, घटनाओं की संख्या, तीन अभियान क्षेत्र और बचाई गई जानें।

भारत-अमेरिका त्रि-सेवा एचएडीआर अभ्यास टाइगर ट्रायम्फ के 5वें संस्करण का विशाखापत्तनम में उद्घाटन; पहली बार एनडीआरएफ का दल भी भाग लेगा

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय त्रि-सेवा मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) अभ्यास के 5वें संस्करण 'टाइगर ट्रायम्फ 2026' का उद्घाटन समारोह 2 नवंबर 2026 को विशाखापत्तनम स्थित मैरीटाइम वारफेयर सेंटर (एमडब्ल्यूसी) में आयोजित किया गया। इस वर्ष यह अभ्यास 'टेबलटॉप एक्सरसाइज' (टीटीएक्स) के रूप में आयोजित किया जा रहा है; इसका उद्देश्य व्यापक स्तर पर मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों के दौरान दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच समन्वय, संयुक्त रूप से योजना बनाने और अंतर-संचालनीयता को बेहतर बनाना है, और इस संस्करण का उद्देश्य संयुक्त बहु-क्षेत्रीय अभियानों (Combined Joint All-Domain Operations) के संचालन को सुगम बनाना भी है। समारोह की अध्यक्षता पूर्वी बेड़े के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग रियर एडमिरल विशाल बिश्नोई और अमेरिकी प्रशांत बेड़े के वाइस कमांडर रियर एडमिरल जोकिन जे. मार्टिनेज डी पिनिलोस ने की। भारतीय पक्ष की ओर से भारतीय नौसेना के समुद्री अभियानों के सभी क्षेत्रों के विशेषज्ञ, भारतीय थल सेना के जमीनी बल, भारतीय वायु सेना की विभिन्न इकाइयों के प्रतिनिधि तथा तीनों सेनाओं के विशेष बलों के कर्मी इसमें शामिल हैं, और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) का एक दल भी पहली बार इसमें भाग लेगा। अमेरिकी संयुक्त बल में अमेरिकी वायु सेना, थल सेना, मरीन कोर और नौसेना के विशेषज्ञ प्रतिनिधियों के साथ-साथ अंतरिक्ष, साइबर, चिकित्सा और बम निरोधक (एक्सप्लोसिव ऑर्डनेंस डिस्पोजल) विशेषज्ञ भी शामिल हैं। मंत्रालय के अनुसार यह अभ्यास भारत और अमेरिका के रणनीतिक समुद्री हितों में बढ़ती निकटता और दोनों देशों के बीच बढ़ती रक्षा साझेदारी को दर्शाता है।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

पढ़ाई के लिए संदर्भ

31 मार्च 2025 को जारी PIB के पूर्वावलोकन के अनुसार भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय त्रि-सेवा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) अभ्यास टाइगर ट्रायम्फ का चौथा संस्करण 1 से 13 अप्रैल 2025 तक पूर्वी समुद्र तट पर आयोजित होना था। इसका उद्देश्य एचएडीआर अभियानों के संचालन के लिए अंतर-संचालनीयता विकसित करना और एक संयुक्त समन्वय केंद्र (सीसीसी) की स्थापना के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) तैयार करना था, ताकि अभ्यासों और संकट/आकस्मिक स्थितियों के दौरान भारतीय और अमेरिकी संयुक्त कार्य बलों (जेटीएफ) के बीच तीव्र और सुचारू समन्वय हो सके। भारतीय पक्ष का प्रतिनिधित्व नौसेना के जहाज जलाश्व, घड़ियाल, मुंबई और शक्ति, लंबी दूरी का समुद्री गश्ती विमान पी8आई, सेना के जवान, वायु सेना के सी-130 विमान और एमआई-17 हेलीकॉप्टर तथा रैपिड एक्शन मेडिकल टीम (आरएएमटी) को करना था, और अमेरिकी पक्ष का प्रतिनिधित्व अमेरिकी नौसेना के जहाज कॉम्स्टॉक और राल्फ जॉनसन को, जिन पर अमेरिकी मरीन डिवीजन के सैनिक सवार होने थे। विशाखापत्तनम में हार्बर चरण (जिसमें 1 अप्रैल 2025 को आईएनएस जलाश्व पर उद्घाटन समारोह होना था) के बाद काकीनाडा के तट पर समुद्री, उभयचर (एम्फिबियस) और एचएडीआर गतिविधियों वाला समुद्री चरण होना था, जहाँ भारतीय सेना और अमेरिकी मरीन को काकीनाडा नौसेना एन्क्लेव में एक संयुक्त कमान एवं नियंत्रण केंद्र स्थापित करना था।

संदर्भ: PIB (रक्षा मंत्रालय), 'पूर्वावलोकन: अभ्यास टाइगर ट्रायम्फ - 2025', 31 मार्च 2025

खुद जाँचें: टाइगर ट्रायम्फ के चौथे संस्करण का उद्घाटन समारोह किस जहाज पर होना निर्धारित था, और उसका समुद्री चरण किस स्थान के तट पर होना था?

विशाखापत्तनम में आईएनएस जलाश्व पर, 1 अप्रैल 2025 को; काकीनाडा के तट पर।

अभ्यास: इस रिलीज़ से संस्करण की संख्या, उद्घाटन समारोह का स्थान और तारीख़, इस वर्ष अभ्यास का प्रारूप, अध्यक्षता करने वाले दोनों अधिकारी, भारतीय और अमेरिकी प्रतिभागी और पहली बार भाग लेने वाला संगठन लिखें; नोट से चौथे संस्करण की तारीख़ें और उद्देश्य, बताए गए जहाज, दोनों चरण और वे कहाँ होने थे। दोनों संस्करणों के प्रारूप की तुलना करें।

आदित्य-एल1 के वीईएलसी से पता चला कि एक सौर विस्फोट सरल सममित बुलबुले की तरह नहीं, बल्कि असममित रूप से फैला: आईआईए का अध्ययन

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 3 नवंबर 2026 को बताया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के स्वायत्त संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (आईआईए) के वैज्ञानिकों ने आदित्य-एल1 पर लगे विज़िबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (वीईएलसी) के डेटा से दिखाया है कि एक सौर विस्फोट, यानी कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई), सूर्य से बाहर की ओर एक सरल सममित बुलबुले की तरह नहीं फैला, जैसा पहले सोचा जाता था, बल्कि उसका फैलाव असमान रहा और उसका आकार असममित (विषम) हो गया; रिलीज़ के अनुसार एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में प्रकाशित इस अध्ययन से यह बात पहली बार सामने आई। वैज्ञानिकों ने वीईएलसी के डेटा को नासा की सोलर डायनेमिक्स ऑब्ज़र्वेटरी (एसडीओ) के पूरक अवलोकनों और त्रि-आयामी मॉडलिंग के साथ मिलाकर विस्फोट की पूरी 3-डी ज्यामिति और गतिकी का पुनर्निर्माण किया, और 5 अगस्त 2024 के उस सीएमई का अवलोकन किया जो सूर्य के पश्चिमी किनारे के पास एक सक्रिय क्षेत्र से निकला था। आदित्य-एल1 के 7 पेलोड में से प्राथमिक पेलोड वीईएलसी एक आंतरिक रूप से आच्छादित (इंटरनली ऑकल्टेड) कोरोनाग्राफ है, जो कोरोना में अत्यधिक आयनित लौह परमाणुओं से उत्पन्न 530.3 एनएम तरंगदैर्ध्य की हरी उत्सर्जन रेखा में स्पेक्ट्रोस्कोपी के ज़रिए नए सीएमई का अध्ययन करता है; यह रेखा लगभग 1.8 मिलियन केल्विन तापमान वाले गर्म कोरोनल प्लाज़्मा को दर्ज करती है। इसके डेटा में ब्लू-शिफ्टेड और रेड-शिफ्टेड उत्सर्जन दिखा, जो प्रेक्षक की ओर आते और उससे दूर जाते प्लाज़्मा से उत्पन्न होता है। सममित फैलाव वाला मॉडल इस पैटर्न को दोबारा नहीं बना सका, जबकि झुके हुए सीएमई अक्ष और असममित पार्श्व फैलाव वाले मॉडल ने बना लिया। शोधकर्ताओं के अनुसार फैलाव में ऐसे अंतर सीएमई की गति और पृथ्वी पर उसके पहुंचने के समय पर असर डाल सकते हैं, जो अंतरिक्ष मौसम (स्पेस वेदर) के लिए अहम है। भारत की पहली अंतरिक्ष-आधारित सौर वेधशाला आदित्य-एल1 सितंबर 2023 में लॉन्च हुई थी और अब सूर्य-पृथ्वी एल1 बिंदु पर कार्यरत है; वीईएलसी को आईआईए ने होसाकोटे में क्रेस्ट (CREST) परिसर स्थित अपनी एमजीके मेनन लैब फॉर स्पेस साइंसेज में इसरो के उल्लेखनीय सहयोग से डिज़ाइन और निर्मित किया।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

पढ़ाई के लिए संदर्भ

इसरो के 10 दिसंबर 2024 के एक लेख में वीईएलसी द्वारा एक सीएमई के प्रेक्षणों का वर्णन है। भारत का पहला अंतरिक्ष-आधारित सौर मिशन आदित्य-एल1 2 सितंबर 2023 को लॉन्च हुआ था और 6 जनवरी 2024 को पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किमी दूर प्रथम सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंज बिंदु एल1 के चारों ओर प्रभामंडल (हेलो) कक्षा में स्थापित किया गया। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (आईआईए) के शोधकर्ताओं ने वीईएलसी से 16 जुलाई 2024 को देखे गए एक सीएमई का अध्ययन किया, जिसमें कोरोना में अत्यधिक उच्च तापमान वाले लौह परमाणुओं से उत्पन्न 5303 Å की हरी उत्सर्जन रेखा पर ध्यान दिया गया, और नतीजे द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में प्रकाशित किए। प्रभावित क्षेत्र में कोरोना की चमक लगभग 50% घट गई - यह 'कोरोनल डिमिंग' लगभग 6 घंटे तक रही; क्षेत्र का तापमान लगभग 30% बढ़ा और वह अधिक अशांत हो गया; और डॉप्लर मापों से पता चला कि निकला हुआ प्लाज़्मा प्रेक्षक से लगभग 10 किमी प्रति सेकंड की गति से दूर जा रहा था, जो सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र द्वारा सीएमई के विक्षेपण का संकेत है। इसरो के अनुसार सीएमई के पृथ्वी तक पहुंचने पर उपग्रह संचार, जीपीएस प्रणालियां और पावर ग्रिड बाधित हो सकते हैं।

संदर्भ: इसरो, 'सूर्य के रहस्यों को प्रकट करना: प्रभामंडलीय द्रव्यमान उत्सर्जन (कोरोनल मास इजेक्शन) का आदित्य-एल1 द्वारा प्रेक्षण', 10 दिसंबर 2024

खुद जाँचें: आदित्य-एल1 को एल1 के चारों ओर प्रभामंडल (हेलो) कक्षा में कब स्थापित किया गया, और वीईएलसी द्वारा देखे गए 16 जुलाई 2024 के सीएमई के दौरान कोरोना की चमक लगभग कितनी घटी?

6 जनवरी 2024 को; लगभग 50% (लगभग 6 घंटे तक चली कोरोनल डिमिंग)।

अभ्यास: इस रिलीज़ से अध्ययन करने वाला संस्थान और उसका विभाग, पत्रिका, देखे गए सीएमई की तारीख़, उसके आकार के बारे में निष्कर्ष, वीईएलसी की तरंगदैर्ध्य और वह किस तापमान का प्लाज़्मा दर्ज करता है, आदित्य-एल1 के पेलोड की संख्या और अंतरिक्ष मौसम के लिए इस निष्कर्ष का महत्व लिखें; नोट से आदित्य-एल1 के लॉन्च और प्रभामंडल (हेलो) कक्षा में स्थापना की तारीख़ें, पृथ्वी से एल1 की दूरी, और 16 जुलाई 2024 के सीएमई पर चमक, तापमान और डॉप्लर संबंधी निष्कर्ष।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 43ए में संशोधन का प्रस्ताव रखा: आईसीडी, एक एसईजैड और नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को अधिकृत आयात गेटवे बनाने का प्रस्ताव

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 3 नवंबर 2026 को बताया कि उसने देश में दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और सौंदर्य प्रसाधनों के आयात के लिए अधिकृत प्रवेश स्थलों के नेटवर्क का विस्तार करने हेतु 'ड्रग्स रूल्स, 1945' के नियम 43ए में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। नियम 43ए में उन अधिकृत बंदरगाहों, हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों, सड़क मार्गों और अन्य प्रवेश द्वारों को निर्धारित किया गया है, जिनके माध्यम से भारत में दवाओं का आयात किया जा सकता है। प्रस्तावित नए स्थानों में हरियाणा में सोनीपत, पियाला और हरसारू, उत्तर प्रदेश में दादरी, गुजरात में गांधीधाम/मुंद्रा, हैदराबाद (तेलंगाना) में सनत नगर और थिम्मापुर तथा बेंगलुरु (कर्नाटक) में व्हाइटफील्ड के इनलैंड कंटेनर डिपो (आईसीडी); कर्नाटक में बोम्मासांद्रा का विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजैड); और हवाई मार्ग से दवाओं के आयात के लिए उत्तर प्रदेश में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा शामिल हैं। प्रस्ताव के अनुसार इन्हें आयात के लिए पहले से मौजूद अधिकृत नेटवर्क में जोड़ा जाएगा, जिसमें इंदौर (मध्य प्रदेश) के धननाद और तिही के आईसीडी तथा दवाओं के आयात के लिए पहले से अधिसूचित हवाई अड्डे शामिल हैं। मंत्रालय के अनुसार इस प्रस्ताव से आयातक अपने विनिर्माण केंद्रों, गोदामों और वितरण केंद्रों के करीब ही अपनी खेप की निकासी करा सकेंगे, जिससे देश के भीतर परिवहन की दूरी, लॉजिस्टिक्स लागत और देरी कम होगी और व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा मिलेगा। प्रस्तावित संशोधन वाली ड्राफ्ट अधिसूचना आधिकारिक गजट में उपलब्ध है, और इस पर आपत्तियां और सुझाव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अवर सचिव (दवा नियमन), कर्तव्य भवन-1, नई दिल्ली को या ईमेल से भेजे जा सकते हैं।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

पढ़ाई के लिए संदर्भ

8 जुलाई 2026 को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया था कि औषधि नियम, 1945 (ड्रग्स रूल्स, 1945) के नियम 43ए में संशोधन करके महाराष्ट्र में हाल ही में उद्घाटित नवी मुंबई हवाई अड्डे को उन हवाई अड्डों की सूची में शामिल किया गया है जिनके माध्यम से देश में औषधियों का आयात किया जा सकता है। यह अधिसूचना औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 के प्रावधानों के तहत औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड से परामर्श के बाद जारी की गई थी। मंत्रालय के अनुसार इस नए जुड़ाव के साथ दवाओं के आयात के लिए प्रवेश द्वारों (सड़क/रेल/जहाज/हवाई मार्ग) की कुल संख्या 42 हो गई। उसने कहा था कि इस संशोधन से दवाइयों की खेपों की सुगम आवाजाही को बढ़ावा मिलेगा, लॉजिस्टिक्स अवसंरचना मजबूत होगी और आयातकों को दवाओं के आयात का एक नया विकल्प मिलेगा, और यह कदम आयातित दवाओं की प्रभावी नियामक निगरानी सुनिश्चित करते हुए व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों के अनुरूप है।

संदर्भ: PIB (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय), 'सरकार ने औषधि नियम, 1945 के तहत नवी मुंबई हवाई अड्डे को औषधियों के आयात द्वार के रूप में अधिसूचित किया', 8 जुलाई 2026

खुद जाँचें: जुलाई 2026 में औषधि नियम, 1945 के नियम 43ए में कौन-सा हवाई अड्डा जोड़ा गया, अधिसूचना से पहले किस निकाय से परामर्श किया गया, और दवाओं के आयात के लिए प्रवेश द्वारों की कुल संख्या कितनी हो गई?

नवी मुंबई हवाई अड्डा (महाराष्ट्र); औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड; 42।

अभ्यास: इस रिलीज़ से संशोधित किया जाने वाला नियम और नियमावली, नियम 43ए क्या निर्धारित करता है, प्रस्तावित नए आईसीडी और उनके राज्य, एसईजैड, हवाई अड्डा, इंदौर के मौजूदा आईसीडी, अपेक्षित लाभ और आपत्तियां भेजने का तरीका लिखें; नोट से जुलाई 2026 में जोड़ा गया हवाई अड्डा, परामर्श किया गया निकाय, मूल अधिनियम और बताई गई प्रवेश द्वारों की कुल संख्या। याद रखें कि नया बदलाव अभी केवल प्रस्ताव है।

ट्राई ने दूरसंचार इंटरकनेक्शन (तीसरा संशोधन) विनियम, 2026 जारी किए: एलएसए स्तर और आईपी-आधारित इंटरकनेक्शन की ओर बदलाव, 1 जनवरी 2027 से लागू

भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने 3 नवंबर 2026 को “दूरसंचार इंटरकनेक्शन (तीसरा संशोधन) विनियम, 2026” जारी किए, जो 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। दूरसंचार में इंटरकनेक्शन का तात्पर्य उन तकनीकी, परिचालन और व्यावसायिक व्यवस्थाओं से है जो दो या दो से अधिक दूरसंचार नेटवर्कों को आपस में जोड़ती हैं, जिससे उनके बीच ट्रैफिक का प्रवाह संभव होता है और अलग-अलग सेवा प्रदाताओं के उपयोगकर्ता एक-दूसरे से निर्बाध रूप से संवाद कर पाते हैं; ट्राई अधिनियम, 1997 की धारा 11(1)(ब) ट्राई को सेवा प्रदाताओं के बीच इंटरकनेक्शन की शर्तें निर्धारित करने का अधिकार देती है। ट्राई ने अप्रैल 2025 में “इंटरकनेक्शन मामलों पर मौजूदा ट्राई विनियमों की समीक्षा” विषय पर प्रारंभिक-परामर्श पत्र जारी करके यह समीक्षा शुरू की और नवंबर 2025 में परामर्श पत्र जारी किया, जिस पर सत्रह हितधारकों ने टिप्पणियां और नौ हितधारकों ने प्रति-टिप्पणियां दीं; जनवरी 2026 में एक खुली चर्चा (ओपन हाउस डिस्कशन) आयोजित की गई। यह संशोधन इंटरकनेक्शन देने वालों और लेने वालों को दूरसंचार ट्रैफिक के आदान-प्रदान के स्थानों पर आपसी सहमति बनाने की सुविधा देता है और मौजूदा लॉन्ग डिस्टेंस चार्जिंग एरिया (एलडीसीए) और शॉर्ट डिस्टेंस चार्जिंग एरिया (एसडीसीए) स्तर के इंटरकनेक्शन से लाइसेंस्ड सर्विस एरिया (एलएसए) स्तर के इंटरकनेक्शन की ओर बदलाव को आसान बनाता है; ट्राई के अनुसार ट्रैफिक को एलएसए-स्तर के इंटरकनेक्शन बिंदुओं (पीओआई) पर ले जाने से रूटिंग सरल होगी, सीमित नंबरिंग संसाधनों का प्रबंधन अधिक कुशलता से हो सकेगा, विलंब (लेटेंसी) कम होगा और सेवाओं की विश्वसनीयता बेहतर होगी। एलडीसीए/एसडीसीए-स्तर के पीओआई पर मौजूदा ट्रैफिक को तीन वर्षों के भीतर चरणबद्ध तरीके से एलएसए-स्तर के पीओआई पर ले जाया जाएगा। विनियमों के लागू होने के बाद स्थापित सभी नए इंटरकनेक्शन आईपी-आधारित होंगे, और ई1/टीडीएम-आधारित इंटरकनेक्शन पर काम कर रहे सभी मौजूदा पीओआई को तीन वर्षों के भीतर चरणबद्ध तरीके से आईपी-आधारित इंटरकनेक्शन में बदला जाएगा। अन्य बदलावों में सेवा प्रदाता द्वारा अपनी परिचालन आवश्यकताओं के लिए स्वेच्छा से पीओआई सरेंडर करने का ढांचा (पहले विनियमों में केवल पीओआई के डिस्कनेक्शन का प्रावधान था); पुनर्मूल्यांकन पर दी जाने वाली बैंक गारंटी की वैधता और ऐसे पुनर्मूल्यांकन के अंतराल को छह महीने से बढ़ाकर बारह महीने करना; इंटरकनेक्शन शुल्क या इंटरकनेक्शन उपयोग शुल्क के भुगतान में देरी पर सेवा प्रदाताओं की आपसी सहमति से तय ब्याज, जिसकी अधिकतम सीमा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की एक वर्ष की मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) में दो प्रतिशत जोड़कर बनने वाली दर होगी; एलएसए-स्तर के पीओआई पर ट्रैफिक के स्थानांतरण और आईपी-आधारित इंटरकनेक्शन की ओर माइग्रेशन की निगरानी के लिए रिपोर्टिंग की आवश्यकताएं; तथा विनियमों के उल्लंघन पर वित्तीय दंड (फाइनेंशियल डिसइंसेंटिव) का श्रेणीबद्ध ढांचा शामिल हैं।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

पढ़ाई के लिए संदर्भ

10 नवंबर 2025 को “इंटरकनेक्शन मामलों पर मौजूदा ट्राई विनियमों की समीक्षा” विषय पर परामर्श पत्र जारी करते हुए ट्राई ने कहा था कि वह ट्राई अधिनियम, 1997 की धारा 11(1)(ब) के अनुसार मौजूदा सभी नौ इंटरकनेक्शन विनियमों की व्यापक समीक्षा कर रहा है, ताकि नियामक ढांचे में प्रौद्योगिकी के विकास और दूरसंचार क्षेत्र में हुए बदलावों को ध्यान में रखा जा सके। ट्राई के अनुसार यह ढांचा दो दशकों से अधिक समय में 'इंटरकनेक्ट समझौतों के रजिस्टर संबंधी विनियम, 1999' (The Register of Interconnect Agreements Regulations, 1999) से लेकर 'दूरसंचार इंटरकनेक्शन विनियम, 2018' तक विकसित हुआ, और नवीनतम संशोधन 10 जुलाई 2020 को अधिसूचित 'दूरसंचार इंटरकनेक्शन (द्वितीय संशोधन) विनियम, 2020' था। समीक्षा में अन्य बातों के साथ आईपी-आधारित इंटरकनेक्शन पर ध्यान दिया गया, जिसे ट्राई ने 4जी/5जी के तेज़ विस्तार के कारण बेहतर सेवा गुणवत्ता के लिए और भी प्रासंगिक बताया, और इंटरकनेक्शन के स्तरों पर भी, जो उस समय मोबाइल नेटवर्क के लिए एलएसए स्तर पर और फिक्स्ड-लाइन टेलीफोन नेटवर्क के लिए जिला/तहसील स्तर पर थे। समीक्षा में उपग्रह-आधारित दूरसंचार नेटवर्क से जुड़े इंटरकनेक्शन के मुद्दे भी शामिल थे, जिनमें उपग्रह अर्थ स्टेशन गेटवे से जुड़े इंटरकनेक्शन बिंदुओं (पीओआई) की प्रकृति और स्थान शामिल थे, साथ ही इंटरकनेक्शन शुल्क, इंटरकनेक्शन उपयोग शुल्क और संदर्भ इंटरकनेक्ट ऑफर (आरआईओ) ढांचा भी। इससे पहले 3 अप्रैल 2025 को एक प्रारंभिक-परामर्श पत्र जारी किया गया था।

संदर्भ: PIB (संचार मंत्रालय), 'भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण ने “इंटरकनेक्शन मुद्दों पर ट्राई के मौजूदा विनियमों की समीक्षा” पर परामर्श पत्र जारी किया', 10 नवंबर 2025

खुद जाँचें: नवंबर 2025 में ट्राई ने कितने मौजूदा इंटरकनेक्शन विनियमों की समीक्षा की बात कही थी, यह ढांचा किस विनियम से शुरू हुआ था, और किस संशोधन को उसने नवीनतम बताया था?

सभी नौ; इंटरकनेक्ट समझौतों के रजिस्टर संबंधी विनियम, 1999; 10 जुलाई 2020 को अधिसूचित दूरसंचार इंटरकनेक्शन (द्वितीय संशोधन) विनियम, 2020।

अभ्यास: इस रिलीज़ से विनियम लागू होने की तारीख़, उल्लिखित ट्राई अधिनियम की धारा, परामर्श की तारीख़ें और प्रतिक्रियाओं की संख्या, इंटरकनेक्शन के स्तर में बदलाव और उसकी समय-सीमा, आईपी-आधारित इंटरकनेक्शन का नियम, बैंक गारंटी में बदलाव, देर से भुगतान पर ब्याज की अधिकतम सीमा और प्रवर्तन से जुड़े प्रावधान लिखें; नोट से समीक्षा में शामिल विनियमों की संख्या, पहला और 2018 का विनियम, तब नवीनतम बताया गया संशोधन और समीक्षा में शामिल मुद्दे।

प्रधानमंत्री ने लगभग 21,800 करोड़ रुपये की पुणे मेट्रो परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया; हिंजेवाड़ी-शिवाजीनगर कॉरिडोर शुरू

प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 3 नवंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लगभग 21,800 करोड़ रुपये की पुणे मेट्रो परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। दस वर्ष पहले पुणे मेट्रो के पहले चरण का शिलान्यास करने को याद करते हुए उन्होंने कहा कि हिंजेवाड़ी से शिवाजीनगर कॉरिडोर के उद्घाटन से एक बड़े आईटी हब को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, जबकि उसी दिन जिस नई लाइन पर काम शुरू हुआ, वह शहर के पुराने और नए इलाकों को और जोड़ेगी। उन्होंने बताया कि नए उद्घाटित कॉरिडोर का निर्माण सरकार और निजी क्षेत्र के साझा प्रयासों से सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर हुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश का मेट्रो नेटवर्क 26 शहरों में लगभग 1,200 किलोमीटर तक फैल गया है, जिसमें प्रतिदिन एक करोड़ से अधिक लोग यात्रा करते हैं, और भारतीय मेट्रो नेटवर्क की गिनती दुनिया के शीर्ष तीन मेट्रो नेटवर्क में होती है। उन्होंने कहा कि 2014 में महाराष्ट्र में केवल 10 से 11 किलोमीटर मेट्रो लाइनें चालू थीं, जबकि अब लगभग 175 किलोमीटर लाइनें सेवा में हैं और 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से 680 किलोमीटर से अधिक लाइनों पर काम चल रहा है। उन्होंने फरवरी 2026 में अर्बन चैलेंज फंड को दी गई स्वीकृति का उल्लेख किया, जिसके लिए केंद्र सरकार एक लाख करोड़ रुपये की सहायता दे रही है और जिसका लक्ष्य शहरों में लाखों करोड़ रुपये का निवेश जुटाना है, और स्थानीय निकायों तथा निजी क्षेत्र के साझेदारों से मिशन मोड में इस प्रयास से जुड़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारत ने कठिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में दुनिया की सबसे तेज़ विकास दर बनाए रखी है और विश्व बैंक की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार 10 से 12 वर्षों के भीतर भारत में 50 करोड़ नागरिक अत्यधिक गरीबी से बाहर निकले हैं।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

पढ़ाई के लिए संदर्भ

इस कार्यक्रम की घोषणा करने वाली PIB की 2 नवंबर 2026 की रिलीज़ के अनुसार प्रधानमंत्री को 8,300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित पुणे मेट्रो लाइन 3 का उद्घाटन करना था, जिसे पिंक लाइन के रूप में भी जाना जाता है। लगभग 23 किलोमीटर तक फैली पिंक लाइन मान को डिस्ट्रिक्ट कोर्ट मेट्रो स्टेशन से जोड़ती है और हिंजेवाड़ी आईटी हब और शिवाजीनगर के बीच मेट्रो कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। यह लाइन पूरी तरह से महिला ट्रेन ऑपरेटरों द्वारा संचालित की जाएगी, जिसे रिलीज़ ने अपनी तरह की पहली पहल बताया, और इसकी कुल बिजली आवश्यकताओं का लगभग 30 प्रतिशत सौर ऊर्जा से पूरा करने की परिकल्पना की गई है। प्रधानमंत्री को लगभग 13,500 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले पुणे मेट्रो के दूसरे चरण (चरण-II) की आधारशिला भी रखनी थी, जिसमें लाइन 2ए और 2बी (कुल लगभग 12.75 किलोमीटर; लाइन 2ए वनाज से चांदनी चौक और लाइन 2बी रामवाड़ी से विट्ठलवाड़ी तक, जो मौजूदा पूर्व-पश्चिम मेट्रो नेटवर्क का विस्तार करेंगी), लाइन 4 (लगभग 25.52 किलोमीटर, खराडी से खड़कवासला) और लाइन 4ए (6.12 किलोमीटर, नल स्टॉप से माणिक बाग) शामिल हैं। नए कॉरिडोर स्वारगेट, नल स्टॉप और खराडी बाईपास पर इंटरचेंज सुविधाओं के माध्यम से इंटरसिटी बस सेवाओं और मौजूदा पुणे मेट्रो नेटवर्क से जुड़ेंगे।

संदर्भ: PIB (प्रधानमंत्री कार्यालय), 'प्रधानमंत्री 3 नवंबर को लगभग 21,800 करोड़ रुपये की पुणे मेट्रो परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे', 2 नवंबर 2026

खुद जाँचें: पुणे मेट्रो लाइन 3 को और किस नाम से जाना जाता है, यह किन दो स्टेशनों को जोड़ती है, और पुणे मेट्रो के दूसरे चरण में कौन-सी चार लाइनें शामिल हैं?

पिंक लाइन; मान और डिस्ट्रिक्ट कोर्ट मेट्रो स्टेशन; लाइन 2ए, 2बी, 4 और 4ए।

अभ्यास: इस रिलीज़ से परियोजनाओं का कुल मूल्य, उद्घाटित कॉरिडोर और वह किस मॉडल पर बना, प्रधानमंत्री द्वारा बताए गए देश और महाराष्ट्र के मेट्रो आंकड़े, और अर्बन चैलेंज फंड लिखें; नोट से लाइन 3 का दूसरा नाम, लागत, लंबाई, छोर के स्टेशन, संचालक और सौर ऊर्जा का हिस्सा, तथा दूसरे चरण की अनुमानित लागत और उसकी चारों लाइनें व उनके छोर।

अंताल्या में होने वाले यूएनएफसीसीसी सीओपी31 में भारत समाधान-उन्मुख और न्यायसंगत जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाएगा: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में मीडिया को जानकारी देते हुए तुर्किये के अंताल्या में 9 से 20 नवंबर 2026 तक होने वाले यूएनएफसीसीसी के सीओपी31 के लिए भारत की प्राथमिकताएं बताईं, और सीबीडी सीओपी17 तथा यूएनसीसीडी सीओपी17 में भारत की भागीदारी के प्रमुख परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत सीओपी31 में समाधान-उन्मुख दृष्टिकोण के साथ जाएगा और क्षमता निर्माण, ज्ञान साझा करने तथा भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप समाधानों को केंद्र में रखते हुए ग्लोबल साउथ के लिए व्यावहारिक समाधान लाएगा, तथा जी-77 और चीन, एलएमडीसी और बेसिक (BASIC) के साथ मिलकर काम करेगा। मंत्री के अनुसार जलवायु वित्त एक प्रमुख प्राथमिकता होगी और भारत सीओपी31 में जलवायु वित्त कार्य कार्यक्रम (क्लाइमेट फाइनेंस वर्क प्रोग्राम) शुरू करने का निर्णय चाहेगा; उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 9.1 के तहत वित्त उपलब्ध कराना विकसित देशों का दायित्व है, और यह वित्त पूर्वानुमेय, मुख्यतः सार्वजनिक और रियायती होना चाहिए तथा इससे कर्ज का बोझ नहीं बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत इस पर भी जोर देगा कि शमन (मिटिगेशन) और वैश्विक स्टॉकटेक पक्षकार-संचालित, सहायक (फैसिलिटेटिव) और गैर-दंडात्मक रहें, एनडीसी की राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित प्रकृति का सम्मान हो और ऊपर से तय किए गए नए लक्ष्य न थोपे जाएं। मंत्री ने कहा कि अनुकूलन भारत की प्राथमिकता बना रहेगा, अनुकूलन पर वैश्विक लक्ष्य (ग्लोबल गोल ऑन एडेप्टेशन) के संकेतक स्वैच्छिक हों और वित्त तक पहुंच की शर्त न बनें, तथा अनुकूलन वित्त बढ़ाया जाए; भारत पक्षकार-संचालित व्यवस्था के माध्यम से न्यायसंगत परिवर्तन कार्य कार्यक्रम (जस्ट ट्रांजिशन वर्क प्रोग्राम) को जारी रखने का समर्थन करेगा; प्रौद्योगिकी हस्तांतरण विकसित देशों का दायित्व है और लागत, बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) तथा व्यापार से जुड़ी बाधाएं दूर की जानी चाहिए; और कार्बन बाज़ारों में भागीदारी स्वैच्छिक रहनी चाहिए। सीओपी31 में भारत की गतिविधियों में स्वीडन के साथ लीडआईटी 3.0 (LeadIT 3.0), तटीय लचीलेपन (कोस्टल रेजिलिएंस) पर उच्च-स्तरीय साइड इवेंट और आईबीसीए तथा वनों पर पैनल चर्चाएं शामिल होंगी, और मंत्री ने कहा कि भारत अंताल्या में रचनात्मक और सेतु-निर्माण (ब्रिज-बिल्डिंग) की भूमिका निभाएगा तथा ऐसा परिणाम चाहेगा जो प्रतिबद्धताओं से आगे बढ़कर कार्यान्वयन और सहायता की ओर ले जाए। उलानबटार (मंगोलिया) में हुए यूएनसीसीडी सीओपी17 के बारे में उन्होंने बताया कि एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय समूह का अध्यक्ष चुने जाने के बाद भारत ने 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर से अधिक भूमि की बहाली की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और भारत के घास के मैदानों और अन्य खुले प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों पर अपनी पहली मार्गदर्शिका (Guide to Grasslands and Other Open Natural Ecosystems of India) जारी की; उनके अनुसार येरेवान (आर्मेनिया) में हुए सीबीडी सीओपी17 में भारत ने कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क (केएमजीबीएफ) के प्रभावी और न्यायसंगत कार्यान्वयन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

पढ़ाई के लिए संदर्भ

1 दिसंबर 2023 को सीओपी-28 में उद्योग परिवर्तन के लिए नेतृत्व समूह (लीडरशिप ग्रुप फॉर इंडस्ट्री ट्रांज़िशन - लीडआईटी) के एक कार्यक्रम में, जिसके सह-मेजबान स्वीडन के प्रधानमंत्री ऊल्फ़ क्रिस्टरसन (Ulf Kristersson) थे, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि 2019 में शुरू किया गया लीडआईटी उद्योग परिवर्तन को बल देने का साझा प्रयास है और सरकारों तथा उद्योग के बीच साझेदारी का एक सफल उदाहरण है। उन्होंने बताया कि अपने पहले चरण में लीडआईटी ने लौह एवं इस्पात, सीमेंट, एल्युमीनियम और परिवहन जैसे क्षेत्रों में ट्रांज़िशन रोडमैप और ज्ञान साझा करने पर ध्यान दिया, और 18 देश तथा 20 कंपनियां इस समूह की सदस्य थीं। उन्होंने लीडआईटी 2.0 के शुभारंभ की घोषणा की, जिसके तीन मुख्य फोकस हैं: समावेशी और न्यायसंगत उद्योग परिवर्तन; कम कार्बन प्रौद्योगिकी का सह-विकास और हस्तांतरण; और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में उद्योग परिवर्तन के लिए वित्तीय सहायता। इसके साथ भारत-स्वीडन इंडस्ट्री ट्रांज़िशन प्लेटफॉर्म भी शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य दोनों देशों की सरकारों, उद्योगों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, शोधकर्ताओं और थिंक-टैंकों को जोड़ना है। उन्होंने यह भी कहा कि कम कार्बन प्रौद्योगिकी और नवाचार को गति मिलनी चाहिए और ये ग्लोबल साउथ तक जल्द से जल्द और आसानी से पहुंचने चाहिए।

संदर्भ: प्रधानमंत्री कार्यालय (pmindia.gov.in), 'COP-28 में लीडरशिप ग्रुप फॉर इंडस्ट्री ट्रांज़िशन कार्यक्रम में प्रधान मंत्री का संबोधन', 1 दिसंबर 2023

खुद जाँचें: लीडआईटी कब शुरू हुआ था, सीओपी-28 में लीडआईटी कार्यक्रम की सह-मेजबानी भारत ने किस देश के प्रधानमंत्री के साथ की, और लीडआईटी 2.0 के तीन मुख्य फोकस क्या हैं?

2019 में; स्वीडन (प्रधानमंत्री ऊल्फ़ क्रिस्टरसन); समावेशी और न्यायसंगत उद्योग परिवर्तन, कम कार्बन प्रौद्योगिकी का सह-विकास और हस्तांतरण, तथा उभरती अर्थव्यवस्थाओं में उद्योग परिवर्तन के लिए वित्तीय सहायता।

अभ्यास: इस रिलीज़ से सीओपी31 का स्थान और तारीख़ें, भारत किन समूहों के साथ काम करेगा, जलवायु वित्त (और उल्लिखित अनुच्छेद), शमन और वैश्विक स्टॉकटेक, अनुकूलन, न्यायसंगत परिवर्तन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और कार्बन बाज़ारों पर भारत का रुख, सीओपी31 में उसकी नियोजित गतिविधियां, और यूएनसीसीडी सीओपी17 तथा सीबीडी सीओपी17 से जुड़ी बातें लिखें; नोट से लीडआईटी कब शुरू हुआ, पहले चरण के क्षेत्र और सदस्य संख्या, लीडआईटी 2.0 के तीन फोकस और साथ में शुरू हुआ प्लेटफॉर्म।

कोयला मंत्रालय के कोयला नियंत्रक संगठन ने बंद और परित्यक्त खदानों के लिए डिजिटल खदान पुनर्प्रयोजन उपकरण 'सुविकल्प' विकसित किया

कोयला मंत्रालय ने 3 नवंबर 2026 को बताया कि मंत्रालय के तहत कोयला नियंत्रक संगठन (सीसीओ) ने 'सुविकल्प- खदान पुनर्प्रयोजन उपकरण' (SUVIKALP – Mine Repurposing Tool) विकसित किया है, जो कोयला और लिग्नाइट खदान के लिए खनन योजना दिशानिर्देश, 2025 के अनुरूप एक डिजिटल निर्णय-समर्थन मंच है और बंद तथा परित्यक्त खदानों को उत्पादक संपत्तियों में बदलने में मदद के लिए बनाया गया है। सुविकल्प का उद्देश्य खनन के बाद भूमि-उपयोग के उपयुक्त अवसरों की पहचान के लिए एक वैज्ञानिक, पारदर्शी और मानकीकृत ढांचा स्थापित करना है। यह एक एकीकृत डिजिटल मंच पर भू-खनन विशेषताओं, पर्यावरणीय स्थितियों, इन्फ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता, संसाधनों की कमी, वित्तीय पहलुओं और सामाजिक-आर्थिक कारकों को एक साथ लाता है; उपयोगकर्ता खदान-विशिष्ट जानकारी दर्ज करके साइट प्रोफाइल बनाते हैं, और संभावित पुनर्प्रयोजन विकल्पों का मूल्यांकन और रैंकिंग टीओपीएसआईएस (TOPSIS - आदर्श समाधान की समानता द्वारा अनुक्रम प्राथमिकता हेतु तकनीक) पर आधारित बहु-मानदंड निर्णय (एमसीडीएम) पद्धति से की जाती है। मूल्यांकन प्रक्रिया कारक चयन, संभावित विकल्पों के निर्माण, सामुदायिक प्राथमिकताओं के एकीकरण, उपयुक्तता मूल्यांकन और अंतिम रैंकिंग के क्रम में चलती है। सुविकल्प परियोजना मूल्यांकन में स्थानीय प्राथमिकताओं को शामिल करने के लिए 'रिक्लेम' (RECLAIM) – सामुदायिक जुड़ाव और विकास ढांचे को एकीकृत करता है, और इसका 'प्रिज्म' (PRISM – पोस्ट-माइनिंग रीपर्पोजिंग इम्प्लीमेंटेशन स्ट्रैटेजिक मॉडल) मंच को कार्यान्वयन के रास्तों तक ले जाता है, जिसे परियोजना अवधारणा नोट, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय केस स्टडी, नमूना निविदा दस्तावेज, कार्यान्वयन एजेंसियों के विवरण और सर्वोत्तम प्रथाओं से जुड़े संसाधनों वाले एक एकीकृत ज्ञान भंडार का समर्थन प्राप्त है। मंत्रालय के अनुसार अगला चरण बंद और परित्यक्त कोयला और लिग्नाइट खदानों में सुविकल्प को व्यापक रूप से अपनाने, सिफारिशों को साइट-विशिष्ट व्यवहार्यता अध्ययनों, अवधारणा नोट और डीपीआर में बदलने, संस्थागत समन्वय, निवेश जुटाने, ज्ञान और क्षमता निर्माण तथा निगरानी और मूल्यांकन पर केंद्रित होगा; दीर्घकालिक लक्ष्य सुविकल्प को एक मापनीय (स्केलेबल) राष्ट्रीय ज्ञान और निर्णय-समर्थन इकोसिस्टम के रूप में विकसित करना है।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

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6 अगस्त 2025 को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में केंद्रीय कोयला और खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने बताया कि भारत में कोयला खदानों को बंद करने और उनका पुनः उपयोग अब 'कोयला और लिग्नाइट ब्लॉकों के लिए खनन योजना और खदान बंद करने की योजना तैयार करने हेतु दिशानिर्देश-2025' के अनुसार किया जाता है। ये दिशानिर्देश वैज्ञानिक और सामाजिक रूप से जिम्मेदार खदान बंदी पर बल देते हैं, जिसमें भूमि पुनर्ग्रहण, पर्यावरणीय पुनर्स्थापन और सामुदायिक एवं आर्थिक लाभ के लिए खनन के बाद उपयोग शामिल है; ये कृषि, मत्स्यपालन, इको-पार्क, जलाशयों के जीर्णोद्धार, हरित ऊर्जा परियोजनाओं और सांस्कृतिक या विरासत संवर्धन जैसी गतिविधियों को एकीकृत करने के लिए दिशा-निर्देश देते हैं और सार्वजनिक स्थलों के संचालन और रखरखाव में स्थानीय समुदायों की भागीदारी को प्रोत्साहित करते हैं। दिशानिर्देशों में अनिवार्य किया गया है कि खदान बंद करने के लिए जमा की गई पाँच-वर्षीय एस्क्रो राशि का कम से कम 25 प्रतिशत सामुदायिक विकास और आजीविका गतिविधियों के लिए उपयोग हो, और खदान बंद करने की अंतिम लागत का 10 प्रतिशत न्यायोचित परिवर्तन (जस्ट ट्रांसफॉर्मेशन) के लिए निर्धारित हो, जिसका उपयोग जिला प्रशासन और हितधारकों के परामर्श से किया जाएगा। उत्तर के अनुसार कोयला और लिग्नाइट सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने इको-पार्क, खदान पर्यटन स्थल, मनोरंजक पार्क, खदानों के खाली गड्ढों (माइन वॉयड) में मत्स्य पालन और सौर ऊर्जा परियोजनाओं जैसी पुनः उपयोग पहल की हैं; उदाहरणों में वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड का साओनेर इको पार्क, सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड की केरकेट्टा खदान में कायाकल्प वाटिका और मत्स्य पालन, तथा भारत कोकिंग कोल लिमिटेड का पारसनाथ उद्यान शामिल हैं; विदेश में जर्मनी, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में कुछ बंद कोयला खदानों का पर्यटन स्थलों, सांस्कृतिक केंद्रों, जलाशयों या औद्योगिक उद्देश्यों के लिए पुनः उपयोग किया गया है।

संदर्भ: PIB (कोयला मंत्रालय), 'बंद कोयला खदानों का पर्यटन स्थलों के रूप में विकास', 6 अगस्त 2025

खुद जाँचें: उत्तर में बताए गए 2025 के दिशानिर्देशों के तहत खदान बंद करने के लिए जमा पाँच-वर्षीय एस्क्रो राशि का कितना हिस्सा सामुदायिक विकास और आजीविका गतिविधियों पर खर्च होना चाहिए, और खदान बंद करने की अंतिम लागत का कितना हिस्सा न्यायोचित परिवर्तन के लिए निर्धारित है?

कम से कम 25 प्रतिशत; 10 प्रतिशत।

अभ्यास: इस रिलीज़ से सुविकल्प किसने विकसित किया, यह किन दिशानिर्देशों के अनुरूप है, यह किन कारकों को एक साथ लाता है, विकल्पों की रैंकिंग किस पद्धति से करता है, मूल्यांकन के चरण, रिक्लेम और प्रिज्म क्या करते हैं, और अगले चरण की प्राथमिकताएं लिखें; नोट से 2025 के दिशानिर्देशों का नाम, वे किन बातों पर बल देते हैं, एस्क्रो राशि और बंदी लागत के निर्धारित हिस्से, और भारत तथा विदेश में पुनः उपयोग की गई खदानों के उदाहरण।

नीति आयोग ने 'इंडिया एसएंडटी स्कोरबोर्ड' का शुभारंभ किया: राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिदृश्य पर एक इंटरैक्टिव प्लेटफॉर्म

नीति आयोग ने 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के केजी मार्ग स्थित सिविल सर्विसेज ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट (CSOI) में 'इंडिया एसएंडटी स्कोरबोर्ड' का शुभारंभ किया; इसका अनावरण नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री अशोक कुमार लाहिड़ी ने किया। नीति आयोग की एक प्रमुख पहल के रूप में विकसित यह स्कोरबोर्ड एक इंटरैक्टिव प्लेटफॉर्म है, जो भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिदृश्य का एक एकीकृत दृश्य प्रदान करता है, और इसे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और बेंचमार्किंग को सुगम बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह उच्च शिक्षण संस्थानों, अनुसंधान एवं विकास (R&D) संस्थानों, डीप-टेक स्टार्टअप्स और इनक्यूबेटर्स सहित एसएंडटी इकोसिस्टम के डेटा के साथ-साथ शोध प्रकाशनों और पेटेंट जैसे एसएंडटी आउटपुट के डेटा को एक साथ लाता है। आउटपुट की मात्रा से आगे बढ़कर, यह प्राथमिकता वाले अनुसंधान क्षेत्रों और तीन क्षेत्रों - अकादमिक, सरकारी अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाएं और उद्योग - में शोध की गुणवत्ता, प्रभाव, सहयोग और ओपन एक्सेस के संकेतक प्रस्तुत करता है; यह राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की आपस में तुलना की सुविधा भी देता है और राज्य नीतियों और सर्वोत्तम प्रथाओं (बेस्ट प्रैक्टिसेज) सहित विस्तृत राज्य प्रोफाइल प्रदान करता है। नीति आयोग के सदस्य (एसएंडटी) प्रो. अभय करंदीकर ने कहा कि अनुसंधान और नवाचार से संबंधित डेटा अब तक कई स्रोतों में बिखरा हुआ था, जिससे राज्यों के लिए अपनी वास्तविक स्थिति का आकलन करना कठिन हो जाता था, और यह स्कोरबोर्ड एक ही इंटरैक्टिव डैशबोर्ड पर इकोसिस्टम, प्रकाशन और पेटेंट डेटा को वर्षों के रुझानों के साथ लाकर इस कमी को दूर करता है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. उमेश वी. वाघमारे ने कहा कि यह स्कोरबोर्ड विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर राष्ट्रीय साक्ष्य आधार में एक मूल्यवान राज्य-स्तरीय परिदृश्य जोड़ता है। उपाध्यक्ष ने कहा कि सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद के सिद्धांत से प्रेरित यह स्कोरबोर्ड राज्यों को अपनी शक्तियों और कमियों की पहचान करने, एक-दूसरे से सीखने तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में बेहतर कार्यक्रम और नीतियां तैयार करने में मदद करेगा, और उन्होंने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से इस मंच का पूरा उपयोग करने का आग्रह किया; यह मंच www.sts.niti.gov.in पर उपलब्ध है।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

पढ़ाई के लिए संदर्भ

21 जुलाई 2022 को नीति आयोग ने प्रतिस्पर्धात्मकता संस्थान (इंस्टीट्यूट फॉर कॉम्पिटिटिवनेस) के साथ तैयार किए गए अपने इंडिया इनोवेशन इंडेक्स का तीसरा संस्करण - इंडिया इनोवेशन इंडेक्स 2021 - जारी किया था। PIB के अनुसार यह सूचकांक देश के नवाचार इकोसिस्टम के मूल्यांकन और विकास का एक विस्तृत साधन है: यह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उनके नवाचार प्रदर्शन के आधार पर क्रम में रखता है, ताकि उनके बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बने। 'प्रमुख राज्यों' की श्रेणी में कर्नाटक फिर से शीर्ष पर रहा, 'पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों' की श्रेणी में मणिपुर आगे रहा और 'केंद्र शासित प्रदेशों और शहर राज्यों' की श्रेणी में चंडीगढ़ ने शीर्ष प्रदर्शन किया। ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स के ढांचे के आधार पर संकेतकों की संख्या इंडिया इनोवेशन इंडेक्स 2020 के 36 से बढ़कर 66 हो गई, जो 16 उप-स्तंभों में बंटे हैं और ये उप-स्तंभ सात प्रमुख स्तंभ बनाते हैं: पांच 'एनेबलर' (सक्षमकारी) स्तंभ इनपुट को और दो 'प्रदर्शन' स्तंभ आउटपुट को मापते हैं। यह सूचकांक नीति आयोग के तत्कालीन उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने जारी किया था, और यह ग्लोबल इंडिसिस टू ड्राइव रिफॉर्म एंड ग्रोथ (जीआईआरजी) तंत्र में योगदान देता है, जिसके लिए नीति आयोग नोडल संगठन है।

संदर्भ: PIB (नीति आयोग), 'कर्नाटक, मणिपुर और चंडीगढ़ नीति आयोग के इंडिया इनोवेशन इंडेक्स 2021 में शीर्ष पर', 21 जुलाई 2022

खुद जाँचें: नीति आयोग के इंडिया इनोवेशन इंडेक्स 2021 में 'प्रमुख राज्यों' की श्रेणी में कौन-सा राज्य शीर्ष पर रहा, और उस संस्करण में कितने संकेतक थे?

कर्नाटक; 66 संकेतक (इंडिया इनोवेशन इंडेक्स 2020 के 36 से बढ़कर)।

अभ्यास: इस रिलीज़ से लिखें कि इंडिया एसएंडटी स्कोरबोर्ड का शुभारंभ किसने, कहाँ और किस तारीख़ को किया, इसका अनावरण किसने किया, यह कौन-सा डेटा एक साथ लाता है, इसमें शामिल तीन क्षेत्र कौन-से हैं, यह राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की किस काम में मदद के लिए है और इसका वेब पता क्या है; नोट से जुलाई 2022 में जारी इंडिया इनोवेशन इंडेक्स का संस्करण, वह संस्थान जिसके साथ इसे तैयार किया गया, तीनों श्रेणियों में शीर्ष पर रहे राज्य/केंद्र शासित प्रदेश, और संकेतकों, उप-स्तंभों और स्तंभों की संख्या। दोनों साधन क्या मापना चाहते हैं, इसकी तुलना करें।

नीति आयोग और टेक्समिन (TEXMiN) ने भारत के महत्वपूर्ण खनिज इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए संयुक्त आशय वक्तव्य पर हस्ताक्षर किए

नीति आयोग ने 3 नवंबर 2026 को बताया कि नीति आयोग और आईआईटी (आईएसएम) धनबाद स्थित टेक्समिन (TEXMiN - टेक्नोलॉजी ट्रांसलेशन रिसर्च पार्क), जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की एक पहल है, ने महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए एक संयुक्त आशय वक्तव्य (जॉइंट स्टेटमेंट ऑफ इंटेंट - एसओआई) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सहयोग का उद्देश्य स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को आगे बढ़ाना, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना तथा भारत में मजबूत और टिकाऊ महत्वपूर्ण खनिज मूल्य श्रृंखलाओं के विकास में सहायता करना है, और यह नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (एनसीएमएम) के उद्देश्यों के अनुरूप है। एसओआई में चार प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग की परिकल्पना की गई है: सहयोगात्मक अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास; तकनीकी और रणनीतिक अध्ययन; नीतिगत और संस्थागत सहायता; तथा क्षमता निर्माण और ज्ञान का आदान-प्रदान। इस पर हस्ताक्षर नीति आयोग के सदस्य प्रो. गोवर्धन दास की आईआईटी (आईएसएम) धनबाद यात्रा के दौरान हुए, जहाँ उन्होंने 31 अक्टूबर 2026 को महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ मृदा तत्वों (रेयर अर्थ्स) पर राष्ट्रीय संगोष्ठी (सीएमआरई 2026) का उद्घाटन किया; यह संगोष्ठी इंडियन काउंसिल ऑफ केमिस्ट्स के 45वें वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन के हिस्से के रूप में आयोजित की गई। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रो. दास ने महत्वपूर्ण खनिजों को राष्ट्रीय सुरक्षा, तकनीकी आत्मनिर्भरता और भारत के 'विकसित भारत 2047' विजन के रणनीतिक सक्षमकारी (स्ट्रैटेजिक एनेबलर्स) बताया, खनन-केंद्रित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर अन्वेषण, प्रसंस्करण, शोधन, उन्नत सामग्री और पुनर्चक्रण को समाहित करने वाली एकीकृत मूल्य श्रृंखला की ओर बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया, और कोयले की फ्लाई ऐश, रेड मड, खदानों के अवशेष (माइन टेलिंग्स) और इलेक्ट्रॉनिक कचरे जैसे द्वितीयक संसाधनों से महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति की संभावना पर प्रकाश डाला।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

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29 जनवरी 2025 को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 16,300 करोड़ रुपये के व्यय और सार्वजनिक उपक्रमों आदि द्वारा 18,000 करोड़ रुपये के अपेक्षित निवेश के साथ नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (एनसीएमएम) के शुभारंभ को मंजूरी दी थी - प्रधानमंत्री कार्यालय के पेज के शीर्षक में इसे सात वर्षों में 34,300 करोड़ रुपये का परिव्यय बताया गया है। वित्त मंत्री ने 23 जुलाई 2024 को 2024-25 के केंद्रीय बजट में इस मिशन की स्थापना की घोषणा की थी। एनसीएमएम में खनिज अन्वेषण, खनन, सज्जीकरण, प्रसंस्करण और अंतिम उत्पादों (एंड-ऑफ-लाइफ प्रोडक्ट्स) से पुनर्प्राप्ति सहित मूल्य श्रृंखला के सभी चरण शामिल होंगे। यह मिशन देश के भीतर और अपतटीय क्षेत्रों में महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण को गति देगा, इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिज खनन परियोजनाओं के लिए फास्ट ट्रैक नियामक अनुमोदन प्रक्रिया बनाना है, और यह अन्वेषण के लिए वित्तीय प्रोत्साहन देगा तथा ओवरबर्डन और टेलिंग्स से इन खनिजों की पुनर्प्राप्ति को बढ़ावा देगा; इसका उद्देश्य भारतीय सार्वजनिक उपक्रमों और निजी कंपनियों को विदेशों में महत्वपूर्ण खनिज परिसंपत्तियां हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करना भी है; इसमें देश के भीतर महत्वपूर्ण खनिजों के भंडार के विकास और महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़े उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना का प्रस्ताव है, और खनिज प्रसंस्करण पार्कों की स्थापना और पुनर्चक्रण को समर्थन के प्रावधान शामिल हैं। पेज के अनुसार खान मंत्रालय के संयुक्त उद्यम काबिल (KABIL) ने लिथियम के अन्वेषण और खनन के लिए अर्जेंटीना के कैटामार्का प्रांत में लगभग 15703 हेक्टेयर क्षेत्र का अधिग्रहण किया है।

संदर्भ: पीएमइंडिया (प्रधानमंत्री कार्यालय), 'केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने सात वर्षों में 34,300 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ हरित प्रौद्योगिकियों के लिए अहम माने जाने वाले महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों के लिए एक सुदृढ़ मूल्य श्रृंखला के निर्माण हेतु 'नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन' को मंजूरी दी', 29 जनवरी 2025

खुद जाँचें: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन को किस तारीख़ को मंजूरी दी, और इसमें कितना व्यय और सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा कितना अपेक्षित निवेश है?

29 जनवरी 2025 को; 16,300 करोड़ रुपये का व्यय और सार्वजनिक उपक्रमों आदि द्वारा 18,000 करोड़ रुपये का अपेक्षित निवेश।

अभ्यास: इस रिलीज़ से आशय वक्तव्य के दोनों पक्ष, रिलीज़ में टेक्समिन का विस्तार और वह कहाँ स्थित है, सहयोग के चार क्षेत्र, जिस मिशन के यह अनुरूप है, प्रो. गोवर्धन दास द्वारा उद्घाटित संगोष्ठी और उनके बताए द्वितीयक संसाधन लिखें; नोट से एनसीएमएम को मंत्रिमंडल की मंजूरी की तारीख़, उसका व्यय और सार्वजनिक उपक्रमों का अपेक्षित निवेश, उसकी घोषणा कब हुई, उसमें शामिल मूल्य श्रृंखला के चरण और काबिल द्वारा विदेश में हासिल की गई लिथियम परिसंपत्ति।

एपीईडीए ने अरुणाचल प्रदेश के ज़िरो से 1.5 मीट्रिक टन कीवी का दुबई के लिए प्रायोगिक निर्यात कराया

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने 3 नवंबर 2026 को बताया कि उसके अंतर्गत आने वाले कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) ने अरुणाचल प्रदेश के ज़िरो से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दुबई तक 1.5 मीट्रिक टन (एमटी) कीवी के प्रायोगिक निर्यात में सहायता की है। यह खेप दुबई पहुँच गई और इसे अल कुसैस के लुलु हाइपरमार्केट में प्रदर्शित किया गया; मंत्रालय के अनुसार यह पहल अब फ्लैग-ऑफ के चरण से आगे बढ़कर खुदरा स्तर पर बाजार के मूल्यांकन के चरण में पहुँच गई है, जिसमें ग्राहकों द्वारा कीवी को चखने और उनकी प्रतिक्रिया से फल की स्वीकार्यता और संभावित मांग का आकलन होगा और भविष्य के व्यावसायिक निर्यात के लिए ग्राहकों की पसंद, गुणवत्ता की उम्मीदों, पैकेजिंग और प्रस्तुति की जरूरतों की जानकारी मिलेगी। उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (एमडीओएनईआर) के अंतर्गत शुरू की गई यह पहल 'कीवी: अरुणाचल प्रदेश की विशेषता' (Kiwi: USP of Arunachal Pradesh) नामक ब्रांडिंग पहल के तहत अरुणाचल प्रदेश के कीवी सेक्टर को बढ़ावा देने और मजबूत करने का प्रयास करती है, और इसे अरुणाचल प्रदेश सरकार के व्यापार और वाणिज्य विभाग तथा बागवानी विभाग के सहयोग से लागू किया गया। रिलीज़ के अनुसार राज्य की अधिक ऊँचाई वाली परिस्थितियाँ और प्राकृतिक वातावरण विशिष्ट गुणवत्ता और स्वाद वाली कीवी की खेती में सहायक हैं; यहाँ मुख्य रूप से हेवर्ड, मोंटी, एलिसन और ब्रूनो किस्में उगाई जाती हैं, जिनमें से हेवर्ड किस्म की अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अच्छी मांग है। फ्लैग-ऑफ समारोह में अरुणाचल प्रदेश सरकार के कृषि एवं संबद्ध विभागों के मंत्री श्री गेब्रियल डी. वांगसू उपस्थित रहे, और कीवी उत्पादक सहकारी समिति तथा फेयर एक्सपोर्ट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने एपीईडीए के अधिकारियों और खेप के साथ गए कीवी किसानों के साथ इसमें भाग लिया।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

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20 मई 2026 को पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने 'अरुणाचल कीवी: अरुणाचल प्रदेश की यूएसपी' मिशन की शुरुआत की थी - यह राज्य के लिए लगभग ₹167 करोड़ के परिव्यय वाला क्लस्टर-आधारित कीवी खेती और मूल्य श्रृंखला विकास मिशन है। एमडीओएनईआर की अगुवाई वाले इस मिशन को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की योजनाओं के साथ-साथ नाबार्ड, आईसीएआर-सीआईटीएच, एपीईडीए, एनईआरएएमएसी और निजी निवेशकों के तालमेल से तैयार किया गया है। ज़िरो वैली (लोअर सुबनसिरी), दिरांग और कलाकतांग (वेस्ट कामेंग), शि योमी और दिबांग घाटी में छह एकीकृत क्लस्टर-स्तरीय फसल-बाद प्रबंधन हब (पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट हब) चिह्नित किए गए। मंत्री ने बताया कि भारत के कुल कीवी उत्पादन में अरुणाचल प्रदेश का योगदान 50 प्रतिशत से अधिक है और यहाँ हर साल 7,050 मीट्रिक टन से अधिक उत्पादन होता है; उन्होंने 2,000 मीट्रिक टन की कोल्ड-चेन क्षमता बनाने और वित्त वर्ष 2028 तक अरुणाचल की जैविक कीवी (अरुणाचल ऑर्गेनिक कीवी) को अंतरराष्ट्रीय निर्यात बाजारों में स्थापित करने जैसे लक्ष्य बताए; मिशन चार रणनीतिक स्तंभों - तालमेल (कन्वर्जेंस), मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और बाजार एकीकरण - पर आधारित है। मुख्यमंत्री श्री पेमा खांडू ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का सबसे बड़ा कीवी उत्पादक राज्य है और एमओवीसीडी-एनईआर (2020) के तहत जैविक कीवी का प्रमाणन पाने वाला देश का पहला राज्य है, और एमडीओएनईआर के सचिव ने बताया कि कीवी की खेती राज्य के 13 जिलों में 3,582 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैल चुकी है और इसमें 1,500 से अधिक किसान लगे हैं।

संदर्भ: PIB (पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय), 'केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने "अरुणाचल कीवी: अरुणाचल प्रदेश की यूएसपी" मिशन लॉन्च किया', 20 मई 2026

खुद जाँचें: 20 मई 2026 को शुरू किए गए 'अरुणाचल कीवी: अरुणाचल प्रदेश की यूएसपी' मिशन का अनुमानित परिव्यय कितना है, और मंत्री के अनुसार भारत के कीवी उत्पादन में अरुणाचल प्रदेश का योगदान कितना है?

लगभग ₹167 करोड़; 50 प्रतिशत से अधिक (हर साल 7,050 मीट्रिक टन से अधिक)।

अभ्यास: इस रिलीज़ से निर्यात की गई मात्रा, कीवी कहाँ से भेजी गई, गंतव्य और वह स्टोर जहाँ इसे प्रदर्शित किया गया, वह मंत्रालय जिसके अंतर्गत पहल की गई, ब्रांडिंग पहल, शामिल राज्य विभाग और कीवी की प्रमुख किस्में लिखें; नोट से कीवी मिशन की तारीख़ और परिव्यय, फसल-बाद प्रबंधन हब की संख्या और स्थान, भारत के कीवी उत्पादन में अरुणाचल प्रदेश का हिस्सा, कोल्ड-चेन और निर्यात के लक्ष्य, और वह योजना जिसके तहत राज्य को जैविक कीवी का प्रमाणन मिला।

सर्बानंद सोनोवाल ने 2047 तक भारत की माल ढुलाई में तटीय और अंतर्देशीय जलमार्ग नौवहन की हिस्सेदारी को 6% से दोगुना कर 12% करने की योजना प्रस्तुत की

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने 3 नवंबर 2026 को बताया कि केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने ओडिशा के पुरी में कंसल्टेटिव कमेटी (परामर्शदात्री समिति) की बैठक में कहा कि सरकार तटीय कार्गो प्रोत्साहन योजना और क्रूज भारत मिशन के माध्यम से 2047 तक भारत की माल ढुलाई में तटीय और अंतर्देशीय जलमार्ग नौवहन की हिस्सेदारी को 6% से दोगुना कर 12% करने और 2029 तक दस लाख समुद्री क्रूज यात्रियों को आकर्षित करने के लिए काम कर रही है; ये लक्ष्य हैं, उपलब्धियां नहीं। मंत्री ने यह भी घोषणा की कि पारादीप पोर्ट अथॉरिटी (पीपीए) ओडिशा सरकार की साझेदारी में पुरी इंटरनेशनल क्रूज़ टर्मिनल विकसित करेगी, जिसकी लागत लगभग 1,500 करोड़ रुपये होने की संभावना है। सोनोवाल ने बताया कि भारतीय बंदरगाहों पर तटीय कार्गो पिछले 12 वर्षों में 74 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर 177 मिलियन मीट्रिक टन हो गया है, जो लगभग 140% की वृद्धि है; भारत की तटरेखा 11,000 किलोमीटर से अधिक लंबी है। 2026-27 के बजट में घोषित तटीय कार्गो प्रोत्साहन योजना कार्गो मालिकों, तटीय पोत ऑपरेटरों और मल्टीमॉडल परिवहन ऑपरेटरों को प्रोत्साहन देगी। सोनोवाल के अनुसार क्रूज क्षेत्र में 2025-26 के वित्तीय वर्ष में भारत में 462,661 महासागरीय क्रूज यात्री और 212 पोत कॉल दर्ज किए गए, जो 2013-14 के बाद से यात्री यातायात में 5.5 गुना और पोत कॉल में 2.1 गुना वृद्धि है; सितंबर 2024 में शुरू किए गए क्रूज भारत मिशन का लक्ष्य मार्च 2029 तक दस लाख समुद्री क्रूज यात्री और 400,000 नौकरियां है। सोनोवाल ने कहा कि 143 नदी क्रूज टर्मिनल और लैंडिंग पॉइंट चालू हैं, और दोनों पहलों से कुल मिलाकर 560,000 से अधिक नौकरियों के सृजन और 16 मिलियन मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन की बचत होने की उम्मीद है। उन्होंने ओडिशा में राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या 5 के विकास पर भी प्रकाश डाला, जिसकी अनुमानित लागत 13,000 करोड़ रुपये से अधिक है और जिसका उद्देश्य तालचेर और कलिंगनगर सहित राज्य के औद्योगिक और खनन केंद्रों को पूर्वी तट के बंदरगाहों से जोड़ना है। बैठक में राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर और संसद के आठ सदस्य उपस्थित रहे।

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30 सितंबर 2024 को केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मुंबई बंदरगाह पर क्रूज शिप 'एम्प्रेस' पर सवार होकर 'क्रूज भारत मिशन' की शुरुआत की थी और कहा था कि इसका उद्देश्य पांच वर्षों के भीतर, यानी 2029 तक, क्रूज यात्रियों की संख्या को दोगुना करना है। मिशन को 1 अक्टूबर 2024 से 31 मार्च 2029 तक तीन चरणों में लागू किया जाना है: चरण 1 में अध्ययन, मास्टर प्लानिंग और पड़ोसी देशों के साथ क्रूज गठबंधन बनाने पर, चरण 2 में नए क्रूज टर्मिनलों, मरीना और गंतव्यों के विकास पर, और चरण 3 में भारतीय उपमहाद्वीप के सभी क्रूज सर्किटों को एकीकृत करने पर ध्यान दिया जाएगा। इसके प्रमुख प्रदर्शन लक्ष्यों में समुद्री क्रूज यात्रियों की संख्या चरण 1 के 0.5 मिलियन से बढ़ाकर चरण 3 तक 1 मिलियन करना और समुद्री क्रूज कॉल 125 से बढ़ाकर 500 करना, नदी क्रूज यात्रियों की संख्या 0.5 मिलियन से 1.5 मिलियन, अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल 2 से 10, नदी क्रूज टर्मिनल 50 से 100 और मरीना 1 से 5 करना शामिल है, और अंतिम चरण तक रोजगार सृजन 0.1 मिलियन से बढ़कर 0.4 मिलियन होना है। मिशन तीन क्रूज सेगमेंट - महासागर और हार्बर क्रूज, नदी और अंतर्देशीय क्रूज, तथा आइलैंड (द्वीप) क्रूज - को लक्षित करता है और पांच रणनीतिक स्तंभों के तहत पहलें तय करता है।

संदर्भ: PIB (पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय), 'केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने पांच साल के भीतर क्रूज सुविधा को बढ़ाने और यात्रियों की संख्या दोगुनी करने के लिए 'क्रूज भारत मिशन' की शुरुआत की', 30 सितंबर 2024

खुद जाँचें: 30 सितंबर 2024 को क्रूज भारत मिशन की शुरुआत किस क्रूज शिप पर सवार होकर और किस बंदरगाह पर की गई, और इसे किस अवधि में लागू किया जाना है?

क्रूज शिप 'एम्प्रेस' पर, मुंबई बंदरगाह पर; 1 अक्टूबर 2024 से 31 मार्च 2029 तक तीन चरणों में।

अभ्यास: इस रिलीज़ से माल ढुलाई में हिस्सेदारी का लक्ष्य, शुरुआती हिस्सेदारी और लक्ष्य वर्ष, समुद्री क्रूज यात्रियों का लक्ष्य, पुरी में विकसित होने वाला क्रूज टर्मिनल, उसे कौन विकसित करेगा और उसकी संभावित लागत, तटीय कार्गो में वृद्धि, 2026-27 के बजट में घोषित योजना, 2025-26 के क्रूज आंकड़े, अपेक्षित नौकरियां और उत्सर्जन में बचत, और राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या 5 लिखें; नोट से क्रूज भारत मिशन की शुरुआत की तारीख़, स्थान और चरण, और समुद्री क्रूज यात्रियों व रोजगार के उसके लक्ष्य। याद रखें कि माल ढुलाई में हिस्सेदारी का आंकड़ा लक्ष्य है, उपलब्धि नहीं।

भारतीय तटरक्षक बल और श्रीलंका तटरक्षक बल की 9वीं उच्च स्तरीय बैठक श्रीलंका के मिरिसा में हुई

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) और श्रीलंका तटरक्षक बल (एसएलसीजी) के बीच 9वीं उच्च स्तरीय बैठक (एचएलएम) 3 नवंबर 2026 को श्रीलंका के मिरिसा में आयोजित की गई। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि ने और श्रीलंकाई प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व श्रीलंका तटरक्षक बल के महानिदेशक रियर एडमिरल रुवान रूपासेना ने किया। बैठक में समुद्री प्रदूषण से निपटने (मरीन पॉल्यूशन रिस्पॉन्स), समुद्री खोज एवं बचाव (एसएआर) तथा समुद्री कानून प्रवर्तन सहित आपसी हित के प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दिया गया, और दोनों तटरक्षक बलों के बीच परिचालन सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए क्षमता विकास तथा तकनीकी सहायता संबंधी पहलों को बढ़ाने के उपायों पर भी विचार किया गया। दोनों प्रतिनिधिमंडलों ने उभरती समुद्री चुनौतियों से निपटने तथा साझा समुद्री क्षेत्र में समुद्री संरक्षा, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने में सहयोग बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। मंत्रालय के अनुसार बैठक में दोनों तटरक्षक बलों ने द्विपक्षीय जुड़ाव को और मजबूत करने, समुद्री आपात स्थितियों से निपटने के लिए समन्वित कार्रवाई को बढ़ावा देने तथा हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षित, संरक्षित और स्वच्छ समुद्री पर्यावरण के लिए क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने के अपने साझा संकल्प को रेखांकित किया।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

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11 अगस्त 2025 को भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) और श्रीलंका तटरक्षक बल (एसएलसीजी) के बीच 8वीं उच्च स्तरीय बैठक (एचएलएम) नई दिल्ली में आयोजित की गई थी; PIB ने इसे दोनों देशों के बीच समुद्री साझेदारी में एक और मील का पत्थर बताया था। बैठक में समुद्री प्रदूषण से निपटने, समुद्री खोज एवं बचाव और समुद्री कानून प्रवर्तन के क्षेत्रों में सहयोगात्मक जुड़ाव को मजबूत करने के साथ-साथ क्षमता निर्माण और तकनीकी सहायता पहलों को बढ़ाने पर चर्चा हुई। श्रीलंकाई प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व एसएलसीजी के महानिदेशक रियर एडमिरल वाई.आर. सेरासिंघे ने और भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व आईसीजी के महानिदेशक परमेश शिवमणि ने किया; दोनों पक्षों ने समकालीन समुद्री चुनौतियों का समाधान करने और साझा समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा, संरक्षा और पर्यावरणीय प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। PIB के अनुसार एसएलसीजी प्रतिनिधिमंडल 2018 में आईसीजी और एसएलसीजी के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के ढांचे के तहत एचएलएम और अन्य पेशेवर बातचीत के लिए 10 से 14 अगस्त 2025 तक भारत के दौरे पर था।

संदर्भ: PIB (रक्षा मंत्रालय), 'नई दिल्ली में भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) और श्रीलंका तटरक्षक बल (एसएलसीजी) के बीच 8वीं उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई', 11 अगस्त 2025

खुद जाँचें: आईसीजी और एसएलसीजी के बीच 8वीं उच्च स्तरीय बैठक कहाँ और किस तारीख़ को हुई, उसमें श्रीलंकाई प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किसने किया, और आईसीजी-एसएलसीजी समझौता ज्ञापन किस वर्ष हुआ था?

नई दिल्ली में, 11 अगस्त 2025 को; एसएलसीजी के महानिदेशक रियर एडमिरल वाई.आर. सेरासिंघे ने; 2018 में।

अभ्यास: इस रिलीज़ से बैठक की संख्या, स्थान और तारीख़, दोनों प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुख, सहयोग के तीन प्रमुख क्षेत्र और विचार किए गए अन्य उपाय लिखें; नोट से 8वीं बैठक का स्थान और तारीख़, तब श्रीलंकाई पक्ष के प्रमुख, और आईसीजी-एसएलसीजी समझौता ज्ञापन का वर्ष। दोनों बैठकों के स्थान और श्रीलंकाई प्रमुखों की तुलना करें।

2026-11-02 · 11 खबरें

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए आठ नेक्स्ट जेनरेशन कोरवेट हेतु जीआरएसई और जीएसएल के साथ 53,866.50 करोड़ रुपये के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए आठ नेक्स्ट जेनरेशन कोरवेट (एनजीसी) की खरीद हेतु गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) के साथ 53,866.50 करोड़ रुपये के अनुबंधों पर 2 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए। अनुबंधों के तहत जीआरएसई पांच कोरवेट का निर्माण करेगी, जबकि जीएसएल शेष तीन का निर्माण करेगी। मंत्रालय के अनुसार यह पहली परियोजना है जिसमें जहाजों को भारतीय नौसेना द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन किया जाएगा और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के माध्यम से चयनित रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) द्वारा निर्मित किया जाएगा। उन्नत मिसाइलों, हथियारों और सेंसर सूट से लैस एनजीसी वायु, सतह और जलमग्न क्षेत्रों में मिशन को अंजाम दे सकेंगे, जिनमें समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, सतह-रोधी और पनडुब्बी-रोधी युद्ध अभियान, तटीय रक्षा, तटीय (लिटोरल) युद्ध अभियान और समुद्री उपस्थिति एवं निगरानी मिशन शामिल हैं। इन जहाजों के निर्माण से अगले दस वर्षों में शिपयार्डों में लगभग 72 लाख व्यक्ति-दिवस और सहायक उद्योगों तथा एमएसएमई में 460 लाख व्यक्ति-दिवस का रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। पणजी से जारी PIB की एक अलग रिलीज़ के अनुसार सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जीएसएल ने तीन कोरवेट के निर्माण का काम प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से हासिल किया, और एनजीसी परियोजना जीएसएल के इतिहास में उसे मिला अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर है।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

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6 जून 2022 को रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने सशस्त्र बलों के लिए 76,390 करोड़ रुपये के पूंजी अधिग्रहण प्रस्तावों के लिए आवश्यकता की स्वीकृति (एओएन) दी थी। भारतीय नौसेना के लिए डीएसी ने लगभग 36,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर नेक्स्ट जेनरेशन कोरवेट (एनजीसी) की खरीद के लिए एओएन को मंजूरी दी और कहा कि ये एनजीसी निगरानी मिशन, एस्कॉर्ट ऑपरेशन, डिटरेंस, सरफेस एक्शन ग्रुप (एसएजी) ऑपरेशन, तलाश एवं आक्रमण और तटीय सुरक्षा जैसी विभिन्न भूमिकाओं के लिए बहुउद्देश्यीय प्लेटफॉर्म होंगे। इनका निर्माण भारतीय नौसेना के नए इन-हाउस डिजाइन के आधार पर जहाज निर्माण की नवीनतम तकनीक से किया जाना था, और इससे सरकार की सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) पहल को आगे बढ़ाने में योगदान मिलना था। उसी बैठक में डीएसी ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा डोर्नियर विमानों और एसयू-30 एमकेआई एयरो-इंजनों के निर्माण के लिए एओएन दिया और 'डिजिटल तटरक्षक' परियोजना को मंजूरी दी।

संदर्भ: PIB (रक्षा मंत्रालय), 'रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा खरीद परिषद ने “आत्मनिर्भर भारत” को बढ़ावा देने के लिए 76,390 करोड़ रुपये के रक्षा सौदों को मंजूरी दी', 6 जून 2022

खुद जाँचें: रक्षा अधिग्रहण परिषद ने नेक्स्ट जेनरेशन कोरवेट के लिए एओएन कब दिया, तब इनकी अनुमानित लागत कितनी थी, और इन्हें सरकार की किस पहल में योगदान देना था?

6 जून 2022 को; लगभग 36,000 करोड़ रुपये; सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास)।

अभ्यास: इस रिलीज़ से अनुबंधों का मूल्य, दोनों शिपयार्ड और हर एक द्वारा बनाए जाने वाले कोरवेट की संख्या, हस्ताक्षर की तारीख़ और स्थान, परियोजना किस बात में पहली है, एनजीसी की भूमिकाएँ और रोजगार के अनुमान लिखें; नोट से एनजीसी के लिए डीएसी के एओएन की तारीख़, तब की अनुमानित लागत, बताई गई भूमिकाएँ और उल्लिखित पहल।

भगवान बुद्ध के पवित्र पिपराहवा अवशेष तवांग मठ पहुंचे; तवांग, बोमडिला और नामसाई में होगी प्रदर्शनी

संस्कृति मंत्रालय ने 2 नवंबर 2026 को बताया कि नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय से लाए गए शाक्यमुनि बुद्ध के पवित्र अवशेषों को अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पेमा खांडू ने 31 अक्टूबर 2026 को तवांग में औपचारिक रूप से प्राप्त किया, और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत की उपस्थिति में ऐतिहासिक गादेन नामग्याल ल्हात्से (तवांग मठ) में उनका पारंपरिक धार्मिक स्वागत किया गया। संस्कृति मंत्रालय यह प्रदर्शनी अरुणाचल प्रदेश सरकार, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (आईबीसी) और राष्ट्रीय संग्रहालय के साथ मिलकर बौद्ध आस्था के तीन केंद्रों में आयोजित कर रहा है: 1 से 7 नवंबर तक तवांग मठ में, 8 से 13 नवंबर तक टीजीएल मठ (लोअर गोम्पा), बोमडिला में और 14 से 20 नवंबर 2026 तक गोल्डन पैगोडा, नामसाई में; पवित्र अवशेष 21 नवंबर 2026 को राष्ट्रीय संग्रहालय वापस लाए जाएंगे। ये अवशेष उत्तर प्रदेश के पिपराहवा से हैं, जो प्राचीन कपिलवस्तु और भगवान बुद्ध की शाक्य परंपरा से जुड़ा एक पुरातात्विक स्थल है। अपने संदेश में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक सदी से भी अधिक समय बाद पवित्र पिपराहवा अवशेषों की घर वापसी को गर्व और खुशी का पल बताया। यह प्रदर्शनी ल्हाबाब दुचेन के अवसर पर हो रही है, जो तिब्बती बौद्ध परंपरा में बुद्ध के स्वर्गलोक से अवतरण की स्मृति में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण अवसर है। साथ में लगी प्रदर्शनी 'पवित्र पिपराहवा की खोज: पवित्र बुद्ध अवशेषों और उनकी खोज की कहानी' (Unearthing the Sacred Piprahwa: The Story of the Holy Buddha Relics and Their Discovery) में पिपराहवा में हुई पुरातात्विक खोजों का इतिहास और भारत में इसकी वापसी सहित पिपराहवा विरासत की यात्रा प्रस्तुत की जाएगी, और आईबीसी अरुणाचल प्रदेश सरकार के साथ मिलकर 2 नवंबर 2026 को तवांग के कलावांगपो सम्मेलन कक्ष में 'बौद्ध धर्म: हिमालयी क्षेत्र और उससे आगे प्रसार' विषय पर एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर रहा है।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

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इस प्रदर्शनी पर PIB की 30 अक्टूबर 2026 की रिलीज़ के अनुसार ये अवशेष उत्तर प्रदेश में आज के सिद्धार्थनगर जिले के पिपराहवा से हैं, जो प्राचीन कपिलवस्तु और भगवान बुद्ध की शाक्य परंपरा से जुड़ा एक पुरातात्विक स्थल है। 1898 में विलियम क्लैक्सटन पेप्पे ने वहां एक स्तूप की खुदाई की और हड्डियों के टुकड़ों तथा कीमती वस्तुओं वाले अवशेष-पात्र खोजे। इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने पुरातत्वविद् श्री के. एम. श्रीवास्तव की देखरेख में 1971 और 1977 के बीच वहां और खुदाई की, जिसमें दो और अवशेष-मंजूषाएं मिलीं: बड़ी मंजूषा में हड्डियों के 12 पवित्र टुकड़े थे और छोटी में 10, यानी कुल 22 पवित्र अवशेष, जिनमें से 20 राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली में और दो भारतीय संग्रहालय, कोलकाता में सुरक्षित हैं। 1898 की खोज से जुड़ा पिपराहवा ज्वेल कलेक्शन, उसकी प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय नीलामी के बाद संस्कृति मंत्रालय के प्रयासों से, लगभग 127 साल बाद 2025 में भारत वापस लाया गया।

संदर्भ: PIB (संस्कृति मंत्रालय), 'भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष अरुणाचल प्रदेश में 31 अक्टूबर से 21 नवंबर 2026 तक सार्वजनिक पूजा के लिए रखे जाएंगे', 30 अक्टूबर 2026

खुद जाँचें: 1898 में पिपराहवा में स्तूप की खुदाई किसने की थी, और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की बाद की खुदाई में हड्डियों के कितने पवित्र अवशेष मिले?

विलियम क्लैक्सटन पेप्पे; 22 (बड़ी मंजूषा में 12 और छोटी में 10)।

अभ्यास: इस रिलीज़ से अवशेष किसने, कहाँ और कब प्राप्त किए, आयोजक, तीनों स्थान और उनकी तारीख़ें, अवशेष कहाँ से हैं, प्रदर्शनी किस अवसर पर हो रही है, तथा साथ की प्रदर्शनी और सम्मेलन लिखें; नोट से पिपराहवा का जिला, दोनों खुदाइयाँ और उनका नेतृत्व किसने किया, मिले अवशेषों की संख्या और वे कहाँ रखे हैं, और ज्वेल कलेक्शन की वापसी।

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने वीबी-जी राम जी शिकायत निवारण नियम, 2026 अधिसूचित किए: 7 कार्य दिवसों में जांच, 15 दिनों में निवारण

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 2 नवंबर 2026 को बताया कि उसने विकसित भारत - रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी - शिकायत निवारण नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं, जिनसे योजना के क्रियान्वयन से जुड़ी शिकायतों के लिए एक सुव्यवस्थित, बहुस्तरीय और समयबद्ध व्यवस्था स्थापित की गई है। राज्य सरकारें ग्राम पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर यह व्यवस्था स्थापित करेंगी, जहाँ नामित शिकायत निवारण अधिकारी शिकायतें प्राप्त करने, उनका पंजीकरण करने, जांच करने और उनका निपटारा करने के लिए जिम्मेदार होंगे; जिला कार्यक्रम समन्वयक जिला स्तर पर शिकायत निवारण की निगरानी करेंगे। कोई भी व्यक्ति नामित शिकायत निवारण अधिकारी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से, डिलीवरी के प्रमाण के साथ स्पीड पोस्ट से, केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित शिकायत निवारण के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से, या टेलीफोन, निर्धारित हेल्पलाइन अथवा राज्य सरकार द्वारा तय किसी अन्य माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकता है। भौतिक रूप से प्राप्त शिकायतों को उसी दिन, और ऐसा संभव न हो तो अगले कार्य दिवस तक, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर पंजीकृत करना होगा, और शिकायतकर्ता को पंजीकरण संख्या, शिकायत प्राप्ति की तारीख और शिकायत प्राप्त करने वाले अधिकारी के पदनाम वाली पावती दी जाएगी। शिकायत के प्रारूप, भाषा, प्रस्तुत करने के तरीके या किसी प्रक्रियागत कमी के आधार पर उसका पंजीकरण करने से इनकार नहीं किया जा सकेगा। शिकायत की प्राप्ति की तारीख से 7 कार्य दिवसों के भीतर जांच पूरी करनी होगी और 15 दिनों के भीतर उसका निवारण करना होगा; 15 दिनों में न सुलझी शिकायत अगले उच्च स्तर पर भेजी जाएगी और समाधान होने तक उसकी इलेक्ट्रॉनिक निगरानी जारी रहेगी। शिकायत निवारण व्यवस्था के तहत पारित आदेशों के विरुद्ध अपील वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 की अनुसूची-I के अनुसार दायर और निस्तारित की जाएगी।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

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11 मई 2026 को भारत सरकार ने वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 के क्रियान्वयन को अधिसूचित किया, जो 1 जुलाई 2026 से देशभर में लागू होना था, और उसी तिथि से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (महात्मा गांधी नरेगा), 2005 निरस्त माना जाना था। अधिनियम के अनुसार श्रमिकों को उनकी रोजगार मांग के अनुसार निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य उपलब्ध कराया जाना है, ऐसा न होने पर वे बेरोजगारी भत्ता पाने के हकदार होंगे; मजदूरी का भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे श्रमिकों के बैंक अथवा डाकघर खातों में साप्ताहिक आधार पर या मस्टर रोल बंद होने के पंद्रह दिनों के भीतर किया जाएगा, ऐसा न होने पर श्रमिक विलंब क्षतिपूर्ति (मुआवजा) पाने के पात्र होंगे। मंत्रालय ने कहा कि वर्तमान ई-केवाईसी सत्यापित मनरेगा जॉब कार्ड ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी होने तक मान्य रहेंगे, और अधिनियम के अंतर्गत कई नियमों के प्रारूप - जिनमें शिकायत निवारण नियम, संक्रमणकालीन प्रावधान (ट्रांजिशनल प्रोविजंस) नियम और मजदूरी एवं बेरोजगारी भत्ते के भुगतान की प्रक्रिया संबंधी नियम शामिल हैं - राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के परामर्श से तैयार किए जा रहे हैं।

संदर्भ: PIB (ग्रामीण विकास मंत्रालय), 'पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम का 1 जुलाई 2026 से ऐतिहासिक शुभारंभ', 11 मई 2026

खुद जाँचें: वीबी-जी राम जी अधिनियम के तहत मजदूरी का भुगतान किस अवधि में करना होता है, और मांग के अनुसार निर्धारित समय-सीमा में कार्य न मिलने पर श्रमिक किसका हकदार होता है?

साप्ताहिक आधार पर या मस्टर रोल बंद होने के पंद्रह दिनों के भीतर; बेरोजगारी भत्ते का।

अभ्यास: इस रिलीज़ से शिकायत निवारण व्यवस्था के तीनों स्तर, जिला स्तर पर उसकी निगरानी कौन करेगा, शिकायत दर्ज कराने के माध्यम, भौतिक शिकायतों के पंजीकरण का नियम, जांच और निवारण की समय-सीमा, अनसुलझी शिकायतों का क्या होगा और अपील कहाँ होगी, लिखें; नोट से अधिसूचना और लागू होने की तारीख़ें, निरस्त अधिनियम, मजदूरी भुगतान का नियम, बेरोजगारी भत्ता और जिन नियमों के प्रारूप तैयार हो रहे थे।

सिक्किम का सोरेंग पीएमएमएसवाई के अंतर्गत देश का पहला अधिसूचित जैविक मत्स्य पालन क्लस्टर; पूर्वोत्तर में मत्स्य पालन के जैविक प्रमाणीकरण के लिए एसओपी का शुभारंभ

मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने बताया कि केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत मत्स्य पालन विकास पहलों की समीक्षा के लिए 2 नवंबर 2026 को सिक्किम के मंगन जिले का दौरा किया; यह दौरा पूर्वोत्तर क्षेत्र में केंद्रीय मंत्रियों की आवधिक यात्राओं के लिए बनाए गए संरचित तंत्र के अनुरूप था। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पूर्वोत्तर क्षेत्र में मत्स्य पालन के जैविक प्रमाणीकरण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का शुभारंभ किया और पीएमएमएसवाई के अंतर्गत 375 लाख रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन किया, जिनमें हैचरी, फीड मिल और कोल्ड स्टोरेज जैसी मत्स्य पालन अवसंरचना तथा बायोफ्लॉक और रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) जैसी उत्पादन संबंधी प्रौद्योगिकियां शामिल हैं। मछली किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड वितरित किए गए, मुख्यमंत्री मत्स्य उत्थान योजना (एमएमएमयूवाई) के अंतर्गत पांच मछली किसानों को चेक दिए गए, और दो मत्स्य सहकारी समितियों के 15 मत्स्य किसानों को मछली चारा वितरित किया गया। मंत्रालय ने बताया कि पीएमएमएसवाई के अंतर्गत देश भर में 34 मत्स्य उत्पादन और प्रसंस्करण क्लस्टर अधिसूचित किए गए हैं, जिनमें सिक्किम और मेघालय के जैविक मत्स्य क्लस्टर शामिल हैं, और सिक्किम का सोरेंग जिला पीएमएमएसवाई के अंतर्गत देश का पहला जैविक मत्स्य पालन क्लस्टर है; यह क्लस्टर हानिकारक रसायनों, एंटीबायोटिक दवाओं और कीटनाशकों के बिना पारिस्थितिक रूप से स्वस्थ मछली पालन पर केंद्रित है, जिसमें अमूर कार्प, इंडियन मेजर कार्प (आईएमसी) और ट्राउट पर विशेष जोर है। एसओपी का उद्देश्य जैविक उत्पादन के लिए एक संरचित ढांचा देना और मूल्य श्रृंखला में ट्रेसबिलिटी (पता लगाने की क्षमता) को समर्थन देना है। सिक्किम ने स्थानीय रूप से उत्पादित रेनबो ट्राउट की संस्थागत खरीद के लिए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी किया है।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

पढ़ाई के लिए संदर्भ

6 जनवरी 2025 को गुवाहाटी में पूर्वोत्तर क्षेत्र राज्य सम्मेलन 2025 (Northeastern Region States Meet 2025) के दौरान केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने राज्य मंत्रियों प्रो. एस.पी. सिंह बघेल और श्री जॉर्ज कुरियन की उपस्थिति में पीएमएमएसवाई के अंतर्गत सिक्किम के सोरेंग जिले में जैविक मत्स्य पालन क्लस्टर के शुभारंभ की घोषणा की थी। मंत्रालय ने कहा था कि अन्य कार्प के साथ अमूर कार्प पर विशेष ध्यान वाला यह जैविक मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्लस्टर जैविक खेती में सिक्किम की अग्रणी पहचान के अनुरूप है, और प्रमुख हितधारक राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) आवश्यक मत्स्य अवसंरचना और क्षमता निर्माण के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता देगा तथा मछुआरा सहकारी समितियों को जोड़कर और मत्स्य किसान उत्पादक संगठन (एफएफपीओ) बनाकर इसमें मदद करेगा। मत्स्यपालन विभाग इससे पहले चार मत्स्य क्लस्टर अधिसूचित कर चुका था: झारखंड के हजारीबाग जिले में पर्ल (मोती) क्लस्टर, तमिलनाडु के मदुरै जिले में सजावटी मत्स्य पालन क्लस्टर, केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप में समुद्री शैवाल (सीवीड) क्लस्टर और अंडमान एवं निकोबार में टूना क्लस्टर।

संदर्भ: PIB गुवाहाटी (मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय), 'Union Minister Shri Rajiv Ranjan Singh Launches Organic Fisheries Cluster in Sikkim Under PMMSY' (केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने पीएमएमएसवाई के अंतर्गत सिक्किम में जैविक मत्स्य पालन क्लस्टर का शुभारंभ किया), 6 जनवरी 2025

खुद जाँचें: सोरेंग जैविक मत्स्य पालन क्लस्टर का शुभारंभ किस आयोजन में और किस शहर में हुआ था, और मत्स्यपालन विभाग द्वारा अधिसूचित पर्ल क्लस्टर कहाँ है?

पूर्वोत्तर क्षेत्र राज्य सम्मेलन 2025 में, गुवाहाटी में; झारखंड के हजारीबाग जिले में।

अभ्यास: इस रिलीज़ से दौरे वाला जिला और तारीख़, शुरू की गई एसओपी, उद्घाटित परियोजनाओं का मूल्य और प्रकार, पीएमएमएसवाई के अंतर्गत अधिसूचित क्लस्टरों की संख्या और जैविक क्लस्टर वाले राज्य, सोरेंग क्लस्टर की प्रमुख मछलियाँ और आईटीबीपी के साथ एमओयू लिखें; नोट से सोरेंग क्लस्टर के शुभारंभ की तारीख़, आयोजन और शहर, नाबार्ड की भूमिका और पहले अधिसूचित चार क्लस्टर।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने किश्तवाड़ में नई भूकंपीय वेधशाला का उद्घाटन किया; वर्ष 2027 में चार और डॉप्लर मौसम रडार चालू किए जाएंगे

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 2 नवंबर 2026 को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के माध्यम से जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ के उच्च भूकंपीय क्षेत्र में नई भूकंपीय वेधशाला का उद्घाटन किया। अत्याधुनिक डिजिटल भूकंपीय उपकरणों से सुसज्जित यह वेधशाला वास्तविक समय में आंकड़े नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के भूकंप निगरानी केंद्र को भेजेगी; इसके साथ जम्मू-कश्मीर में अब चार भूकंपीय वेधशालाएं हैं - जम्मू, श्रीनगर, उधमपुर और किश्तवाड़ में। मंत्री ने बताया कि पहले इस क्षेत्र में डॉप्लर मौसम रडार की कोई सुविधा नहीं थी, वर्ष 2014 के बाद बनिहाल, जोत, जम्मू और श्रीनगर में चार डॉप्लर मौसम रडार स्थापित किए गए हैं, और वर्ष 2027 में डोडा, किश्तवाड़, अनंतनाग और बारामूला में चार और डॉप्लर मौसम रडार चालू किए जाने हैं। पहले उधमपुर, कठुआ और रामबन में तीन स्वचालित मौसम केंद्र थे; नौ और केंद्र स्थापित किए जाने से इनकी कुल संख्या बढ़कर 12 हो गई है, और इनमें किश्तवाड़ में चार, डोडा और रामबन में दो-दो और कठुआ में एक केंद्र शामिल है। संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के पांच जिलों में वर्षामापी केंद्रों की संख्या नौ से बढ़कर 15 हो गई है, इन पांच जिलों की सभी पंचायतों में पंचायत स्तर पर मौसम पूर्वानुमान उपलब्ध कराए जा रहे हैं, और मौसम पूर्वानुमान तथा कृषि-मौसम परामर्श सेवाओं का लाभ 5,467 लाभार्थियों तक पहुंचा है। उन्होंने पटनीटॉप स्थित हाई-एल्टीट्यूड क्लाउड भौतिकी प्रयोगशाला और जम्मू में स्थापित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का भी उल्लेख किया, और नागरिकों से मौसम संबंधी वैज्ञानिक चेतावनियों के अनुसार कार्रवाई करने का आग्रह करते हुए कहा, 'जानकारी महत्वपूर्ण है, लेकिन उस जानकारी के अनुसार कार्रवाई करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।'

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

पढ़ाई के लिए संदर्भ

6 अगस्त 2025 को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया था कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) के अंतर्गत अगस्त 2014 में राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) की स्थापना के बाद से भूकंपीय वेधशालाओं की संख्या वर्ष 2014 की लगभग 84 से बढ़कर 168 हो गई है, जिनमें वीसैट के माध्यम से वास्तविक समय में डेटा रिपोर्टिंग की सुविधा है। एनसीएस अपनी वेबसाइट (seismo.gov.in) पर मासिक भूकंप सारांश रिपोर्ट जारी करता है, और अप्रैल 2020 से महत्वपूर्ण भूकंपों की कुल 39 रिपोर्टें जारी की गई थीं। भूकंपीय माइक्रोज़ोनेशन डेटा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा एनसीएस के माध्यम से तैयार किया जाता है: दिल्ली, बेंगलुरु, कोलकाता, गुवाहाटी, जबलपुर, देहरादून, अहमदाबाद, गांधीधाम और गंगटोक शहर इसमें शामिल किए जा चुके हैं, और वर्ष 2018 से लगभग 30 शहरों को इसमें लिया गया है।

संदर्भ: PIB (पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय), 'संसद प्रश्न: राष्ट्रीय भूकंपीय नेटवर्क', 6 अगस्त 2025

खुद जाँचें: राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की स्थापना कब और किस मंत्रालय के अंतर्गत हुई, और उस उत्तर में मंत्री ने कितनी भूकंपीय वेधशालाएं बताईं?

अगस्त 2014 में, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत; 168 (वर्ष 2014 की लगभग 84 से बढ़कर)।

अभ्यास: इस रिलीज़ से नई वेधशाला कहाँ है और उसके आंकड़े कहाँ जाएंगे, जम्मू-कश्मीर की चारों वेधशालाएं, 2014 के बाद स्थापित और आगे चालू होने वाले डॉप्लर मौसम रडार, तथा स्वचालित मौसम केंद्रों, वर्षामापी केंद्रों और लाभार्थियों के आंकड़े लिखें; नोट से एनसीएस की स्थापना कब हुई, भूकंपीय वेधशालाओं की संख्या में वृद्धि, और भूकंपीय माइक्रोज़ोनेशन में शामिल शहर।

गृह मंत्रालय: देश में FRRO कार्यालयों की संख्या बढ़कर 20 हुई; अमित शाह ने वर्ष 2027 तक सभी राज्यों की राजधानियों में FRRO स्थापित करने का निर्देश दिया

गृह मंत्रालय ने 2 नवंबर 2026 को बताया कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने वर्ष 2027 तक सभी राज्यों की राजधानियों में विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) स्थापित करने का निर्देश दिया है, क्योंकि पर्यटन, चिकित्सा और शिक्षा के लिए भारत आने वाले विदेशियों की संख्या में पर्याप्त वृद्धि हुई है। वर्ष 2025 से पांच नए FRRO स्थापित किए गए हैं: वर्ष 2025 में जयपुर, चंडीगढ़ और गुवाहाटी (जो पहले क्रमशः दिल्ली, अमृतसर और कोलकाता स्थित FRRO के अधिकार क्षेत्र में थे), और वर्ष 2026 में आइजोल (मिजोरम) और अमरावती (आंध्र प्रदेश) (जो पहले क्रमशः FRRO कोलकाता और FRRO हैदराबाद के अधिकार क्षेत्र में थे)। हाल ही में कोहिमा (नगालैंड), अगरतला (त्रिपुरा) और भुवनेश्वर (ओडिशा) में तीन नए FRRO कार्यालय अधिसूचित किए गए हैं। मंत्रालय के अनुसार देश में FRRO कार्यालयों की कुल संख्या अब बढ़कर 20 हो गई है, और सरकार शेष राज्यों में भी FRRO स्थापित करने पर काम कर रही है। इमिग्रेशन एवं विदेशी अधिनियम, 2025 (Immigration and Foreigners Act, 2025), जिसने इमिग्रेशन और विदेशियों से संबंधित चार पूर्ववर्ती कानूनों को समेकित किया है, विदेशी नागरिकों के प्रवेश, ठहरने, आवागमन और प्रस्थान के विनियमन के लिए एक एकीकृत वैधानिक ढांचा प्रदान करता है; इसके अनुसार इमिग्रेशन ब्यूरो को अपने कर्तव्यों के निर्वहन में, अन्य के साथ-साथ, केंद्र सरकार द्वारा प्राधिकृत विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी (FRRO) से सहायता मिलेगी। FRRO पात्र श्रेणी के विदेशियों का आगमन के बाद पंजीकरण करता है और पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी)/आवासीय परमिट जारी करता है, विदेशी के विवरणों में हुए परिवर्तन दर्ज करता है, संरक्षित एवं प्रतिबंधित क्षेत्रों की यात्रा की अनुमति देता है और निकास परमिट जारी करता है; e-FRRO के जरिए 35 ऑनलाइन सेवाएं पंजीकरण, वीजा विस्तार, रूपांतरण तथा अन्य पात्र इमिग्रेशन संबंधी सेवाओं की सुविधा देती हैं।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

पढ़ाई के लिए संदर्भ

27 मार्च 2025 को केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के जवाब के बाद लोक सभा ने आप्रवास और विदेशियों से संबंधित विधेयक, 2025 (Immigration and Foreigners Bill, 2025) पारित किया था। उन्होंने कहा था कि आप्रवासन की पूरी व्यवस्था तब चार अधिनियमों में बंटी थी, जिनमें ओवरलैप और कई खामियां थीं, और यह एक विधेयक उन चारों अधिनियमों को निरस्त करेगा; पुराने कानूनों में से तीन 1920, 1939 और 1946 के थे, यानी देश की आज़ादी से पहले के। पुराने कानूनों में कुल 45 धाराएं थीं, जबकि नए कानून में 36 धाराएं होंगी - 26 पुरानी और 10 नई। उन्होंने बताया कि अवैध प्रवासियों और निर्धारित समय-सीमा से अधिक रुकने वालों की निगरानी के लिए 'आप्रवास, वीजा और विदेशी पंजीकरण तथा ट्रैकिंग' (IVFRT) प्रणाली को कानूनी आधार दिया गया है, और सभी इमिग्रेशन पोस्ट्स को भारतीय मिशनों, विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालयों (FRRO) और विदेशी पंजीकरण कार्यालयों (FRO) से एंड-टू-एंड एकीकृत प्रणाली के जरिए जोड़ने का काम पूरा हो चुका है।

संदर्भ: PIB (गृह मंत्रालय), 'केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज लोक सभा में आप्रवास और विदेशियों से संबंधित विधेयक, 2025 (Immigration and Foreigners Bill, 2025) पर चर्चा का जवाब दिया, चर्चा के बाद सदन ने विधेयक को पारित कर दिया', 27 मार्च 2025

खुद जाँचें: लोक सभा ने आप्रवास और विदेशियों से संबंधित विधेयक, 2025 कब पारित किया, और गृह मंत्री के अनुसार पुराने कानूनों और नए कानून में कितनी धाराएं हैं?

27 मार्च 2025 को; पुराने कानूनों में 45 धाराएं और नए कानून में 36 (26 पुरानी और 10 नई)।

अभ्यास: इस रिलीज़ से सभी राज्यों की राजधानियों में FRRO की समय-सीमा, 2025 और 2026 में नए FRRO पाने वाले शहर, हाल में अधिसूचित तीन FRRO, मंत्रालय द्वारा बताई गई कुल संख्या, चार पूर्ववर्ती कानूनों को समेकित करने वाला अधिनियम और FRRO के काम लिखें; नोट से लोक सभा द्वारा विधेयक पारित करने की तारीख़, तीन पुराने कानूनों के वर्ष, पुराने और नए कानून की धाराओं की संख्या, और IVFRT प्रणाली।

ट्राई ने दूरसंचार उपभोक्ता शिकायत निवारण (चौथा संशोधन) विनियम, 2026 जारी किए; अपील दायर करने की समय-सीमा 30 दिन से घटकर 15 दिन

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने 2 नवंबर 2026 को दूरसंचार उपभोक्ता शिकायत निवारण (चौथा संशोधन) विनियम, 2026 जारी किए। इससे पहले 7 मई 2026 को मसौदे पर परामर्श पत्र जारी किया गया था, जिस पर हितधारकों से 32 टिप्पणियां और 24 प्रति-टिप्पणियां प्राप्त हुईं, और 17 जुलाई 2026 को ऑनलाइन खुली चर्चा (ओपन हाउस डिस्कशन) हुई। संशोधित विनियम उन इंटरनेट सेवा प्रदाताओं पर लागू होंगे जिनके पिछले वित्त वर्ष के अंतिम दिन दस हज़ार से अधिक ग्राहक हों; 5 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक वित्तीय टर्नओवर पर आधारित मौजूदा वैकल्पिक मानदंड हटा दिया गया है। उपभोक्ता अब शिकायत केंद्र, वेबसाइट और वेब पोर्टल के अलावा सेवा प्रदाता के मोबाइल एप्लिकेशन से भी शिकायत और अपील दर्ज कर सकेंगे, सेवा अनुरोध कर सकेंगे और सेवा संबंधी प्रश्न पूछ सकेंगे। शिकायत केंद्रों पर उपभोक्ता सहायता मौजूदा 16 घंटे की व्यवस्था के बजाय सप्ताह के सभी दिन चौबीसों घंटे उपलब्ध होगी; यह सहायता मानव प्रतिनिधियों, स्वचालित प्रणालियों, अन्य ग्राहक-केंद्रित तकनीकी समाधानों या इनके संयोजन से दी जा सकती है, पर मानवीय सहायता प्रतिदिन कम से कम सोलह घंटे उपलब्ध रहेगी; दिव्यांगजनों की कॉल प्राप्त करने के लिए समर्पित डेस्क या हेल्पलाइन रखनी होगी। शिकायत के निपटारे के बाद अपील दायर करने की समय-सीमा 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दी गई है, और सेवा प्रदाता के प्रबंधन के नियमित कर्मचारियों में से कम से कम पांच वर्ष के अनुभव वाले एक या अधिक व्यक्तियों से बने अपीलीय प्राधिकारी को अपील प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर अपना अंतिम निर्णय बताना होगा; सलाहकार समिति के माध्यम से अपीलों के निपटारे की पुरानी प्रक्रिया समाप्त कर दी गई है। नए प्रावधानों में शिकायत या अपील के निपटारे या बंद होने पर पांच-बिंदु पैमाने पर ऑनलाइन फीडबैक सर्वेक्षण और उसके परिणामों का त्रैमासिक प्रकाशन, सीईओ या निदेशक मंडल के समक्ष त्रैमासिक रिपोर्ट, हर सेवा प्रदाता में उपभोक्ता शिकायत निवारण निगरानी समिति (जिसकी बैठक साल में कम से कम एक बार होगी), ट्राई द्वारा आवधिक नियामक समीक्षा, तथा ऑडिट, निरीक्षण, विश्लेषण या समीक्षा के दौरान विनियमों का उल्लंघन करके शिकायत या अपील निपटाए जाने के मामलों और त्रैमासिक कार्य-निष्पादन रिपोर्ट जमा न करने या देर से जमा करने पर वित्तीय हतोत्साहन (फाइनेंशियल डिसइंसेंटिव) शामिल हैं।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

पढ़ाई के लिए संदर्भ

ट्राई ने 5 जनवरी 2012 को 'दूरसंचार उपभोक्ता शिकायत निवारण विनियम, 2012' (टीसीसीआरआर-2012) अधिसूचित किया था, और इसमें तीन बार - 2012, 2013 और 2014 में - संशोधन किए गए। 7 मई 2026 को चौथे संशोधन का मसौदा जारी करते हुए ट्राई ने कहा था कि 2012 के बाद से उपभोक्ता सहभागिता के तरीकों में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं: आईवीआरएस आज भी प्रासंगिक है, लेकिन उपभोक्ता शिकायत दर्ज करने और उन पर नज़र रखने के लिए मोबाइल एप्लिकेशन, वेब-आधारित पोर्टल, चैटबॉट और ईमेल का तेजी से उपयोग कर रहे हैं। उसने यह भी कहा था कि शिकायतों के असंतोषजनक निपटारे के विरुद्ध अपील से संबंधित प्रावधानों में पहुंच, स्पष्टता, दक्षता, प्रभावशीलता और उपभोक्ता सुविधा के दृष्टिकोण से बदलाव की आवश्यकता है। मसौदे पर लिखित टिप्पणियां शुरू में 5 जून 2026 तक मांगी गई थीं।

संदर्भ: PIB (संचार मंत्रालय), 'ट्राई ने दूरसंचार उपभोक्ता शिकायत निवारण (चौथा संशोधन) विनियमन, 2026 का मसौदा जारी किया', 7 मई 2026

खुद जाँचें: ट्राई ने मूल दूरसंचार उपभोक्ता शिकायत निवारण विनियम कब अधिसूचित किए थे, और चौथे संशोधन से पहले उसमें किन वर्षों में संशोधन हुए?

5 जनवरी 2012 को; 2012, 2013 और 2014 में (तीन संशोधन)।

अभ्यास: इस रिलीज़ से परामर्श की तारीख़ें और प्राप्त टिप्पणियों के आंकड़े, लागू होने की शर्त, शिकायत और अपील का नया माध्यम, शिकायत केंद्रों का समय, अपील की पुरानी और नई समय-सीमा, अपीलीय प्राधिकारी की संरचना और समय-सीमा, तथा शुरू की गई नई व्यवस्थाएं लिखें; नोट से मूल विनियम कब अधिसूचित हुए, पहले के संशोधनों के वर्ष, और चौथे संशोधन के लिए ट्राई द्वारा बताए गए कारण।

प्रधानमंत्री ने भारत मंडपम में 'भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन और प्रदर्शनी 2026' का उद्घाटन किया; आयोजन अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की नौवीं सभा के साथ

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 'भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन और प्रदर्शनी 2026' (Bharat Renewable Energy Summit & Expo 2026) का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष का शिखर सम्मेलन वैश्विक ऊर्जा झटकों के बीच हो रहा है और इसका दायरा बहुत व्यापक है, क्योंकि यह अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की नौवीं सभा के साथ हो रहा है और इसमें हरित हाइड्रोजन पर चौथे सम्मेलन के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। 'ऊर्जा सुरक्षा का भविष्य स्वच्छ ऊर्जा में ही निहित है' कहते हुए उन्होंने स्टार्टअप्स, आईआईटी, नवप्रवर्तकों और उद्यमियों से ऐसे सौर मॉडल विकसित करने का आग्रह किया जो चौबीसों घंटे और हर मौसम में काम कर सकें और घरों की अधिकांश जरूरतें पूरी कर सकें, जैसे छत पर सौर ऊर्जा से खाना पकाना (रूफटॉप सोलर कुकिंग) और इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों व कारों के लिए होम सोलर चार्जिंग। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने बताया कि प्रधानमंत्री ने 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के परिव्यय के साथ 'प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना' को मंजूरी दी है, जिसके तहत 5,000 मेगावाट की तैरने वाली (फ्लोटिंग) सौर क्षमता विकसित की जाएगी, और हाल ही में 1.86 लाख करोड़ रुपये के निवेश के साथ 'हरित ऊर्जा गलियारा चरण-III' (Green Energy Corridor Phase-III) को मंजूरी दी है। श्री जोशी के अनुसार भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित क्षमता, जो सितंबर 2024 में 200 गीगावाट से अधिक हो गई थी, अब 310 गीगावाट तक पहुँच गई है, और 'पीएम सूर्य घर' के तहत 65 लाख से अधिक इंस्टॉलेशन हो चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हरित हाइड्रोजन की खरीद प्रतिबद्धताओं (ऑफटेक कमिटमेंट) के मामले में भारत दुनिया में पहले स्थान पर है, और दुनिया भर के निवेशकों को आमंत्रित करते हुए कहा, 'भारत में निवेश करें। भारत में नवाचार करें। भारत के साथ आगे बढ़ें।'

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

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नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की 29 दिसंबर 2025 की वर्षांत समीक्षा के अनुसार कॉप-26 में प्रधानमंत्री द्वारा रखे गए दृष्टिकोण के अनुरूप सरकार 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता तक पहुंचने के लिए काम कर रही है। भारत ने जून 2025 में अपनी कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त करने की उपलब्धि हासिल की, जो पेरिस समझौते के तहत अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) में तय 2030 के लक्ष्य से पांच साल पहले है, और अगस्त 2025 में गैर-जीवाश्म स्थापित क्षमता 250 गीगावाट के पार पहुंची। समीक्षा में नई दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) की आठवीं सभा में भारत की भागीदारी का भी उल्लेख है, जिसमें 137 देशों और 36 संगठनों ने उच्च स्तरीय भागीदारी की। समीक्षा के अनुसार फरवरी 2024 में शुरू की गई प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026-27 तक एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर लगवाना है, जिसके लिए 75,021 करोड़ रुपये का परिव्यय है।

संदर्भ: PIB (नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय), 'देश में होने वाला नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार 2025 में अब तक के सबसे उच्च स्तर पर पहुंचा', 29 दिसंबर 2025

खुद जाँचें: भारत ने अपनी स्थापित विद्युत क्षमता का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से किस महीने और वर्ष में हासिल किया, और यह एनडीसी के 2030 के लक्ष्य से कितना पहले था?

जून 2025 में; 2030 के लक्ष्य से पांच साल पहले।

अभ्यास: इस रिलीज़ से आयोजन स्थल, शिखर सम्मेलन अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की किस सभा के साथ हुआ और किस सम्मेलन के प्रतिनिधि शामिल हुए, नवप्रवर्तकों से प्रधानमंत्री का आग्रह, तैरने वाली सौर क्षमता की योजना और उसका परिव्यय व क्षमता, मंजूर किया गया हरित ऊर्जा गलियारा चरण, और श्री जोशी द्वारा बताए गए गैर-जीवाश्म क्षमता के आंकड़े लिखें; नोट से कॉप-26 का लक्ष्य, 50 प्रतिशत की उपलब्धि का महीना, आठवीं आईएसए सभा में भागीदारी, और पीएम सूर्य घर का लक्ष्य व परिव्यय।

एमएसडीई ने ग्रीन चैनल के माध्यम से 19 संस्थानों को कौशल उत्कृष्टता केंद्रों (सीओई-स्किल्स) के रूप में पैनलबद्ध किया; मान्यता 8 अक्टूबर 2029 तक वैध

कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) ने 2 नवंबर 2026 को 19 प्रतिष्ठित संस्थानों को कौशल उत्कृष्टता केंद्रों (सीओई-स्किल्स) के रूप में औपचारिक मान्यता दी; नई दिल्ली के कौशल भवन में आयोजित समारोह में एमएसडीई की सचिव श्रीमती देबाश्री मुखर्जी ने मान्यता प्रमाण-पत्र प्रदान किए। यह मान्यता 9 अक्टूबर 2026 से 8 अक्टूबर 2029 तक वैध है। इन संस्थानों को कौशल उत्कृष्टता केंद्रों और व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों के पैनलबद्धीकरण संबंधी दिशा-निर्देशों के तहत उपलब्ध ग्रीन चैनल के माध्यम से पैनलबद्ध किया गया है। यह स्थापित प्रतिष्ठा वाले पात्र संस्थानों के लिए त्वरित मार्ग है, जिनमें राष्ट्रीय महत्त्व के संस्थान, पीएम-सेतु के तहत उन्नत किए गए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) तथा केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और राज्य सरकारों द्वारा संचालित या पैनलबद्ध कौशल उत्कृष्टता केंद्र शामिल हैं; इनके आवेदन नामांकन या नियमित मूल्यांकन प्रक्रिया के बिना सीधे कार्यकारी समिति के समक्ष विचार के लिए रखे जाते हैं। ये दिशा-निर्देश 15 जुलाई 2026 को विश्व युवा कौशल दिवस समारोह के दौरान कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयंत चौधरी ने जारी किए थे। कौशल उत्कृष्टता केंद्र की परिकल्पना एक स्थायी, उन्नत और क्षेत्र-विशिष्ट प्रशिक्षण केंद्र के रूप में की गई है; इसके कार्यों में उन्नत एवं प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रशिक्षण, मूल्यांकन, मार्गदर्शन और करिअर परामर्श, प्रशिक्षकों एवं मूल्यांकन-कर्ताओं का प्रशिक्षण, उद्योग जगत के साथ जुड़ाव तथा प्रशिक्षण के बाद के परिणामों की उपलब्धि और निगरानी शामिल हो सकते हैं, और इसका पैनलबद्धीकरण किसी विशेष योजना से बंधा नहीं है। मान्यता पाने वाले संस्थान नवीकरणीय ऊर्जा (आईआईटी रुड़की का जलविद्युत एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग, गुरुग्राम स्थित राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान और चेन्नई तथा कायथार स्थित राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान सहित), रसायन एवं पेट्रोरसायन (गुवाहाटी, संभाजीनगर, लखनऊ, कोच्चि और भुवनेश्वर स्थित सीआईपीईटी केंद्र), निर्माण (भारतीय रेल सिविल इंजीनियरिंग संस्थान, पुणे), बहु-क्षेत्रीय, लौह एवं इस्पात, समुद्री इंजीनियरिंग (आईएनएस शिवाजी, पुणे), पर्यटन एवं आतिथ्य और कृषि (राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान, हैदराबाद) क्षेत्रों से हैं।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

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15 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के कौशल भवन में एमएसडीई द्वारा आयोजित विश्व युवा कौशल दिवस 2026 समारोह में मंत्रालय ने स्किल इंडिया के अंतर्गत उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना के लिए दिशानिर्देश (Guidelines for the Creation of Centres of Excellence under Skill India) जारी किए, जिनका उद्देश्य आधुनिक बुनियादी ढांचे, उन्नत प्रौद्योगिकियों और मजबूत उद्योग साझेदारी से सुसज्जित विश्व स्तरीय, उद्योग-अनुकूल प्रशिक्षण सुविधाओं के विकास में सहयोग करना है। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयंत चौधरी ने 63 उद्योग-संबद्ध कौशल श्रेणियों वाली 'इंडियास्किल्स प्रतियोगिता 2026-27' के दिशा-निर्देश भी जारी किए, और केंद्रीय बजट 2026-27 में 1.5 लाख देखभाल पेशेवरों को प्रशिक्षित करने की घोषणा के अनुरूप पीएमकेवीवाई के तहत बहु-कुशल देखभालकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया। एमएसडीई ने लगभग ₹530 करोड़ के परिणाम-आधारित वित्तपोषण मंच के रूप में प्रस्तावित स्किल्स आउटकम्स फंड की घोषणा की, जिससे दो लाख से अधिक युवाओं को सहयोग मिलेगा, और लैंगिक समानता को मुख्यधारा में लाने संबंधी एक समिति के गठन की भी घोषणा की। एमएसडीई की सचिव श्रीमती देबाश्री मुखर्जी ने 'साझा भविष्य के लिए कौशल' (Skills for a Shared Future) विषय का उल्लेख किया।

संदर्भ: PIB (कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय), 'विश्व युवा कौशल दिवस 2026 पर श्री जयंत चौधरी ने कहा— भविष्य उन्हीं का है जो सीखते हैं, बदलते परिवेश में ढलते हैं और नवाचार करते हैं', 15 जुलाई 2026

खुद जाँचें: विश्व युवा कौशल दिवस 2026 पर बहु-कुशल देखभालकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम किस योजना के तहत शुरू किया गया, और 'इंडियास्किल्स प्रतियोगिता 2026-27' के दिशा-निर्देश कितनी कौशल श्रेणियों को शामिल करते हैं?

पीएमकेवीवाई के तहत; 63 उद्योग-संबद्ध कौशल श्रेणियां।

अभ्यास: इस रिलीज़ से मान्यता पाने वाले संस्थानों की संख्या, प्रमाण-पत्र किसने और कहाँ प्रदान किए, मान्यता की वैधता अवधि, अपनाया गया मार्ग और वह किन संस्थानों के लिए है, दिशा-निर्देश कब और किसने जारी किए, कौशल उत्कृष्टता केंद्र से क्या अपेक्षित है, और क्षेत्र तथा उनके लिए बताए गए संस्थान लिखें; नोट से विश्व युवा कौशल दिवस 2026 पर जारी दिशानिर्देश और अन्य पहलें, इंडियास्किल्स की कौशल श्रेणियों की संख्या, देखभाल पेशेवरों का लक्ष्य और प्रस्तावित स्किल्स आउटकम्स फंड का आकार।

कोयला मंत्रालय के वित्त वर्ष 2024-25 के स्टार रेटिंग पुरस्कार रायपुर में: 50 कोयला खदानों को फाइव-स्टार रेटिंग

कोयला मंत्रालय ने 2 नवंबर 2026 को छत्तीसगढ़ के रायपुर में वित्त वर्ष 2024-25 के लिए वार्षिक स्टार रेटिंग पुरस्कार समारोह का आयोजन किया, जिसमें भारत के कोयला और लिग्नाइट खनन क्षेत्र में उत्कृष्टता को सराहा गया; समारोह की शोभा कोयला और खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने बढ़ाई। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए कुल 50 कोयला खदानों को फाइव-स्टार रेटिंग मिली; इनमें से 10 खदानों ने अपनी-अपनी श्रेणियों में 93 प्रतिशत से अधिक अंकों के साथ पहला, दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त किया। ओपनकास्ट (खुली खदान) श्रेणी में नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) और एनटीपीसी ने तथा अंडरग्राउंड (भूमिगत) श्रेणी में सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। कोल इंडिया की सभी सहायक कंपनियों में सबसे अधिक फाइव-स्टार रेटिंग वाली खदानों के लिए वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) को विशेष सराहना मिली, जबकि स्टार रेटिंग मूल्यांकन के साथ-साथ उत्पादन में भी लगातार उच्च प्रदर्शन बनाए रखने के लिए एनसीएल और महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) की सराहना की गई। राज्य मंत्री ने स्टार रेटिंग कार्यक्रम को कोयला खदानों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बताया, कोयला कंपनियों से इसे आत्म-मूल्यांकन, सीखने और सुधार के अवसर के रूप में देखने को कहा, और वित्त वर्ष 2025-26 के स्टार रेटिंग कार्यक्रम में व्यापक और अधिक सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। अपने स्वागत भाषण में कोयला नियंत्रक संगठन (सीसीओ) के कोयला नियंत्रक श्री सतीश कुमार ने कहा कि यह समारोह सुरक्षा, पर्यावरण प्रबंधन, वैज्ञानिक खनन प्रथाओं, उत्पादकता और सामुदायिक कल्याण के क्षेत्र में खदानों के अनुकरणीय प्रदर्शन को पहचानने का एक महत्वपूर्ण मंच है।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

पढ़ाई के लिए संदर्भ

पिछले मूल्यांकन वर्ष के पुरस्कार समारोह की घोषणा करते हुए कोयला मंत्रालय ने 3 सितंबर 2025 को बताया था कि उसकी स्टार रेटिंग प्रणाली सात मॉड्यूलों वाले एक संरचित ढांचे के माध्यम से कोयला और लिग्नाइट खदानों का मूल्यांकन करती है: खनन कार्य, पर्यावरणीय मानदंड, प्रौद्योगिकी और सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाना, आर्थिक प्रदर्शन, पुनर्वास और पुनर्स्थापन, श्रमिक-संबंधी अनुपालन, तथा सुरक्षा (Safety & Security)। खदानों को भूमिगत, खुली खदान और मिश्रित, इन तीन श्रेणियों के अंतर्गत पांच सितारा से लेकर शून्य सितारा तक के पैमाने पर रेटिंग दी जाती है। मूल्यांकन वर्ष 2023-24 के लिए स्टार रेटिंग मूल्यांकन में भाग लेने के लिए 383 खदानों का चयन किया गया था, जिनमें से 42 खदानों ने 93 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर फाइव स्टार रेटिंग हासिल की; उस वर्ष के पुरस्कार 4 सितंबर 2025 को मुंबई में एक समारोह में प्रदान किए जाने थे।

संदर्भ: PIB (कोयला मंत्रालय), 'कोयला मंत्रालय 4 सितंबर 2025 को मुंबई में कोयला और लिग्नाइट खदानों के लिए स्टार रेटिंग पुरस्कार समारोह आयोजित करेगा', 3 सितंबर 2025

खुद जाँचें: कोयला मंत्रालय का स्टार रेटिंग ढांचा कितने मॉड्यूलों को शामिल करता है, और खदानों को किन तीन श्रेणियों में रेटिंग दी जाती है?

सात मॉड्यूल; भूमिगत, खुली खदान और मिश्रित।

अभ्यास: इस रिलीज़ से पुरस्कारों का स्थान और वित्त वर्ष, फाइव-स्टार खदानों और शीर्ष तीन स्थान पाने वाली खदानों की संख्या तथा उनकी अंक-सीमा, ओपनकास्ट और अंडरग्राउंड श्रेणियों के प्रथम पुरस्कार विजेता, विशेष सराहना पाने वाली कंपनी और जिन कंपनियों की भी सराहना की गई, कारणों सहित, और राज्य मंत्री का संदेश लिखें; नोट से सातों मॉड्यूल, रेटिंग का पैमाना और श्रेणियां, और वित्त वर्ष 2023-24 में भागीदारी व फाइव-स्टार रेटिंग के आंकड़े।

दस महीने का ट्रांसओशनिक नौकायन अभियान लोकायन 26 पूरा कर आईएनएस सुदर्शिनी कोच्चि लौटा

भारतीय नौसेना ने 2 नवंबर 2026 को आईएनएस सुदर्शिनी का औपचारिक स्वागत किया, जब यह जहाज 22,000 नॉटिकल मील से अधिक के दस महीने के ट्रांसओशनिक (अंतर-महासागरीय) नौकायन अभियान लोकायन 26 को सफलतापूर्वक पूरा करके कोच्चि लौटा; वापसी पर वॉटर कैनन से सलामी दी गई और नौसेना बैंड ने औपचारिक स्वागत किया। फ्लैग-इन समारोह की अध्यक्षता दक्षिणी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल समीर सक्सेना ने की। 20 जनवरी 2026 को कोच्चि से रवाना हुई इस यात्रा में एशिया, यूरोप, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका के 11 देशों में 17 अलग-अलग बंदरगाहों पर पड़ाव (पोर्ट कॉल) और दो बार अटलांटिक महासागर पार करना शामिल रहा। अभियान की प्रमुख झलकियों में फ्रांस में एस्केल ए सेट (Escale à Sète) समुद्री विरासत महोत्सव तथा अमेरिका में स्मरणोत्सव कार्यक्रमों के तहत सेल 250 (SAIL 250) और अंतरराष्ट्रीय नौसेना समीक्षा (International Naval Review) में जहाज की भागीदारी शामिल रही। नौसेना के अनुसार, चुनौतीपूर्ण मौसम और समुद्री परिस्थितियों के बीच 19 दिनों में 2,200 नॉटिकल मील की एक अटलांटिक पार यात्रा पूरी तरह पालों के सहारे तय की गई सबसे लंबी दूरी रही। चालक दल ने रॉयल मोरक्कन नौसेना, पुर्तगाली नौसेना, इतालवी नौसेना, मिस्र की नौसेना और स्पेनिश नौसेना के साथ पेशेवर संवाद, प्रशिक्षण आदान-प्रदान और क्रॉस-ट्रेनिंग गतिविधियां कीं। नौसेना ने कहा कि यह तैनाती भारत के समुद्री विजन महासागर (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए आपसी और समग्र प्रगति) और वसुधैव कुटुंबकम की भावना को दर्शाती है, और इसका मुख्य उद्देश्य युवा अधिकारी प्रशिक्षुओं को पाल प्रशिक्षण (सेल ट्रेनिंग) देना रहा।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

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जब दक्षिणी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल समीर सक्सेना ने 20 जनवरी 2026 को कोच्चि के नौसैनिक बेस से आईएनएस सुदर्शिनी को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था, तब रक्षा मंत्रालय ने बताया था कि दस महीने की इस तैनाती के दौरान जहाज लगभग 22,000 नॉटिकल मील की यात्रा करेगा और 13 देशों के 18 बंदरगाहों का दौरा करेगा; योजना के अनुसार जहाज को मार्च-अप्रैल 2026 में फ्रांस के एस्केल ए सेट (Escale à Sète) में पहली बार भाग लेना था और जुलाई 2026 में अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के हिस्से के रूप में न्यूयॉर्क में अंतरराष्ट्रीय परेड ऑफ सेल्स के दौरान सेल 250 में शामिल होना था। गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा स्वदेशी रूप से निर्मित आईएनएस सुदर्शिनी भारतीय नौसेना का 54 मीटर लंबा नौकायन प्रशिक्षण जहाज है; तीन मस्तूलों वाला यह जहाज 20 पालों से सुसज्जित है, जिनका पाल क्षेत्र 1,000 वर्ग मीटर से अधिक है। रवानगी के समय फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ ने भारत के 'एम्बेसडर एट लार्ज' (Ambassador at Large) के रूप में जहाज की भूमिका पर जोर दिया था।

संदर्भ: PIB (रक्षा मंत्रालय), 'भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग शिप सुदर्शिनी लोकायन 26 के लिए रवाना', 20 जनवरी 2026

खुद जाँचें: आईएनएस सुदर्शिनी का निर्माण किस शिपयार्ड ने किया, जहाज की लंबाई कितनी है, और इसमें कितने पाल हैं?

गोवा शिपयार्ड लिमिटेड; 54 मीटर; 20 पाल, जिनका पाल क्षेत्र 1,000 वर्ग मीटर से अधिक है।

अभ्यास: इस रिलीज़ से अभियान का नाम, अवधि और दूरी, वापसी का बंदरगाह और तारीख़, फ्लैग-इन समारोह की अध्यक्षता किसने की, रवानगी की तारीख़, पोर्ट कॉल और देशों की संख्या, प्रमुख झलकियां, केवल पालों के सहारे तय सबसे लंबी दूरी, जिन नौसेनाओं के साथ संवाद हुआ और तैनाती किस विजन को दर्शाती है, लिखें; नोट से नियोजित दूरी, बंदरगाह और देश, तथा आईएनएस सुदर्शिनी का निर्माता, लंबाई और पाल।

2026-11-01 · 7 खबरें

श्री दिनेश वी. गणवीर ने भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के 55वें महानिदेशक के रूप में पदभार संभाला

खान मंत्रालय ने 1 नवंबर 2026 को बताया कि श्री दिनेश विठ्ठलराव गणवीर ने खान मंत्रालय के संबद्ध कार्यालय (attached office) भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के 55वें महानिदेशक के रूप में पदभार ग्रहण किया है। आरटीएमएनयू विश्वविद्यालय, नागपुर से भूविज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री के बाद उन्होंने 1 जुलाई 1994 को जीएसआई में कार्यभार ग्रहण किया था, और 32 वर्षों से अधिक के सेवाकाल में जीएसआई के मध्य, पूर्वोत्तर और उत्तरी क्षेत्रों में विभिन्न वैज्ञानिक, तकनीकी और प्रशासनिक पदों पर कार्य किया है; महानिदेशक का पदभार संभालने से ठीक पहले वे नागपुर स्थित मध्य क्षेत्र में अपर महानिदेशक और विभागाध्यक्ष थे और राष्ट्रीय मिशन प्रमुख-II का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे। उनके कार्यों में पश्चिमी बस्तर क्रेटन में विषयगत मानचित्रण, महाराष्ट्र के साकोली फोल्ड बेल्ट में सोने और हीरे का अन्वेषण, तथा यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों भीमबेटका शैलाश्रयों और एलोरा गुफाओं के संरक्षण से जुड़े भूवैज्ञानिक अध्ययन शामिल हैं, और उन्होंने भारत-पेरू संयुक्त कार्य समूह, रूस-भारत खनन उप-समूह और ऑस्ट्रेलिया में आईएमएआरसी 2022 सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जीएसआई का प्रतिनिधित्व किया है। राष्ट्रीय मिशन प्रमुख-II के रूप में उन्होंने हाल के समय में महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों के अन्वेषण संबंधी जांच में पांच गुना वृद्धि में प्रमुख भूमिका निभाई, और इस कार्यकाल में उन्होंने 359 भूवैज्ञानिक रिपोर्ट और 377 भूवैज्ञानिक ज्ञापन सौंपे जाने में योगदान दिया: इनमें से 202 ब्लॉक महत्वपूर्ण खनिजों से संबंधित थे, जिनमें से 40 की नीलामी हो चुकी है, जबकि अन्वेषण लाइसेंस (ईएल) व्यवस्था के तहत 56 ब्लॉक सौंपे गए, जिनमें से 11 की नीलामी चरण-I और चरण-II के अंतर्गत हो चुकी है। पदभार ग्रहण करने पर उन्होंने कहा कि एक प्रमुख प्राथमिकता महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों के अन्वेषण में तेज़ी लाना और नीलामी के लिए तैयार खनिज ब्लॉक तैयार करना होगी, जिससे खनिज सुरक्षा मज़बूत करने, आयात पर निर्भरता कम करने और आत्मनिर्भर भारत के विज़न को बल मिलेगा; उभरती प्रौद्योगिकियों और उन्नत डेटा विश्लेषण का उपयोग, प्रयोगशाला अवसंरचना को मज़बूत करना और अपतटीय अन्वेषण भी प्रमुख कार्यक्षेत्र होंगे, और जीएसआई भूस्खलन की पूर्व चेतावनी, हिमनद और हिममंडल संबंधी अध्ययन, प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं तथा आपदा जोखिम आकलन में अपना योगदान जारी रखेगा।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

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31 जुलाई 2026 की PIB रिलीज़ के अनुसार श्रीमती वर्षा अशोक अगलावे ने भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की 54वीं महानिदेशक के रूप में पदभार ग्रहण किया था; वे इस संगठन के 176 वर्षों के इतिहास में इसकी प्रमुख बनने वाली पहली महिला हैं। उन्होंने श्री असित साहा का स्थान लिया, जिन्होंने 27 जुलाई 2024 से 31 जुलाई 2026 तक महानिदेशक के रूप में काम किया। भारतीय खान ब्यूरो में सेवा देने के बाद उन्होंने 1992 में जीएसआई में कार्यभार ग्रहण किया था, और महानिदेशक बनने से पहले वे पूर्वी क्षेत्र, कोलकाता में अपर महानिदेशक एवं विभागाध्यक्ष थीं। जीवाश्म विज्ञान एवं परागकण विज्ञान की विशेषज्ञ श्रीमती अगलावे ने मध्य भारत में सालबर्डी-घोरपेंड क्षेत्र को डायनासोर के घोंसले के नए स्थल के रूप में दर्ज किया। पदभार ग्रहण करने पर उन्होंने गहराई में मौजूद एवं छिपे हुए खनिज भंडारों के अन्वेषण में तेज़ी लाने और अपतटीय खनिज अन्वेषण के विस्तार पर ज़ोर दिया।

संदर्भ: PIB (खान मंत्रालय), 'भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण को अपनी पहली महिला महानिदेशक मिली', 31 जुलाई 2026

खुद जाँचें: भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की प्रमुख बनने वाली पहली महिला कौन हैं, वे क्रम में कौन-सी महानिदेशक थीं, और उन्होंने पदभार कब ग्रहण किया?

श्रीमती वर्षा अशोक अगलावे; 54वीं महानिदेशक; 31 जुलाई 2026 को।

अभ्यास: इस रिलीज़ से नए महानिदेशक का क्रम, जीएसआई किस मंत्रालय का संबद्ध कार्यालय है, उन्होंने जीएसआई में कब कार्यभार ग्रहण किया और ठीक पहले उनका पद क्या था, तथा भूवैज्ञानिक रिपोर्ट, ज्ञापन, महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉक और अन्वेषण लाइसेंस ब्लॉक के आँकड़े लिखें; नोट से जीएसआई की प्रमुख बनने वाली पहली महिला, उनका क्रम, पदभार ग्रहण की तारीख़ और वहाँ बताई गई जीएसआई के इतिहास की अवधि।

ईपीएफओ ने 74वां स्थापना दिवस मनाया; डॉ. मनसुख मांडविया ने व्हाट्सएप के माध्यम से ईपीएफओ सेवाएं शुरू कीं, पात्र निष्क्रिय ईपीएफ खातों के ऑटोमेटिक सेटलमेंट की शुरुआत

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने 1 नवंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में अपना 74वां स्थापना दिवस मनाया। समारोह की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री और केंद्रीय न्यासी बोर्ड (ईपीएफ) के अध्यक्ष डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि अपनी 74 साल की यात्रा में ईपीएफओ देश के कार्यबल के लिए एक विश्वसनीय संस्था के रूप में उभरा है, और यह विश्वास 8 करोड़ से अधिक सदस्यों के अंशदान से जमा हुए 32 लाख करोड़ रुपये के कोष में परिलक्षित होता है। “सेवा ही हमारा संस्कार है” कहते हुए उन्होंने अधिकारियों से ईपीएफओ के 75वें वर्ष के मद्देनज़र श्रमिक-केंद्रित नवाचारों पर ध्यान देने का आग्रह किया। केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त श्री रमेश कृष्णमूर्ति ने 1952 के स्थापना संकल्प से लेकर आज लगभग 8 करोड़ अंशदायी सदस्यों और 85 लाख पेंशनभोगियों को सेवा देने वाले राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संस्थान तक ईपीएफओ की यात्रा का उल्लेख किया। सीआईटीईएस 2.01 के माध्यम से हुए तकनीकी बदलाव के प्रभाव को दर्शाते हुए बताया गया कि अक्टूबर 2026 में दावों के निपटारे की औसत अवधि घटकर 2.57 दिन रह गई। डॉ. मांडविया ने व्हाट्सएप के माध्यम से ईपीएफओ सेवाएं शुरू कीं, जिनसे सदस्य ईपीएफओ की सत्यापित व्हाट्सएप सेवा पर अपना पीएफ बैलेंस, पिछले पांच लेन-देन और पासबुक की जानकारी देख सकेंगे और पीएमवीबीआरवाई से संबंधित ज़रूरतों के लिए मार्गदर्शन पा सकेंगे; साथ ही पात्र निष्क्रिय ईपीएफ खातों के ऑटोमेटिक सेटलमेंट की शुरुआत हुई: जिन सदस्यों के आधार-सत्यापित निष्क्रिय ईपीएफ खातों में 1,000 रुपये तक की राशि है, उन्हें अलग से दावा दायर नहीं करना होगा, और 5 करोड़ रुपये की राशि के लगभग एक लाख खातों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। इस अवसर पर सात प्रकाशन जारी किए गए, जिनमें ईपीएफओ स्टेट प्रोफाइल 2026 और 62 क्षेत्रीय कार्यालयों के 83 वास्तविक अध्ययनों वाला ‘शासन-विधि में करुणा’ शामिल हैं, और भविष्य निधि पुरस्कार 2026 प्रदान किए गए।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

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ईपीएफओ ने 1 नवंबर 2025 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में अपना 73वां स्थापना दिवस मनाया था, जिसमें डॉ. मनसुख मांडविया मुख्य अतिथि थे। इस अवसर पर उन्होंने कर्मचारी नामांकन योजना 2025 का शुभारंभ किया, जो 1 नवंबर 2025 से लागू हुई और जिसका उद्देश्य नियोक्ताओं को पात्र कर्मचारियों की स्वेच्छा से घोषणा और नामांकन के लिए प्रोत्साहित करना है: यदि पहले कटौती नहीं की गई है, तो नियोक्ताओं को कर्मचारी के हिस्से का अंशदान जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी, और केवल 100 रुपये का नाममात्र दंड (पीनल डैमेज) लगेगा। उन्होंने उपयोगकर्ता-अनुकूल डोमेन नाम www.epfo.gov.in के साथ ईपीएफओ का नया होमपेज भी शुरू किया। श्रम एवं रोजगार सचिव ने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएमवीबीआरवाई) के क्रियान्वयन में ईपीएफओ की केंद्रीय भूमिका का उल्लेख किया, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को की थी और जिसका उद्देश्य 3.5 करोड़ नए रोजगारों को प्रोत्साहित करना है, और केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त ने कहा कि आगामी ईपीएफओ 3.0 प्लेटफॉर्म कार्यकुशलता और सुगमता को और बेहतर बनाएगा।

संदर्भ: PIB (श्रम और रोजगार मंत्रालय), 'डॉ. मांडविया ने ईपीएफओ स्थापना दिवस पर नागरिक-केंद्रित, प्रौद्योगिकी-संचालित सामाजिक सुरक्षा प्रणाली की आवश्यकता बताई', 1 नवंबर 2025

खुद जाँचें: ईपीएफओ के 73वें स्थापना दिवस पर डॉ. मांडविया ने कौन-सी योजना शुरू की, वह किस तारीख़ से लागू हुई, और उसके तहत कितना दंड लगता है?

कर्मचारी नामांकन योजना 2025; 1 नवंबर 2025 से; केवल 100 रुपये का नाममात्र दंड।

अभ्यास: इस रिलीज़ से स्थापना दिवस की संख्या, कोष और सदस्यता के आँकड़े, स्थापना वर्ष, दावों के निपटारे की औसत अवधि, शुरू की गई दो सेवाएँ, और ऑटोमेटिक सेटलमेंट की राशि-सीमा व संभावित लाभार्थी लिखें; नोट से 73वें स्थापना दिवस का स्थान, तब शुरू की गई योजना और उसकी शर्तें, तथा पीएमवीबीआरवाई का रोजगार लक्ष्य।

सात हवाई अड्डों पर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए 'डिजी यात्रा' का ट्रायल शुरू; 2027 में व्यापक विस्तार की योजना

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 1 नवंबर 2026 को बताया कि सात हवाई अड्डों - दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोचीन, मुंबई, चेन्नई और अमृतसर - पर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए डिजी यात्रा के ट्रायल शुरू हो गए हैं। नवंबर से दिसंबर 2026 तक चलने वाले इन ट्रायल के दौरान ई-पासपोर्ट रखने वाले पात्र भारतीय नागरिक एयर इंडिया और इंडिगो की चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में यात्रा करते समय हवाई अड्डों पर तय टचपॉइंट्स - टर्मिनल प्रवेश बिंदुओं, सुरक्षा होल्ड क्षेत्रों (एसएचए) और बोर्डिंग गेटों, जहाँ भी आवश्यक अवसंरचना उपलब्ध है - पर डिजी यात्रा का उपयोग कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें डिजी यात्रा मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से ई-पासपोर्ट-आधारित सत्यापन योग्य जानकारी (Verifiable Credential - वीसी) बनानी होगी: इसमें ई-पासपोर्ट के मशीन रीडेबल ज़ोन (एमआरजेड) को स्कैन करना, किसी उपयुक्त स्मार्टफोन के नियर फील्ड कम्यूनिकेशन (एनएफसी) फीचर से पासपोर्ट में लगी चिप को पढ़ना, एक सेल्फी लेना और विवरणों का सत्यापन करना शामिल है; यह जानकारी यात्री के डिवाइस पर उसके डिजी यात्रा वॉलेट में सुरक्षित रहती है। यह सुविधा मौजूदा यात्रा प्रक्रियाओं की जगह नहीं लेती, बल्कि उनमें सहयोग करती है: यात्रियों को अपने यात्रा दस्तावेज़ साथ रखने होंगे और एयरलाइन द्वारा दस्तावेज़ों की ज़रूरी जाँच, आव्रजन प्रक्रियाएँ और अन्य औपचारिकताएँ पूरी करनी होंगी। ट्रायल अवधि में मिलने वाले फीडबैक के आधार पर 2027 में होने वाले व्यापक विस्तार की योजना बनाई जाएगी। डिजी यात्रा के 26.5 मिलियन से अधिक उपयोगकर्ता हैं और इसने 39 घरेलू हवाई अड्डों पर 110 मिलियन से अधिक यात्राओं को संभव बनाया है; 2027 तक 25 और घरेलू हवाई अड्डों को इसके दायरे में लाने की योजना है।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

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तत्कालीन केंद्रीय नागरिक विमानन मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 1 दिसंबर 2022 को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से देश के तीन हवाई अड्डों - नई दिल्ली, वाराणसी और बेंगलुरु - के लिए डिजी यात्रा का शुभारंभ किया था। नागरिक विमानन मंत्रालय के अंतर्गत डिजी यात्रा फाउंडेशन द्वारा परिकल्पित डिजी यात्रा का उद्देश्य चेहरे की पहचान प्रौद्योगिकी (एफआरटी) के आधार पर हवाई अड्डों पर यात्रियों का संपर्क रहित और निर्बाध आवागमन है; इसके उपयोग के लिए आधार के माध्यम से सत्यापन और एक स्व-छवि (सेल्फ़ी) कैप्चर के ज़रिए डिजी यात्रा ऐप पर एक बार पंजीकरण आवश्यक था। मंत्री ने कहा कि व्यक्तिगत रूप से पहचान योग्य सूचना (पीआईआई) का कोई केंद्रीय भंडारण नहीं है: यात्री की आईडी और यात्रा विवरण उसके स्मार्टफोन में ही एक सुरक्षित वॉलेट में रहते हैं, और उपयोग के 24 घंटे के भीतर सर्वर से सारा डेटा हटा दिया जाता है। उस समय यह सेवा केवल घरेलू उड़ानों के यात्रियों के लिए शुरू की गई थी, और इसका उपयोग स्वैच्छिक है।

संदर्भ: PIB (नागरिक उड्डयन मंत्रालय), 'केंद्रीय नागरिक विमानन मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने देश में तीन हवाई अड्डों के लिए डिजी यात्रा का शुभारंभ किया', 1 दिसंबर 2022

खुद जाँचें: डिजी यात्रा का शुभारंभ कब और किन तीन हवाई अड्डों के लिए हुआ था, और यह किस प्रौद्योगिकी पर आधारित है?

1 दिसंबर 2022 को, नई दिल्ली, वाराणसी और बेंगलुरु के लिए; चेहरे की पहचान प्रौद्योगिकी (एफआरटी)।

अभ्यास: इस रिलीज़ से सात हवाई अड्डे, ट्रायल की अवधि, एयरलाइनें, उपयोग होने वाला दस्तावेज़ और क्रेडेंशियल, व्यापक विस्तार का वर्ष, और उपयोगकर्ताओं, यात्राओं व हवाई अड्डों के आँकड़े लिखें; नोट से शुभारंभ की तारीख़ और पहले तीन हवाई अड्डे, तब की पंजीकरण विधि और यात्रियों का डेटा कैसे रखा जाता है।

सीआईएसएफ ने 1 नवंबर 2026 से क्षेत्रीय (टेरिटोरियल) कमान की जगह कार्यात्मक सेक्टर आधारित कमान व्यवस्था लागू की; भिलाई बना नए स्टील सेक्टर का मुख्यालय

1 नवंबर 2026 से केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने अपने पर्यवेक्षण ढांचे को क्षेत्रीय कमान (टेरिटोरियल कमांड) मॉडल से विशेषीकृत, कार्यात्मक सेक्टर मॉडल में बदल दिया है; यह पुनर्गठन गृह मंत्रालय की सहमति से लागू किया गया है। पूर्ववर्ती क्षेत्रीय व्यवस्था में एक सेक्टर मुख्यालय कोयला खदानों से लेकर विद्युत संयंत्रों और बंदरगाहों तक की 50 से अधिक विभिन्न इकाइयों को संभालता था, जिसके लिए कई मंत्रालयों के साथ समन्वय करना पड़ता था; अब पर्यवेक्षण केवल प्रतिष्ठान के प्रकार के आधार पर होगा। नए कार्यात्मक सेक्टर हैं: पावर-I (नई दिल्ली) और पावर-II (कोलकाता) सेक्टर, कोयला सेक्टर (रांची), स्टील सेक्टर (भिलाई), पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस सेक्टर (गुवाहाटी), पश्चिमी तट बंदरगाह (मुंबई) और पूर्वी तट बंदरगाह (चेन्नई) सेक्टर, तथा सरकारी भवन, संग्रहालय एवं स्मारक और मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (जीबीएमएम एवं एमआरटीएस) सेक्टर (नई दिल्ली)। ये वर्ष 2001 से कार्यरत विमानन सेक्टरों और वर्ष 2018 से कार्यरत परमाणु ऊर्जा विभाग एवं अंतरिक्ष विभाग (डीएई एवं डीओएस) सेक्टर के साथ जुड़ेंगे, जिससे पूरा बल कार्यात्मक मॉडल के अंतर्गत आ जाएगा। मंत्रालय ने कहा कि महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को अब ड्रोन, सटीक मारक हथियारों, साइबर हमलों, तोड़फोड़ और समन्वित व्यवधानों से बढ़ते खतरे हैं, और यह सुधार खुफिया जानकारी आधारित और जोखिम-आधारित दृष्टिकोण की ओर बदलाव है: ग्राहक संगठनों का संपर्क एक समर्पित सेक्टर कमांडर से होगा, और सेक्टर मुख्यालय औद्योगिक नियंत्रण प्रणालियों (ओटी/आईसीएस) के लिए भौतिक सुरक्षा और साइबर जोखिम प्रबंधन में तालमेल बिठाने, सेक्टर-विशिष्ट ड्रोन-रोधी तकनीकें तैनात करने और किसी घटना के बाद परिचालन की शीघ्र बहाली के लिए आकस्मिक कार्ययोजनाएँ बनाने की बेहतर स्थिति में होंगे। इकाई स्तर पर मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी), प्रवेश नियंत्रण और त्वरित प्रतिक्रिया दलों (क्यूआरटी) की तैनाती को लगातार बेहतर बनाया जाएगा। सीआईएसएफ के महानिदेशक ने कहा कि इस बदलाव से संपर्क के एकल बिंदु के साथ बेहतर अंतर-एजेंसी समन्वय होगा, परिचालन संबंधी बाधाएँ घटेंगी जिससे समय पर निर्णय और संकट प्रबंधन संभव होगा, और दक्षता, व्यावसायिकता और जवाबदेही स्थापित होगी।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

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6 मार्च 2026 को ओडिशा के मुंडली में सीआईएसएफ के 57वें स्थापना दिवस (रेज़िंग डे) समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा था कि अपनी स्थापना के 56 वर्ष पूरे करने वाला सीआईएसएफ भारत के 70 हवाई अड्डों सहित 361 महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा कर रहा है और उसे ड्रोन सुरक्षा में नोडल एजेंसी बनाया गया है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय ने हाल ही में सारे बंदरगाहों की सुरक्षा सीआईएसएफ को सौंपने का निर्णय लिया है, आने वाले दिनों में सीआईएसएफ निजी औद्योगिक समूहों को भी हाइब्रिड मोड में सुरक्षा देगा, और पिछले 56 वर्षों में सीआईएसएफ को वीरता और विशिष्ट सेवा के लिए 13,693 पदक मिले हैं।

संदर्भ: PIB (गृह मंत्रालय), 'केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज ओडिशा के मुंडली में CISF के 57वें स्थापना दिवस समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया', 6 मार्च 2026

खुद जाँचें: सीआईएसएफ के 57वें स्थापना दिवस पर सीआईएसएफ को किस प्रकार की सुरक्षा में नोडल एजेंसी बताया गया, और गृह मंत्रालय ने किन प्रतिष्ठानों की सुरक्षा उसे सौंपने का निर्णय लिया था?

ड्रोन सुरक्षा; सारे बंदरगाह।

अभ्यास: इस रिलीज़ से बदलाव की तारीख़, पहले की क्षेत्रीय व्यवस्था, हर नया कार्यात्मक सेक्टर और उसका मुख्यालय, पहले से मौजूद सेक्टर और वे कब से कार्यरत हैं, तथा महानिदेशक द्वारा बताए गए लाभ लिखें; नोट से 57वें स्थापना दिवस का स्थान और तारीख़, सीआईएसएफ द्वारा सुरक्षित प्रतिष्ठान, ड्रोन सुरक्षा में उसकी भूमिका और बंदरगाहों संबंधी निर्णय।

रेल मंत्री ने एसएमवीटी बेंगलुरु-सीएसएमटी मुंबई वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया

केन्द्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने 1 नवंबर 2026 को केन्द्रीय मंत्रियों श्री प्रहलाद जोशी और श्री एच. डी. कुमारस्वामी, रेल राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना और राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे की उपस्थिति में एसएमवीटी बेंगलुरु-छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी), मुंबई वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह सेवा जनवरी 2026 में हावड़ा-गुवाहाटी कॉरिडोर पर वंदे भारत स्लीपर सेवाओं की शुरुआत और एक दिन पहले वाराणसी-नई दिल्ली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाए जाने के बाद आई है। श्री वैष्णव ने कहा कि यह सेवा देश की आईटी और स्टार्टअप राजधानी बेंगलुरु को उसकी वित्तीय राजधानी मुंबई से जोड़ेगी। यह ट्रेन आंध्र प्रदेश के अनंतपुर और गुंतकल; कर्नाटक के रायचूर, यादगीर और कलबुर्गी; तथा महाराष्ट्र के सोलापुर, पुणे और कल्याण से होकर गुजरेगी, जिससे उत्तर कर्नाटक के कई हिस्सों को बेहतर रात्रिकालीन रेल संपर्क मिलेगा। यह ट्रेन एसएमवीटी बेंगलुरु से 19:45 बजे रवाना होकर अगले दिन 11:55 बजे सीएसएमटी पहुंचेगी; वापसी में यह सीएसएमटी से 20:10 बजे रवाना होकर अगले दिन 12:00 बजे एसएमवीटी बेंगलुरु पहुंचेगी। यह सेवा सप्ताह में छह दिन चलेगी; बेंगलुरु से चलने वाली ट्रेन सोमवार को और मुंबई से चलने वाली ट्रेन मंगलवार को नहीं चलेगी। रेल मंत्री ने घोषणा की कि कर्नाटक के लिए अगली वंदे भारत स्लीपर सेवा बेंगलुरु से शुरू होकर राज्य के उत्तरी हिस्सों को हुबली क्षेत्र से जोड़ते हुए पुणे और मुंबई की ओर जाएगी, और मार्ग पर विद्युतीकरण पूरा होने और सफल परीक्षण के बाद अगले कुछ सप्ताह में बेंगलुरु और मंगलुरु के बीच वंदे भारत सेवाएं शुरू होने की उम्मीद है। रेल राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना ने बताया कि राज्य में लगभग ₹52,000 करोड़ की रेलवे अवसंरचना विकास परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

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1 जनवरी 2026 को रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की थी कि पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन असम के गुवाहाटी और पश्चिम बंगाल के हावड़ा के बीच चलेगी; ट्रेन का संपूर्ण परीक्षण, जांच और प्रमाणीकरण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका था, और प्रधानमंत्री जनवरी में इसे हरी झंडी दिखाने वाले थे। ट्रेन में 16 कोच हैं - 11 थ्री-टियर एसी कोच, 4 टू-टियर एसी कोच और 1 फर्स्ट-क्लास एसी कोच - और इसकी कुल क्षमता लगभग 823 यात्रियों की है। इसकी बताई गई विशेषताओं में सेमी-हाई-स्पीड डिज़ाइन (180 किमी प्रति घंटे तक की डिज़ाइन गति), कवच, वेस्टिब्यूल सहित स्वचालित दरवाज़े, सभी कोचों में सीसीटीवी और एरोसोल आधारित अग्नि पहचान एवं शमन प्रणाली शामिल हैं, और इसकी समय-सारणी इस तरह बनाई गई है कि यह शाम को प्रस्थान स्थल से चलकर अगली सुबह गंतव्य पर पहुंचे।

संदर्भ: PIB (रेल मंत्रालय), 'भारतीय रेल का राष्ट्र को नव वर्ष का उपहार: गुवाहाटी और हावड़ा के बीच पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन', 1 जनवरी 2026

खुद जाँचें: पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन किन दो स्थानों के बीच चली, और उसमें कितने कोच हैं तथा कितने यात्रियों की क्षमता है?

गुवाहाटी (असम) और हावड़ा (पश्चिम बंगाल); 16 कोच और लगभग 823 यात्री।

अभ्यास: इस रिलीज़ से दोनों टर्मिनस, उपस्थित मंत्री, पहले की वंदे भारत स्लीपर सेवाएँ, मार्ग के राज्य और स्टेशन, समय और संचालन के दिन, तथा कर्नाटक के लिए घोषित सेवाएँ लिखें; नोट से पहली वंदे भारत स्लीपर का मार्ग, कोचों की संरचना और क्षमता, तथा उसकी डिज़ाइन गति।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु कुरुक्षेत्र में हरियाणा राज्य के गठन के 60वें वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित ‘हीरक जयंती’ समारोह में शामिल हुईं

भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु 1 नवंबर 2026 को हरियाणा के कुरुक्षेत्र में हरियाणा राज्य के गठन के 60वें वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित ‘हीरक जयंती’ समारोह में शामिल हुईं। भारत की प्रगति-यात्रा में योगदान के लिए हरियाणा वासियों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण के निष्काम कर्मयोग का अमर संदेश सारे विश्व में फैलाने वाली इस धरती ने आधुनिक युग में भी मानवीय पराक्रम के अनेक कीर्तिमान स्थापित किए हैं, और हरियाणा के लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर सामाजिक परिवर्तन, लोकतंत्र, साहित्य और विज्ञान के क्षेत्रों में सार्थक योगदान किया है। पिछले एक दशक में महिला सशक्तीकरण के अनेक आयामों में हरियाणा की विशेष प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जनवरी 2015 में पानीपत से शुरू किया गया ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ राष्ट्रीय अभियान बहुत महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ है; वे यह जानकर प्रसन्न हुईं कि वर्ष 2014 की तुलना में वर्ष 2025 में जन्म के समय लिंगानुपात में वृद्धि हुई है, और उन्होंने विश्वास जताया कि केन्द्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से यह अनुपात समानता का स्तर प्राप्त कर लेगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा के खिलाड़ियों ने प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में असाधारण उपलब्धियां प्राप्त की हैं, खेलों में विलक्षण उपलब्धियों के लिए हरियाणा की बेटियों की सराहना की, और कहा कि हरियाणा की धरती ने विश्व को गीता का संदेश दिया है।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

पढ़ाई के लिए संदर्भ

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) अभियान 22 जनवरी 2015 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने हरियाणा के पानीपत में भारत में लिंग असंतुलन और घटते बाल लिंग अनुपात (सीएसआर) की समस्या के जवाब में शुरू किया था। 21 जनवरी 2025 को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने घोषणा की कि योजना की 10वीं वर्षगांठ का जश्न 22 जनवरी से 8 मार्च 2025 तक मनाया जाएगा, जिसका समापन अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर होगा। मंत्रालय ने योजना की प्रमुख उपलब्धियों में जन्म के समय राष्ट्रीय लिंग अनुपात (एसआरबी) का 2014-15 के 918 से बढ़कर 2023-24 में 930 होना, इसी अवधि में माध्यमिक स्तर पर लड़कियों के सकल नामांकन अनुपात का 75.51% से बढ़कर 78% होना, और संस्थागत प्रसव का 61% से बढ़कर 97.3% होना गिनाया।

संदर्भ: PIB (महिला एवं बाल विकास मंत्रालय), 'महिला एवं बाल विकास मंत्रालय बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की 10वीं वर्षगांठ मनाएगा', 21 जनवरी 2025

खुद जाँचें: बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान कब और कहाँ शुरू हुआ था, और मंत्रालय के अनुसार 2023-24 में जन्म के समय राष्ट्रीय लिंग अनुपात कितना था?

22 जनवरी 2015 को, हरियाणा के पानीपत में; 930 (2014-15 के 918 से बढ़कर)।

अभ्यास: इस रिलीज़ से समारोह और उसका स्थान, हरियाणा के गठन का कौन-सा वर्ष मनाया गया, राष्ट्रपति ने जिस अभियान का उल्लेख किया उसका स्थान और शुरुआत का महीना, और जन्म के समय लिंगानुपात के लिए जिन वर्षों की तुलना की गई, लिखें; नोट से बीबीबीपी की शुरुआत की तारीख़ और स्थान, उसका उद्देश्य, और जन्म के समय लिंग अनुपात के आँकड़े।

एयर मार्शल मेहताब सिंह देसवाल ने पूर्वी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में कार्यभार संभाला

एयर मार्शल मेहताब सिंह देसवाल, एवीएसएम, वीएम ने 1 नवंबर 2026 को भारतीय वायुसेना की पूर्वी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पदभार ग्रहण किया। वे 14 जून 1989 को भारतीय वायुसेना की उड़ान शाखा में लड़ाकू विमान पायलट के रूप में कमीशन हुए थे; उन्हें विभिन्न लड़ाकू विमानों को उड़ाने का 3,200 घंटे से अधिक का अनुभव है, वे आक्रमणकारी (स्ट्राइक) विमानों के संचालन और वायु रक्षा के विशेषज्ञ तथा योग्य पायलट आक्रमण प्रशिक्षक हैं, और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) और राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के पूर्व छात्र हैं। उनके परिचालन और स्टाफ पदों में दो वायुसेना अड्डों के एयर ऑफिसर कमांडिंग और एक लड़ाकू विमान स्क्वाड्रन के कमान अधिकारी का पद शामिल है; वे पाकिस्तान स्थित भारतीय दूतावास में वायुसेना अताशे के रूप में तैनात रहे हैं और वायुसेना मुख्यालय में महानिदेशक (हथियार प्रणाली) के रूप में सेवा दे चुके हैं। यह कार्यभार संभालने से पहले वे दक्षिण-पश्चिमी वायु कमान मुख्यालय में वरिष्ठ वायु स्टाफ अधिकारी (एसएएसओ) थे। उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल और वायु सेना मेडल से सम्मानित किया जा चुका है।

आधिकारिक स्रोत: PIB ↗

पढ़ाई के लिए संदर्भ

PIB शिलांग की 7 अक्टूबर 2023 की वायु सेना दिवस रिलीज़ के अनुसार भारतीय वायु सेना की आधिकारिक स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को हुई थी और यह 7 कमानों में विभाजित है। अपर शिलांग में मुख्यालय वाली पूर्वी वायु कमान (ईएसी) 12 राज्यों - सात पूर्वोत्तर राज्यों, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार और ओडिशा तथा झारखंड के कुछ हिस्सों - के ऊपर हवाई अभियानों को नियंत्रित करती है, और इसके दायित्व क्षेत्र में चीन, नेपाल, भूटान, म्यांमार और बांग्लादेश के साथ 6300 किमी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा शामिल है। पूर्वी वायु कमान की शुरुआत 27 मई 1958 को कोलकाता के रानीकुटीर में स्थित नंबर 1 ऑपरेशनल ग्रुप के रूप में हुई थी; 1 दिसंबर 1959 को फोर्ट विलियम, कोलकाता में मुख्यालय के साथ इसे कमान का दर्जा दिया गया, और 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद शिलांग में एक पूर्ण कमान स्थापित करने का निर्णय लिया गया। इसका आदर्श वाक्य ‘समरेषु पराक्रम’ (युद्ध में पराक्रम) है।

संदर्भ: PIB शिलांग (रक्षा मंत्रालय), '08 OCTOBER 2023 : AIR FORCE DAY EASTERN AIR COMMAND INDIAN AIR FORCE : THE FIRST RESPONDER AND SAVIOUR OF NORTH EAST' (वायु सेना दिवस: पूर्वी वायु कमान, भारतीय वायु सेना - पूर्वोत्तर की प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता और रक्षक), 7 अक्टूबर 2023

खुद जाँचें: पूर्वी वायु कमान का मुख्यालय कहाँ है, और इसका आदर्श वाक्य क्या है?

अपर शिलांग में; ‘समरेषु पराक्रम’ (युद्ध में पराक्रम)।

अभ्यास: इस रिलीज़ से कमान और पद, तारीख़, उनके कमीशन की तारीख़, उड़ान अनुभव और विशेषज्ञता, पहले के पद और कार्यभार से ठीक पहले का पद, तथा उनके सम्मान लिखें; नोट से पूर्वी वायु कमान का मुख्यालय, उसके अंतर्गत आने वाले राज्य और सीमा, उसकी शुरुआत और कमान बनने की तारीख़ें, और उसका आदर्श वाक्य।

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