प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने ग्रीन प्रोपल्शन के लिए मनस्तु स्पेस के साथ RDI फ़ंड से ₹116 करोड़ की सहायता का समझौता किया
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 26 अक्टूबर 2026 को बताया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) ने नवी मुंबई की मनस्तु स्पेस टेक्नोलॉजीज़ के साथ अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) फ़ंड के तहत ₹116 करोड़ की वित्तीय सहायता का समझौता किया है, जो वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋण के रूप में दी जाएगी। ₹277.63 करोड़ की कुल लागत वाली यह परियोजना 5 mN से 300 N थ्रस्ट श्रेणी में उपग्रहों और प्रक्षेपण यानों के लिए एक विस्तार-योग्य, एकीकृत ग्रीन प्रोपल्शन प्रणाली विकसित करेगी और इसका लक्ष्य इसे प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर (TRL) 6 से TRL 9 तक ले जाना है। यह तकनीक योजकों के साथ हाइड्रोजन पेरॉक्साइड आधारित हरित प्रणोदक का उपयोग करती है और अंतरिक्ष में पहले ही प्रदर्शित हो चुकी है।
ऊपर दी गई PIB की आधिकारिक विज्ञप्ति से AI की सहायता से तैयार, और AI की दूसरी जाँच में उसी विज्ञप्ति से मिलाया गया। किसी व्यक्ति ने इसका पंक्ति-दर-पंक्ति संपादन नहीं किया है।
पढ़ाई के लिए संदर्भ
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1 जुलाई 2025 को एक लाख करोड़ रुपये के कोष के साथ अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) योजना को मंज़ूरी दी, ताकि निजी क्षेत्र को अनुसंधान, विकास और नवाचार के लिए कम या शून्य ब्याज पर दीर्घकालिक वित्त मिल सके। यह दो स्तरों पर काम करती है: अनुसंधान नेशनल रिसर्च फ़ाउंडेशन (ANRF) के भीतर एक विशेष प्रयोजन निधि दूसरे स्तर के फ़ंड प्रबंधकों को राशि देती है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग इसका नोडल विभाग है।
खुद जाँचें: RDI योजना का कोष कितना है, और इसका नोडल विभाग कौन-सा है?
एक लाख करोड़ रुपये; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग।
अभ्यास: इस रिलीज़ से सहायता राशि, परियोजना लागत, थ्रस्ट सीमा, TRL स्तर और प्रणोदक लिखें; नोट से RDI योजना की मंज़ूरी की तारीख़, निधि, दोनों स्तर और नोडल विभाग।
खुद को परखें
जिस मनस्तु स्पेस के साथ प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने RDI फ़ंड के तहत ₹116 करोड़ की सहायता का समझौता किया है (26 अक्टूबर 2026 को घोषित), वह कौन-सी तकनीक विकसित कर रही है?
उत्तर देखें
उत्तर: उपग्रहों और प्रक्षेपण यानों के लिए ग्रीन प्रोपल्शन प्रणाली
यह परियोजना 5 mN से 300 N थ्रस्ट श्रेणी में उपग्रहों और प्रक्षेपण यानों के लिए हाइड्रोजन पेरॉक्साइड आधारित ग्रीन प्रोपल्शन प्रणाली विकसित कर रही है और इसका लक्ष्य इसे TRL 6 से TRL 9 तक ले जाना है।