अमित शाह की अध्यक्षता में एनसीडीसी की महापरिषद की 93वीं बैठक; वित्त वर्ष 2025-26 में एनसीडीसी का शुद्ध लाभ ₹1,475 करोड़, ऋण वसूली दर 99.84 प्रतिशत और नेट एनपीए शून्य
सहकारिता मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) की महापरिषद की 93वीं बैठक 29 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित निगम के मुख्यालय में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई। शाह ने कहा कि एनसीडीसी ने पिछले लगभग पाँच वर्षों में अत्यंत सराहनीय प्रदर्शन किया है और इस बात पर विशेष संतोष व्यक्त किया कि निगम ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अपनी उपस्थिति स्थापित कर ली है; उन्होंने एनसीडीसी को अगले 25 वर्षों के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार करने का निर्देश दिया और कहा कि इसके लिए सहकारी क्षेत्र के अनुभवी प्रतिनिधियों और पेशेवर विशेषज्ञों का एक समूह गठित किया जाना चाहिए, जो निगम की वर्तमान संरचना, पूँजी जुटाने के वैकल्पिक माध्यमों, वित्तीय स्वायत्तता और संगठनात्मक सुधारों पर विचार करे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक पूर्वोत्तर को दूध, अंडा, मछली और मांस के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, और एनसीडीसी के पूर्वोत्तर स्थित कार्यालयों को इन क्षेत्रों में व्यावहारिक परियोजनाएँ तैयार करने का निर्देश दिया; उन्होंने नाबार्ड, राज्य सहकारी बैंकों और वाणिज्यिक बैंकों के साथ कंसोर्टियम और सह-वित्तपोषण मॉडल विकसित करने का सुझाव भी दिया। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹1.70 लाख करोड़, 2027-28 के लिए ₹2.10 लाख करोड़ और 2028-29 के लिए ₹2.50 लाख करोड़ के संवितरण लक्ष्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने आगामी वर्षों के लिए और अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय करने को कहा। बैठक में प्रस्तुत वित्तीय विवरणों के अनुसार, सहकारिता मंत्रालय के गठन से 25 अक्टूबर 2026 तक एनसीडीसी ने सहकारी संस्थाओं को संचयी रूप से ₹4,14,586 करोड़ की वित्तीय सहायता वितरित की है। वित्त वर्ष 2025-26 में निगम ने ₹1,55,408 करोड़ की परियोजनाएँ स्वीकृत कीं, ₹1,27,596 करोड़ वितरित किए और ₹1,475 करोड़ का शुद्ध लाभ अर्जित किया, जबकि उसकी ऋण वसूली दर 99.84 प्रतिशत और नेट एनपीए शून्य रहा; उसका वार्षिक संवितरण वित्त वर्ष 2020-21 के ₹24,733 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में ₹1,27,596 करोड़ हो गया, यानी लगभग पाँच गुना वृद्धि। बैठक में 14 अगस्त 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) अधिनियम, 2026 के महत्व पर भी चर्चा हुई; केंद्र सरकार ने एनसीडीसी के लिए ₹2,000 करोड़ की अनुदान सहायता को मंज़ूरी दी है, जिसके आधार पर निगम ने चार वर्षों में बाज़ार से ₹20,000 करोड़ जुटाने की व्यवस्था की है। एनसीडीसी की 'सहकार नवाचार योजना' के तहत पात्र सहकारी संस्थाओं को अधिकतम ₹25 लाख तक की 100 प्रतिशत (शत-प्रतिशत) अनुदान सहायता दी जाती है; इसके लिए ₹10 करोड़ का प्रारंभिक निधि कोष बनाया गया है, जिसमें से 20 प्रतिशत पूर्वोत्तर क्षेत्र, पहाड़ी क्षेत्रों और कमज़ोर वर्गों की सहकारी संस्थाओं के लिए आरक्षित है।
ऊपर दी गई PIB की आधिकारिक विज्ञप्ति से AI की सहायता से तैयार, और AI की दूसरी जाँच में उसी विज्ञप्ति से मिलाया गया। किसी व्यक्ति ने इसका पंक्ति-दर-पंक्ति संपादन नहीं किया है।
पढ़ाई के लिए संदर्भ
31 जुलाई 2025 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) को 2025-26 से 2028-29 तक चार वर्षों के लिए 2,000 करोड़ रुपये की केंद्रीय अनुदान सहायता योजना (केंद्रीय क्षेत्र की योजना) को स्वीकृति दी, जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 से हर वर्ष 500 करोड़ रुपये भारत सरकार की बजटीय सहायता से दिए जाएँगे। इस अनुदान के आधार पर एनसीडीसी चार वर्षों में खुले बाज़ार से 20,000 करोड़ रुपये जुटा सकेगा, जिनका उपयोग सहकारी समितियों को नई परियोजनाएँ स्थापित करने या संयंत्रों के विस्तार के लिए ऋण देने और कार्यशील पूंजी की आवश्यकताएँ पूरी करने में होगा; एनसीडीसी संवितरण, अनुवर्ती कार्रवाई, निगरानी और वसूली के लिए कार्यान्वयन एजेंसी है, और सहकारी समितियों को राज्य सरकारों के माध्यम से या सीधे ऋण देता है। डेयरी, पशुधन, मत्स्य पालन, चीनी, वस्त्र, खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण और शीतगृह जैसे क्षेत्रों तथा श्रमिक और महिलाओं के नेतृत्व वाली 13,288 सहकारी समितियों के लगभग 2.9 करोड़ सदस्यों को इसका लाभ मिलने की संभावना है। रिलीज़ के अनुसार भारत में 29 करोड़ से अधिक सदस्यों वाली 8.25 लाख से अधिक सहकारी समितियाँ हैं, और 94 प्रतिशत किसान किसी न किसी रूप में सहकारी समितियों से जुड़े हैं।
खुद जाँचें: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एनसीडीसी के लिए अनुदान सहायता योजना को कब स्वीकृति दी, और इस अनुदान के आधार पर एनसीडीसी चार वर्षों में खुले बाज़ार से कितनी राशि जुटा सकेगा?
31 जुलाई 2025; 20,000 करोड़ रुपये।
अभ्यास: इस रिलीज़ से बैठक की संख्या, तारीख़, स्थान और अध्यक्ष, रोडमैप की अवधि, पूर्वोत्तर का लक्ष्य और उसका वर्ष, संवितरण लक्ष्य, संचयी संवितरण, वित्त वर्ष 2025-26 की स्वीकृतियाँ, संवितरण, शुद्ध लाभ, वसूली दर और नेट एनपीए, संशोधन अधिनियम के राजपत्र में प्रकाशन की तारीख़ और सहकार नवाचार योजना का अनुदान, निधि कोष और आरक्षित हिस्सा लिखें; नोट से मंत्रिमंडल की स्वीकृति की तारीख़, योजना का परिव्यय और अवधि, इससे संभव बाज़ार उधारी और संभावित लाभार्थी।
खुद को परखें
सहकारिता मंत्रालय के अनुसार, पूर्वोत्तर को दूध, अंडा, मछली और मांस के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य किस वर्ष तक के लिए निर्धारित किया गया है?
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उत्तर: 2030
29 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में एनसीडीसी की महापरिषद की 93वीं बैठक में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि वर्ष 2030 तक पूर्वोत्तर को दूध, अंडा, मछली और मांस के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, और एनसीडीसी के पूर्वोत्तर स्थित कार्यालयों को इन क्षेत्रों पर केंद्रित व्यावहारिक परियोजनाएँ तैयार करने, आवश्यक वित्तपोषण उपलब्ध कराने और राज्य सरकारों के सहयोग से उन्हें क्रियान्वित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन चार क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता से क्षेत्र की आय में अभूतपूर्व वृद्धि और रोज़गार के अवसर सृजित हो सकते हैं।