केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के मामलों के लिए फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों की योजना को पांच वर्ष (वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31) तक जारी रखने की मंजूरी दी; कुल परिव्यय 3,788.04 करोड़ रुपये
सरकार ने 4 नवंबर 2026 को बताया कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विशेष पॉक्सो न्यायालयों सहित फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (एफटीएससी) के लिए केंद्र प्रायोजित योजना (सीएसएस) को पांच वर्ष की और अवधि के लिए, यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 (वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31) तक, जारी रखने की मंजूरी दी है। योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 3,788.04 करोड़ रुपये है - केंद्रीय हिस्सा 2,353.15 करोड़ रुपये और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश का हिस्सा 1,434.89 करोड़ रुपये - और केंद्रीय हिस्से को निर्भया फंड से वित्त पोषित किया जाएगा। योजना में भाग लेने वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष पॉक्सो न्यायालयों सहित 850 एफटीएससी के संचालन का प्रावधान है - यह वर्तमान 779 से विस्तार है, ताकि दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के लंबित मामलों के आधार पर चिह्नित किए जाने वाले अतिरिक्त जिलों तक कवरेज बढ़ सके - और प्रत्येक न्यायालय के लिए एक समर्पित न्यायिक अधिकारी, एक विशेष लोक अभियोजक और 6 सहायक कर्मचारियों का प्रावधान है; साथ ही सीएसएस फंडिंग पैटर्न के अनुसार प्रचालनगत व्यय के लिए भाग लेने वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता दी जाएगी। योजना को न्याय विभाग राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के समन्वय से लागू करेगा, और विभाग एफटीएससी डैशबोर्ड, आवधिक प्रगति रिपोर्टों और राज्यों के व्यय विवरणों के माध्यम से न्यायालयों के प्रदर्शन की निगरानी करेगा। रिलीज़ के अनुसार यह योजना अक्टूबर 2019 से प्रचालनगत है और इसमें 29 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश भाग ले रहे हैं; 399 विशेष पॉक्सो न्यायालयों सहित 779 एफटीएससी कार्यरत हैं, और योजना शुरू होने के बाद से 4,02,457 मामलों का निपटारा किया गया है। यह योजना आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018 के अनुसरण में और स्वत: संज्ञान रिट (आपराधिक) संख्या 1/2019 में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में शुरू की गई थी, जिनमें पॉक्सो अधिनियम के 100 से अधिक लंबित मामलों वाले जिलों में विशिष्ट विशेष न्यायालय स्थापित करने का निर्देश दिया गया था। योजना के प्राथमिक लाभार्थी दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम, 2012 के तहत अपराधों की शिकार महिलाएं और बच्चे हैं; यह योजना कमजोर गवाह बयान केंद्रों (वल्नरेबल विटनेस डिपोज़िशन सेंटर, वीडब्ल्यूडीसी) और बच्चों के अनुकूल अदालत स्थानों की स्थापना को भी प्रोत्साहित करती है। आरंभ में एक वर्ष के लिए शुरू की गई इस योजना को 31 मार्च 2026 तक बढ़ाया गया था।
ऊपर दी गई PIB की आधिकारिक विज्ञप्ति से AI की सहायता से तैयार, और AI की दूसरी जाँच में उसी विज्ञप्ति से मिलाया गया। किसी व्यक्ति ने इसका पंक्ति-दर-पंक्ति संपादन नहीं किया है।
पढ़ाई के लिए संदर्भ
29 नवंबर 2023 को PIB ने बताया था कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (एफटीएससी) को केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में अगले तीन वर्षों, यानी अप्रैल 2023 से मार्च 2026 तक, जारी रखने को मंजूरी दी है; इसका वित्तीय निहितार्थ 1952.23 करोड़ रुपये (केंद्र का हिस्सा 1207.24 करोड़ रुपये और राज्य का हिस्सा 744.99 करोड़ रुपये) था और केंद्र के हिस्से का वित्त पोषण निर्भया फंड से होना था। रिलीज़ में बताया गया था कि आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018, जिसमें दुष्कर्म के अपराधियों के लिए मृत्युदंड सहित कड़ी सजा शामिल है, से एफटीएससी का गठन संभव हुआ; अगस्त 2019 में तैयार की गई केंद्र प्रायोजित योजना ने स्वत: संज्ञान रिट याचिका (आपराधिक) संख्या 1/2019 में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए पॉक्सो अधिनियम के 100 से अधिक मामलों वाले जिलों के लिए विशेष पॉक्सो न्यायालयों की स्थापना अनिवार्य की; और अक्टूबर 2019 में एक वर्ष के लिए शुरू की गई इस योजना को अतिरिक्त दो वर्षों के लिए बढ़ाया गया था। विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग द्वारा कार्यान्वित यह योजना एफटीएससी की स्थापना के लिए राज्य सरकारों के संसाधनों को बढ़ाती है। तब तक तीस राज्य/केंद्र शासित प्रदेश इस योजना में भाग ले चुके थे और 414 विशेष पॉक्सो न्यायालयों सहित 761 एफटीएससी शुरू हो चुके थे, जिन्होंने 1,95,000 से अधिक मामलों का निपटारा किया था।
खुद जाँचें: नवंबर 2023 में मंत्रिमंडल ने एफटीएससी योजना को किस अवधि के लिए और कितने वित्तीय निहितार्थ के साथ जारी रखा, और तब तक कितने एफटीएससी शुरू हो चुके थे?
अप्रैल 2023 से मार्च 2026 तक, 1952.23 करोड़ रुपये के साथ; 414 विशेष पॉक्सो न्यायालयों सहित 761 एफटीएससी।
अभ्यास: इस रिलीज़ से नई अवधि, कुल परिव्यय और उसमें केंद्र तथा राज्य/केंद्र शासित प्रदेश का हिस्सा, केंद्रीय हिस्से का कोष, प्रावधान किए गए और वर्तमान एफटीएससी की संख्या, प्रत्येक न्यायालय के कर्मचारी, कार्यान्वयन करने वाला विभाग और योजना की स्थिति के आंकड़े (भाग लेने वाले राज्य/केंद्र शासित प्रदेश, विशेष पॉक्सो न्यायालय, निपटाए गए मामले) लिखें; नोट से पिछली अवधि और परिव्यय, योजना के पीछे का अधिनियम और सर्वोच्च न्यायालय का मामला, और नवंबर 2023 में न्यायालयों की संख्या। दोनों परिव्ययों और न्यायालयों की दोनों संख्याओं की तुलना करें।
खुद को परखें
सरकार ने 4 नवंबर 2026 को बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के मामलों के लिए फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (एफटीएससी) की केंद्र प्रायोजित योजना को पांच वर्ष (वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31) तक जारी रखने की मंजूरी दी है। योजना के केंद्रीय हिस्से का वित्त पोषण किस कोष से किया जाएगा?
उत्तर देखें
उत्तर: निर्भया फंड
योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 3,788.04 करोड़ रुपये है - केंद्रीय हिस्सा 2,353.15 करोड़ रुपये और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश का हिस्सा 1,434.89 करोड़ रुपये - और रिलीज़ के अनुसार केंद्रीय हिस्से को निर्भया फंड से वित्त पोषित किया जाएगा। योजना में विशेष पॉक्सो न्यायालयों सहित 850 एफटीएससी का प्रावधान है, जबकि वर्तमान में इनकी संख्या 779 है।