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DAILY · 2026-11-05

अमित शाह ने हरियाणा के अंबाला में 1857 में आजादी की पहली लड़ाई के शहीद स्मारक का उद्घाटन किया; 22 एकड़ में 594 करोड़ रुपये की लागत से बना है स्मारक

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गृह मंत्रालय ने बताया कि केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने 5 नवंबर 2026 को हरियाणा के अंबाला में 1857 में आजादी की पहली लड़ाई के शहीद स्मारक का उद्घाटन किया; इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी और केन्द्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल उपस्थित थे। श्री शाह के अनुसार यह स्मारक 22 एकड़ भूमि पर 594 करोड़ रुपये की लागत से 22 दीर्घाओं के साथ बना है; इसमें वर्चुअल रियलिटी, होलोग्राफी और इंटरैक्टिव प्रोजेक्शन जैसी आधुनिक तकनीक के साथ ऐतिहासिक दस्तावेजों और हरियाणा की कलाओं को एक साथ पिरोया गया है, और इसमें फुलकारी और सरकंडा की शिल्पकला, 2,500 लोगों के बैठने की क्षमता वाला ओपन एयर थिएटर और लाइट एंड साउंड शो है, जो दर्शकों को वापस 1857 में ले जाने के लिए बनाया गया है। अपने संबोधन में श्री शाह ने कहा कि इसी भूमि - अंबाला कैंट - पर 10 मई 1857 को क्रांतिवीरों ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध सशस्त्र क्रांति का बिगुल फूंका था, और वीर सावरकर ने कहा था कि 1857 की क्रांति भारत माता की संतानों के लिए विद्रोह नहीं बल्कि स्वतंत्रता संग्राम है। उन्होंने 1857 के योद्धाओं में नाना साहेब पेशवा, महारानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे और बेगम हजरत महल का, और हरियाणा की भूमि पर आजादी की लड़ाई लड़ने वालों में राजा नाहर सिंह और राव तुलाराम का नाम लिया, तथा देशभर के युवाओं से इस स्मारक को देखने और शहीदों को श्रद्धांजलि देने का आग्रह किया। श्री शाह ने बताया कि उसी दिन 1,260 करोड़ रुपये की लागत से बने नेशनल हाईवे का भी लोकार्पण हुआ।

ऊपर दी गई PIB की आधिकारिक विज्ञप्ति से AI की सहायता से तैयार, और AI की दूसरी जाँच में उसी विज्ञप्ति से मिलाया गया। किसी व्यक्ति ने इसका पंक्ति-दर-पंक्ति संपादन नहीं किया है।

पढ़ाई के लिए संदर्भ

PIB की पत्रिका न्यू इंडिया समाचार (New India Samachar) के एक लेख के अनुसार विनायक दामोदर सावरकर ने 1857 की क्रांति को केवल विद्रोह नहीं, बल्कि भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम कहा था। 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक में भगूर गांव के पास जन्मे सावरकर ने पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की और 1904 में 'अभिनव भारत' नामक संगठन की स्थापना की; 1905 में बंगाल विभाजन की पृष्ठभूमि में उन्होंने पुणे में विदेशी कपड़ों की होली जलाई। छात्रवृत्ति पर कानून की पढ़ाई के लिए लंदन जाने पर उन्होंने 'फ्री इंडिया सोसाइटी' बनाई और इंडिया हाउस में रहे, जो श्यामजी कृष्ण वर्मा के नेतृत्व में चल रहे स्वतंत्रता आंदोलन का केंद्र था। 1908 में गहन शोध के बाद उन्होंने 'द हिस्ट्री ऑफ द वॉर ऑफ इंडियन इंडिपेंडेंस' (The History of the War of Indian Independence) पुस्तक लिखी, जिसमें 1857 की क्रांति को भारत की आजादी की पहली लड़ाई कहा गया; जनता तक पहुंचने से पहले ही अंग्रेजों ने इस पुस्तक पर प्रतिबंध लगा दिया। आजीवन कारावास की सजा पाकर 'काला पानी' भेजे गए सावरकर 10 वर्ष जेल में बिताने के बाद 1921 में अंडमान की सेल्युलर जेल से रिहा हुए।

संदर्भ: न्यू इंडिया समाचार (PIB), 'Firebrand Son of the Soil: Veer Savarkar' (वीर सावरकर पर लेख), 16-31 मई अंक

खुद जाँचें: लेख के अनुसार सावरकर ने 1857 की क्रांति को भारत की आजादी की पहली लड़ाई बताने वाली अपनी पुस्तक किस वर्ष लिखी, और 1904 में उन्होंने कौन-सा संगठन स्थापित किया?

1908 में; 'अभिनव भारत'।

अभ्यास: इस रिलीज़ से स्मारक का उद्घाटन कहां और किसने किया, उसका क्षेत्रफल, लागत और दीर्घाओं की संख्या, थिएटर की बैठने की क्षमता, अंबाला में क्रांति शुरू होने की श्री शाह द्वारा बताई गई तारीख़, और उनके द्वारा लिए गए 1857 के योद्धाओं तथा हरियाणा के स्वतंत्रता सेनानियों के नाम लिखें; नोट से 1857 पर सावरकर की पुस्तक और उसका वर्ष, उनके द्वारा स्थापित संगठन, और उन्हें कहां कैद रखा गया।

खुद को परखें

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने 5 नवंबर 2026 को 1857 में आजादी की पहली लड़ाई के शहीद स्मारक का उद्घाटन किया। यह स्मारक किस शहर में है?

  1. अंबाला
  2. मेरठ
  3. झांसी
  4. बैरकपुर
उत्तर देखें

उत्तर: अंबाला

यह स्मारक हरियाणा के अंबाला में है; श्री शाह के अनुसार यह 22 एकड़ भूमि पर 594 करोड़ रुपये की लागत से 22 दीर्घाओं के साथ बना है। उन्होंने कहा कि इसी भूमि, अंबाला कैंट, पर 10 मई 1857 को क्रांतिवीरों ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध सशस्त्र क्रांति का बिगुल फूंका था।

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