10 में से पाठ 10 · कंप्यूटर ज्ञान

साइबर सुरक्षा, IT अधिनियम 2000 और डेटाबेस (DBMS और SQL) की मूल बातें

AI की सहायता से तैयार किया गया और 28 अक्टूबर 2026 को तथ्यों की जाँच की गई; किसी मानव संपादक ने इसे अभी पंक्ति-दर-पंक्ति नहीं पढ़ा है। कोई गलती दिखे तो हमें बताइए। संपादकीय मानक और सुधार

मैलवेयर

मैलवेयर ऐसा कोई भी सॉफ्टवेयर है जो कंप्यूटर या उसके उपयोगकर्ता को हानि पहुँचाने के लिए लिखा गया हो। वायरस स्वयं को किसी प्रोग्राम या फ़ाइल से जोड़ लेता है और उस फ़ाइल को चलाने या साझा करने पर फैलता है; 1986 में पाकिस्तान में लिखे गए ब्रेन (Brain) को IBM PC का पहला वायरस कहा जाता है। वर्म एक स्वतंत्र प्रोग्राम है जो उपयोगकर्ता की किसी क्रिया के बिना नेटवर्कों में अपनी प्रतियाँ फैलाता है; 1988 का मॉरिस वर्म इंटरनेट के पहले वर्मों में से एक था। यूनानी कथा के लकड़ी के घोड़े के नाम पर बना ट्रोजन हॉर्स उपयोगी सॉफ्टवेयर जैसा दिखता है पर चुपके से हानि करता है, जैसे बैकडोर खोलना, और वायरस के विपरीत यह अपनी प्रतियाँ नहीं बनाता। रैनसमवेयर पीड़ित की फ़ाइलों को एन्क्रिप्ट कर देता है और कुंजी के बदले भुगतान माँगता है, जैसा वानाक्राई (WannaCry) ने 2017 में किया। स्पाइवेयर चुपके से जानकारी इकट्ठा करता है, कीलॉगर पासवर्ड चुराने के लिए कीस्ट्रोक दर्ज करता है, एडवेयर अनचाहे विज्ञापन दिखाता है, और बॉटनेट संक्रमित कंप्यूटरों (ज़ॉम्बी) का समूह है जिसे हमलावर दूर से नियंत्रित करता है।

हमले

फ़िशिंग में बैंक या किसी अन्य विश्वसनीय संस्था की नकल करने वाले नकली ईमेल या वेबसाइटों से लोगों को पासवर्ड, कार्ड नंबर या OTP बताने के लिए छला जाता है; फ़ोन कॉल से यही विशिंग और SMS से स्मिशिंग कहलाता है। स्पूफ़िंग किसी पहचान की नकल करना है, जैसे जाली ईमेल प्रेषक, कॉलर ID या IP पता। फ़ार्मिंग उपयोगकर्ताओं को असली वेबसाइट से नकली वेबसाइट पर मोड़ देता है, और डिनायल-ऑफ़-सर्विस (DoS) हमला सर्वर पर अनुरोधों की बाढ़ लाकर उसे ठप कर देता है; DDoS हमला यही काम अनेक कंप्यूटरों से, प्रायः बॉटनेट से, करता है। अन्य हमले हैं मैन-इन-द-मिडल (चुपके से संचार को बीच में पकड़ना), ब्रूट-फ़ोर्स (हर संभव पासवर्ड आज़माना) और सोशल इंजीनियरिंग (मशीनों के बजाय लोगों के साथ छल करना)।

बचाव के उपाय

फ़ायरवॉल ऐसा हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर है जो किसी विश्वसनीय नेटवर्क और इंटरनेट के बीच के ट्रैफ़िक पर नज़र रखता है और जो कुछ उसके नियम अनुमति न दें उसे रोक देता है। एंटीवायरस सॉफ्टवेयर ज्ञात सिग्नेचर से मिलान करके और संदिग्ध व्यवहार पर नज़र रखकर मैलवेयर का पता लगाता और उसे हटाता है, इसलिए इसे नियमित रूप से अपडेट करना आवश्यक है। एन्क्रिप्शन पठनीय प्लेनटेक्स्ट को एक कुंजी की सहायता से अपठनीय सिफ़रटेक्स्ट में बदलता है। सममित (सिमेट्रिक) एन्क्रिप्शन (जैसे AES) एक साझा कुंजी का उपयोग करता है, जबकि असममित या सार्वजनिक-कुंजी एन्क्रिप्शन (जैसे RSA, 1977) एन्क्रिप्ट करने के लिए सार्वजनिक कुंजी और डिक्रिप्ट करने के लिए निजी कुंजी का उपयोग करता है। डिजिटल हस्ताक्षर प्रेषक की निजी कुंजी से बनता है और प्रेषक की सार्वजनिक कुंजी से जाँचा जाता है, जिससे सिद्ध होता है कि संदेश किसने भेजा और उसमें बदलाव नहीं हुआ। टू-फ़ैक्टर ऑथेंटिकेशन (द्वि-कारक प्रमाणीकरण) तीन में से दो अलग प्रकार के प्रमाण माँगता है: कुछ जो आप जानते हैं (पासवर्ड या PIN), कुछ जो आपके पास है (OTP पाने वाला फ़ोन, या कार्ड) और कुछ जो आप हैं (फ़िंगरप्रिंट या चेहरा)।

IT अधिनियम 2000

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, जो साइबर अपराध और इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य पर भारत का मुख्य कानून है, 17 अक्टूबर 2000 को लागू हुआ। इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य पर UNCITRAL मॉडल लॉ पर आधारित यह अधिनियम इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों और डिजिटल हस्ताक्षरों को कानूनी मान्यता देता है, और प्रमाणन प्राधिकरणों के नियंत्रक द्वारा लाइसेंस प्राप्त प्रमाणन प्राधिकरण डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र जारी करते हैं। धारा 43 कंप्यूटर प्रणालियों को हुई क्षति के लिए प्रतिकर (मुआवज़ा) का प्रावधान करती है, धारा 65 कंप्यूटर सोर्स कोड से छेड़छाड़ को दंडित करती है और धारा 66 हैकिंग जैसे कंप्यूटर-संबंधी अपराधों को कवर करती है। 2008 के संशोधन ने पहचान की चोरी (66C), प्रतिरूपण द्वारा छल (66D), निजता का उल्लंघन (66E) और साइबर आतंकवाद (66F, आजीवन कारावास तक दंडनीय) जैसे अपराध जोड़े, और CERT-In को साइबर सुरक्षा घटनाओं के लिए राष्ट्रीय एजेंसी के रूप में वैधानिक भूमिका दी। ऑनलाइन आपत्तिजनक संदेशों से संबंधित धारा 66A को सर्वोच्च न्यायालय ने 2015 में श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ मामले में रद्द कर दिया।

डेटाबेस और DBMS

डेटाबेस संबंधित डेटा का व्यवस्थित संग्रह है, और DBMS (डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम) वह सॉफ्टवेयर है जो डेटा को बनाता, संगृहीत करता, अद्यतन करता और पुनः प्राप्त करता है, साथ ही दोहराव घटाता है, डेटा को सुसंगत रखता है और पहुँच को नियंत्रित करता है; MySQL, Oracle, PostgreSQL और MS Access इसके उदाहरण हैं। IBM के ई. एफ. कॉड द्वारा 1970 में प्रस्तावित रिलेशनल मॉडल में डेटा तालिकाओं में रखा जाता है, जिन्हें रिलेशन कहते हैं। पंक्ति (रो) रिकॉर्ड या टपल कहलाती है, स्तंभ (कॉलम) फ़ील्ड या एट्रिब्यूट कहलाता है, स्तंभों की संख्या डिग्री और पंक्तियों की संख्या कार्डिनैलिटी कहलाती है।

कुंजियाँ (कीज़)

प्राइमरी की (प्राथमिक कुंजी) तालिका के हर रिकॉर्ड की अद्वितीय पहचान करती है और न खाली (NULL) हो सकती है, न दोहराई जा सकती है, जैसे अनुक्रमांक (रोल नंबर)। हर वह फ़ील्ड, या फ़ील्डों का समूह, जो प्राइमरी की बन सकता है, कैंडिडेट की कहलाता है, और जो कैंडिडेट नहीं चुने जाते वे अल्टरनेट की कहलाते हैं। कंपोज़िट की दो या अधिक स्तंभों के मेल से बनती है। फ़ॉरेन की (बाह्य कुंजी) एक तालिका का वह फ़ील्ड है जो दूसरी तालिका की प्राइमरी की को संदर्भित करता है; यह दोनों तालिकाओं को जोड़ती है और उनके संदर्भों को वैध रखती है, जिसे रेफ़रेंशियल इंटीग्रिटी कहते हैं।

SQL की रूपरेखा

SQL (स्ट्रक्चर्ड क्वेरी लैंग्वेज) का विकास 1970 के दशक में IBM में हुआ और यह 1986 में ANSI मानक बनी। DDL (डेटा डेफ़िनिशन लैंग्वेज) CREATE, ALTER, DROP और TRUNCATE से संरचना परिभाषित करती है। DML (डेटा मैनिपुलेशन लैंग्वेज) INSERT, UPDATE और DELETE से डेटा बदलती है, और SELECT उससे पूछताछ (क्वेरी) करता है, जैसे SELECT name FROM students WHERE marks > 60। DCL (डेटा कंट्रोल लैंग्वेज) GRANT और REVOKE से अधिकार देती और वापस लेती है। TCL (ट्रांज़ैक्शन कंट्रोल लैंग्वेज) COMMIT, ROLLBACK और SAVEPOINT से ट्रांज़ैक्शन का प्रबंधन करती है। DROP पूरी तालिका हटा देता है, TRUNCATE उसकी सभी पंक्तियाँ हटाता है पर संरचना रखता है, और DELETE केवल चुनी हुई पंक्तियाँ हटाता है।

मुख्य तथ्य

  • वायरस को फैलने के लिए होस्ट फ़ाइल और उपयोगकर्ता की क्रिया चाहिए; वर्म नेटवर्क पर स्वयं फैलता है; ट्रोजन उपयोगी सॉफ्टवेयर का भेष धरता है और अपनी प्रतियाँ नहीं बनाता।
  • रैनसमवेयर फ़ाइलें एन्क्रिप्ट करके भुगतान माँगता है (WannaCry, 2017); स्पाइवेयर चुपके से डेटा इकट्ठा करता है; कीलॉगर कीस्ट्रोक दर्ज करता है।
  • फ़िशिंग: नकली ईमेल या वेबसाइट; विशिंग: वॉयस कॉल से; स्मिशिंग: SMS से; स्पूफ़िंग: प्रेषक की पहचान की नकल।
  • फ़ायरवॉल नियमों के अनुसार नेटवर्क ट्रैफ़िक छानता है; एंटीवायरस सिग्नेचर से मैलवेयर पहचानता है और उसे अपडेट रखना आवश्यक है।
  • सममित एन्क्रिप्शन एक कुंजी (AES) का उपयोग करता है; असममित एक सार्वजनिक और एक निजी कुंजी (RSA) का; डिजिटल हस्ताक्षर प्रेषक की निजी कुंजी से बनता है।
  • टू-फ़ैक्टर ऑथेंटिकेशन इनमें से दो को जोड़ता है: जो आप जानते हैं (PIN), जो आपके पास है (OTP वाला फ़ोन, कार्ड) और जो आप हैं (फ़िंगरप्रिंट)।
  • IT अधिनियम 2000 UNCITRAL मॉडल लॉ पर आधारित है और 17 अक्टूबर 2000 को लागू हुआ; 2008 में संशोधित; धारा 66A श्रेया सिंघल मामले (2015) में रद्द।
  • धारा 66C पहचान की चोरी, 66D प्रतिरूपण द्वारा छल, 66E निजता का उल्लंघन, 66F साइबर आतंकवाद (आजीवन कारावास तक)।
  • प्राइमरी की: अद्वितीय और कभी NULL नहीं; फ़ॉरेन की: दूसरी तालिका की प्राइमरी की को संदर्भित करती है; न चुनी गई कैंडिडेट की, अल्टरनेट की बन जाती हैं।
  • SQL समूह: DDL (CREATE, ALTER, DROP, TRUNCATE), DML (INSERT, UPDATE, DELETE, SELECT), DCL (GRANT, REVOKE), TCL (COMMIT, ROLLBACK, SAVEPOINT)।

एक नज़र में दोहराव

वायरस (होस्ट चाहिए), वर्म (स्वयं फैलता है), ट्रोजन (भेष बदला हुआ, प्रतियाँ नहीं बनाता), रैनसमवेयर (WannaCry 2017), स्पाइवेयर, कीलॉगर, बॉटनेट; फ़िशिंग, विशिंग, स्मिशिंग, स्पूफ़िंग, फ़ार्मिंग, DoS/DDoS; फ़ायरवॉल, एंटीवायरस, एन्क्रिप्शन (AES सममित, RSA सार्वजनिक-कुंजी), डिजिटल हस्ताक्षर, टू-फ़ैक्टर ऑथेंटिकेशन; IT अधिनियम 2000, 17 अक्टूबर 2000 से लागू, 2008 में संशोधित, 66A 2015 में रद्द; DBMS, रिलेशनल मॉडल (कॉड 1970); प्राइमरी, कैंडिडेट, फ़ॉरेन की; SQL में DDL, DML, DCL, TCL।

इस विषय का अभ्यास करें

कंप्यूटर ज्ञान के सभी 10 पाठ