10 में से पाठ 2 · पर्यावरण और पारिस्थितिकी

जैव विविधता: स्तर, हॉटस्पॉट, महाविविधता वाले देश और संरक्षण की विधियाँ

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जैव विविधता का अर्थ

जैव विविधता जैविक संगठन के हर स्तर पर, जीन से लेकर पूरे पारितंत्र तक, जीवन की विविधता है। यह शब्द अमेरिकी जीवविज्ञानी एडवर्ड ओ. विल्सन ने लोकप्रिय बनाया। यह इसलिए महत्वपूर्ण है कि प्रजाति-समृद्ध पारितंत्र अधिक उत्पादक होते हैं और गड़बड़ी से बेहतर उबरते हैं, और मनुष्य भोजन, औषधि, रेशे, इमारती लकड़ी और स्वच्छ जल के लिए जैव विविधता पर निर्भर है। पारिस्थितिकीविद् पॉल एर्लिक ने प्रजातियों की तुलना हवाई जहाज़ की रिवेटों से की: कुछ रिवेट निकलने पर शायद पता न चले, पर हर क्षति पूरे ढाँचे को कमज़ोर करती है, और किसी मुख्य रिवेट के निकलने से जहाज़ गिर सकता है। इसे रिवेट पॉपर परिकल्पना कहते हैं।

विविधता के तीन स्तर

आनुवंशिक विविधता एक ही प्रजाति के भीतर पाई जाने वाली भिन्नता है। NCERT पाठ्यपुस्तक इसके तीन उदाहरण देती है: भारत में चावल की 50,000 से अधिक आनुवंशिक रूप से भिन्न किस्में और आम की लगभग 1,000 किस्में हैं, और हिमालय की विभिन्न श्रेणियों में उगने वाले औषधीय पौधे राउवोल्फिया वोमिटोरिया में उसकी औषधि रेसरपीन की शक्ति अलग-अलग होती है। प्रजातीय विविधता किसी क्षेत्र में प्रजातियों की विविधता है; उदाहरण के लिए, पश्चिमी घाट में पूर्वी घाट से अधिक उभयचर प्रजातियाँ हैं। पारिस्थितिक या पारितंत्र विविधता आवासों की विविधता है: भारत के मरुस्थल, वर्षा वन, मैंग्रोव, प्रवाल भित्तियाँ, आर्द्रभूमियाँ, ज्वारनदमुख और अल्पाइन घास के मैदान उसे नॉर्वे जैसे देश से कहीं अधिक पारितंत्र विविधता देते हैं। पारिस्थितिकीविद् अल्फ़ा विविधता (एक समुदाय के भीतर), बीटा विविधता (समुदायों के बीच परिवर्तन) और गामा विविधता (पूरे क्षेत्र में) की भी बात करते हैं। विविधता उष्णकटिबंध में सबसे अधिक है और ध्रुवों की ओर घटती है; अमेज़न वर्षा वन पृथ्वी का सबसे समृद्ध क्षेत्र है।

भारत का हिस्सा और स्थानिक प्रजातियाँ

NCERT पाठ्यपुस्तक के आँकड़े के अनुसार, भारत के पास विश्व के भू-क्षेत्र का केवल 2.4 प्रतिशत है, पर ज्ञात प्रजातियों का लगभग 8.1 प्रतिशत है। स्थानिक (एंडेमिक) प्रजाति वह है जो प्राकृतिक रूप से केवल एक क्षेत्र में पाई जाती है और जंगल में कहीं और नहीं। भारतीय उदाहरण हैं एशियाई शेर (जंगल में केवल गुजरात के गिर और उसके आसपास), पश्चिमी घाट के नीलगिरि तहर और शेर-पूँछ मकाक, मणिपुर का संगाई हिरण और असम का पिग्मी हॉग। स्थानिक प्रजातियाँ विशेष रूप से संकट में रहती हैं, क्योंकि एक ही आवास के नष्ट होने से वे समाप्त हो सकती हैं। मुख्य खतरों को 'ईविल क्वार्टेट' (दुष्ट चौकड़ी) कहा जाता है: आवास की क्षति और विखंडन, अति-दोहन, विदेशी प्रजातियों का आक्रमण, और सहविलुप्तता। भारत में आक्रामक विदेशी प्रजातियों में जलकुंभी, लैंटाना और पार्थेनियम (गाजर घास) शामिल हैं, जबकि अफ्रीका की विक्टोरिया झील में लाई गई नील पर्च मछली के कारण सिक्लिड मछलियों की 200 से अधिक प्रजातियाँ विलुप्त हो गईं।

जैव विविधता हॉटस्पॉट

ब्रिटिश पारिस्थितिकीविद् नॉर्मन मायर्स ने 1988 में हॉटस्पॉट की अवधारणा दी, और बाद में कंज़र्वेशन इंटरनेशनल ने इसे अपनाया। कोई क्षेत्र हॉटस्पॉट तब माना जाता है जब उसमें स्थानिक संवहनी पौधों की कम से कम 1,500 प्रजातियाँ हों (विश्व के कुल का 0.5 प्रतिशत से अधिक) और वह अपनी मूल वनस्पति का कम से कम 70 प्रतिशत खो चुका हो। हॉटस्पॉट पृथ्वी के भू-भाग का छोटा-सा हिस्सा हैं, फिर भी उनमें स्थानिक प्रजातियों का बहुत बड़ा भाग है, इसलिए उनकी रक्षा से एक साथ अनेक प्रजातियाँ बचती हैं। भारत में चार हॉटस्पॉट के भाग हैं: हिमालय, इंडो-बर्मा (पूर्वोत्तर), पश्चिमी घाट और श्रीलंका, तथा सुंडालैंड (निकोबार द्वीप समूह)। पश्चिमी घाट को 2012 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भी घोषित किया गया।

महाविविधता वाले देश

1998 में कंज़र्वेशन इंटरनेशनल ने 17 महाविविधता वाले (मेगाडायवर्स) देशों की पहचान की, जिनमें मिलकर विश्व की अधिकांश प्रजातियाँ हैं; ब्राज़ील, इंडोनेशिया, चीन, मेक्सिको और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ भारत भी इनमें से एक है। 2002 में मेक्सिको में हस्ताक्षरित कैनकन घोषणा से समान विचारधारा वाले महाविविधता देशों का समूह बना, जो आनुवंशिक संसाधनों तक पहुँच और उनसे होने वाले लाभों के बँटवारे पर मिलकर आवाज़ उठाता है।

स्वस्थाने (इन-सीटू) संरक्षण

इन-सीटू का अर्थ है 'उसी स्थान पर': प्रजातियों की रक्षा उनके प्राकृतिक आवास में, पूरे पारितंत्र के साथ की जाती है, जिससे उद्विकास (इवोल्यूशन) की प्रक्रिया भी चलती रहती है। राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र, संरक्षण आरक्षित क्षेत्र और सामुदायिक आरक्षित क्षेत्र इसके कानूनी रूप हैं। भारत में पवित्र उपवनों (देव वनों) की भी पुरानी परंपरा है, यानी धार्मिक कारणों से समुदायों द्वारा संरक्षित वन-खंड, जो मेघालय की खासी और जयंतिया पहाड़ियों, राजस्थान की अरावली पहाड़ियों, कर्नाटक और महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट, तथा मध्य भारत के सरगुजा, चंदा और बस्तर क्षेत्रों में मिलते हैं; इनमें से कई दुर्लभ प्रजातियों को आश्रय देते हैं।

बाह्यस्थाने (एक्स-सीटू) संरक्षण

एक्स-सीटू का अर्थ है 'स्थान से बाहर': संकटग्रस्त पौधों और जंतुओं की रक्षा उनके प्राकृतिक आवास से बाहर की जाती है। चिड़ियाघर, वनस्पति उद्यान, वन्यजीव सफ़ारी पार्क और बंदी प्रजनन केंद्र इसके परिचित रूप हैं; हावड़ा का भारतीय वनस्पति उद्यान, जिसकी स्थापना रॉबर्ट किड ने 1787 में की थी, अपने विशाल बरगद (ग्रेट बनयान) के लिए प्रसिद्ध है। बीज बैंक बीजों को कम तापमान और कम नमी पर संग्रहित करते हैं, और जीन बैंक पराग, ऊतक संवर्धन और DNA रखते हैं। युग्मकों और भ्रूणों को निम्नताप परिरक्षण (क्रायोप्रिज़र्वेशन) द्वारा द्रव नाइट्रोजन में शून्य से 196 डिग्री सेल्सियस नीचे लंबे समय तक रखा जा सकता है। भारत का राष्ट्रीय जीन बैंक नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBPGR) चलाता है, और 2008 में नॉर्वे के आर्कटिक क्षेत्र में खुला स्वालबार्ड वैश्विक बीज भंडार दुनिया भर के जीन बैंकों के बीजों की बैकअप प्रतियाँ रखता है। एक्स-सीटू विधियाँ सुरक्षा-जाल हैं; मुख्य रणनीति इन-सीटू संरक्षण ही है, क्योंकि इसमें प्रजातियाँ अपने आवास सहित बचती हैं।

मुख्य तथ्य

  • जैव विविधता: यह शब्द एडवर्ड ओ. विल्सन ने लोकप्रिय बनाया; इसके तीन स्तर हैं: आनुवंशिक, प्रजातीय और पारिस्थितिक (पारितंत्र) विविधता।
  • भारत में आनुवंशिक विविधता (NCERT): चावल की 50,000 से अधिक किस्में और आम की लगभग 1,000 किस्में।
  • रिवेट पॉपर परिकल्पना: पॉल एर्लिक ने प्रजातियों की तुलना हवाई जहाज़ की रिवेटों से की; हर विलुप्ति पारितंत्र को कमज़ोर करती है।
  • हॉटस्पॉट (नॉर्मन मायर्स, 1988): कम से कम 1,500 स्थानिक संवहनी पादप प्रजातियाँ और मूल वनस्पति का कम से कम 70 प्रतिशत नष्ट।
  • भारत के चार हॉटस्पॉट: हिमालय, इंडो-बर्मा, पश्चिमी घाट और श्रीलंका, सुंडालैंड (निकोबार द्वीप समूह)।
  • महाविविधता वाले देश: 1998 में कंज़र्वेशन इंटरनेशनल ने 17 देश चिह्नित किए, भारत उनमें है; समान विचारधारा वाले महाविविधता देशों का समूह कैनकन घोषणा, 2002 से बना।
  • खतरों की 'ईविल क्वार्टेट': आवास क्षति और विखंडन, अति-दोहन, विदेशी प्रजातियों का आक्रमण, सहविलुप्तता; विक्टोरिया झील में नील पर्च ने सिक्लिड की 200 से अधिक प्रजातियाँ मिटा दीं।
  • इन-सीटू: राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र, पवित्र उपवन (खासी और जयंतिया पहाड़ियाँ, अरावली, बस्तर)। एक्स-सीटू: चिड़ियाघर, वनस्पति उद्यान, बीज बैंक, निम्नताप परिरक्षण।
  • निम्नताप परिरक्षण में युग्मक और भ्रूण द्रव नाइट्रोजन में शून्य से 196 डिग्री सेल्सियस नीचे रखे जाते हैं; NBPGR, नई दिल्ली भारत का राष्ट्रीय जीन बैंक रखता है।
  • नॉर्वे का स्वालबार्ड वैश्विक बीज भंडार 2008 में खुला; हावड़ा के भारतीय वनस्पति उद्यान की स्थापना रॉबर्ट किड ने 1787 में की।

एक नज़र में दोहराव

जैव विविधता शब्द ई.ओ. विल्सन ने लोकप्रिय किया; आनुवंशिक, प्रजातीय और पारितंत्र विविधता; भारत: भू-क्षेत्र का 2.4 प्रतिशत, प्रजातियों का लगभग 8.1 प्रतिशत (NCERT); हॉटस्पॉट अवधारणा नॉर्मन मायर्स 1988 (1,500 स्थानिक पौधे, 70 प्रतिशत आवास नष्ट); भारत में 4 हॉटस्पॉट; 17 महाविविधता वाले देश (1998); ईविल क्वार्टेट; इन-सीटू: उद्यान, अभयारण्य, पवित्र उपवन; एक्स-सीटू: चिड़ियाघर, बीज बैंक, शून्य से 196 डिग्री नीचे निम्नताप परिरक्षण; स्वालबार्ड भंडार 2008।

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