10 में से पाठ 4 · पर्यावरण और पारिस्थितिकी

भारत में वन्यजीव संरक्षण: बाघ परियोजना, हाथी परियोजना, IUCN रेड लिस्ट और CITES

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प्रजाति परियोजनाएँ क्यों

1960 के दशक के अंत तक शिकार, खाल के व्यापार और वनों के विनाश ने अनेक भारतीय जीवों को विलुप्ति के कगार पर पहुँचा दिया था। इसका जवाब चरणों में आया: 1952 में भारतीय वन्यजीव बोर्ड, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972, और फिर किसी एक प्रजाति पर केंद्रित परियोजनाएँ। बाघ जैसी फ्लैगशिप प्रजाति पर बनी परियोजना उसके पूरे वन की, और उसके साथ हज़ारों अन्य प्रजातियों की, रक्षा करती है। बाघ को 1973 में भारत का राष्ट्रीय पशु अपनाया गया, उसी वर्ष जब बाघ परियोजना शुरू हुई।

बाघ परियोजना

1 अप्रैल 1973 को 9 बाघ आरक्षित क्षेत्रों के साथ शुरू हुई बाघ परियोजना विश्व के सबसे प्रसिद्ध संरक्षण कार्यक्रमों में से एक है। हर आरक्षित क्षेत्र में एक कोर क्षेत्र होता है, जिसे मानव उपयोग से मुक्त रखा जाता है, और उसके चारों ओर बफ़र क्षेत्र। 2000 के दशक के आरंभ में सरिस्का के बाघ गायब हो जाने के बाद, वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम 2006 ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), जो केंद्रीय पर्यावरण मंत्री की अध्यक्षता वाला एक सांविधिक निकाय है, और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो बनाया। 2008 में रणथंभौर से लाए गए बाघों से सरिस्का को फिर से बसाया गया। 2006 से हर चार वर्ष में अखिल भारतीय बाघ आकलन में कैमरा ट्रैप की मदद से बाघों की गिनती NTCA और भारतीय वन्यजीव संस्थान मिलकर करते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस, 29 जुलाई, 2010 के सेंट पीटर्सबर्ग बाघ शिखर सम्मेलन में तय हुआ।

हाथी परियोजना और अन्य परियोजनाएँ

हाथी परियोजना 1992 में हाथियों, उनके आवासों और गलियारों की रक्षा, मानव-हाथी संघर्ष कम करने और पालतू हाथियों के कल्याण के लिए शुरू की गई; हाथी आरक्षित क्षेत्र इसकी इकाइयाँ हैं, और 2010 में हाथी को भारत का राष्ट्रीय धरोहर पशु घोषित किया गया। मगरमच्छ संरक्षण परियोजना 1975 में FAO और UNDP की सहायता से शुरू हुई, जिसमें घड़ियाल और अन्य मगरमच्छों को बंदी अवस्था में पालकर नदियों में छोड़ा गया। हिम तेंदुआ परियोजना 2009 में ऊँचे हिमालय के लिए शुरू हुई। गंगा नदी डॉल्फ़िन को 2009 में राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया, और बिहार में भागलपुर के पास विक्रमशिला गंगा डॉल्फ़िन अभयारण्य 1991 से है। 1990 के दशक में गिद्धों की संख्या इसलिए तेज़ी से गिरी कि पशुओं के शवों में दर्दनिवारक दवा डाइक्लोफेनाक होती थी, इसलिए 2006 में इसके पशु-चिकित्सा उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया और हरियाणा के पिंजौर जैसे प्रजनन केंद्र बनाए गए।

IUCN रेड लिस्ट

अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की स्थापना 1948 में फ्रांस के फॉन्टेनब्लो में हुई और इसका मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के ग्लैंड में है। इसने 1964 में संकटग्रस्त प्रजातियों की अपनी रेड लिस्ट शुरू की। यह सूची प्रजातियों को नौ श्रेणियों में रखती है: विलुप्त, वन्य रूप में विलुप्त, अति संकटग्रस्त, संकटग्रस्त, सुभेद्य, निकट संकटग्रस्त, कम चिंताजनक, आँकड़े अपर्याप्त और मूल्यांकन नहीं हुआ। केवल अति संकटग्रस्त, संकटग्रस्त और सुभेद्य को मिलाकर 'संकटापन्न' (थ्रेटन्ड) कहा जाता है। लंबे समय से अति संकटग्रस्त सूची में रही भारतीय प्रजातियों में सोन चिरैया, घड़ियाल, तीन गिद्ध (सफ़ेद पीठ वाला, भारतीय और पतली चोंच वाला), जर्डन कोर्सर और बंगाल फ्लोरिकन शामिल हैं। बाघ, एशियाई हाथी, लाल पांडा और गंगा नदी डॉल्फ़िन संकटग्रस्त श्रेणी में हैं। नए आँकड़े आने पर श्रेणियाँ बदली जाती हैं, इसलिए कोई स्थिति किसी प्रजाति की एक निश्चित समय की स्थिति बताती है।

CITES

वन्य जीव-जंतुओं और वनस्पतियों की संकटग्रस्त प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय (CITES) पर 3 मार्च 1973 को वॉशिंगटन DC में हस्ताक्षर हुए और यह 1975 में लागू हुआ; भारत 1976 में इसमें शामिल हुआ। जिनेवा स्थित इसका सचिवालय UNEP चलाता है, और 3 मार्च अब विश्व वन्यजीव दिवस है। CITES किसी देश के भीतर शिकार से संबंधित नहीं है; यह तीन परिशिष्टों के माध्यम से सीमा-पार व्यापार को नियंत्रित करता है। परिशिष्ट I में विलुप्ति के खतरे वाली प्रजातियाँ हैं, जिनका व्यावसायिक व्यापार सामान्यतः प्रतिबंधित है, जैसे बाघ और हिम तेंदुआ। परिशिष्ट II में वे प्रजातियाँ हैं जो अभी आवश्यक रूप से संकट में नहीं हैं, और जिनका व्यापार परमिट से होता है ताकि वह हानिकारक न बने। परिशिष्ट III में वे प्रजातियाँ हैं जो किसी एक देश में संरक्षित हैं और जिसने व्यापार नियंत्रण में अन्य पक्षकारों से सहायता माँगी है।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूचियाँ

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 सूचीबद्ध जीवों के शिकार पर रोक लगाता है और वन्यजीव उत्पादों के व्यापार को नियंत्रित करता है, और अनुसूचियों के माध्यम से संरक्षण का स्तर तय करता है। 2022 तक इसमें छह अनुसूचियाँ थीं: अनुसूची I और अनुसूची II का भाग II पूर्ण संरक्षण देते थे, अनुसूची III और IV कम संरक्षण, अनुसूची V में वे पीड़क जीव (वर्मिन) थे जिनका शिकार किया जा सकता था, और 1991 के संशोधन से जोड़ी गई अनुसूची VI में संरक्षित पौधे थे। बाघ, शेर, हाथी, गैंडा और सोन चिरैया जैसे अनुसूची I के जीवों से जुड़े अपराधों पर सबसे कठोर दंड है। वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम 2022 ने अनुसूचियों की संख्या घटाकर चार कर दी: अनुसूची I (सर्वोच्च संरक्षण), अनुसूची II (कम संरक्षण), अनुसूची III (संरक्षित पौधे) और अनुसूची IV (CITES परिशिष्टों में सूचीबद्ध नमूने), और पीड़क जीवों की अलग अनुसूची हटा दी।

संस्थाएँ

देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), जिसकी स्थापना 1982 में हुई, पर्यावरण मंत्रालय का एक स्वायत्त संस्थान है जो वन्यजीव प्रबंधकों को प्रशिक्षण देता है और शोध करता है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड ने 2003 में भारतीय वन्यजीव बोर्ड का स्थान लिया, और संरक्षित क्षेत्रों के भीतर की परियोजनाओं को इसकी मंज़ूरी आवश्यक है। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (1992) चिड़ियाघरों का नियमन करता है, और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो अवैध शिकार और तस्करी से लड़ता है। गैर-सरकारी संस्थाओं में बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (1883) सबसे पुरानी संस्थाओं में से है, और 1961 में स्थापित WWF, जिसका प्रतीक विशाल पांडा है, पूरे विश्व में काम करता है।

मुख्य तथ्य

  • बाघ परियोजना: 1 अप्रैल 1973 को 9 आरक्षित क्षेत्रों के साथ शुरू; उसी वर्ष बाघ राष्ट्रीय पशु बना; हाथी परियोजना: 1992।
  • NTCA: वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम 2006 से बना सांविधिक निकाय, अध्यक्ष केंद्रीय पर्यावरण मंत्री; बाघों की गिनती हर चार वर्ष में होती है।
  • मगरमच्छ परियोजना 1975 (FAO और UNDP सहायता); हिम तेंदुआ परियोजना 2009; हाथी राष्ट्रीय धरोहर पशु 2010; गंगा डॉल्फ़िन राष्ट्रीय जलीय जीव 2009।
  • विक्रमशिला गंगा डॉल्फ़िन अभयारण्य, भागलपुर (बिहार), 1991; गिद्धों को मारने वाली डाइक्लोफेनाक पर 2006 में पशु-चिकित्सा उपयोग के लिए प्रतिबंध लगा।
  • IUCN: स्थापना 1948 में फॉन्टेनब्लो (फ्रांस), मुख्यालय ग्लैंड (स्विट्ज़रलैंड); रेड लिस्ट 1964 से; संकटापन्न = अति संकटग्रस्त, संकटग्रस्त और सुभेद्य।
  • अति संकटग्रस्त भारतीय प्रजातियाँ: सोन चिरैया, घड़ियाल, सफ़ेद पीठ वाला, भारतीय और पतली चोंच वाला गिद्ध, जर्डन कोर्सर, बंगाल फ्लोरिकन।
  • CITES: 3 मार्च 1973 को वॉशिंगटन DC में हस्ताक्षर (अब विश्व वन्यजीव दिवस), 1975 में लागू, भारत 1976 में शामिल; परिशिष्ट I में व्यावसायिक व्यापार प्रतिबंधित।
  • अधिनियम की अनुसूचियाँ: 2022 तक छह (अनुसूची V पीड़क जीव; पौधों वाली अनुसूची VI 1991 में जोड़ी गई); 2022 के संशोधन ने इन्हें चार किया (I सर्वोच्च, II कम संरक्षण, III पौधे, IV CITES नमूने)।
  • भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून, 1982; केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण 1992; राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (अध्यक्ष प्रधानमंत्री) 2003; BNHS 1883; WWF 1961।

एक नज़र में दोहराव

बाघ परियोजना 1 अप्रैल 1973 (9 आरक्षित क्षेत्र); बाघ राष्ट्रीय पशु 1973; NTCA 2006 संशोधन से; हाथी परियोजना 1992; मगरमच्छ परियोजना 1975; हिम तेंदुआ परियोजना 2009; IUCN 1948, ग्लैंड, रेड लिस्ट 1964, 9 श्रेणियाँ, CR-EN-VU संकटापन्न; सोन चिरैया, घड़ियाल, तीन गिद्ध अति संकटग्रस्त; CITES 3 मार्च 1973, भारत 1976, परिशिष्ट I से III; अधिनियम की छह अनुसूचियाँ 2022 में चार; WII देहरादून 1982; राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड के अध्यक्ष प्रधानमंत्री।

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