10 में से पाठ 3 · भारतीय अर्थव्यवस्था
मुद्रा, मुद्रा आपूर्ति, मुद्रास्फीति और मूल्य सूचकांक (CPI और WPI)
AI की सहायता से तैयार किया गया और 28 अक्टूबर 2026 को तथ्यों की जाँच की गई; किसी मानव संपादक ने इसे अभी पंक्ति-दर-पंक्ति नहीं पढ़ा है। कोई गलती दिखे तो हमें बताइए। संपादकीय मानक और सुधार
मुद्रा के कार्य और रूप
मुद्रा वस्तु विनिमय (बार्टर) की मुख्य समस्या, अर्थात आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की जरूरत, को दूर करती है। इसके प्राथमिक कार्य विनिमय का माध्यम और मूल्य का मापक (लेखे की इकाई) बनना हैं; इसके गौण कार्य मूल्य का संचय और स्थगित भुगतानों का मान बनना हैं, ताकि ऋण बाद में उसी इकाई में चुकाए जा सकें। मुद्रा अनाज और पशु जैसी वस्तु मुद्रा से धातु के सिक्कों तक, फिर कागजी मुद्रा तक और अब बैंक जमाओं और डिजिटल मुद्रा तक पहुँची है। आधुनिक कागजी मुद्रा आदेशात्मक (फिएट) मुद्रा है: इसका मूल्य इसलिए है कि सरकार इसे वैध मुद्रा (लीगल टेंडर) घोषित करती है, न कि उस सामग्री के कारण जिससे यह बनी है।
भारत में मुद्रा कौन जारी करता है
RBI अधिनियम 1934 की धारा 22 के तहत RBI करेंसी नोट जारी करता है, जबकि सिक्के और एक रुपये के नोट भारत सरकार जारी करती है; इसीलिए एक रुपये के नोट पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं और अन्य नोटों पर RBI गवर्नर के। सिक्के मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता और नोएडा की सरकारी टकसालों में ढाले जाते हैं। 1957 से RBI न्यूनतम आरक्षित प्रणाली का पालन करता है: उसे कम से कम 200 करोड़ रुपये का सोना और विदेशी मुद्रा रखनी होती है, जिसमें सोना कम से कम 115 करोड़ रुपये का होना चाहिए, और जारी नोटों की मात्रा इस आरक्षित निधि से बँधी नहीं है।
मुद्रा आपूर्ति के माप
M0, अर्थात आरक्षित मुद्रा या उच्च शक्ति मुद्रा = प्रचलन में मुद्रा + RBI के पास बैंकों की जमाएँ + RBI के पास अन्य जमाएँ; यही वह आधार है जिस पर बैंक मुद्रा खड़ी होती है। इसके ऊपर RBI के मुद्रा आपूर्ति के चार माप हैं, जो 1977 में अपनाए गए और सबसे अधिक तरल से सबसे कम तरल की ओर चलते हैं। M1, अर्थात संकीर्ण मुद्रा = जनता के पास मुद्रा + बैंकों की माँग जमाएँ + RBI के पास अन्य जमाएँ। M2 = M1 + डाकघर बचत बैंकों की बचत जमाएँ। M3, अर्थात व्यापक मुद्रा = M1 + बैंकों की सावधि जमाएँ; नीति में सबसे अधिक इसी माप का उपयोग होता है। M4 = M3 + राष्ट्रीय बचत पत्रों को छोड़कर डाकघर बचत बैंकों की सभी जमाएँ। व्यापक मुद्रा और आरक्षित मुद्रा का अनुपात मुद्रा गुणक है: M0 में परिवर्तन से M3 में उससे बड़ा परिवर्तन होता है, क्योंकि बैंक हर जमा का एक भाग ऋण के रूप में दे देते हैं।
मुद्रास्फीति क्या है और क्यों होती है
मुद्रास्फीति सामान्य कीमत स्तर में लगातार वृद्धि है, अर्थात मुद्रा की क्रय शक्ति में गिरावट। माँग-जनित मुद्रास्फीति तब होती है जब कुल माँग आपूर्ति से आगे निकल जाती है, प्रायः मुद्रा की तेज वृद्धि या भारी सरकारी व्यय के कारण: बहुत अधिक मुद्रा बहुत कम वस्तुओं के पीछे दौड़ती है। लागत-जनित मुद्रास्फीति तब होती है जब मजदूरी, तेल या कच्चे माल जैसी लागतें बढ़ती हैं, या जब सूखा या कोई अन्य आपूर्ति आघात उत्पादन घटा देता है। गति के आधार पर मुद्रास्फीति को रेंगती (हल्की), चलती, दौड़ती या सरपट कहा जाता है, और जब कीमतें अत्यंत तेजी से बढ़ें तो अति-मुद्रास्फीति (हाइपरइन्फ्लेशन)। मुद्रास्फीति से ऋण लेने वालों को लाभ और ऋण देने वालों तथा स्थिर आय वालों को हानि होती है, क्योंकि उनका पैसा कम खरीद पाता है।
संबंधित शब्द
स्टैगफ्लेशन (मुद्रास्फीतिजनित मंदी) ऊँची मुद्रास्फीति के साथ ठहरा हुआ उत्पादन और ऊँची बेरोजगारी है, जैसा 1970 के दशक के तेल संकटों के बाद कई देशों में देखा गया। अपस्फीति (डिफ्लेशन) सामान्य कीमत स्तर में गिरावट है; यह हानिकारक है, क्योंकि लोग खर्च टालते हैं और ऋण का वास्तविक बोझ बढ़ जाता है। अवस्फीति (डिसइन्फ्लेशन) मुद्रास्फीति की दर में गिरावट है: कीमतें अब भी बढ़ती हैं, बस धीमी गति से। पुनर्स्फीति (रिफ्लेशन) मंदी के बाद उत्पादन और कीमतें बढ़ाने के लिए जानबूझकर उठाया गया नीतिगत कदम है। हेडलाइन मुद्रास्फीति सूचकांक की सभी मदों को समेटती है, जबकि कोर मुद्रास्फीति अस्थिर खाद्य और ईंधन कीमतों को छोड़कर मूल प्रवृत्ति दिखाती है।
WPI और CPI
थोक मूल्य सूचकांक (WPI) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) का आर्थिक सलाहकार कार्यालय प्रकाशित करता है। इसमें केवल वस्तुएँ तीन समूहों में आती हैं: प्राथमिक वस्तुएँ, ईंधन और बिजली, तथा विनिर्मित उत्पाद, जिनमें अंतिम का भार सबसे अधिक है; सेवाएँ इसमें शामिल नहीं हैं। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) परिवारों द्वारा वस्तुओं और सेवाओं के लिए चुकाई जाने वाली खुदरा कीमतों को मापता है, और इसमें भोजन का भार बड़ा है। NSO, CPI (ग्रामीण), CPI (शहरी) और CPI (संयुक्त) प्रकाशित करता है, जिनकी शृंखला 2011 में शुरू हुई, जबकि श्रम ब्यूरो, शिमला औद्योगिक श्रमिकों के लिए CPI (CPI-IW) तथा कृषि और ग्रामीण मजदूरों के लिए CPI प्रकाशित करता है। 2014 तक WPI भारत में मुद्रास्फीति का मुख्य माप था; तब से CPI (संयुक्त) मुख्य (हेडलाइन) माप है और RBI के मुद्रास्फीति लक्ष्य का आधार भी।
फिलिप्स वक्र सरल शब्दों में
1958 में अर्थशास्त्री A.W. फिलिप्स ने ब्रिटेन के आँकड़ों का अध्ययन कर पाया कि कम बेरोजगारी वाले वर्षों में मजदूरी तेजी से बढ़ी, जबकि अधिक बेरोजगारी वाले वर्षों में मजदूरी धीरे बढ़ी। नीचे की ओर झुके वक्र के रूप में खींचने पर यह अल्पकाल में एक समझौते (ट्रेड-ऑफ) का संकेत देता है: अधिक मुद्रास्फीति की कीमत पर कम बेरोजगारी पाई जा सकती है, और अधिक बेरोजगारी की कीमत पर कम मुद्रास्फीति। 1970 के दशक की स्टैगफ्लेशन, जब दोनों एक साथ ऊँचे थे, ने दिखाया कि यह समझौता स्थिर नहीं है। मिल्टन फ्रीडमैन जैसे अर्थशास्त्रियों का तर्क था कि दीर्घकाल में यह वक्र ऊर्ध्वाधर होता है, क्योंकि लोग मुद्रास्फीति की अपेक्षा करने लगते हैं और बेरोजगारी अपनी प्राकृतिक दर पर लौट आती है।
मुख्य तथ्य
- मुद्रा के कार्य: प्राथमिक - विनिमय का माध्यम और मूल्य का मापक; गौण - मूल्य का संचय और स्थगित भुगतानों का मान।
- करेंसी नोट RBI जारी करता है (धारा 22, RBI अधिनियम 1934); सिक्के और एक रुपये के नोट भारत सरकार (वित्त सचिव के हस्ताक्षर)।
- 1957 से न्यूनतम आरक्षित प्रणाली: कम से कम 200 करोड़ रुपये का सोना और विदेशी मुद्रा, जिसमें कम से कम 115 करोड़ रुपये का सोना।
- M0 = आरक्षित (उच्च शक्ति) मुद्रा; M1 = संकीर्ण मुद्रा (जनता के पास मुद्रा + माँग जमाएँ + RBI के पास अन्य जमाएँ); M3 = व्यापक मुद्रा (M1 + सावधि जमाएँ)।
- तरलता क्रम: M1 सबसे अधिक तरल और M4 सबसे कम; मुद्रा गुणक = M3 / M0।
- माँग-जनित: अतिरिक्त माँग; लागत-जनित: बढ़ती आगत लागत या आपूर्ति आघात; स्टैगफ्लेशन: ठहराव और बेरोजगारी के साथ ऊँची मुद्रास्फीति।
- अपस्फीति = गिरती कीमतें; अवस्फीति = मुद्रास्फीति की गिरती दर; पुनर्स्फीति = कीमतों और उत्पादन का जानबूझकर पुनरुद्धार।
- WPI: आर्थिक सलाहकार कार्यालय, DPIIT; केवल वस्तुएँ, सेवाएँ नहीं; समूह - प्राथमिक वस्तुएँ, ईंधन और बिजली, विनिर्मित उत्पाद।
- CPI ग्रामीण/शहरी/संयुक्त: NSO; CPI-IW, CPI-AL और CPI-RL: श्रम ब्यूरो; 2014 से CPI (संयुक्त) मुख्य मुद्रास्फीति माप है और यही RBI के मुद्रास्फीति लक्ष्य का आधार है।
- फिलिप्स वक्र (A.W. फिलिप्स, 1958): अल्पकाल में बेरोजगारी और मुद्रास्फीति के बीच विपरीत संबंध; दीर्घकाल में ऊर्ध्वाधर।
एक नज़र में दोहराव
मुद्रा: विनिमय का माध्यम, मूल्य का मापक, मूल्य का संचय, स्थगित भुगतान; नोट RBI (धारा 22), सिक्के और 1 रुपये का नोट भारत सरकार; न्यूनतम आरक्षित प्रणाली 1957 (200 करोड़ रुपये, सोना 115 करोड़ रुपये); M0 आरक्षित मुद्रा, M1 संकीर्ण, M3 व्यापक (माप 1977 से); माँग-जनित बनाम लागत-जनित; स्टैगफ्लेशन, अपस्फीति, अवस्फीति; WPI आर्थिक सलाहकार कार्यालय (DPIIT), केवल वस्तुएँ; CPI NSO, CPI-IW श्रम ब्यूरो; 2014 से CPI (संयुक्त) मुख्य माप; फिलिप्स वक्र 1958।