10 में से पाठ 1 · भारतीय अर्थव्यवस्था

राष्ट्रीय आय: GDP, GNP, NNP और अर्थव्यवस्था के तीन क्षेत्र

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राष्ट्रीय आय क्या मापती है

राष्ट्रीय आय लेखांकन यह मापता है कि कोई अर्थव्यवस्था एक वर्ष में जितनी अंतिम वस्तुएँ और सेवाएँ उत्पन्न करती है, उनका कुल मूल्य कितना है। यह एक प्रवाह (फ्लो) है, जिसे किसी अवधि में मापा जाता है; यह किसी एक समय-बिंदु पर मौजूद भंडार (स्टॉक) नहीं है। केवल अंतिम वस्तुएँ गिनी जाती हैं, क्योंकि कार में लगे इस्पात या ब्रेड में लगे आटे जैसी मध्यवर्ती वस्तुओं को जोड़ने पर एक ही मूल्य दो बार गिना जाएगा (दोहरी गणना)। इससे बचने का सबसे सुरक्षित तरीका उत्पादन के प्रत्येक चरण पर हुए मूल्य वर्धन को जोड़ना है, जो उत्पादन के मूल्य में से मध्यवर्ती उपभोग घटाने पर मिलता है। पुरानी वस्तुओं की बिक्री, वृद्धावस्था पेंशन और छात्रवृत्ति जैसे हस्तांतरण भुगतान, तथा शेयर खरीदने जैसे शुद्ध वित्तीय सौदे इसमें शामिल नहीं किए जाते, क्योंकि उनसे उस वर्ष कोई नया उत्पादन नहीं होता।

घरेलू बनाम राष्ट्रीय, सकल बनाम शुद्ध

घरेलू उत्पाद (GDP) देश के आर्थिक क्षेत्र के भीतर हुए उत्पादन को गिनता है, चाहे उत्पादक कोई भी हो; इसलिए भारत में विदेशी स्वामित्व वाले कारखाने का उत्पादन भी भारत के GDP का भाग है। आर्थिक क्षेत्र में विदेशों में स्थित भारतीय दूतावास और भारतीय निवासियों द्वारा चलाए जाने वाले जहाज और विमान भी शामिल हैं, जबकि नई दिल्ली स्थित विदेशी दूतावास इससे बाहर हैं। राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) देश के सामान्य निवासियों द्वारा किए गए उत्पादन को गिनता है, वे कहीं भी हों; इसलिए GNP = GDP + विदेश से शुद्ध साधन आय (NFIA), जहाँ NFIA निवासियों द्वारा विदेश में अर्जित साधन आय में से अनिवासियों द्वारा भारत में अर्जित साधन आय घटाकर मिलती है। सकल आँकड़ों में मूल्यह्रास, अर्थात मशीनों और भवनों की टूट-फूट (स्थायी पूँजी का उपभोग), शामिल रहता है; शुद्ध आँकड़ों में इसे घटा दिया जाता है। अतः NDP = GDP - मूल्यह्रास और NNP = GNP - मूल्यह्रास।

बाजार मूल्य, साधन लागत और आधारभूत कीमतें

बाजार मूल्य पर आँके गए मूल्य में वस्तुओं पर लगे अप्रत्यक्ष कर शामिल होते हैं और सब्सिडी घट जाती है, इसलिए यह वह राशि है जो खरीदार वास्तव में चुकाता है। साधन लागत वह है जो उत्पादन के साधनों (भूमि, श्रम, पूँजी और उद्यम) को लगान, मजदूरी, ब्याज और लाभ के रूप में मिलता है। दोनों का संबंध है: साधन लागत = बाजार मूल्य - अप्रत्यक्ष कर + सब्सिडी। कड़े अर्थ में राष्ट्रीय आय साधन लागत पर NNP है। जनवरी 2015 में CSO ने एक नई शृंखला जारी की, जिसने आधार वर्ष को 2004-05 से बदलकर 2011-12 कर दिया और क्षेत्रवार उत्पादन को आधारभूत कीमतों पर सकल मूल्य वर्धन (GVA) के रूप में मापना शुरू किया, जो साधन लागत पर GVA + उत्पादन कर - उत्पादन सब्सिडी के बराबर है; फिर GDP = आधारभूत कीमतों पर GVA + उत्पाद कर - उत्पाद सब्सिडी।

वास्तविक, नाममात्र और प्रति व्यक्ति

नाममात्र (नॉमिनल) GDP उत्पादन को चालू वर्ष की कीमतों पर आँकता है, इसलिए केवल कीमतें बढ़ने पर भी यह बढ़ जाता है। वास्तविक GDP उसी उत्पादन को किसी स्थिर आधार वर्ष की कीमतों पर आँकता है, इसलिए इसकी वृद्धि वास्तविक मात्राओं में हुए परिवर्तन को दिखाती है। अनुपात (नाममात्र GDP / वास्तविक GDP) x 100 को GDP अपस्फीतिकारक (डिफ्लेटर) कहते हैं; यह कीमत परिवर्तन का सबसे व्यापक माप है, क्योंकि यह GDP की हर वस्तु और सेवा को समेटता है। आधार वर्ष समय-समय पर बदला जाता है, ताकि कीमतें और क्षेत्रों के भार वर्तमान अर्थव्यवस्था का सही प्रतिनिधित्व करते रहें। प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय आय को जनसंख्या से भाग देने पर मिलती है; औसत होने के कारण यह छिपा लेती है कि आय कितनी असमान रूप से बँटी है।

मापन की तीन विधियाँ

उत्पादन या मूल्य वर्धन विधि प्रत्येक क्षेत्र की हर उत्पादक इकाई द्वारा किए गए मूल्य वर्धन को जोड़ती है। आय विधि उत्पादन से उत्पन्न साधन आयों को जोड़ती है: कर्मचारियों का पारिश्रमिक, लगान, ब्याज, लाभ और स्वरोजगार में लगे लोगों की मिश्रित आय। व्यय विधि अंतिम व्यय को जोड़ती है: निजी उपभोग (C), निवेश (I), सरकारी उपभोग (G) और शुद्ध निर्यात (X - M)। सिद्धांततः तीनों से एक ही योग मिलता है, क्योंकि एक व्यक्ति का व्यय दूसरे की आय होता है। भारत के अनुमान मुख्य रूप से उत्पादन विधि पर आधारित हैं, और जिन क्षेत्रों के उत्पादन का मूल्य आँकना कठिन है, उनके लिए आय विधि भी जोड़ी जाती है; व्यय पक्ष का अनुमान अलग से लगाया जाता है और दोनों का अंतर विसंगतियों (डिस्क्रेपेंसीज) के रूप में दिखाया जाता है।

मापता कौन है, और थोड़ा इतिहास

दादाभाई नौरोजी ने भारत की प्रति व्यक्ति आय का पहला अनुमान, 1867-68 के लिए 20 रुपये प्रति व्यक्ति, अपनी पुस्तक पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया (1901) में दिया। V.K.R.V. राव ने 1931-32 के लिए पहला वैज्ञानिक अनुमान लगाया। स्वतंत्रता के बाद P.C. महालनोबिस की अध्यक्षता वाली 1949 की राष्ट्रीय आय समिति ने आधिकारिक अनुमानों की नींव रखी। 1951 में स्थापित केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) राष्ट्रीय लेखे तैयार करता था, और 1950 में शुरू हुआ राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण (NSS), जिसे बाद में राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) चलाता था, परिवारों के सर्वेक्षण करता था। 2019 में CSO और NSSO का विलय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) में कर दिया गया, जो अब GDP के अनुमान जारी करता है।

तीन क्षेत्र

प्राथमिक क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों का सीधे उपयोग करता है: कृषि, वानिकी, मत्स्यन, तथा खनन और उत्खनन। द्वितीयक क्षेत्र सामग्री का रूप बदलता है: विनिर्माण, निर्माण (कंस्ट्रक्शन), तथा बिजली, गैस और जल आपूर्ति। तृतीयक या सेवा क्षेत्र अन्य क्षेत्रों और परिवारों को सेवाएँ देता है: व्यापार, होटल, परिवहन, संचार, बैंकिंग, बीमा, रियल एस्टेट, लोक प्रशासन, शिक्षा और स्वास्थ्य। अर्थव्यवस्था के विकास के साथ उत्पादन में प्राथमिक क्षेत्र का हिस्सा घटता है और अन्य दो का बढ़ता है। भारत का रास्ता असामान्य है: सेवाएँ GDP का सबसे बड़ा भाग बन गईं, जबकि सबसे अधिक श्रमिक अब भी कृषि में लगे हैं; इसलिए खेती में प्रति श्रमिक उत्पादन कम है और खेतिहर श्रम का बड़ा भाग प्रच्छन्न बेरोजगारी है।

मुख्य तथ्य

  • GNP = GDP + विदेश से शुद्ध साधन आय (NFIA); NFIA = निवासियों द्वारा विदेश में अर्जित साधन आय - अनिवासियों द्वारा देश में अर्जित साधन आय।
  • शुद्ध = सकल - मूल्यह्रास (स्थायी पूँजी का उपभोग): NDP = GDP - मूल्यह्रास; NNP = GNP - मूल्यह्रास।
  • साधन लागत = बाजार मूल्य - अप्रत्यक्ष कर + सब्सिडी; राष्ट्रीय आय = साधन लागत पर NNP।
  • GDP अपस्फीतिकारक = (नाममात्र GDP / वास्तविक GDP) x 100; WPI या CPI के विपरीत यह GDP की सभी वस्तुओं और सेवाओं को समेटता है।
  • तीन विधियाँ: उत्पादन (मूल्य वर्धन), आय (मजदूरी, लगान, ब्याज, लाभ, मिश्रित आय) और व्यय (C + I + G + X - M)।
  • GDP में नहीं गिने जाते: मध्यवर्ती वस्तुएँ, पुरानी वस्तुओं की बिक्री, पेंशन और छात्रवृत्ति जैसे हस्तांतरण भुगतान, तथा शेयरों की खरीद।
  • दादाभाई नौरोजी ने प्रति व्यक्ति आय का पहला अनुमान दिया (1867-68 के लिए 20 रुपये); V.K.R.V. राव ने पहला वैज्ञानिक अनुमान (1931-32)।
  • 1949 की राष्ट्रीय आय समिति के अध्यक्ष P.C. महालनोबिस; CSO (1951) और NSSO (1950 में शुरू हुए NSS का संचालक) का 2019 में MoSPI के अधीन NSO में विलय।
  • जनवरी 2015 की शृंखला ने आधार वर्ष 2004-05 से बदलकर 2011-12 किया और क्षेत्रवार उत्पादन के लिए आधारभूत कीमतों पर GVA शुरू किया।
  • क्षेत्र: प्राथमिक (कृषि, वानिकी, मत्स्यन, खनन), द्वितीयक (विनिर्माण, निर्माण, बिजली-गैस-जल), तृतीयक (सेवाएँ); GDP में सेवाएँ आगे, रोजगार में कृषि।

एक नज़र में दोहराव

राष्ट्रीय आय = साधन लागत पर NNP; GNP = GDP + NFIA; शुद्ध = सकल - मूल्यह्रास; साधन लागत = बाजार मूल्य - अप्रत्यक्ष कर + सब्सिडी; GDP अपस्फीतिकारक = नाममात्र / वास्तविक x 100; विधियाँ: उत्पादन, आय, व्यय (भारत मुख्यतः उत्पादन + आय); नौरोजी 1867-68, V.K.R.V. राव 1931-32, महालनोबिस समिति 1949; CSO 1951 + NSSO (NSS 1950 से) = NSO 2019 (MoSPI); 2015 की शृंखला: आधार 2011-12, आधारभूत कीमतों पर GVA; GDP में सेवाएँ, रोजगार में कृषि आगे।

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