10 में से पाठ 3 · भारत का भूगोल: भौतिक, आर्थिक और मानव
प्रायद्वीपीय पठार, पश्चिमी और पूर्वी घाट, तटीय मैदान, द्वीप समूह और थार
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सबसे प्राचीन भूखंड
प्रायद्वीपीय पठार पुरानी क्रिस्टलीय, आग्नेय और कायांतरित चट्टानों से बना एक मेज़नुमा भूभाग है, जो प्राचीन गोंडवाना भूमि का भाग और भारत का सबसे पुराना व सबसे स्थिर भूखंड है। यह लगभग त्रिभुजाकार है और पूर्व की ओर धीरे-धीरे ढलता है, इसीलिए इसकी अधिकांश बड़ी नदियाँ बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं। इसकी पुरानी चट्टानें इसे भारत के खनिजों का भंडार बनाती हैं। नर्मदा इसे उत्तर में मध्यवर्ती उच्चभूमि और दक्षिण में दक्कन के पठार में बाँटती है।
मध्यवर्ती उच्चभूमि और उसकी श्रेणियाँ
मध्यवर्ती उच्चभूमि नर्मदा के उत्तर में स्थित है और मालवा पठार के अधिकांश भाग को घेरती है। यहाँ की नदियाँ, चंबल, सिंध, बेतवा और केन, दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर बहती हैं, जो ढाल को दर्शाता है। इसके पूर्वी विस्तार बुंदेलखंड और बघेलखंड हैं, और उससे आगे पूर्व में झारखंड का छोटानागपुर पठार है, जिसे दामोदर अपवाहित करती है और जो कोयले व लौह अयस्क से समृद्ध है। उत्तर-पश्चिम में अरावली श्रेणी, जो विश्व के सबसे पुराने वलित पर्वतों में है, गुजरात से दिल्ली तक फैली है; इसकी सबसे ऊँची चोटी राजस्थान में माउंट आबू पर गुरु शिखर (1,722 मीटर) है। विंध्य श्रेणी नर्मदा के उत्तर में और सतपुड़ा श्रेणी नर्मदा और तापी के बीच है; मध्य प्रदेश में पचमढ़ी के पास धूपगढ़ (1,350 मीटर) सतपुड़ा का सर्वोच्च बिंदु है। अमरकंटक में मैकाल श्रेणी नर्मदा और सोन का उद्गम स्थल है।
दक्कन का पठार और घाट
नर्मदा के दक्षिण में स्थित दक्कन का पठार उत्तर में सतपुड़ा श्रेणी से घिरा है, और महादेव, कैमूर और मैकाल श्रेणियाँ इसके पूर्वी विस्तार हैं। इसका उत्तर-पश्चिमी भाग दक्कन ट्रैप है, यानी ज्वालामुखी उद्गारों से बनी बेसाल्ट की परतें, जो अपक्षय से काली मृदा में बदल गईं। पश्चिमी घाट या सह्याद्रि पश्चिमी तट के साथ तापी से कन्याकुमारी तक फैले हैं; ये निरंतर और अधिक ऊँचे (900 से 1,600 मीटर) हैं, और इन्हें थाल घाट (मुंबई-नासिक), भोर घाट (मुंबई-पुणे) तथा केरल और तमिलनाडु के बीच पालघाट (पलक्कड़) दर्रे जैसे मार्गों से पार किया जाता है। इनकी सबसे ऊँची चोटी, केरल की अनामलाई पहाड़ियों में अनाईमुडी (2,695 मीटर), प्रायद्वीपीय भारत का सर्वोच्च बिंदु है; नीलगिरि में डोडाबेट्टा (2,637 मीटर) तमिलनाडु की सबसे ऊँची चोटी है। पूर्वी घाट नीचे (औसतन लगभग 600 मीटर) हैं और महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी द्वारा कटे-फटे हैं; इनमें जावादी और शेवराय पहाड़ियाँ तथा नल्लामला श्रेणी हैं। NCERT ओडिशा के महेंद्रगिरि (1,501 मीटर) को इनकी सबसे ऊँची चोटी बताती है, यद्यपि आंध्र प्रदेश की कुछ चोटियाँ, जैसे अरमा कोंडा, इससे ऊँची हैं। दोनों घाट नीलगिरि पहाड़ियों में मिलते हैं।
तटीय मैदान
पश्चिमी घाट और अरब सागर के बीच का पश्चिमी तटीय मैदान संकरा है और कोंकण तट (मुंबई से गोवा), कन्नड़ या कनारा मैदान (गोवा से मंगलुरु) तथा मालाबार तट (मंगलुरु से कन्याकुमारी) में बँटा है। यह एक जलमग्न तट है जिसमें बड़े डेल्टा नहीं हैं, परंतु अच्छे प्राकृतिक बंदरगाह हैं, और केरल के मालाबार तट पर कयाल नामक पश्च जल (बैकवाटर) हैं, जिनमें वेम्बनाड सबसे बड़ा है। बंगाल की खाड़ी के साथ पूर्वी तटीय मैदान अधिक चौड़ा और समतल है, जो महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी के डेल्टाओं से बना है। इसके उत्तरी भाग को उत्तरी सरकार और दक्षिणी भाग को कोरोमंडल तट कहते हैं। ओडिशा में महानदी डेल्टा के दक्षिण में चिल्का झील स्थित है, जो भारत का सबसे बड़ा खारे पानी का लैगून है।
द्वीप समूह
बंगाल की खाड़ी में अंडमान और निकोबार द्वीप समुद्र में डूबी एक पर्वत शृंखला के उभरे हुए शिखर हैं, जो म्यांमार की अराकान योमा का विस्तार है। ये भूमध्य रेखा के निकट हैं, यहाँ विषुवतीय जलवायु और घने वन हैं, और दस डिग्री चैनल उत्तर के अंडमान समूह को दक्षिण के निकोबार समूह से अलग करता है। बैरन द्वीप भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है और नारकोंडम एक प्रसुप्त ज्वालामुखी; उत्तरी अंडमान में सैडल पीक सबसे ऊँचा बिंदु है; और ग्रेट निकोबार पर इंदिरा पॉइंट भारत का सबसे दक्षिणी बिंदु है। ये द्वीप ग्रेट अंडमानी, ओंगे, जारवा और सेंटिनली जैसी प्राचीन जनजातियों तथा ग्रेट निकोबार की शोम्पेन जनजाति का निवास हैं। केरल के पास अरब सागर में स्थित लक्षद्वीप 36 छोटे प्रवाल द्वीपों का समूह है, जिनमें से अनेक एटॉल हैं; कवरत्ती इसका मुख्यालय है, मिनिकॉय दक्षिण में अलग स्थित है, और पिट्टी द्वीप पर पक्षी विहार है।
थार मरुस्थल
अरावली के पश्चिम में थार या महान भारतीय मरुस्थल है, एक लहरदार रेतीला मैदान जो अधिकतर राजस्थान में है और पाकिस्तान तक फैला है। यहाँ वर्ष में 150 मिमी से कम वर्षा होती है, वनस्पति विरल है, और यह बरखान नामक अर्धचंद्राकार टीलों से ढका है। नदियाँ केवल वर्षा ऋतु में दिखती हैं और फिर रेत में समा जाती हैं; लूणी एकमात्र बड़ी नदी है, जो अजमेर के पास अरावली से दक्षिण-पश्चिम की ओर बहकर समुद्र तक पहुँचे बिना कच्छ के रण में समाप्त हो जाती है। आंतरिक अपवाह ने सांभर, डीडवाना और पचपदरा जैसी खारी झीलें छोड़ी हैं। थार के पूर्व की अर्ध-शुष्क पट्टी को बागड़ कहते हैं। पंजाब में ब्यास-सतलुज संगम पर हरिके बैराज से जल पाने वाली इंदिरा गांधी नहर ने मरुस्थल में सिंचाई पहुँचाई है, और जैसलमेर के पास मरु राष्ट्रीय उद्यान ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) को आश्रय देता है। इसके विपरीत, लद्दाख एक शीत मरुस्थल है।
मुख्य तथ्य
- प्रायद्वीपीय पठार: सबसे पुराना भूखंड, गोंडवाना भूमि का भाग; नर्मदा इसे मध्यवर्ती उच्चभूमि (उत्तर) और दक्कन के पठार (दक्षिण) में बाँटती है।
- अरावली, सबसे पुराने वलित पर्वतों में: सबसे ऊँची चोटी गुरु शिखर (1,722 मीटर), माउंट आबू, राजस्थान; सतपुड़ा का सर्वोच्च बिंदु पचमढ़ी के पास धूपगढ़ (1,350 मीटर)।
- पश्चिमी घाट (सह्याद्रि): निरंतर, 900-1,600 मीटर; अनाईमुडी 2,695 मीटर (केरल) प्रायद्वीपीय भारत में सर्वोच्च; डोडाबेट्टा 2,637 मीटर (नीलगिरि); दर्रे थाल घाट, भोर घाट, पालघाट।
- पूर्वी घाट: नदियों से कटे-फटे, लगभग 600 मीटर; जावादी, शेवराय, नल्लामला; NCERT में महेंद्रगिरि (1,501 मीटर, ओडिशा) सर्वोच्च; दोनों घाट नीलगिरि में मिलते हैं।
- पश्चिमी तट: कोंकण (मुंबई-गोवा), कनारा (गोवा-मंगलुरु), मालाबार (मंगलुरु-कन्याकुमारी, कयाल सहित); पूर्वी तट: उत्तरी सरकार (उत्तर) और कोरोमंडल (दक्षिण)।
- अंडमान और निकोबार: इनके बीच दस डिग्री चैनल; बैरन द्वीप एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी, नारकोंडम प्रसुप्त; सैडल पीक सबसे ऊँचा; इंदिरा पॉइंट सबसे दक्षिणी।
- लक्षद्वीप: अरब सागर में 36 प्रवाल द्वीप; कवरत्ती मुख्यालय; मिनिकॉय सुदूर दक्षिण में; पिट्टी द्वीप पर पक्षी विहार।
- थार: 150 मिमी से कम वर्षा, बरखान टीले; लूणी कच्छ के रण में समाप्त; खारी झीलें सांभर, डीडवाना, पचपदरा; इंदिरा गांधी नहर हरिके बैराज से।
- दामोदर द्वारा अपवाहित छोटानागपुर पठार (झारखंड) खनिजों का भंडार है; दक्कन ट्रैप की बेसाल्ट अपक्षय से काली मृदा बनाती है।
एक नज़र में दोहराव
प्रायद्वीपीय पठार: सबसे पुराना, गोंडवाना, पूर्व की ओर ढाल; मध्यवर्ती उच्चभूमि (मालवा, बुंदेलखंड, बघेलखंड, छोटानागपुर) और दक्कन; गुरु शिखर 1,722 मीटर (अरावली), धूपगढ़ 1,350 मीटर (सतपुड़ा); पश्चिमी घाट निरंतर, अनाईमुडी 2,695 मीटर; पूर्वी घाट कटे-फटे, महेंद्रगिरि 1,501 मीटर; पश्चिम में कोंकण, कनारा, मालाबार, पूर्व में उत्तरी सरकार और कोरोमंडल; बैरन द्वीप सक्रिय ज्वालामुखी; लक्षद्वीप 36 प्रवाल द्वीप; थार में 150 मिमी से कम वर्षा, लूणी कच्छ के रण में।