10 में से पाठ 4 · भारत का भूगोल: भौतिक, आर्थिक और मानव

हिमालयी नदी तंत्र: सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र तथा उनकी सहायक नदियाँ

AI की सहायता से तैयार किया गया और 28 अक्टूबर 2026 को तथ्यों की जाँच की गई; किसी मानव संपादक ने इसे अभी पंक्ति-दर-पंक्ति नहीं पढ़ा है। कोई गलती दिखे तो हमें बताइए। संपादकीय मानक और सुधार

हिमालयी नदियाँ अलग क्यों हैं

हिमालयी नदियाँ सदानीरा हैं, जिन्हें वर्षा के साथ-साथ पिघलती बर्फ और हिमनदों से भी जल मिलता है, इसलिए ये पूरे वर्ष बहती हैं। सिंधु, सतलुज और ब्रह्मपुत्र जैसी कुछ नदियाँ उन श्रेणियों से भी पुरानी हैं जिन्हें वे पार करती हैं, और पर्वतों के उठने के साथ उन्होंने गहरे महाखड्ड काटे। मैदानों में ये विसर्पण करती हैं, मार्ग बदलती हैं और चौड़े बाढ़ के मैदान व डेल्टा बनाती हैं। उत्तरी भारत को तीन बड़े तंत्र अपवाहित करते हैं: सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र। प्रत्येक नदी के लिए याद रखें कि वह कहाँ से निकलती है, कौन-सी सहायक नदियाँ किस तट पर मिलती हैं, और कौन-से नगर उसके किनारे बसे हैं।

सिंधु तंत्र

सिंधु तिब्बत में मानसरोवर झील के पास से निकलती है, लद्दाख में भारत में प्रवेश करती है, लद्दाख और ज़ास्कर श्रेणियों के बीच लेह से होती हुई उत्तर-पश्चिम की ओर बहती है, और फिर दक्षिण की ओर मुड़कर पाकिस्तान से होती हुई कराची के पास अरब सागर में गिरती है। इसकी लंबाई लगभग 2,880 किमी है, जिसमें से 1,114 किमी भारत में है। लद्दाख में इसमें ज़ास्कर, श्योक और नुब्रा मिलती हैं। पंजाब की इसकी पाँच सहायक नदियाँ पंचनद के रूप में मिलकर पाकिस्तान में मिठनकोट के पास इससे जुड़ती हैं। झेलम कश्मीर घाटी में वेरीनाग झरने से निकलती है, श्रीनगर और वुलर झील से होकर बहती है और पाकिस्तान में चिनाब से मिलती है। सबसे बड़ी सहायक नदी चिनाब हिमाचल प्रदेश में तांडी पर चंद्रा और भागा के मिलने से बनती है, इसलिए इसे चंद्रभागा भी कहते हैं। रावी रोहतांग दर्रे के पास से निकलकर चंबा घाटी को अपवाहित करती है। ब्यास रोहतांग के पास ब्यास कुंड से निकलती है, कुल्लू घाटी से बहती है और पंजाब में हरिके पर सतलुज से मिलती है; यह पूरी तरह भारत में बहती है। सतलुज मानसरोवर के पास राकस ताल से निकलती है और शिपकी ला पर भारत में प्रवेश करती है।

सिंधु जल संधि, 1960

चूँकि ये नदियाँ भारत से पाकिस्तान में बहती हैं, इसलिए दोनों देशों ने विश्व बैंक की मध्यस्थता से 19 सितंबर 1960 को कराची में सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए; इस पर प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए। भारत को तीन पूर्वी नदियाँ, रावी, ब्यास और सतलुज, मिलीं, और पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियाँ, सिंधु, झेलम और चिनाब, जिन पर भारत घरेलू आवश्यकताओं, सिंचाई और नदी-प्रवाह (रन-ऑफ-द-रिवर) जलविद्युत के लिए सीमित उपयोग कर सकता है। कुल मिलाकर भारत सिंधु तंत्र के जल का केवल लगभग 20 प्रतिशत उपयोग कर सकता है। संधि ने आँकड़े साझा करने और नदियों से जुड़े प्रश्न सुलझाने के लिए दोनों देशों के एक-एक आयुक्त वाला स्थायी सिंधु आयोग बनाया। इन नदियों पर बनी परियोजनाओं में सतलुज पर भाखड़ा, ब्यास पर पौंग, रावी पर रणजीत सागर और चिनाब पर सलाल और बगलिहार शामिल हैं।

गंगा और उसका मार्ग

लगभग 2,525 किमी लंबी गंगा भारत की सबसे लंबी नदी है। यह उत्तराखंड में गंगोत्री हिमनद के मुहाने गोमुख से भागीरथी के रूप में निकलती है, और देवप्रयाग में इसमें अलकनंदा मिलती है, जो बद्रीनाथ के ऊपर सतोपंथ हिमनद से निकलती है; देवप्रयाग के बाद ही इसे गंगा कहा जाता है। यह हरिद्वार में मैदान में प्रवेश करती है और उत्तर प्रदेश, जिसमें इसका सबसे लंबा भाग है, बिहार, झारखंड के एक छोटे भाग और पश्चिम बंगाल से होकर बहती है। फरक्का में यह बँट जाती है: भागीरथी-हुगली कोलकाता से होती हुई दक्षिण में बंगाल की खाड़ी में जाती है, जबकि मुख्य धारा पद्मा के रूप में बांग्लादेश में प्रवेश करती है, जहाँ इसमें ब्रह्मपुत्र और फिर मेघना मिलती हैं और सुंदरबन डेल्टा बनता है। 2008 में गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित किया गया। हरिद्वार, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, पटना और भागलपुर इसके तट पर बसे हैं।

गंगा की सहायक नदियाँ

बाएँ (उत्तरी) तट पर, अधिकतर हिमालय और नेपाल से, रामगंगा, गोमती (लखनऊ, जौनपुर), घाघरा (अयोध्या में सरयू कहलाती है और छपरा के पास मिलती है), गंडक (पटना के पास मिलती है), कोसी (बिहार का शोक, जो मार्ग बदलने के लिए जानी जाती है) और महानंदा मिलती हैं। दाएँ (दक्षिणी) तट पर यमुना और सोन मिलती हैं। सबसे लंबी सहायक नदी यमुना बंदरपूँछ श्रेणी पर यमुनोत्री हिमनद से निकलती है, दिल्ली, मथुरा और आगरा से होकर बहती है और प्रयागराज में गंगा से मिलती है; इसकी दाएँ तट की सहायक नदियाँ, चंबल (कोटा), सिंध, बेतवा और केन, पठार से आती हैं। सोन अमरकंटक से निकलकर पटना के पश्चिम में गंगा से मिलती है। बंगाल का शोक दामोदर छोटानागपुर पठार की एक भ्रंश घाटी से बहकर हुगली से मिलती है।

ब्रह्मपुत्र तंत्र

ब्रह्मपुत्र मानसरोवर के पास कैलाश श्रेणी के चेमायुंगडुंग हिमनद से निकलती है और त्सांगपो के रूप में दक्षिणी तिब्बत में पूर्व की ओर बहती है। नामचा बरवा के पास यह तीखा मोड़ लेकर एक गहरे महाखड्ड से सियांग या दिहांग के रूप में अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करती है। सादिया के पास दिबांग और लोहित के मिलने पर यह ब्रह्मपुत्र बनती है और असम में डिब्रूगढ़, तेजपुर और गुवाहाटी से होकर पश्चिम की ओर एक चौड़ी गुंफित धारा में बहती है, जिसमें माजुली जैसे द्वीप हैं। इसकी दाएँ तट की सहायक नदियों में सुबनसिरी (सबसे बड़ी), कामेंग, मानस और संकोश, तथा बांग्लादेश में मिलने वाली तीस्ता हैं; बाएँ तट की सहायक नदियों में बूढ़ी दिहिंग, धनसिरी और कोपिली हैं। बांग्लादेश में इसे जमुना कहते हैं। यह लगभग 2,900 किमी लंबी है, बहुत अधिक जल और गाद ले जाती है, और लगभग हर वर्ष असम में बाढ़ लाती है।

मुख्य तथ्य

  • सिंधु: मानसरोवर (तिब्बत) के पास से निकलती है, लद्दाख में भारत में प्रवेश करती है, लेह से होकर बहती है; लगभग 2,880 किमी, 1,114 किमी भारत में; पंचनद मिठनकोट (पाकिस्तान) पर मिलती है।
  • झेलम: वेरीनाग झरना, श्रीनगर, वुलर झील। चिनाब (सिंधु की सबसे बड़ी सहायक): तांडी (हि.प्र.) पर चंद्रा और भागा का संगम। ब्यास: ब्यास कुंड, कुल्लू घाटी, हरिके पर सतलुज से मिलन।
  • सतलुज: राकस ताल (तिब्बत), शिपकी ला पर भारत में प्रवेश, भाखड़ा बाँध; रावी: रोहतांग के पास, चंबा घाटी, रणजीत सागर बाँध।
  • सिंधु जल संधि: 19 सितंबर 1960, कराची, विश्व बैंक की मध्यस्थता, नेहरू और अयूब खान; पूर्वी नदियाँ (रावी, ब्यास, सतलुज) भारत को, पश्चिमी नदियाँ (सिंधु, झेलम, चिनाब) पाकिस्तान को।
  • गंगा: भागीरथी (गोमुख, गंगोत्री हिमनद) और अलकनंदा (सतोपंथ हिमनद) देवप्रयाग में मिलती हैं; लगभग 2,525 किमी; 2008 से राष्ट्रीय नदी; फरक्का पर हुगली और पद्मा में बँटती है।
  • गंगा की बाएँ तट की सहायक: रामगंगा, गोमती, घाघरा, गंडक, कोसी, महानंदा; दाएँ तट की: यमुना (सबसे लंबी सहायक, प्रयागराज में मिलती है) और सोन (अमरकंटक से)।
  • पठार से आने वाली यमुना की दाएँ तट की सहायक नदियाँ: चंबल, सिंध, बेतवा, केन। कोसी बिहार का शोक और दामोदर बंगाल का शोक है।
  • ब्रह्मपुत्र के नाम: तिब्बत में त्सांगपो, अरुणाचल में सियांग या दिहांग, सादिया के पास दिबांग और लोहित के मिलने के बाद ब्रह्मपुत्र, बांग्लादेश में जमुना।
  • ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियाँ: दायाँ तट - सुबनसिरी (सबसे बड़ी), कामेंग, मानस, संकोश, तीस्ता; बायाँ तट - बूढ़ी दिहिंग, धनसिरी, कोपिली।
  • नगर-नदी युग्म: लेह-सिंधु, श्रीनगर-झेलम, दिल्ली और आगरा-यमुना, लखनऊ-गोमती, अयोध्या-सरयू, कोटा-चंबल, वाराणसी और पटना-गंगा, कोलकाता-हुगली, गुवाहाटी-ब्रह्मपुत्र।

एक नज़र में दोहराव

हिमालयी नदियाँ सदानीरा; सिंधु लगभग 2,880 किमी (1,114 किमी भारत में), लेह इसके तट पर, पंचनद मिठनकोट पर मिलती है; चिनाब सबसे बड़ी सहायक (चंद्रा + भागा); सिंधु जल संधि 19 सितंबर 1960: रावी, ब्यास, सतलुज भारत को; गंगा लगभग 2,525 किमी, देवप्रयाग में भागीरथी + अलकनंदा, 2008 में राष्ट्रीय नदी; यमुना सबसे लंबी सहायक; कोसी बिहार का शोक, दामोदर बंगाल का शोक; ब्रह्मपुत्र = त्सांगपो, सियांग, जमुना; सुबनसिरी सबसे बड़ी सहायक।

इस विषय का अभ्यास करें

भारत का भूगोल: भौतिक, आर्थिक और मानव के सभी 10 पाठ