10 में से पाठ 5 · भारत का भूगोल: भौतिक, आर्थिक और मानव

प्रायद्वीपीय नदियाँ, झीलें, जलप्रपात और बहुउद्देशीय नदी परियोजनाएँ

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प्रायद्वीपीय नदियाँ कैसे भिन्न हैं

प्रायद्वीपीय नदियाँ पुरानी हैं, निश्चित मार्गों पर चौड़ी और उथली घाटियों में बहती हैं, और मुख्यतः वर्षा पर निर्भर हैं, इसलिए शुष्क ऋतु में इनमें से कई सिकुड़ जाती हैं। पश्चिमी घाट मुख्य जल-विभाजक हैं। अधिकांश नदियाँ वहीं से निकलकर पूर्व में बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं और डेल्टा बनाती हैं, जबकि कुछ नदियाँ भ्रंश घाटियों या छोटे, तीव्र ढाल वाले मार्गों से पश्चिम में अरब सागर में गिरती हैं और डेल्टा के बजाय ज्वारनदमुख (एस्चुअरी) बनाती हैं। कावेरी अन्य नदियों की तुलना में अधिक समान रूप से बहती है, क्योंकि इसके बेसिन को दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पूर्व दोनों मानसूनों से वर्षा मिलती है।

पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ

महानदी (लगभग 851 किमी) छत्तीसगढ़ में सिहावा के पास से निकलती है, ओडिशा में संबलपुर और कटक से होकर बहती है और डेल्टा बनाती है; इस पर हीराकुंड बाँध है। गोदावरी (लगभग 1,465 किमी), सबसे बड़ी प्रायद्वीपीय नदी, जिसे दक्षिण गंगा कहते हैं, महाराष्ट्र में नासिक के पास त्र्यंबकेश्वर से निकलती है और तेलंगाना व आंध्र प्रदेश से होकर बहती है; इसकी सहायक नदियों में पूर्णा, प्राणहिता (जो वैनगंगा, वर्धा और पेनगंगा का जल लाती है), इंद्रावती और मंजरा हैं। कृष्णा (लगभग 1,401 किमी) सह्याद्रि में महाबलेश्वर के पास से निकलती है और महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से होकर विजयवाड़ा के नीचे अपने डेल्टा तक जाती है; कोयना, भीमा, तुंगभद्रा और मूसी (हैदराबाद) इसकी सहायक नदियाँ हैं। कावेरी (लगभग 800 किमी) कर्नाटक के कोडगु की ब्रह्मगिरि पहाड़ियों में तालकावेरी से निकलती है और तमिलनाडु से होकर तंजावुर के आसपास अपने डेल्टा तक जाती है, जिसे तमिलनाडु का धान का कटोरा कहते हैं; काबिनी, हेमावती, भवानी और अमरावती इसमें मिलती हैं, और तिरुचिरापल्ली इसके तट पर है। पूर्व की ओर बहने वाली छोटी नदियों में स्वर्णरेखा, ब्राह्मणी, वैतरणी, पेन्नेरु और वैगई (मदुरै) हैं।

पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ

नर्मदा (लगभग 1,312 किमी), पश्चिम की ओर बहने वाली सबसे बड़ी नदी, मध्य प्रदेश में अमरकंटक से निकलती है और विंध्य व सतपुड़ा श्रेणियों के बीच एक भ्रंश घाटी में पश्चिम की ओर बहती है; जबलपुर के पास यह संगमरमर चट्टानों (भेड़ाघाट) का महाखड्ड काटती है और धुआँधार जलप्रपात बनाती है, और भरूच के पास ज्वारनदमुख से खंभात की खाड़ी में पहुँचती है। तापी (लगभग 724 किमी) मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में मुलताई से निकलती है, सतपुड़ा के दक्षिण में एक समानांतर भ्रंश घाटी में बहती है और सूरत के पास समुद्र में मिलती है। साबरमती (अहमदाबाद, गांधीनगर) और कर्क रेखा को दो बार पार करने वाली माही भी खंभात की खाड़ी में गिरती हैं। पश्चिम की ओर बहने वाली छोटी, तीव्र नदियों में गोवा की मांडवी और जुआरी, कर्नाटक की शरावती और केरल की पेरियार हैं।

झीलें

जम्मू और कश्मीर में झेलम पर स्थित वुलर, जो आंशिक रूप से विवर्तनिक क्रिया से बनी है, भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है; डल झील श्रीनगर में है। ओडिशा की चिल्का सबसे बड़ा खारे पानी का लैगून है, और आंध्र प्रदेश-तमिलनाडु सीमा पर पुलिकट दूसरा सबसे बड़ा है, जिसके और समुद्र के बीच श्रीहरिकोटा द्वीप है। कोलेरू गोदावरी और कृष्णा डेल्टाओं के बीच मीठे पानी की झील है। केरल की वेम्बनाड भारत की सबसे लंबी झील है, और राजस्थान की सांभर सबसे बड़ी अंतःस्थलीय खारी झील। मणिपुर की लोकटक झील में फुमदी नामक तैरते वनस्पति द्वीप हैं, जिन पर एकमात्र तैरता राष्ट्रीय उद्यान केइबुल लामजाओ संगाई हिरण की रक्षा करता है। महाराष्ट्र की लोनार झील बेसाल्ट पर उल्कापिंड के टकराने से बनी एक क्रेटर झील है।

जलप्रपात

जोग (गेरसोप्पा) प्रपात कर्नाटक में शरावती पर है; शिवसमुद्रम (कर्नाटक) और होगेनक्कल (तमिलनाडु) कावेरी पर हैं; दूधसागर गोवा-कर्नाटक सीमा पर मांडवी पर है; भारत का सबसे चौड़ा प्रपात चित्रकोट, जिसे भारत का नियाग्रा कहते हैं, छत्तीसगढ़ के बस्तर में इंद्रावती पर है; धुआँधार जबलपुर के पास नर्मदा पर है; और हुंडरू रांची के पास स्वर्णरेखा पर है।

बहुउद्देशीय परियोजनाएँ

जवाहरलाल नेहरू ने बाँधों को आधुनिक भारत के मंदिर कहा था, क्योंकि एक ही परियोजना सिंचाई, जलविद्युत, बाढ़ नियंत्रण और पेयजल एक साथ दे सकती है। अमेरिका के टेनेसी घाटी प्राधिकरण के नमूने पर बना दामोदर घाटी निगम (1948) स्वतंत्र भारत की पहली बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना था, जिसमें तिलैया, कोनार, मैथन और पंचेत जैसे बाँध हैं। ये युग्म याद रखें: सतलुज पर भाखड़ा नांगल (हिमाचल प्रदेश-पंजाब, गोबिंद सागर झील); भागीरथी पर टिहरी (उत्तराखंड), भारत का सबसे ऊँचा बाँध; महानदी पर हीराकुंड (ओडिशा), विश्व के सबसे लंबे बाँधों में से एक; नर्मदा पर सरदार सरोवर (गुजरात) और इंदिरा सागर (मध्य प्रदेश); तापी पर उकाई (गुजरात); कृष्णा पर नागार्जुन सागर और श्रीशैलम (तेलंगाना-आंध्र प्रदेश); तुंगभद्रा नदी पर तुंगभद्रा बाँध (कर्नाटक); कावेरी पर कृष्णराज सागर (कर्नाटक) और मेट्टूर (तमिलनाडु); चंबल पर गांधी सागर, राणा प्रताप सागर और जवाहर सागर; सोन की सहायक रिहंद नदी पर रिहंद (गोविंद बल्लभ पंत सागर, उत्तर प्रदेश); और पेरियार पर इडुक्की (केरल)। पश्चिम बंगाल में गंगा पर फरक्का बैराज कोलकाता बंदरगाह को नौगम्य रखने के लिए हुगली में जल भेजता है।

मुख्य तथ्य

  • पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ डेल्टा बनाती हैं: महानदी (सिहावा, छत्तीसगढ़; लगभग 851 किमी), गोदावरी (त्र्यंबकेश्वर; लगभग 1,465 किमी, दक्षिण गंगा), कृष्णा (महाबलेश्वर; लगभग 1,401 किमी), कावेरी (तालकावेरी; लगभग 800 किमी)।
  • पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ ज्वारनदमुख बनाती हैं: नर्मदा (अमरकंटक; लगभग 1,312 किमी, विंध्य और सतपुड़ा के बीच भ्रंश घाटी) और तापी (मुलताई, बैतूल; लगभग 724 किमी); दोनों खंभात की खाड़ी में गिरती हैं।
  • सहायक नदियाँ: गोदावरी - प्राणहिता, इंद्रावती, मंजरा, पूर्णा; कृष्णा - कोयना, भीमा, तुंगभद्रा, मूसी; कावेरी - काबिनी, हेमावती, भवानी, अमरावती।
  • झीलें: वुलर (सबसे बड़ी मीठे पानी की, जम्मू-कश्मीर), चिल्का (सबसे बड़ा लैगून, ओडिशा), पुलिकट (आंध्र-तमिलनाडु), कोलेरू (आंध्र), वेम्बनाड (सबसे लंबी, केरल), सांभर (खारी, राजस्थान), लोकटक (फुमदी, मणिपुर), लोनार (क्रेटर, महाराष्ट्र)।
  • प्रपात-नदी युग्म: जोग-शरावती, शिवसमुद्रम और होगेनक्कल-कावेरी, दूधसागर-मांडवी, चित्रकोट-इंद्रावती, धुआँधार-नर्मदा, हुंडरू-स्वर्णरेखा।
  • बाँध-नदी युग्म: भाखड़ा-सतलुज, टिहरी-भागीरथी, हीराकुंड-महानदी, सरदार सरोवर और इंदिरा सागर-नर्मदा, उकाई-तापी, नागार्जुन सागर और श्रीशैलम-कृष्णा, मेट्टूर और कृष्णराज सागर-कावेरी, इडुक्की-पेरियार।
  • टेनेसी घाटी प्राधिकरण के नमूने पर बना दामोदर घाटी निगम (1948) स्वतंत्र भारत की पहली बहुउद्देशीय परियोजना था; टिहरी भारत का सबसे ऊँचा बाँध है।
  • चंबल के बाँध: गांधी सागर (म.प्र.), राणा प्रताप सागर और जवाहर सागर (राजस्थान); रिहंद बाँध गोविंद बल्लभ पंत सागर बनाता है (उ.प्र.); फरक्का बैराज हुगली को जल देता है।

एक नज़र में दोहराव

प्रायद्वीपीय नदियाँ पुरानी, वर्षा-पोषित, निश्चित मार्ग वाली; पूर्व की ओर बहने वाली महानदी, गोदावरी (सबसे बड़ी, लगभग 1,465 किमी, दक्षिण गंगा), कृष्णा, कावेरी डेल्टा बनाती हैं; पश्चिम की ओर बहने वाली नर्मदा और तापी भ्रंश घाटियों में बहकर ज्वारनदमुख बनाती हैं; वुलर सबसे बड़ी मीठे पानी की झील, चिल्का सबसे बड़ा लैगून, सांभर खारी झील, लोकटक में फुमदी; जोग शरावती पर, चित्रकोट इंद्रावती पर; DVC 1948 पहली बहुउद्देशीय परियोजना; भाखड़ा-सतलुज, हीराकुंड-महानदी, टिहरी सबसे ऊँचा बाँध।

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