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मध्यप्रदेश के स्मारक, तीर्थ स्थल और प्रसिद्ध व्यक्तित्व

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विश्व धरोहर स्थल

यूनेस्को ने खजुराहो स्मारक समूह (1986), साँची के बौद्ध स्मारक (1989) और भीमबेटका के शैलाश्रय (2003) को अपनी विश्व धरोहर सूची में शामिल किया है। छतरपुर जिले के खजुराहो मंदिर तीन समूहों में बँटे हैं: कंदरिया महादेव, लक्ष्मण, विश्वनाथ और चित्रगुप्त मंदिरों वाला पश्चिमी समूह, पार्श्वनाथ और आदिनाथ जैसे जैन मंदिरों वाला पूर्वी समूह, और दक्षिणी समूह; चौंसठ योगिनी सबसे पुराना मंदिर है, और ब्रिटिश अधिकारी टी. एस. बर्ट 1838 में इस स्थल को व्यापक ध्यान में लाए। रायसेन जिले के साँची में चार तोरणों वाला महास्तूप, बुद्ध के शिष्यों सारिपुत्र और महामोग्गलान के अवशेषों वाला स्तूप 3, गुप्तकालीन मंदिर 17 और अशोक का स्तंभ है। रायसेन जिले में ही स्थित भीमबेटका प्रागैतिहासिक शैलचित्रों को सँजोए है।

ग्वालियर का किला

गोपाचल पहाड़ी पर स्थित इस किले में अनेक राजवंशों के स्मारक हैं। विशाल तेली का मंदिर प्रतिहार युग का माना जाता है, सास-बहू मंदिर 1093 के हैं, और एक छोटे चतुर्भुज मंदिर में 876 ई. का अभिलेख है, जिसमें शून्य अंक के सबसे पुराने तिथियुक्त प्रयोगों में से एक मिलता है। मानसिंह तोमर का मान मंदिर महल रंगीन टाइलों से सजा है, और उनका गूजरी महल अब पुरातत्व संग्रहालय है। गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ किले की कैद से गुरु हरगोविंद की रिहाई की स्मृति में है। नीचे नगर में मुहम्मद गौस और तानसेन के मकबरे, सिंधियाओं का जय विलास महल और रानी लक्ष्मीबाई की समाधि हैं।

मांडू, ओरछा और महेश्वर

धार जिले में मालवा के सुल्तानों के 'आनंद नगर' मांडू में दो झीलों के बीच जहाज महल, ढलवाँ दीवारों वाला हिंडोला महल, होशंगशाह का संगमरमर का मकबरा, जामा मस्जिद, बाज बहादुर का महल और नर्मदा घाटी की ओर देखता रूपमती मंडप है। बेतवा तट पर ओरछा में राजा महल, जहाँगीर महल, बुंदेला राजाओं की नदी किनारे की छतरियाँ और राम राजा मंदिर है, जहाँ राम की राजा के रूप में पूजा होती है और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। अहिल्याबाई होलकर की राजधानी महेश्वर में नर्मदा तट पर किला और घाट हैं, और इसकी पहचान प्राचीन माहिष्मती से की जाती है।

ज्योतिर्लिंग और तीर्थ स्थल

बारह ज्योतिर्लिंगों में से दो मध्यप्रदेश में हैं। उज्जैन में शिप्रा तट पर महाकालेश्वर दक्षिणमुखी शिवलिंग है, जो भोर की भस्म आरती के लिए प्रसिद्ध है, और ओंकारेश्वर खंडवा जिले में नर्मदा के मांधाता द्वीप पर स्थित है, जिसका आकार ॐ जैसा माना जाता है। अन्य केंद्रों में नर्मदा का उद्गम अमरकंटक; सतना जिले में मंदाकिनी तट पर चित्रकूट, जो राम के वनवास से जुड़ा है और उत्तर प्रदेश के साथ साझा है; मैहर का शारदा देवी मंदिर; दतिया की पीतांबरा पीठ; दतिया के पास सोनागिर की जैन पहाड़ी; और बौद्धों के लिए साँची शामिल हैं।

अन्य दर्शनीय स्थल

पर्यटक भोजपुर के भोजेश्वर मंदिर, उदयगिरि गुफाओं, भेड़ाघाट की संगमरमर चट्टानों, पांडव गुफाओं और बी फॉल वाले पचमढ़ी, सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा उज्जैन में बनवाई गई जंतर-मंतर वेधशाला, इंदौर के राजवाड़ा और लालबाग पैलेस, एशिया की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक भोपाल की ताज-उल-मसाजिद, और बुरहानपुर के पास असीरगढ़ किले को भी देखने जाते हैं।

व्यक्तित्व

आधुनिक भारत के कई निर्माता मध्यप्रदेश में जन्मे। डॉ. बी. आर. आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को महू में, चंद्रशेखर आज़ाद का 1906 में भाबरा में और अटल बिहारी वाजपेयी का 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ; भारत के नौवें राष्ट्रपति डॉ. शंकरदयाल शर्मा का जन्म 1918 में भोपाल में हुआ। प्रख्यात विधिवेत्ता और दिल्ली विश्वविद्यालय के पहले कुलपति डॉ. हरिसिंह गौर ने 1946 में अपनी निजी बचत से सागर विश्वविद्यालय की स्थापना की। ओशो (रजनीश) का जन्म रायसेन जिले के कुचवाड़ा में हुआ, और उन्होंने जबलपुर में दर्शनशास्त्र पढ़ाया।

लेखक और कलाकार

लता मंगेशकर का जन्म इंदौर में और किशोर कुमार का खंडवा में, दोनों का 1929 में हुआ, और राज्य उनके नाम पर राष्ट्रीय सम्मान देता है। नर्मदापुरम जिले के बाबई में जन्मे माखनलाल चतुर्वेदी को 1955 में 'हिमतरंगिनी' के लिए हिंदी का पहला साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। 'अँधेरे में' के रचयिता गजानन माधव मुक्तिबोध का जन्म श्योपुर में और 'गीत फ़रोश' लिखने वाले भवानी प्रसाद मिश्र का नर्मदापुरम जिले में हुआ। व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई का जन्म भी नर्मदापुरम जिले में इटारसी के पास जमानी में हुआ, और उन्हें 1982 में 'विकलांग श्रद्धा का दौर' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। भ्रम से बचें: जबलपुर में रहकर कार्य करने वाली सुभद्राकुमारी चौहान का जन्म इलाहाबाद के पास हुआ था, और मैहर के उस्ताद अलाउद्दीन खाँ बंगाल में जन्मे थे।

मुख्य तथ्य

  • यूनेस्को विश्व धरोहर: खजुराहो स्मारक समूह (1986), साँची के बौद्ध स्मारक (1989), भीमबेटका के शैलाश्रय (2003)।
  • खजुराहो (छतरपुर): पश्चिमी, पूर्वी (जैन) और दक्षिणी समूह; कंदरिया महादेव सबसे बड़ा; 1838 में टी. एस. बर्ट इसे व्यापक ध्यान में लाए।
  • साँची (रायसेन): चार तोरणों वाला महास्तूप, सारिपुत्र और महामोग्गलान के अवशेषों वाला स्तूप 3, गुप्तकालीन मंदिर 17।
  • ग्वालियर किला: तेली का मंदिर, सास-बहू मंदिर (1093), चतुर्भुज मंदिर का शून्य अभिलेख (876 ई.), मान मंदिर, गूजरी महल, गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़।
  • मांडू (धार): जहाज महल, हिंडोला महल, होशंगशाह का संगमरमर का मकबरा, रूपमती मंडप।
  • ओरछा (बेतवा तट): राजा महल, जहाँगीर महल, बुंदेला छतरियाँ और राम राजा मंदिर, जहाँ राम की राजा के रूप में पूजा होती है।
  • ज्योतिर्लिंग: महाकालेश्वर (उज्जैन, शिप्रा तट, दक्षिणमुखी, भस्म आरती) और ओंकारेश्वर (नर्मदा में मांधाता द्वीप, खंडवा)।
  • जन्मस्थान: आंबेडकर महू (1891), आज़ाद भाबरा (1906), वाजपेयी ग्वालियर (1924), शंकरदयाल शर्मा भोपाल (1918)।
  • कला और साहित्य: लता मंगेशकर (इंदौर), किशोर कुमार (खंडवा), माखनलाल चतुर्वेदी (बाबई; हिंदी का पहला साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1955), मुक्तिबोध (श्योपुर), हरिशंकर परसाई (जमानी; 'विकलांग श्रद्धा का दौर' के लिए 1982 का साहित्य अकादमी पुरस्कार)।
  • भ्रम: सुभद्राकुमारी चौहान का जन्म इलाहाबाद के पास हुआ, पर कार्यक्षेत्र जबलपुर रहा; मैहर के अलाउद्दीन खाँ बंगाल में जन्मे; रानी लक्ष्मीबाई की झाँसी उत्तर प्रदेश में है।

एक नज़र में दोहराव

यूनेस्को: खजुराहो 1986, साँची 1989, भीमबेटका 2003; खजुराहो के पश्चिमी, पूर्वी (जैन), दक्षिणी समूह, टी. एस. बर्ट 1838; साँची स्तूप 3 में सारिपुत्र के अवशेष; ग्वालियर किला: तेली का मंदिर, सास-बहू 1093, शून्य अभिलेख 876 ई., मान मंदिर; मांडू: जहाज महल, होशंगशाह का मकबरा; ओरछा का राम राजा मंदिर; ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर; आंबेडकर महू, आज़ाद भाबरा, वाजपेयी ग्वालियर, शंकरदयाल शर्मा भोपाल; लता इंदौर, किशोर खंडवा; माखनलाल चतुर्वेदी को हिंदी का पहला साहित्य अकादमी पुरस्कार 1955।

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