10 में से पाठ 9 · मध्य प्रदेश सामान्य ज्ञान
मध्यप्रदेश की जनजातियाँ, लोकनृत्य, संगीत, उत्सव और बोलियाँ
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जनजातियाँ
मध्यप्रदेश में किसी भी राज्य से अधिक अनुसूचित जनजाति जनसंख्या है: जनगणना 2011 में लगभग 1.53 करोड़ जनजातीय लोग गिने गए, जो राज्य की जनसंख्या का 21.1 प्रतिशत हैं। राज्य और भारत की सबसे बड़ी जनजाति भील मुख्यतः पश्चिमी जिलों झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी और खरगोन में रहती है। दूसरी सबसे बड़ी जनजाति गोंड मध्य और पूर्वी भाग में मंडला, डिंडोरी, सिवनी, छिंदवाड़ा, बैतूल और शहडोल में रहती है; इसका परधान उपसमूह गायक-कथावाचकों और चित्रकारों का है। मुंडा भाषा बोलने वाले कोरकू सतपुड़ा के बैतूल, हरदा और खंडवा जिलों में, और कोल रीवा, सतना तथा सीधी में रहते हैं।
विशेष रूप से कमज़ोर समूह
राज्य की तीन जनजातियाँ विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूहों (PVTG) में सूचीबद्ध हैं। मंडला, डिंडोरी और बालाघाट के बैगा 'बेवर' नामक स्थानांतरित खेती करते थे और गोदना (टैटू) के लिए जाने जाते हैं; डिंडोरी का बैगाचक क्षेत्र उनका मुख्य निवास है। भारिया छिंदवाड़ा की गहरी पातालकोट घाटी में और सहरिया उत्तर-पश्चिम में श्योपुर, शिवपुरी और गुना में रहते हैं।
जनजातीय कला और उत्सव
पशुओं, वृक्षों और देवताओं की आकृतियों को बिंदुओं और रेखाओं से भरने वाली गोंड चित्रकला डिंडोरी जिले के पाटनगढ़ के परधान गोंड कलाकार जनगढ़ सिंह श्याम के माध्यम से प्रसिद्ध हुई, जिन्हें भारत भवन, भोपाल लाया गया था; इस शैली को प्रायः 'जनगढ़ कलम' कहा जाता है। पिथौरा भीलों और भिलालों की अनुष्ठानिक भित्ति चित्रकला है, जिसमें घोड़े और घुड़सवार भरे होते हैं और जो मन्नत पूरी करने के लिए बनाई जाती है। भगोरिया झाबुआ-अलीराजपुर क्षेत्र का भील उत्सव है, जो होली से पहले के दिनों में साप्ताहिक हाटों के रूप में लगता है और संगीत, नृत्य तथा जीवनसाथी चुनने के लिए प्रसिद्ध है। गोंड और बैगा करमा नृत्य करते हैं, और मड़ई मेले जनजातीय समुदायों को एक साथ लाते हैं।
क्षेत्रवार लोकनृत्य
हर सांस्कृतिक क्षेत्र के अपने नृत्य हैं। बुंदेलखंड में राई नृत्य बेड़नी नर्तकियाँ मृदंग की थाप पर करती हैं, बधाई शुभ अवसरों पर और दिवारी दीपावली के आसपास होता है, तथा वीर आल्हा और ऊदल की गाथा 'आल्हा' वर्षा ऋतु में गाई जाती है। मालवा में महिलाएँ मिट्टी के घड़ों के साथ मटकी नृत्य करती हैं, और माच उज्जैन का लोक संगीत नाट्य है। निमाड़ में गणगौर मुख्य उत्सव और नृत्य है। गोंड करमा और सैला (डंडा नृत्य), कोरकू थापटी, सहरिया लहँगी और बैगा विवाह में परधौनी नृत्य करते हैं।
संगीत
ग्वालियर हिंदुस्तानी संगीत का एक उद्गम स्थल है। राजा मानसिंह तोमर ने ध्रुपद को संरक्षण दिया, और ग्वालियर घराने को ख़याल गायकी का सबसे पुराना घराना माना जाता है। ग्वालियर के पास बेहट में जन्मे और स्वामी हरिदास के शिष्य तानसेन रीवा के राजा रामचंद्र की सेवा के बाद अकबर के दरबार में नवरत्नों में शामिल हुए; ग्वालियर में उनके मकबरे पर हर दिसंबर तानसेन समारोह होता है। उस्ताद अलाउद्दीन खाँ ने मैहर को मैहर घराने का केंद्र बनाया; उनके शिष्यों में रविशंकर, उनके पुत्र अली अकबर खाँ, उनकी पुत्री अन्नपूर्णा देवी, निखिल बनर्जी और पन्नालाल घोष हैं, और उन्होंने मैहर बैंड की स्थापना की। कुमार गंधर्व ने देवास को अपना घर बनाया।
उत्सव और संस्थाएँ
उज्जैन में शिप्रा तट पर सिंहस्थ कुंभ हर बारह वर्ष में तब होता है जब बृहस्पति सिंह राशि में होता है; यह 2004 और 2016 में आयोजित हुआ। हर फरवरी मंदिरों की पृष्ठभूमि में होने वाला खजुराहो नृत्य समारोह 1975 से शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत करता आ रहा है, और उज्जैन का कालिदास समारोह संस्कृत नाटक और कलाओं का उत्सव है। चार्ल्स कोरिया द्वारा डिज़ाइन किया गया बहु-कला केंद्र भारत भवन, भोपाल 1982 में खुला, और भोपाल का इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भारत के समुदायों का जीवन प्रदर्शित करता है।
भाषाएँ और बोलियाँ
हिंदी राजभाषा है। प्रमुख क्षेत्रीय बोलियाँ हैं: मालवा (इंदौर, उज्जैन, रतलाम) में मालवी, निमाड़ (खरगोन, खंडवा, बड़वानी) में निमाड़ी, बुंदेलखंड (सागर, दमोह, टीकमगढ़, छतरपुर) में बुंदेली और बघेलखंड (रीवा, सतना, सीधी) में बघेली। अपनी फागों के लिए प्रसिद्ध ईसुरी बुंदेली के सबसे प्रसिद्ध लोककवि हैं। जनजातीय भाषाओं में भीली और गोंडी बोलने वाले सबसे अधिक हैं, और कोरकू मुंडा परिवार की भाषा है।
मुख्य तथ्य
- जनगणना 2011: मध्यप्रदेश में भारत की सबसे अधिक अनुसूचित जनजाति जनसंख्या, लगभग 1.53 करोड़ (राज्य का 21.1 प्रतिशत)।
- भील: सबसे बड़ी जनजाति (झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी)। गोंड: दूसरी सबसे बड़ी (मंडला, डिंडोरी, सिवनी, छिंदवाड़ा)।
- मध्यप्रदेश के PVTG: बैगा (मंडला, डिंडोरी, बालाघाट), भारिया (पातालकोट, छिंदवाड़ा), सहरिया (श्योपुर, शिवपुरी, गुना)।
- गोंड कला: पाटनगढ़ (डिंडोरी) के जनगढ़ सिंह श्याम, जनगढ़ कलम। पिथौरा: भीलों और भिलालों के घोड़ों वाले अनुष्ठानिक चित्र।
- भगोरिया: झाबुआ-अलीराजपुर क्षेत्र में होली से पहले लगने वाले हाटों का भील उत्सव।
- नृत्य: राई, बधाई, दिवारी (बुंदेलखंड); मटकी (मालवा); गणगौर (निमाड़); करमा, सैला (गोंड); थापटी (कोरकू); लहँगी (सहरिया)।
- तानसेन: ग्वालियर के पास बेहट में जन्म, स्वामी हरिदास के शिष्य, पहले रीवा फिर अकबर के दरबार में; तानसेन समारोह हर दिसंबर ग्वालियर में होता है।
- उस्ताद अलाउद्दीन खाँ ने मैहर को मैहर घराने का केंद्र बनाया; उनके शिष्यों में रविशंकर, अली अकबर खाँ और अन्नपूर्णा देवी हैं।
- उज्जैन में सिंहस्थ हर बारह वर्ष में (बृहस्पति सिंह राशि में), 2004 और 2016 में आयोजित; खजुराहो नृत्य समारोह हर फरवरी; भारत भवन, भोपाल 1982 में खुला।
- बोलियाँ: मालवी (मालवा), निमाड़ी (निमाड़), बुंदेली (बुंदेलखंड; लोककवि ईसुरी), बघेली (रीवा, सतना, सीधी)।
एक नज़र में दोहराव
सबसे अधिक अनुसूचित जनजाति जनसंख्या, 1.53 करोड़ (21.1 प्रतिशत, जनगणना 2011); भील सबसे बड़ी, गोंड दूसरी; PVTG बैगा, भारिया (पातालकोट), सहरिया; जनगढ़ सिंह श्याम की गोंड कला, भीलों का पिथौरा, होली से पहले भगोरिया; नृत्य राई, बधाई (बुंदेलखंड), मटकी (मालवा), गणगौर (निमाड़), करमा, सैला (गोंड); ग्वालियर घराना ख़याल का सबसे पुराना घराना; बेहट के तानसेन, तानसेन समारोह; अलाउद्दीन खाँ का मैहर घराना; उज्जैन में सिंहस्थ (2004, 2016); खजुराहो नृत्य समारोह; भारत भवन 1982; मालवी, निमाड़ी, बुंदेली, बघेली।