10 में से पाठ 6 · मध्य प्रदेश सामान्य ज्ञान

मध्यप्रदेश की नदियाँ, बाँध और झीलें: नर्मदा, ताप्ती, चंबल, बेतवा, सोन

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नदी तंत्र

मध्यप्रदेश से इतनी नदियाँ निकलती हैं कि इसे प्रायः 'नदियों का मायका' कहा जाता है। ये चार तंत्रों से संबंधित हैं। चंबल, सिंध, बेतवा, केन और सोन उत्तर या उत्तर-पूर्व की ओर यमुना और गंगा में बहती हैं; नर्मदा और ताप्ती भ्रंश घाटियों से होकर पश्चिम में अरब सागर में जाती हैं; माही भी पश्चिम की ओर खंभात की खाड़ी में बहती है; और वैनगंगा दक्षिण की ओर गोदावरी में जाती है। प्रायद्वीप की बड़ी नदियों में नर्मदा और ताप्ती इसलिए विशिष्ट हैं कि वे पश्चिम की ओर बहती हैं और डेल्टा के बजाय ज्वारनदमुख (एस्चुअरी) बनाती हैं।

नर्मदा

नर्मदा मैकल श्रेणी में अमरकंटक (अनूपपुर जिला) के नर्मदा कुंड से निकलती है और लगभग 1312 किमी बहती है, जिसमें से लगभग 1077 किमी मध्यप्रदेश में है, फिर गुजरात में प्रवेश कर भरूच के पास खंभात की खाड़ी में मिलती है। पुराणों में रेवा और मध्यप्रदेश की जीवन रेखा कही जाने वाली नर्मदा की तीर्थयात्री पैदल परिक्रमा करते हैं। इसके मार्ग में उद्गम के पास कपिलधारा प्रपात, जबलपुर के पास भेड़ाघाट का धुआँधार प्रपात, जहाँ यह संगमरमर की चट्टानों के बीच गहरी घाटी काटती है, ओंकारेश्वर (मांधाता) द्वीप और महेश्वर के पास सहस्रधारा हैं। इसकी सबसे लंबी सहायक नदी दक्षिण से आने वाली तवा है; अन्य दक्षिणी सहायक नदियों में बुढ़नेर, बंजर, शक्कर और गंजाल हैं, जबकि हिरन, बारना और कोलार उत्तर से मिलती हैं। 1969 में गठित नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण ने 1979 में अपना निर्णय देकर इसका जल मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान में बाँटा।

नर्मदा पर परियोजनाएँ

जबलपुर के पास बरगी बाँध (रानी अवंतीबाई लोधी सागर) इस नदी पर पूरे हुए पहले बड़े बाँधों में से है। खंडवा जिले के पुनासा में इंदिरा सागर का जलाशय भारत के सबसे बड़े जलाशयों में है और इसका बिजलीघर 1000 मेगावाट का है; नीचे की ओर ओंकारेश्वर परियोजना 520 मेगावाट बिजली बनाती है, और उससे आगे पश्चिम में महेश्वर जलविद्युत परियोजना है। इटारसी के पास तवा नदी पर बना तवा बाँध नर्मदापुरम के मैदान की सिंचाई करता है। गुजरात के सरदार सरोवर बाँध की बिजली का 57 प्रतिशत मध्यप्रदेश को मिलता है। 2014 में नर्मदा-क्षिप्रा लिंक ने नर्मदा का जल उठाकर उज्जैन की नदी शिप्रा में पहुँचाना आरंभ किया; यह राज्य की पहली नदी जोड़ो योजना थी।

ताप्ती, माही और वैनगंगा

ताप्ती (तापी) बैतूल जिले के मुलताई से निकलती है, जिसका नाम 'मूलतापी' अर्थात तापी के उद्गम से बना है। यह सतपुड़ा और अजंता पहाड़ियों के बीच बुरहानपुर, महाराष्ट्र और गुजरात से होकर लगभग 724 किमी पश्चिम की ओर बहती है और सूरत के पास खंभात की खाड़ी में मिलती है; पूर्णा इसकी प्रमुख सहायक नदी है। माही धार जिले के विंध्य क्षेत्र से निकलकर झाबुआ और रतलाम होते हुए राजस्थान और गुजरात जाती है, और कर्क रेखा को दो बार काटने वाली नदी के रूप में जानी जाती है। वैनगंगा सिवनी जिले से निकलकर दक्षिण की ओर बहती है और वर्धा से मिलती है; दोनों की संयुक्त धारा प्राणहिता गोदावरी में मिलती है। पेंच राष्ट्रीय उद्यान को नाम देने वाली पेंच नदी इसी तंत्र की है।

चंबल, बेतवा, केन और सिंध

चंबल (प्राचीन चर्मण्वती) इंदौर जिले में महू के पास जानापाव पहाड़ी से निकलती है और मालवा से होकर उत्तर की ओर बहती है, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के साथ सीमा के कुछ भाग बनाती है और उत्तर प्रदेश में यमुना से मिल जाती है; शिप्रा, काली सिंध और पार्वती राज्य में इसकी सहायक नदियाँ हैं। मंदसौर जिले का गांधी सागर बाँध (1960) राजस्थान के साथ मिलकर बने चंबल घाटी बाँधों में पहला है, जिसके बाद नीचे की ओर राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर और कोटा बैराज हैं। बेतवा (वेत्रवती) भोपाल के पास रायसेन जिले से निकलती है, विदिशा और ओरछा से होकर बहती है, उत्तर प्रदेश के साथ संयुक्त परियोजना में राजघाट पर बाँधी गई है, और हमीरपुर में यमुना से मिलती है; बीना, धसान और जामनी इसकी सहायक नदियाँ हैं। केन कैमूर पहाड़ियों से निकलकर पन्ना राष्ट्रीय उद्यान और रनेह प्रपात की ग्रेनाइट घाटी से होकर बहती है और उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले में यमुना से मिलती है। सिंध नदी विदिशा जिले से निकलती है। केन-बेतवा लिंक को राष्ट्रीय नदी जोड़ो कार्यक्रम की पहली परियोजना के रूप में नियोजित किया गया।

सोन और पूर्वी नदियाँ

सोन अमरकंटक के पास सोनमुड़ा से निकलती है, शहडोल और सीधी से होकर पहले उत्तर और फिर पूर्व की ओर बहती है, और पटना के पास गंगा से मिलती है; जोहिला, गोपद और रिहंद इसकी सहायक नदियाँ हैं। शहडोल जिले के देवलोंद में सोन पर बना बाणसागर बाँध मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार की संयुक्त परियोजना है। रीवा पठार पर टोंस (तमसा) और उसकी सहायक नदियाँ पठार के किनारे से गिरकर जलप्रपात बनाती हैं, जैसे बीहड़ नदी पर चचाई, महाना पर क्योटी और टोंस पर पुरवा।

भोपाल की झीलें

भोपाल को झीलों का शहर कहा जाता है। ऊपरी झील (बड़ा तालाब या भोजताल) ग्यारहवीं शताब्दी में कोलांस नदी पर मिट्टी के बाँध से बनी और इसका श्रेय राजा भोज को दिया जाता है; यह आज भी शहर के पेयजल का प्रमुख स्रोत है। निचली झील (छोटा तालाब) 1794 में भोपाल के नवाब के मंत्री छोटे खाँ ने बनवाई। दोनों मिलकर भोज वेटलैंड बनाती हैं, जो 2002 में राज्य का पहला रामसर स्थल बना। एक स्थानीय कहावत है: 'ताल तो भोपाल ताल, बाकी सब तलैया'।

मुख्य तथ्य

  • नर्मदा: अमरकंटक (अनूपपुर) से उद्गम, लगभग 1312 किमी लंबी (मध्यप्रदेश में लगभग 1077 किमी), भ्रंश घाटी से पश्चिम की ओर खंभात की खाड़ी तक; डेल्टा नहीं, ज्वारनदमुख बनाती है।
  • नर्मदा पर: उद्गम के पास कपिलधारा, भेड़ाघाट (जबलपुर) में धुआँधार प्रपात और संगमरमर की चट्टानें, ओंकारेश्वर (मांधाता) द्वीप, महेश्वर के पास सहस्रधारा।
  • तवा नर्मदा की सबसे लंबी सहायक नदी है; नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण 1969 में बना और 1979 में निर्णय दिया।
  • नर्मदा के बाँध: बरगी (जबलपुर), इंदिरा सागर (पुनासा, खंडवा; 1000 मेगावाट), ओंकारेश्वर (520 मेगावाट), महेश्वर; तवा बाँध तवा नदी पर है।
  • ताप्ती मुलताई (बैतूल) से निकलकर सूरत के पास समुद्र में मिलती है; माही कर्क रेखा को दो बार काटती है।
  • चंबल जानापाव (महू) से निकलती है; गांधी सागर बाँध (मंदसौर, 1960) राजस्थान के साथ बने चंबल घाटी बाँधों में पहला है।
  • बेतवा (वेत्रवती): रायसेन, विदिशा, ओरछा, उत्तर प्रदेश के साथ राजघाट बाँध, हमीरपुर में यमुना से संगम। केन: पन्ना, रनेह प्रपात, बाँदा में यमुना से संगम।
  • सोन अमरकंटक के पास सोनमुड़ा से निकलकर गंगा में मिलती है; बाणसागर (देवलोंद, शहडोल) मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार की संयुक्त परियोजना है।
  • वैनगंगा सिवनी जिले से निकलकर दक्षिण में गोदावरी तंत्र में जाती है; रीवा के प्रपात: चचाई (बीहड़), क्योटी (महाना), पुरवा (टोंस)।
  • भोपाल की झीलें: ऊपरी झील (श्रेय राजा भोज को, कोलांस पर बाँध) और निचली झील (1794); दोनों मिलकर भोज वेटलैंड, 2002 से रामसर स्थल।

एक नज़र में दोहराव

नर्मदा अमरकंटक से, लगभग 1312 किमी (मध्यप्रदेश में 1077 किमी), भ्रंश घाटी से पश्चिम, भरूच में ज्वारनदमुख; भेड़ाघाट में धुआँधार; सबसे लंबी सहायक तवा; न्यायाधिकरण 1969, निर्णय 1979; बरगी, इंदिरा सागर (1000 मेगावाट), ओंकारेश्वर (520 मेगावाट); सरदार सरोवर की 57 प्रतिशत बिजली मध्यप्रदेश को; नर्मदा-क्षिप्रा लिंक 2014; ताप्ती मुलताई से; माही कर्क रेखा को दो बार काटती है; चंबल जानापाव से, गांधी सागर 1960; बेतवा, केन यमुना में; सोन सोनमुड़ा से, बाणसागर; भोज वेटलैंड रामसर 2002।

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