10 में से पाठ 5 · मध्य प्रदेश सामान्य ज्ञान

मध्यप्रदेश का भूगोल: स्थिति, सीमाएँ और भौतिक प्रदेश

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स्थिति और आकार

मध्यप्रदेश 21°6' से 26°30' उत्तरी अक्षांश और 74°9' से 82°48' पूर्वी देशांतर के बीच भारत के मध्य में स्थित है, इसीलिए इसे भारत का हृदय प्रदेश कहा जाता है। कर्क रेखा (लगभग 23.5 डिग्री उत्तर) राज्य के लगभग बीच से गुज़रती है और रतलाम, उज्जैन, भोपाल, विदिशा, सागर, जबलपुर तथा शहडोल जैसे जिलों को पार करती है। राज्य का क्षेत्रफल 308,252 वर्ग किमी है, जो भारत के क्षेत्रफल का 9.38 प्रतिशत है, और 2000 से यह क्षेत्रफल में राजस्थान के बाद दूसरे स्थान पर है। इसका पूर्व-पश्चिम विस्तार लगभग 870 किमी और उत्तर-दक्षिण विस्तार लगभग 605 किमी है। जनगणना 2011 के अनुसार राज्य की जनसंख्या लगभग 7.26 करोड़ और जनसंख्या घनत्व 236 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है।

पड़ोसी राज्य

राज्य स्थलरुद्ध है और इसकी कोई अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं है। यह पाँच राज्यों से घिरा है: उत्तर-पश्चिम में राजस्थान, उत्तर और उत्तर-पूर्व में उत्तर प्रदेश, दक्षिण-पूर्व में छत्तीसगढ़, दक्षिण में महाराष्ट्र और पश्चिम में गुजरात। इन सीमाओं में सबसे छोटी सीमा गुजरात के साथ है। नदियाँ भी इन सीमाओं के कुछ भाग बनाती हैं: चंबल अपने मार्ग के कुछ हिस्सों में राज्य को राजस्थान और उत्तर प्रदेश से अलग करती है, और नर्मदा महाराष्ट्र के साथ एक छोटी सीमा बनाती है।

धरातल के नीचे की चट्टानें

यहाँ की भू-आकृतियाँ भूगर्भिक संरचना का अनुसरण करती हैं। बुंदेलखंड नीस और ग्रेनाइट सहित सबसे पुरानी आर्कियन चट्टानें उत्तरी पठार बनाती हैं। बालाघाट और छिंदवाड़ा की धारवाड़ चट्टानों में मैंगनीज़ है। विंध्य पर्वत के नाम पर रखा गया बलुआ पत्थर और चूना पत्थर का विंध्य शैल समूह रीवा-पन्ना क्षेत्र में फैला है, जहाँ पन्ना का हीरा क्षेत्र है। सोन, सतपुड़ा और नर्मदा बेसिनों की गोंडवाना चट्टानों में कोयला है, और दक्कन ट्रैप के लावा प्रवाह मालवा तथा पश्चिमी सतपुड़ा को ढकते हैं, जो अपक्षय से काली मिट्टी बनाते हैं। नर्मदा घाटी और चंबल के मैदानों में नदियों की जलोढ़ मिट्टी भरी है।

मालवा और गिर्द क्षेत्र

पश्चिम में मालवा का पठार सबसे बड़ा भौतिक प्रदेश है। दक्कन ट्रैप के बेसाल्ट से बना और काली मिट्टी से ढका यह पठार उत्तर की ओर धीरे-धीरे ढलता है और दक्षिण में नर्मदा के ऊपर विंध्य कगार से घिरा है। चंबल, शिप्रा, काली सिंध, पार्वती और बेतवा इसका जल बहाती हैं, और इंदौर, उज्जैन, देवास, रतलाम, मंदसौर तथा भोपाल इसी पर बसे हैं; चंबल महू के पास जानापाव पहाड़ी से निकलती है। इसकी उर्वरता से पुरानी कहावत बनी: 'मालव धरती गहन गंभीर, डग-डग रोटी पग-पग नीर'। मालवा के उत्तर में मध्य भारत का पठार है, जिसमें ग्वालियर, भिंड और मुरैना का गिर्द क्षेत्र चंबल के बीहड़ों से कटा हुआ है।

बुंदेलखंड, विंध्य और बघेलखंड

उत्तर में बुंदेलखंड का पठार (दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर तथा शिवपुरी और सागर के कुछ भाग) ग्रेनाइट और नीस से बना है, जिसमें पथरीली पहाड़ियाँ, पुराने तालाब और उत्तर की ओर यमुना में बहने वाली बेतवा, धसान तथा केन जैसी नदियाँ हैं। विंध्य श्रेणी नर्मदा के उत्तर में एक कगार के रूप में उठती है और पूर्व में भांडेर तथा कैमूर पहाड़ियों के रूप में आगे बढ़ती है; इसके पीछे बलुआ पत्थर और चूना पत्थर का रीवा-पन्ना (विंध्य) पठार है, जिसके किनारे से गिरती नदियाँ जलप्रपात बनाती हैं। सीधी, शहडोल और सिंगरौली के आसपास का पूर्वी पठार बघेलखंड सोन नदी द्वारा अपवाहित है और इसमें गोंडवाना कोयला क्षेत्र हैं।

नर्मदा घाटी और सतपुड़ा-मैकल श्रेणियाँ

नर्मदा घाटी उत्तर में विंध्य और दक्षिण में सतपुड़ा के बीच एक भ्रंश घाटी है, जो जबलपुर, नरसिंहपुर और नर्मदापुरम के आसपास उपजाऊ जलोढ़ से भरी है। सतपुड़ा श्रेणी नर्मदा और ताप्ती के बीच पश्चिम में राजपीपला पहाड़ियों से महादेव पहाड़ियों होते हुए पूर्व में मैकल श्रेणी तक फैली है। 'सतपुड़ा की रानी' पचमढ़ी के पास महादेव पहाड़ियों में स्थित धूपगढ़ (1350 मीटर) राज्य का सबसे ऊँचा स्थान है। मैकल श्रेणी अमरकंटक पठार पर विंध्य से मिलती है, जहाँ से नर्मदा और सोन निकलती हैं। पश्चिम में असीरगढ़ किले द्वारा संरक्षित सतपुड़ा का बुरहानपुर दर्रा उत्तर भारत से दक्कन जाने का पुराना मार्ग था।

बचने योग्य भ्रम

सबसे ऊँची चोटी सतपुड़ा का धूपगढ़ है, मैकल श्रेणी का अमरकंटक नहीं। सबसे बड़ा शहर इंदौर कर्क रेखा के दक्षिण में है, जबकि भोपाल और उज्जैन इसके निकट हैं। विंध्य मुख्यतः एक पठार का किनारा है, वलित पर्वत श्रृंखला नहीं। मालवा की काली मिट्टी दक्कन के लावा से बनी है, जबकि बुंदेलखंड की पतली मिट्टी प्राचीन ग्रेनाइट से।

मुख्य तथ्य

  • विस्तार: 21°6' उ. से 26°30' उ. और 74°9' पू. से 82°48' पू.; पूर्व-पश्चिम लगभग 870 किमी और उत्तर-दक्षिण लगभग 605 किमी।
  • क्षेत्रफल 308,252 वर्ग किमी (भारत का 9.38 प्रतिशत): 2000 से राजस्थान के बाद दूसरा सबसे बड़ा राज्य।
  • पाँच पड़ोसी राज्य: राजस्थान, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात; सबसे छोटी सीमा गुजरात से; स्थलरुद्ध राज्य।
  • कर्क रेखा रतलाम, उज्जैन, भोपाल, विदिशा, सागर, जबलपुर और शहडोल जैसे जिलों से होकर मध्यप्रदेश के बीच से गुज़रती है; इंदौर इसके दक्षिण में है।
  • मालवा का पठार: सबसे बड़ा प्रदेश, दक्कन ट्रैप बेसाल्ट और काली मिट्टी; चंबल महू के पास जानापाव से निकलती है।
  • बुंदेलखंड का पठार: सबसे पुरानी चट्टानें (बुंदेलखंड नीस और ग्रेनाइट); बेतवा, धसान और केन उत्तर की ओर यमुना में बहती हैं।
  • नर्मदा घाटी उत्तर में विंध्य और दक्षिण में सतपुड़ा के बीच एक भ्रंश घाटी है।
  • सबसे ऊँचा स्थान: सतपुड़ा की महादेव पहाड़ियों में धूपगढ़ (1350 मीटर), 'सतपुड़ा की रानी' पचमढ़ी के पास।
  • मैकल श्रेणी का अमरकंटक पठार: विंध्य और सतपुड़ा का मिलन स्थल, नर्मदा और सोन का उद्गम।
  • जनगणना 2011: जनसंख्या लगभग 7.26 करोड़, घनत्व 236 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी।

एक नज़र में दोहराव

मध्यप्रदेश 21°6'-26°30' उ. और 74°9'-82°48' पू. के बीच, भारत का हृदय प्रदेश, कर्क रेखा बीच से; क्षेत्रफल 308,252 वर्ग किमी (9.38 प्रतिशत), राजस्थान के बाद दूसरा; पाँच पड़ोसी, सबसे छोटी सीमा गुजरात; बुंदेलखंड नीस सबसे पुरानी, विंध्य बलुआ पत्थर, गोंडवाना कोयला, मालवा में दक्कन ट्रैप; प्रदेश: मालवा पठार, गिर्द, बुंदेलखंड, विंध्य पठार, बघेलखंड, नर्मदा भ्रंश घाटी, सतपुड़ा-मैकल; सर्वोच्च स्थान धूपगढ़ 1350 मीटर; अमरकंटक में विंध्य और सतपुड़ा का मिलन।

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