10 में से पाठ 4 · सामाजिक अध्ययन और उसका शिक्षणशास्त्र (पेपर II)
पृथ्वी ग्रह: सौरमंडल, ग्लोब, गतियाँ, मानचित्र, स्थलरूप, आंतरिक संरचना, वायु और जल (कक्षा VI-VII भूगोल)
AI की सहायता से तैयार किया गया और 28 अक्टूबर 2026 को तथ्यों की जाँच की गई; किसी मानव संपादक ने इसे अभी पंक्ति-दर-पंक्ति नहीं पढ़ा है। कोई गलती दिखे तो हमें बताइए। संपादकीय मानक और सुधार
सौरमंडल में पृथ्वी
सौरमंडल में सूर्य, आठ ग्रह, उनके उपग्रह, क्षुद्रग्रह और उल्कापिंड हैं; 2006 में अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ ने प्लूटो को बौना ग्रह घोषित किया। सूर्य से दूरी के क्रम में ग्रह हैं: बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेप्च्यून। सूर्य से तीसरे स्थान पर स्थित पृथ्वी, जो उससे लगभग 15 करोड़ (150 मिलियन) किलोमीटर दूर है, 'नीला ग्रह' कहलाती है क्योंकि इसकी सतह का लगभग दो-तिहाई भाग जल है, और ध्रुवों पर थोड़ी चपटी होने के कारण इसकी आकृति को भू-आभ (जियॉइड) कहा जाता है। लगभग 384,400 किलोमीटर दूर स्थित चंद्रमा को पृथ्वी की एक परिक्रमा करने और अपनी धुरी पर एक चक्कर लगाने, दोनों में लगभग 27 दिन लगते हैं, इसलिए हमें उसका एक ही भाग दिखाई देता है।
अक्षांश, देशांतर और समय
विषुवत् वृत्त (0°) पृथ्वी को उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में बाँटता है। कर्क रेखा (23½° उ.), मकर रेखा (23½° द.), उत्तर ध्रुव वृत्त (66½° उ.) और दक्षिण ध्रुव वृत्त (66½° द.) ताप कटिबंधों की सीमाएँ बनाते हैं: कर्क और मकर रेखाओं के बीच स्थित उष्ण कटिबंध में वर्ष में कम से कम एक बार दोपहर का सूर्य ठीक सिर के ऊपर होता है, और ध्रुवों की ओर शीतोष्ण तथा शीत कटिबंध हैं। प्रमुख याम्योत्तर (0°) लंदन के ग्रीनविच से होकर गुज़रती है। पृथ्वी लगभग 24 घंटे में 360° घूमती है, इसलिए 15° देशांतर एक घंटे के बराबर और 1° देशांतर 4 मिनट के बराबर होता है। भारतीय मानक समय 82½° पू. देशांतर का स्थानीय समय है, जो मिर्ज़ापुर के पास से गुज़रता है, और यह ग्रीनविच माध्य समय से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।
पृथ्वी की गतियाँ
अपनी धुरी पर घूर्णन में लगभग 24 घंटे लगते हैं और इससे दिन और रात होते हैं। पृथ्वी का अक्ष अपनी कक्षा के तल से 66½° का कोण बनाता है। दीर्घवृत्ताकार कक्षा में सूर्य की परिक्रमा में 365¼ दिन लगते हैं, इसलिए हर चौथा वर्ष 366 दिनों का लीप वर्ष होता है, जिसमें फ़रवरी 29 दिनों की होती है। अक्ष का झुकाव और परिक्रमण मिलकर ऋतुएँ बनाते हैं: 21 जून को सूर्य कर्क रेखा पर लंबवत् होता है और उत्तरी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन होता है (ग्रीष्म अयनांत); 22 दिसंबर को वह मकर रेखा पर लंबवत् होता है (उत्तर में शीत अयनांत); और 21 मार्च तथा 23 सितंबर को वह विषुवत् वृत्त पर लंबवत् होता है, जिससे सभी जगह दिन और रात बराबर होते हैं (विषुव)।
मानचित्र
मानचित्र पृथ्वी या उसके किसी भाग का समतल सतह पर पैमाने के अनुसार बनाया गया चित्रण है। भौतिक मानचित्र प्राकृतिक स्वरूप दिखाते हैं, राजनीतिक मानचित्र देश, राज्य और नगर दिखाते हैं, और थिमैटिक (विषयक) मानचित्र वर्षा या सड़कों जैसे किसी एक विषय को दिखाते हैं; ग्लोब पृथ्वी का वास्तविक प्रतिरूप है, परंतु उस पर अधिक विवरण नहीं दिखाया जा सकता। प्रत्येक मानचित्र के तीन घटक होते हैं: दूरी (जो पैमाने से दिखाई जाती है), दिशा और प्रतीक, और बड़े पैमाने का मानचित्र छोटे क्षेत्र को विस्तार से दिखाता है। रूढ़ रंगों का प्रयोग होता है: जल के लिए नीला, पर्वतों के लिए भूरा, पठारों के लिए पीला और मैदानों के लिए हरा। रेखाचित्र बिना पैमाने के बनता है, जबकि खाका किसी छोटे क्षेत्र का बड़े पैमाने पर बनाया गया चित्र होता है।
परिमंडल और प्रमुख स्थलरूप
पृथ्वी के चार परिमंडल हैं: स्थलमंडल, जलमंडल, वायुमंडल और जैवमंडल, जहाँ स्थल, जल और वायु मिलकर जीवन को संभव बनाते हैं। एशिया सबसे बड़ा महाद्वीप है और 'द्वीपीय महाद्वीप' ऑस्ट्रेलिया सबसे छोटा; प्रशांत सबसे बड़ा महासागर है और उसमें लगभग 11 किलोमीटर गहरी मेरियाना खाई है। वायु में लगभग 78 प्रतिशत नाइट्रोजन और 21 प्रतिशत ऑक्सीजन है। वलित पर्वत नवीन (हिमालय, आल्प्स) या प्राचीन (अरावली, यूराल) हो सकते हैं; वोस्जेस जैसे भ्रंशोत्थ पर्वत तब बनते हैं जब बड़े भूभाग टूटकर ऊर्ध्वाधर दिशा में विस्थापित होते हैं; और ज्वालामुखी पर्वतों में किलिमंजारो और फ़्यूजीयामा शामिल हैं। तिब्बत का पठार 4,000 से 6,000 मीटर ऊँचाई के साथ सबसे ऊँचा है, और छोटा नागपुर पठार खनिजों से समृद्ध है।
पृथ्वी का आंतरिक भाग और बदलती सतह
भूपर्पटी महाद्वीपों के नीचे लगभग 35 किलोमीटर मोटी है और सिलिका तथा एलुमिना (सियाल) से बनी है, जबकि महासागरों के नीचे यह लगभग 5 किलोमीटर मोटी है और सिलिका तथा मैग्नीशियम (सीमा) से बनी है। मैंटल लगभग 2,900 किलोमीटर की गहराई तक फैला है, और निकल तथा लोहे (निफ़े) से बने क्रोड की त्रिज्या लगभग 3,500 किलोमीटर है। आग्नेय शैलें पिघले हुए मैग्मा के ठंडा होने से बनती हैं (ग्रेनाइट, बेसाल्ट), अवसादी शैलें जमी हुई परतों से बनती हैं और उनमें जीवाश्म मिल सकते हैं, और कायांतरित शैलें ताप और दाब से बनती हैं (चिकनी मिट्टी से स्लेट, चूना-पत्थर से संगमरमर)। अंतर्जात बल ज्वालामुखी और भूकंप लाते हैं; भूकंप अधिकेंद्र के नीचे स्थित उद्गम केंद्र से शुरू होता है और भूकंपलेखी (सिस्मोग्राफ) उसे दर्ज करता है। बहिर्जात बल अपक्षय और अपरदन से सतह को घिसते हैं: नदियाँ विसर्प, चापझीलें (गोखुर झीलें) और डेल्टा बनाती हैं, समुद्री लहरें तोरण और स्टैक बनाती हैं, हिमनद हिमोढ़ छोड़ते हैं और पवन बालू के टिब्बे बनाती है।
वायु, जल और प्राकृतिक वनस्पति
मौसम की घटनाएँ क्षोभमंडल में होती हैं, जिसकी औसत ऊँचाई 13 किलोमीटर है; 50 किलोमीटर तक फैले समतापमंडल में ओज़ोन परत है; मध्यमंडल में उल्कापिंड जल जाते हैं; और आयनमंडल रेडियो संचार में सहायक है। मौसम वायुमंडल की दिन-प्रतिदिन की दशा है, जबकि जलवायु कई वर्षों की उसकी औसत दशा है। पवनें स्थायी (व्यापारिक पवनें, पछुआ पवनें, पूर्वी पवनें), मौसमी (मानसून) या स्थानीय (लू) होती हैं। पृथ्वी का लगभग 97.3 प्रतिशत जल खारे महासागरों में है। ज्वार दिन में दो बार आते हैं, और पूर्णिमा तथा अमावस्या को बृहत् ज्वार आते हैं; जहाँ गर्म और ठंडी धाराएँ मिलती हैं, जैसे न्यूफ़ाउंडलैंड के पास गल्फ़ स्ट्रीम और लैब्राडोर धारा, वहाँ समृद्ध मत्स्य क्षेत्र बनते हैं। वनस्पति तापमान और नमी पर निर्भर करती है: वन, घास के मैदान, मरुस्थलों में कँटीली झाड़ियाँ, और टुंड्रा में मॉस तथा लाइकेन।
मुख्य तथ्य
- सूर्य से ग्रहों का क्रम: बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस, नेप्च्यून; प्लूटो 2006 में बौना ग्रह घोषित हुआ; शुक्र को पृथ्वी का जुड़वाँ कहा जाता है।
- कर्क रेखा 23½° उ., मकर रेखा 23½° द., उत्तर ध्रुव वृत्त 66½° उ., दक्षिण ध्रुव वृत्त 66½° द.; उष्ण कटिबंध कर्क और मकर रेखाओं के बीच है।
- 1° देशांतर = 4 मिनट और 15° = 1 घंटा; भारतीय मानक समय 82½° पू. पर आधारित है और ग्रीनविच माध्य समय से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।
- अयनांत: 21 जून (सूर्य कर्क रेखा पर लंबवत्) और 22 दिसंबर (मकर रेखा पर लंबवत्); विषुव: 21 मार्च और 23 सितंबर।
- मानचित्र के घटक: दूरी (पैमाना), दिशा, प्रतीक; रंग: नीला जल, भूरा पर्वत, पीला पठार, हरा मैदान; रेखाचित्र में पैमाना नहीं होता, खाका बड़े पैमाने का होता है।
- भूपर्पटी: महाद्वीपों के नीचे लगभग 35 किमी (सियाल) और महासागरों के नीचे लगभग 5 किमी (सीमा); मैंटल लगभग 2,900 किमी तक; क्रोड निकल और लोहे (निफ़े) का।
- शैलें: आग्नेय (ग्रेनाइट, बेसाल्ट), अवसादी (बलुआ पत्थर; जीवाश्म मिल सकते हैं), कायांतरित (चिकनी मिट्टी से स्लेट, चूना-पत्थर से संगमरमर)।
- वायुमंडल: क्षोभमंडल (औसत 13 किमी, मौसम), समतापमंडल (ओज़ोन, वायुयान), मध्यमंडल (उल्कापिंड जलते हैं), तापमंडल (आयनमंडल), बहिर्मंडल।
- शीतोष्ण घास के मैदान: प्रेयरी (उत्तर अमेरिका), पंपास (दक्षिण अमेरिका), स्टेपी (मध्य एशिया), वेल्ड (दक्षिण अफ़्रीका), डाउन्स (ऑस्ट्रेलिया); उष्णकटिबंधीय घास के मैदान सवाना कहलाते हैं।
- कक्षा में: टॉर्च और झुकी हुई गेंद से दिन-रात और ऋतुएँ दिखाएँ, और एटलस के मानचित्रों पर जाने से पहले कक्षा का पैमाने सहित खाका बनवाएँ।
एक नज़र में दोहराव
8 ग्रह, प्लूटो 2006 से बौना ग्रह; पृथ्वी सूर्य से तीसरी, भू-आभ; कर्क-मकर रेखाएँ 23½° पर, ध्रुव वृत्त 66½° पर; 1° = 4 मिनट, भारतीय मानक समय 82½° पू. (GMT से 5 घंटे 30 मिनट आगे); घूर्णन 24 घंटे, परिक्रमण 365¼ दिन; अयनांत 21 जून और 22 दिसंबर, विषुव 21 मार्च और 23 सितंबर; मानचित्र = पैमाना, दिशा, प्रतीक; भूपर्पटी सियाल और सीमा, क्रोड निफ़े; क्षोभमंडल 13 किमी; 97.3 प्रतिशत जल महासागरों में।
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