ICAR ने OPU-IVF तकनीक से बद्री बछड़े के सफल जन्म की सूचना दी
कृषि मंत्रालय के अनुसार वैज्ञानिकों ने ओवम पिक-अप और इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन (OPU-IVF) तकनीक से एक स्वस्थ मादा बद्री बछिया पैदा की है। बछिया का जन्म 11 सितंबर 2026 को अकादमिक डेयरी फार्म में हुआ, जहाँ एक बद्री भ्रूण को प्राप्तकर्ता (recipient) साहीवाल गाय में प्रत्यारोपित किया गया था। यह ICAR-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI), करनाल और जी. बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर का संयुक्त प्रयास है, जिसे 2023 में शुरू हुए कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद, हल्दी से वित्तीय सहायता मिली। बद्री गाय उत्तराखंड का स्वदेशी आनुवंशिक संसाधन है और इसे राज्य पशु का दर्जा प्राप्त है। इस प्रक्रिया में चुनी हुई बद्री दाता गायों से अल्ट्रासाउंड-निर्देशित ओवम पिक-अप द्वारा अंडाणु (oocyte) लिए गए, उन्हें प्रयोगशाला में परिपक्व कर उत्तराखंड पशुधन विकास बोर्ड से प्राप्त आनुवंशिक रूप से श्रेष्ठ बद्री सांड के वीर्य से निषेचित किया गया, भ्रूण तैयार किए गए और उन्हें तैयार (synchronised) प्राप्तकर्ता गायों में प्रत्यारोपित किया गया। एक श्रेष्ठ मादा से कई भ्रूण बन सकने के कारण यह तकनीक पारंपरिक प्रजनन की तुलना में श्रेष्ठ जर्मप्लाज़्म को तेज़ी से बढ़ा सकती है। एक अन्य संकर (crossbred) प्राप्तकर्ता गाय से भी लगभग एक सप्ताह में एक और बद्री बछड़े के जन्म की उम्मीद थी, और टीम ने अगले चरण में प्रत्यारोपण के लिए बद्री के क्लोन भ्रूण भी तैयार किए हैं। NDRI के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने कहा कि यह सफलता बद्री नस्ल के सुधार और संरक्षण के व्यवस्थित कार्यक्रमों की नींव रखती है।
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पढ़ाई के लिए संदर्भ
भारत में पशुधन की नई नस्लों का औपचारिक पंजीकरण ICAR-राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBAGR), करनाल करता है। बद्री 2016 में उत्तराखंड की पहली मान्यता प्राप्त गोवंश नस्ल के रूप में पंजीकृत हुई। देशी गोवंश नस्लों के संरक्षण और विकास को राष्ट्रीय स्तर पर दिसंबर 2014 में शुरू किए गए राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत सहायता मिलती है।
संदर्भ: बद्री गाय सहित नई नस्लों के 2016 के पंजीकरण पर ICAR का विवरण
खुद जाँचें: बछिया साहीवाल गाय से पैदा हुई। क्या इससे वह साहीवाल नस्ल की हो जाती है?
नहीं। भ्रूण बद्री दाता गाय के अंडाणु और बद्री सांड के वीर्य से बना था; साहीवाल गाय केवल प्राप्तकर्ता (सरोगेट) थी, इसलिए बछिया आनुवंशिक रूप से बद्री है।
अभ्यास: इस खबर की तीन भूमिकाएँ लिखें: दाता (बद्री गाय), सांड (बद्री) और प्राप्तकर्ता या सरोगेट (साहीवाल गाय), और बताएँ कि बछिया की नस्ल किससे तय होती है।
खुद को परखें
सितंबर 2026 में एकेडमिक डेयरी फ़ार्म में जन्मी OPU-IVF बछिया की नस्ल 'बद्री' गाय किस राज्य का राज्य पशु मानी जाती है?
उत्तर देखें
उत्तर: उत्तराखंड
बद्री गाय उत्तराखंड का स्वदेशी आनुवंशिक संसाधन और उसका राज्य पशु है। 11 सितंबर 2026 को ओवम पिक-अप और इन विट्रो फ़र्टिलाइज़ेशन (OPU-IVF) से जन्मी इस बछिया का भ्रूण एक साहीवाल गाय में स्थानांतरित किया गया था; यह ICAR-NDRI करनाल और GB पंत कृषि विश्वविद्यालय, पंतनगर का संयुक्त प्रयास है।