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DAILY · 2026-10-10

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने बीज कंपनियों से मिली ₹2.02 करोड़ की लाभ-साझेदारी राशि 27 राज्यों और 3 UT में बांटी

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राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने 10 अक्टूबर 2026 को बताया कि उसने 27 राज्यों के राज्य जैव विविधता बोर्डों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों की जैव विविधता परिषदों को कुल ₹2.02 करोड़ की राशि दी है। यह राशि उस 'पहुंच और लाभ-साझेदारी' (Access and Benefit-Sharing, ABS) भुगतान में से लाभार्थियों का हिस्सा है, जो सात बीज कंपनियों ने भारत के कृषि जैविक संसाधनों — जैसे धान, बैंगन, फूलगोभी, खीरा, तीखी मिर्च, लौकी, करेला, टमाटर और भिंडी — से नई किस्में और हाइब्रिड विकसित करने के बदले चुकाया है। चूंकि ये संसाधन बाज़ारों और व्यापारियों के ज़रिए खरीदे गए थे, इसलिए इन्हें उपलब्ध कराने वाले किसानों या समुदायों की अलग-अलग पहचान संभव नहीं थी। इसलिए NBA ने विशेषज्ञ समिति के सुझाए मानकों के आधार पर यह राशि कृषि मंत्रालय के आंकड़ों में दर्ज हर फसल के खेती-क्षेत्र के अनुपात में राज्यों में बांटी। सबसे बड़ा हिस्सा मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और ओडिशा को मिला, और शीर्ष दस राज्यों को कुल ₹1.43 करोड़ मिले। NBA के अनुसार अब तक उसका कुल ABS वितरण ₹202 करोड़ तक पहुंच गया है। यह पैसा जैव विविधता प्रबंधन समितियों को मज़बूत करने और जन जैव विविधता रजिस्टर अद्यतन करने जैसे कामों पर खर्च होना है। विज्ञप्ति में यह भी बताया गया कि जैव विविधता अभिसमय (CBD) के पक्षकारों का 17वां सम्मेलन (COP 17) 19 अक्टूबर 2026 से आर्मेनिया की राजधानी येरेवान में शुरू हो रहा है।

ऊपर दी गई PIB की आधिकारिक विज्ञप्ति से AI की सहायता से तैयार, और AI की दूसरी जाँच में उसी विज्ञप्ति से मिलाया गया। किसी व्यक्ति ने इसका पंक्ति-दर-पंक्ति संपादन नहीं किया है।

पढ़ाई के लिए संदर्भ

जैव विविधता अभिसमय (CBD) को लागू करने के लिए भारत ने जैविक विविधता अधिनियम, 2002 बनाया। इस अधिनियम में तीन-स्तरीय ढाँचा है: राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (मुख्यालय चेन्नई), राज्यों में राज्य जैव विविधता बोर्ड, और स्थानीय निकायों के स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ (BMC)। पहुँच और लाभ-साझेदारी (ABS) का अर्थ है कि जैविक संसाधनों या उनसे जुड़े ज्ञान का व्यावसायिक उपयोग करने वालों को लाभ का एक हिस्सा उन लोगों और क्षेत्रों के साथ बाँटना होता है जिन्होंने उन संसाधनों को संरक्षित रखा।

संदर्भ: राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट

खुद जाँचें: जन जैव विविधता रजिस्टर (PBR) तैयार करने की ज़िम्मेदारी किस स्तर की है?

स्थानीय निकाय स्तर की जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ (BMC) स्थानीय लोगों के परामर्श से PBR तैयार करती हैं; NBA और राज्य बोर्ड उन्हें मार्गदर्शन और सहायता देते हैं।

अभ्यास: नोट करें कि इस खबर में राशि पहचाने गए किसानों के बजाय खेती-क्षेत्र के आधार पर राज्य बोर्डों को क्यों दी गई, और इसे ऊपर बताए तीन-स्तरीय ढाँचे से जोड़ें।

खुद को परखें

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने बीज क्षेत्र से मिली पहुँच एवं लाभ-साझाकरण की ₹2.02 करोड़ की राशि राज्यों को दी। उसने इसे राज्यों में किस आधार पर बाँटा?

  1. सभी राज्यों में बराबर
  2. प्रत्येक फसल के खेती-क्षेत्र के अनुपात में
  3. राज्यों की जनसंख्या के आधार पर
  4. राज्य में बीज कंपनियों की संख्या के आधार पर
उत्तर देखें

उत्तर: प्रत्येक फसल के खेती-क्षेत्र के अनुपात में

संसाधन बाज़ार और व्यापारियों से खरीदे गए थे, इसलिए उन्हें देने वाले किसानों की पहचान नहीं हो सकी; NBA ने कृषि मंत्रालय के आँकड़ों और विशेषज्ञ समिति के मानकों के अनुसार प्रत्येक फसल के खेती-क्षेत्र के अनुपात में राशि बाँटी। मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और ओडिशा को सबसे बड़े हिस्से मिले।

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