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DAILY · 2026-10-13

खान मंत्रालय ने अंडमान सागर के दो अपतटीय खनिज ब्लॉकों की नीलामी के लिए आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किया

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खान मंत्रालय ने 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में अपतटीय खनिज ब्लॉकों की पहली नीलामी से पहले संभावित बोलीदाताओं के लिए एक आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किया। 1 अक्टूबर 2026 की निविदा सूचना (NIT) के तहत अंडमान सागर में स्थित दो ब्लॉक - सेवेल राइज़-01 (632 वर्ग किलोमीटर) और वेस्ट सेवेल रिज-01 (1,000 वर्ग किलोमीटर), कुल मिलाकर 1,632 वर्ग किलोमीटर - पॉलीमेटेलिक नोड्यूल्स व क्रस्ट (जिनमें निकेल, कोबाल्ट, तांबा और मैंगनीज़ जैसे खनिज होते हैं) के लिए कम्पोज़िट लाइसेंस के तहत नीलाम किए जा रहे हैं। यह नीलामी अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 2002 (2023 में संशोधित) और अपतटीय क्षेत्र खनिज (नीलामी) नियम, 2024 के तहत हो रही है। कार्यक्रम में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने ब्लॉकों की भूवैज्ञानिक जानकारी दी, लेन-देन सलाहकार SBI कैपिटल मार्केट्स ने बोली प्रक्रिया समझाई, और नीलामी मंच संचालक MSTC ने ई-नीलामी पोर्टल का प्रदर्शन किया; राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण एवं विकास न्यास (NMEDT) ने भावी कम्पोज़िट लाइसेंसधारकों के अन्वेषण खर्च की आंशिक प्रतिपूर्ति की योजना की जानकारी दी। घोषित कार्यक्रम के अनुसार प्री-बिड कॉन्फ्रेंस 4 नवंबर 2026 को होगी और बोली जमा करने की अंतिम तारीख 28 दिसंबर 2026 है।

ऊपर दी गई PIB की आधिकारिक विज्ञप्ति से AI की सहायता से तैयार, और AI की दूसरी जाँच में उसी विज्ञप्ति से मिलाया गया। किसी व्यक्ति ने इसका पंक्ति-दर-पंक्ति संपादन नहीं किया है।

पढ़ाई के लिए संदर्भ

संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS), 1982 के अनुच्छेद 57 के अनुसार, किसी तटीय देश का अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) उस आधार रेखा से अधिकतम 200 समुद्री मील तक फैला होता है, जिससे उसकी प्रादेशिक सीमा (टेरिटोरियल सी) नापी जाती है। भारत के अपतटीय खनिज ब्लॉक, जिनमें इस नीलामी के दोनों ब्लॉक शामिल हैं, अंडमान सागर में इसी EEZ के भीतर स्थित हैं।

संदर्भ: UNCLOS का संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी आधिकारिक पाठ, भाग V (अनन्य आर्थिक क्षेत्र)

खुद जाँचें: क्या किसी तटीय देश का EEZ उसकी प्रादेशिक समुद्री सीमा (टेरिटोरियल सी) के बराबर होता है?

नहीं — प्रादेशिक सीमा आधार रेखा से केवल 12 समुद्री मील तक होती है, जिस पर देश की पूर्ण संप्रभुता होती है; EEZ इससे आगे, 200 समुद्री मील तक फैला होता है, और वहाँ देश को पूर्ण संप्रभुता नहीं बल्कि संसाधनों (जैसे समुद्र-तल के खनिज और मछली) पर अधिकार मिलता है।

अभ्यास: इस खबर से नीलामी में पेश दोनों ब्लॉकों का कुल क्षेत्रफल (1,632 वर्ग किलोमीटर) और वह अधिनियम (अपतटीय क्षेत्र खनिज अधिनियम, 2002) नोट करें जिसके तहत नीलामी हो रही है, और दोनों को ऊपर दी गई UNCLOS परिभाषा से अलग रखें।

खुद को परखें

भारत की पहली अपतटीय खनिज नीलामी के दो ब्लॉकों — सेवेल राइज़-01 और वेस्ट सेवेल रिज-01 — में किस प्रकार के खनिज भंडार हैं?

  1. पॉलीमेटेलिक नोड्यूल्स और क्रस्ट
  2. अपतटीय तेल और गैस
  3. कोल-बेड मीथेन
  4. समुद्र-तट की रेत के प्लेसर
उत्तर देखें

उत्तर: पॉलीमेटेलिक नोड्यूल्स और क्रस्ट

दोनों ब्लॉक (632 और 1,000 वर्ग किमी, अंडमान सागर में) में निकेल, कोबाल्ट, तांबा और मैंगनीज़ वाले पॉलीमेटेलिक नोड्यूल्स और क्रस्ट हैं, और ये कम्पोज़िट लाइसेंस के तहत नीलाम हो रहे हैं; बोली 28 दिसंबर 2026 को बंद होगी।

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