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DAILY · 2026-10-27

इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ईएसटीआईसी) 2026 के उद्घाटन पर प्रधानमंत्री ने कहा, सिर्फ एक वर्ष में अनुसंधान और विकास के लिए कुल 24 हजार करोड़ रुपये की नई प्रतिबद्धता हुई

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ईएसटीआईसी) 2026 के उद्घाटन के दौरान अपने संबोधन में कहा कि दशकों पहले भारत के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी का मतलब 'कैच अप' यानी पीछे से बराबरी करना था, लेकिन 21वीं सदी का भारत अब नई टेक्नोलॉजी बनाने, उसकी दिशा तय करने और दुनिया की समस्याओं के समाधान देने की शक्ति विकसित करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है। यह उल्लेख करते हुए कि 30 अक्टूबर को देश डॉ. होमी जहांगीर भाभा की जन्मजयंती मनाएगा, उन्होंने कहा कि भारत अपनी फास्ट ब्रीडर रिएक्टर टेक्नोलॉजी पर तेज़ी से काम कर रहा है और कुछ महीने पहले ही देश का 500 मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर फर्स्ट क्रिटिकैलिटी तक पहुँच चुका है। अंतरिक्ष क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के एक स्पेस स्टार्ट-अप ने मेड इन इंडिया रॉकेट से पहली ही कोशिश में सैटेलाइट को ऑर्बिट में स्थापित किया और भारत ने सैटेलाइट डॉकिंग की क्षमता भी हासिल की; उन्होंने यह भी कहा कि इसी वर्ष भारत ने एआई इम्पैक्ट समिट आयोजित की और अपना मॉडल भी लॉन्च किया, तथा भारत में तैयार चिप्स के पहले शिपमेंट अब दुनिया तक पहुँचने शुरू हो चुके हैं। यह याद करते हुए कि पिछले वर्ष इसी मंच पर अनुसंधान, विकास और नवाचार के लिए एक लाख करोड़ रुपये की व्यवस्था का संकल्प लिया गया था, प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक वर्ष में करीब 12 हजार करोड़ रुपये ऐसी टेक्नोलॉजी के लिए कमिट किए जा चुके हैं जो लैब से निकलकर मार्केट की ओर बढ़ने के लिए तैयार हैं, और इसमें निजी निवेशक भी बराबर से साझेदारी कर रहे हैं: सरकार की ओर से 12 हजार करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता के साथ निजी क्षेत्र भी 12 हजार करोड़ रुपये का निवेश कर रहा है, यानी सिर्फ एक वर्ष में अनुसंधान और विकास के लिए कुल 24 हजार करोड़ रुपये की नई प्रतिबद्धता हुई है। उन्होंने कहा कि दस वर्ष पहले सालभर में 50 हजार से भी कम पेटेंट आवेदन दाखिल होते थे, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या करीब डेढ़ लाख तक पहुँच गई। उन्होंने कुछ दिन पहले आईआईटी मद्रास में अपने द्वारा लोकार्पित ब्रेन सेंटर का उल्लेख किया, जो मानव मस्तिष्क की हाई-रिज़ॉल्यूशन डिजिटल 3D तस्वीरें विकसित करने में जुटा है; 'जय विज्ञान, जय अनुसंधान' का आह्वान दोहराया; कहा कि एआई वैज्ञानिकों की स्वतंत्र सोच को सीमित न करे बल्कि उसे और समृद्ध बनाए तथा जवाब की सत्यता परखने की जिम्मेदारी वैज्ञानिक की ही होनी चाहिए; और कॉन्क्लेव में उपस्थित प्रत्येक शोधकर्ता, उद्योग जगत के अग्रणी, स्टार्ट-अप संस्थापक और युवा विद्यार्थी से आग्रह किया कि वे एक ठोस लक्ष्य तय करें कि अगले तीन वर्षों में वे कौन-सी टेक्नोलॉजी, प्रोटोटाइप, पायलट प्रोजेक्ट या प्रोडक्ट विकसित करने में योगदान देंगे, ताकि यह कॉन्क्लेव मापने योग्य परिणामों (मेज़रेबल आउटकम्स) का मंच बने।

ऊपर दी गई PIB की आधिकारिक विज्ञप्ति से AI की सहायता से तैयार, और AI की दूसरी जाँच में उसी विज्ञप्ति से मिलाया गया। किसी व्यक्ति ने इसका पंक्ति-दर-पंक्ति संपादन नहीं किया है।

पढ़ाई के लिए संदर्भ

पिछले वर्ष का कॉन्क्लेव, ईएसटीआईसी 2025, नई दिल्ली के भारत मंडपम में 3 से 5 नवंबर 2025 तक आयोजित हुआ था। 3 नवंबर 2025 को इसे संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ₹1 लाख करोड़ के आवंटन वाली अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) योजना शुरू करने की घोषणा की, जिसका उद्देश्य देश में निजी क्षेत्र-आधारित अनुसंधान और विकास इकोसिस्टम को बढ़ावा देना है; उन्होंने कहा कि पहली बार उच्च जोखिम और उच्च प्रभाव वाली परियोजनाओं के लिए पूंजी उपलब्ध कराई जा रही है, और उन्होंने 'जय विज्ञान, जय अनुसंधान' की भावना का आह्वान करते हुए अपना संबोधन समाप्त किया। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय विश्वविद्यालयों में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ाने के लिए अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की गई है। ईएसटीआईसी 2025 में शिक्षा जगत, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग और सरकार से 3,000 से अधिक प्रतिभागियों को एक साथ आना था, और विचार-विमर्श 11 प्रमुख विषयगत क्षेत्रों पर केंद्रित होना था, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम साइंस एंड टेक्नोलॉजी, ब्लू इकोनॉमी और स्पेस टेक्नोलॉजी शामिल थे। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद और नोबेल पुरस्कार विजेता सर आंद्रे गेम उपस्थित थे।

संदर्भ: PIB (प्रधानमंत्री कार्यालय), 'प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन 2025 को संबोधित किया', 3 नवंबर 2025

खुद जाँचें: ईएसटीआईसी 2025 कब और कहाँ आयोजित हुआ, और इसे संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कितने आवंटन वाली कौन-सी योजना शुरू की?

नई दिल्ली के भारत मंडपम में, 3 से 5 नवंबर 2025 तक; अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) योजना, ₹1 लाख करोड़ के आवंटन के साथ।

अभ्यास: इस रिलीज़ से प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के बारे में प्रधानमंत्री ने क्या कहा, उनके द्वारा गिनाई गई अंतरिक्ष, एआई और चिप से जुड़ी उपलब्धियाँ, एक वर्ष में अनुसंधान और विकास के लिए हुई प्रतिबद्धताएँ (सरकार, निजी क्षेत्र और कुल), पेटेंट आवेदनों के आँकड़े और प्रतिभागियों से तय करने को कहा गया लक्ष्य लिखें; नोट से ईएसटीआईसी 2025 कब और कहाँ हुआ, वहाँ शुरू की गई योजना और उसका आवंटन, तथा 'जय विज्ञान, जय अनुसंधान' का नारा।

खुद को परखें

27 अक्टूबर 2026 को इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ईएसटीआईसी) 2026 के उद्घाटन के दौरान अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने सरकार और निजी क्षेत्र, दोनों को मिलाकर, सिर्फ एक वर्ष में अनुसंधान और विकास के लिए कुल कितनी नई प्रतिबद्धता होने की बात कही?

  1. 24 हजार करोड़ रुपये
  2. 12 हजार करोड़ रुपये
  3. 36 हजार करोड़ रुपये
  4. 48 हजार करोड़ रुपये
उत्तर देखें

उत्तर: 24 हजार करोड़ रुपये

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक वर्ष में करीब 12 हजार करोड़ रुपये ऐसी टेक्नोलॉजी के लिए कमिट किए जा चुके हैं जो लैब से निकलकर मार्केट की ओर बढ़ने के लिए तैयार हैं, और इसमें निजी निवेशक भी बराबर से साझेदारी कर रहे हैं: सरकार की ओर से 12 हजार करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता के साथ निजी क्षेत्र भी 12 हजार करोड़ रुपये का निवेश कर रहा है; यानी सिर्फ एक वर्ष में अनुसंधान और विकास के लिए कुल 24 हजार करोड़ रुपये की नई प्रतिबद्धता हुई है। उन्होंने याद किया कि पिछले वर्ष इसी मंच पर अनुसंधान, विकास और नवाचार के लिए एक लाख करोड़ रुपये की व्यवस्था का संकल्प लिया गया था।

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