गोवा शिपयार्ड लिमिटेड, गोवा में अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत 'सृष्टि' (यार्ड 1283) का जलावतरण
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि 27 अक्टूबर 2026 को गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल), गोवा में अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत (एनजीओपीवी) 'यार्ड 1283 (सृष्टि)' का जलावतरण श्रीमती संदीपा सहाय द्वारा किया गया; इस अवसर पर सचिव (रक्षा वित्त) विश्वजीत सहाय उपस्थित थे। यह कार्यक्रम भारतीय नौसेना की समृद्ध परंपराओं एवं मूल्यों को दर्शाता था, और इसमें भारतीय नौसेना, रक्षा मंत्रालय और जीएसएल के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। स्वदेशी रूप से डिजाइन एवं निर्मित ये जहाज समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव, अपतटीय परिसंपत्तियों की सुरक्षा, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) तथा समुद्री डकैती-रोधी अभियानों जैसे बहु-आयामी अभियानों के लिए मौजूदा ओपीवी/एनओपीवी की क्षमताओं को बढ़ाएंगे, और एनजीओपीवी का निर्माण एक साथ दो शिपयार्ड - जीएसएल, गोवा और जीआरएसई, कोलकाता - में किया जा रहा है। इन जहाजों के नाम भारत की समृद्ध विरासत से लिए गए हैं, और इस जहाज का नाम 'सृष्टि' रखा गया है, जिसका संस्कृत में अर्थ है 'रचना' या 'निर्माण करने की क्रिया'। इस अवसर पर विश्वजीत सहाय ने स्वदेशीकरण पर सरकार के ज़ोर और अर्थव्यवस्था पर इसके गुणक प्रभाव (मल्टीप्लायर इफ़ेक्ट) को रेखांकित किया, जिसमें जीडीपी वृद्धि में इसका योगदान और घरेलू औद्योगिक इकोसिस्टम का विकास शामिल है; उन्होंने इस प्रयास में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तीनों सेनाओं, विशेष रूप से भारतीय नौसेना, की सराहना की और रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता के सरकार के विज़न को साकार करने में योगदान के लिए जीएसएल को बधाई दी। मंत्रालय के अनुसार यह जलावतरण स्वदेशी जहाज निर्माण की दिशा में भारतीय नौसेना के प्रयासों में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है और भारत सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' तथा 'मेक इन इंडिया' पहल के विज़न के अनुरूप है।
ऊपर दी गई PIB की आधिकारिक विज्ञप्ति से AI की सहायता से तैयार, और AI की दूसरी जाँच में उसी विज्ञप्ति से मिलाया गया। किसी व्यक्ति ने इसका पंक्ति-दर-पंक्ति संपादन नहीं किया है।
पढ़ाई के लिए संदर्भ
ग्यारह अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोतों (एनजीओपीवी) में से पहले, 'यार्ड 1280 (शाची)', का जलावतरण 31 मार्च 2026 को जीएसएल, गोवा में श्रीमती शगुन सोबती द्वारा नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल तरुण सोबती की उपस्थिति में किया गया था। रक्षा मंत्रालय ने तब बताया था कि एनजीओपीवी का निर्माण दो शिपयार्ड (जीएसएल, गोवा और जीआरएसई, कोलकाता) में एक साथ किया जा रहा है और स्वदेशी रूप से निर्मित ये जहाज रक्षा एवं निगरानी, खोज एवं बचाव, अपतटीय परिसंपत्तियों की सुरक्षा, एचएडीआर और समुद्री डकैती-रोधी अभियानों जैसे बहु-क्षेत्रीय अभियानों के लिए मौजूदा दस ओपीवी/एनओपीवी की संख्या को बढ़ाएंगे। मंत्रालय के अनुसार इन जहाजों के नाम भारतीय पौराणिक कथाओं से लिए गए हैं, पहले जहाज का नाम 'शाची' रखा गया, जिसका अर्थ है सहायता प्रदान करने वाला, और एनजीओपीवी के प्रतीक चिह्न (क्रेस्ट) में सप्तर्षि तारामंडल (उर्सा मेजर) और एक लाल एवं सफेद प्रकाशस्तंभ दर्शाया गया है।
खुद जाँचें: ग्यारह एनजीओपीवी में से सबसे पहले किसका जलावतरण हुआ, और वह कब और कहाँ हुआ?
'यार्ड 1280 (शाची)' का, जीएसएल, गोवा में, 31 मार्च 2026 को।
अभ्यास: इस रिलीज़ से 27 अक्टूबर 2026 को जलावतरित एनजीओपीवी का यार्ड नंबर, नाम और उसका अर्थ, जलावतरण कहाँ और किसके द्वारा हुआ, एनजीओपीवी की भूमिकाएँ और इन्हें बनाने वाले दो शिपयार्ड लिखें; नोट से पहले एनजीओपीवी का यार्ड नंबर, नाम, अर्थ और जलावतरण की तारीख़, एनजीओपीवी की संख्या और उनका प्रतीक चिह्न।
खुद को परखें
अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोतों (एनजीओपीवी), जिनमें से एक 'सृष्टि' (यार्ड 1283) का 27 अक्टूबर 2026 को जलावतरण किया गया, का निर्माण एक साथ किन दो शिपयार्ड में किया जा रहा है?
उत्तर देखें
उत्तर: जीएसएल, गोवा और जीआरएसई, कोलकाता
'यार्ड 1283 (सृष्टि)' का जलावतरण 27 अक्टूबर 2026 को गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल), गोवा में किया गया, और रक्षा मंत्रालय के अनुसार एनजीओपीवी का निर्माण एक साथ दो शिपयार्ड - जीएसएल, गोवा और जीआरएसई, कोलकाता - में किया जा रहा है। स्वदेशी रूप से डिजाइन एवं निर्मित ये जहाज समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव, अपतटीय परिसंपत्तियों की सुरक्षा, एचएडीआर और समुद्री डकैती-रोधी अभियानों जैसे बहु-आयामी अभियानों के लिए मौजूदा ओपीवी/एनओपीवी की क्षमताओं को बढ़ाएंगे।