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DAILY · 2026-10-28

भारत की नए युग की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों पर PIB पृष्ठभूमि टिप्पणी: स्पेसडेक्स से भारत अंतरिक्ष डॉकिंग का प्रदर्शन करने वाला चौथा देश बना; एनजीएलवी निम्न पृथ्वी कक्षा में 30 टन तक के लिए डिज़ाइन

SSCRailwayScienceGeneral

PIB की 28 अक्टूबर 2026 की पृष्ठभूमि टिप्पणी 'भारत के नए युग की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियां: आत्मनिर्भरता की राह' में 21 नवंबर 1963 को केरल के थुम्बा से प्रक्षेपित पहले साउंडिंग रॉकेट से लेकर प्रस्तावित भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन तक भारत की अंतरिक्ष यात्रा का विवरण दिया गया है। भारत की संगठित अंतरिक्ष गतिविधियाँ 1962 में डॉ. विक्रम ए. साराभाई के दृष्टिकोण के तहत भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (इनकोस्पार) की स्थापना के साथ शुरू हुईं; इसरो का गठन 15 अगस्त 1969 को हुआ, जिसने इनकोस्पार का स्थान लिया, और 1972 में इसे अंतरिक्ष विभाग के अधीन लाया गया। सितंबर 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 8,240 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ स्वीकृत अगली पीढ़ी का प्रक्षेपण यान (एनजीएलवी) - जिस परिव्यय में विकास लागत, तीन विकासात्मक उड़ानें, आवश्यक सुविधाएँ, कार्यक्रम प्रबंधन और प्रक्षेपण अभियान शामिल हैं - निम्न पृथ्वी कक्षा (एलईओ) में अधिकतम 30 टन की क्षमता के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो एलवीएम3 की 10 टन की एलईओ सीमा का तिगुना है; 14 टन एलईओ पेलोड क्षमता वाला एनजीएलवी का आंशिक रूप से पुन: प्रयोज्य संस्करण भी विकसित किया जा रहा है। इसरो ने अपने पंखों वाले पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान (आरएलवी) प्रौद्योगिकी प्रदर्शक 'पुष्पक' के तीन लैंडिंग प्रयोग 2 अप्रैल 2023, 22 मार्च 2024 और 23 जून 2024 को पूरे किए, और भारत ने 28 अगस्त 2016 को अपने स्क्रैमजेट का उड़ान परीक्षण किया, जिसमें मैक 6 की गति हासिल हुई। 27 मार्च 2025 को इसरो ने अपने स्वदेशी 300 mN स्टेशनरी प्लाज़्मा थ्रस्टर का 1,000 घंटे का जीवन परीक्षण पूरा किया, जिसे वह अपने प्रौद्योगिकी प्रदर्शन उपग्रह (TDS-01) पर परखने की योजना बना रहा है। इसरो के स्पेसडेक्स (SpaDeX) मिशन ने 16 जनवरी 2025 को पहली बार अपने दो उपग्रहों को डॉक किया, 20 अप्रैल 2025 को 15 मीटर की अंतर-उपग्रह दूरी से पूर्ण स्वायत्तता के साथ दूसरी डॉकिंग पूरी की और 21 अप्रैल 2025 को डॉक किए गए उपग्रहों के बीच द्विदिशीय बिजली हस्तांतरण का प्रदर्शन किया; पृष्ठभूमि टिप्पणी के अनुसार इसके साथ भारत संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन के बाद अंतरिक्ष डॉकिंग का प्रदर्शन करने वाला चौथा देश बन गया। पृष्ठभूमि टिप्पणी में भारत की स्वतंत्र क्षेत्रीय उपग्रह नेविगेशन प्रणाली नाविक (NavIC) का भी उल्लेख है, जो पूरे भारत में और भारतीय मुख्य भूमि से 1,500 किलोमीटर आगे तक स्थिति, नेविगेशन और समय सेवाएँ देती है; साथ ही 2 नवंबर 2025 को प्रक्षेपित भारतीय नौसेना के समर्पित संचार उपग्रह सीएमएस-03 (जीसैट-7आर) का, और नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार (निसार) मिशन का, जिसे 30 जुलाई 2025 को श्रीहरिकोटा से जीएसएलवी-एफ16 द्वारा प्रक्षेपित किया गया और जो दो रडार आवृत्तियों - नासा के एल-बैंड और इसरो के एस-बैंड - का एक साथ उपयोग करने वाला पहला उपग्रह मिशन है। अंतरिक्ष विभाग के अनुसार भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को 2033 तक 44 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य है; न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) ने इसरो द्वारा विकसित 83 प्रौद्योगिकियों को भारतीय उद्योग को हस्तांतरित करने के लिए 118 प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, और 31 मार्च 2026 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टार्ट-अप में संचयी निवेश लगभग 618.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया।

ऊपर दी गई PIB की आधिकारिक विज्ञप्ति से AI की सहायता से तैयार, और AI की दूसरी जाँच में उसी विज्ञप्ति से मिलाया गया। किसी व्यक्ति ने इसका पंक्ति-दर-पंक्ति संपादन नहीं किया है।

पढ़ाई के लिए संदर्भ

18 सितंबर 2024 को जब केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यान (एनजीएलवी) के विकास को मंज़ूरी दी, तब सरकार ने इसे भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना और संचालन तथा 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय चालक दल के उतरने की क्षमता विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया था। एनजीएलवी को एलवीएम3 की तुलना में 1.5 गुना लागत पर उस समय की पेलोड क्षमता का 3 गुना देना था, और इसमें पुन: उपयोगिता, जिससे अंतरिक्ष तक कम लागत में पहुँच संभव हो, तथा मॉड्यूलर ग्रीन प्रोपल्शन सिस्टम भी होने थे; इसे निम्न पृथ्वी कक्षा में अधिकतम 30 टन पेलोड क्षमता और पुन: उपयोग योग्य पहले चरण (फ़र्स्ट स्टेज) के साथ डिज़ाइन किया गया था। उस समय भारत ने प्रचालनरत पीएसएलवी, जीएसएलवी, एलवीएम3 और एसएसएलवी प्रक्षेपण यानों के माध्यम से 10 टन तक के उपग्रहों को निम्न पृथ्वी कक्षा में और 4 टन तक के उपग्रहों को जियो-सिन्क्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (जीटीओ) में भेजने के लिए अंतरिक्ष परिवहन प्रणालियों में आत्मनिर्भरता हासिल कर ली थी। इस परियोजना को भारतीय उद्योग की अधिकतम भागीदारी के साथ लागू किया जाना था, और एनजीएलवी का प्रदर्शन तीन विकास उड़ानों (डी1, डी2 और डी3) के माध्यम से किया जाना था, जिसमें विकास चरण पूरा करने का लक्ष्य 96 महीने (8 वर्ष) रखा गया।

संदर्भ: PIB (मंत्रिमंडल), 'भारत के लिए नया पुन: उपयोग योग्य कम लागत वाला प्रक्षेपण यान', 18 सितंबर 2024

खुद जाँचें: एनजीएलवी को मंज़ूरी देते समय सरकार ने चंद्रमा पर भारतीय चालक दल के उतरने की क्षमता किस वर्ष तक विकसित करने की बात कही थी, और एनजीएलवी का विकास चरण पूरा करने के लिए कितना समय लक्षित था?

2040 तक; 96 महीने (8 वर्ष), तीन विकास उड़ानों (डी1, डी2 और डी3) के साथ।

अभ्यास: इस रिलीज़ से भारत का पहला साउंडिंग रॉकेट कब और कहाँ से प्रक्षेपित हुआ, इनकोस्पार और इसरो की स्थापना कब हुई, एनजीएलवी का परिव्यय और पेलोड, पुष्पक के लैंडिंग प्रयोगों की तिथियाँ, स्पेसडेक्स की डॉकिंग तिथियाँ और भारत से पहले डॉकिंग करने वाले देश, नाविक का कवरेज, निसार का प्रक्षेपण और रडार बैंड, तथा अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का लक्ष्य लिखें; नोट से एलवीएम3 की तुलना में एनजीएलवी की पेलोड क्षमता और लागत, उसकी विकास उड़ानें और समय-सीमा, और चंद्रमा पर भारतीय चालक दल के उतरने की क्षमता विकसित करने का लक्ष्य वर्ष।

खुद को परखें

भारत की नए युग की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों पर PIB की 28 अक्टूबर 2026 की पृष्ठभूमि टिप्पणी के अनुसार, इसरो के किस मिशन के माध्यम से भारत अंतरिक्ष डॉकिंग का प्रदर्शन करने वाला चौथा देश बना?

  1. स्पेसडेक्स
  2. पुष्पक
  3. निसार
  4. गगनयान
उत्तर देखें

उत्तर: स्पेसडेक्स

इसरो के स्पेसडेक्स (SpaDeX) मिशन ने 16 जनवरी 2025 को पहली बार अपने दो उपग्रहों को डॉक किया और बाद में अनडॉकिंग का प्रदर्शन किया; 20 अप्रैल 2025 को 15 मीटर की अंतर-उपग्रह दूरी से पूर्ण स्वायत्तता के साथ दूसरी डॉकिंग हुई, और 21 अप्रैल 2025 को डॉक किए गए उपग्रहों के बीच द्विदिशीय बिजली हस्तांतरण का प्रदर्शन किया गया। पृष्ठभूमि टिप्पणी के अनुसार इस प्रकार भारत संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन के बाद अंतरिक्ष डॉकिंग का प्रदर्शन करने वाला चौथा देश बन गया। पुष्पक इसरो का पंखों वाला पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी प्रदर्शक है, निसार नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार मिशन है, और गगनयान भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान लक्ष्यों को आगे बढ़ा रहा है।

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