भगवान बुद्ध के पवित्र पिपराहवा अवशेष तवांग मठ पहुंचे; तवांग, बोमडिला और नामसाई में होगी प्रदर्शनी
संस्कृति मंत्रालय ने 2 नवंबर 2026 को बताया कि नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय से लाए गए शाक्यमुनि बुद्ध के पवित्र अवशेषों को अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पेमा खांडू ने 31 अक्टूबर 2026 को तवांग में औपचारिक रूप से प्राप्त किया, और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत की उपस्थिति में ऐतिहासिक गादेन नामग्याल ल्हात्से (तवांग मठ) में उनका पारंपरिक धार्मिक स्वागत किया गया। संस्कृति मंत्रालय यह प्रदर्शनी अरुणाचल प्रदेश सरकार, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (आईबीसी) और राष्ट्रीय संग्रहालय के साथ मिलकर बौद्ध आस्था के तीन केंद्रों में आयोजित कर रहा है: 1 से 7 नवंबर तक तवांग मठ में, 8 से 13 नवंबर तक टीजीएल मठ (लोअर गोम्पा), बोमडिला में और 14 से 20 नवंबर 2026 तक गोल्डन पैगोडा, नामसाई में; पवित्र अवशेष 21 नवंबर 2026 को राष्ट्रीय संग्रहालय वापस लाए जाएंगे। ये अवशेष उत्तर प्रदेश के पिपराहवा से हैं, जो प्राचीन कपिलवस्तु और भगवान बुद्ध की शाक्य परंपरा से जुड़ा एक पुरातात्विक स्थल है। अपने संदेश में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक सदी से भी अधिक समय बाद पवित्र पिपराहवा अवशेषों की घर वापसी को गर्व और खुशी का पल बताया। यह प्रदर्शनी ल्हाबाब दुचेन के अवसर पर हो रही है, जो तिब्बती बौद्ध परंपरा में बुद्ध के स्वर्गलोक से अवतरण की स्मृति में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण अवसर है। साथ में लगी प्रदर्शनी 'पवित्र पिपराहवा की खोज: पवित्र बुद्ध अवशेषों और उनकी खोज की कहानी' (Unearthing the Sacred Piprahwa: The Story of the Holy Buddha Relics and Their Discovery) में पिपराहवा में हुई पुरातात्विक खोजों का इतिहास और भारत में इसकी वापसी सहित पिपराहवा विरासत की यात्रा प्रस्तुत की जाएगी, और आईबीसी अरुणाचल प्रदेश सरकार के साथ मिलकर 2 नवंबर 2026 को तवांग के कलावांगपो सम्मेलन कक्ष में 'बौद्ध धर्म: हिमालयी क्षेत्र और उससे आगे प्रसार' विषय पर एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर रहा है।
ऊपर दी गई PIB की आधिकारिक विज्ञप्ति से AI की सहायता से तैयार, और AI की दूसरी जाँच में उसी विज्ञप्ति से मिलाया गया। किसी व्यक्ति ने इसका पंक्ति-दर-पंक्ति संपादन नहीं किया है।
पढ़ाई के लिए संदर्भ
इस प्रदर्शनी पर PIB की 30 अक्टूबर 2026 की रिलीज़ के अनुसार ये अवशेष उत्तर प्रदेश में आज के सिद्धार्थनगर जिले के पिपराहवा से हैं, जो प्राचीन कपिलवस्तु और भगवान बुद्ध की शाक्य परंपरा से जुड़ा एक पुरातात्विक स्थल है। 1898 में विलियम क्लैक्सटन पेप्पे ने वहां एक स्तूप की खुदाई की और हड्डियों के टुकड़ों तथा कीमती वस्तुओं वाले अवशेष-पात्र खोजे। इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने पुरातत्वविद् श्री के. एम. श्रीवास्तव की देखरेख में 1971 और 1977 के बीच वहां और खुदाई की, जिसमें दो और अवशेष-मंजूषाएं मिलीं: बड़ी मंजूषा में हड्डियों के 12 पवित्र टुकड़े थे और छोटी में 10, यानी कुल 22 पवित्र अवशेष, जिनमें से 20 राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली में और दो भारतीय संग्रहालय, कोलकाता में सुरक्षित हैं। 1898 की खोज से जुड़ा पिपराहवा ज्वेल कलेक्शन, उसकी प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय नीलामी के बाद संस्कृति मंत्रालय के प्रयासों से, लगभग 127 साल बाद 2025 में भारत वापस लाया गया।
खुद जाँचें: 1898 में पिपराहवा में स्तूप की खुदाई किसने की थी, और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की बाद की खुदाई में हड्डियों के कितने पवित्र अवशेष मिले?
विलियम क्लैक्सटन पेप्पे; 22 (बड़ी मंजूषा में 12 और छोटी में 10)।
अभ्यास: इस रिलीज़ से अवशेष किसने, कहाँ और कब प्राप्त किए, आयोजक, तीनों स्थान और उनकी तारीख़ें, अवशेष कहाँ से हैं, प्रदर्शनी किस अवसर पर हो रही है, तथा साथ की प्रदर्शनी और सम्मेलन लिखें; नोट से पिपराहवा का जिला, दोनों खुदाइयाँ और उनका नेतृत्व किसने किया, मिले अवशेषों की संख्या और वे कहाँ रखे हैं, और ज्वेल कलेक्शन की वापसी।
खुद को परखें
अरुणाचल प्रदेश में प्रदर्शनी के लिए 31 अक्टूबर 2026 को तवांग मठ में प्राप्त किए गए भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष किस पुरातात्विक स्थल से हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: पिपराहवा
संस्कृति मंत्रालय ने बताया कि ये अवशेष उत्तर प्रदेश के पिपराहवा से हैं, जो प्राचीन कपिलवस्तु और भगवान बुद्ध की शाक्य परंपरा से जुड़ा एक पुरातात्विक स्थल है; ये नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में रखे हैं और तवांग, बोमडिला और नामसाई में दर्शन के बाद 21 नवंबर 2026 को संग्रहालय वापस लाए जाएंगे।