जेएनसीएएसआर की नई सिलिकॉन चिप टेराहर्ट्ज तरंगों को बहुत कम हानि के साथ अवरोध के पार गुजारती है और 100 गीगाबिट प्रति सेकंड तक की गति से डेटा ले जाती है; भविष्य के 6जी नेटवर्क में हो सकती है सहायक
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 4 नवंबर 2026 को बताया कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के स्वायत्त संस्थान जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (जेएनसीएएसआर) के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी सिलिकॉन चिप का प्रदर्शन किया है, जो टेराहर्ट्ज तरंगों को एक विशेष रूप से निर्मित अवरोध के पार बहुत कम हानि के साथ गुजरने देती है और साथ ही 100 गीगाबिट प्रति सेकंड (Gbit/s) तक की गति से डेटा ले जाती है; रिलीज़ के अनुसार यह परिणाम भविष्य की छठी पीढ़ी (6जी) की संचार प्रौद्योगिकियों के लिए कॉम्पैक्ट टेराहर्ट्ज सर्किट की दिशा दिखाता है। भविष्य के 6जी वायरलेस नेटवर्क में टेराहर्ट्ज आवृत्तियों के उपयोग की अपेक्षा है, जो माइक्रोवेव और इन्फ्रारेड प्रकाश के बीच स्थित होती हैं और व्यापक बैंडविड्थ प्रदान करती हैं; लेकिन इन तरंगों को छोटे सर्किटों में निर्देशित करना चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि वेवगाइड में मोड़, जोड़ और अचानक होने वाले बदलाव सिग्नल के कुछ हिस्से को बिखेर या परावर्तित कर सकते हैं। टोपोलॉजिकल फोटोनिक्स का उपयोग करते हुए टीम ने एक सिलिकॉन फोटोनिक क्रिस्टल डिजाइन किया - सिलिकॉन की एक परत में त्रिकोणीय छिद्र ऐसे पैटर्न में व्यवस्थित किए गए जो ग्राफीन की मधुमक्खी के छत्ते जैसी (हनीकॉम्ब) जालक संरचना की नकल करता है - और वेवगाइड के एक छोटे हिस्से में त्रिकोणीय छिद्रों का आकार बदलकर एक अवरोध बनाया। एक अवरोध से केवल लगभग 1–2 प्रतिशत हानि हुई और क्रम में दो अवरोधों से लगभग 2–3 प्रतिशत, जबकि पारंपरिक गैर-टोपोलॉजिकल वेवगाइड में ऐसा ही अवरोध संचरण को काफी कम कर देता है; जब तक अवरोध की तीव्रता क्रिस्टल की एक विशिष्ट युग्मन क्षमता (कपलिंग स्ट्रेंथ) से नीचे रही, संचरण अवरोध-मुक्त स्थिति के लगभग बराबर बना रहा। इस अवधारणा का परीक्षण उच्च प्रतिरोधकता वाले सिलिकॉन (जो पहले से स्थापित सेमीकंडक्टर विनिर्माण प्रक्रियाओं के अनुकूल सामग्री है) पर बने तीन उपकरणों में किया गया: एक में क्रम से दो अवरोध थे, दूसरे में चार तीखे मोड़ों और बीच में एक अवरोध वाला ओमेगा (Ω) आकार का मार्ग था, और तीसरा एक पावर स्प्लिटर था, जिसकी दो शाखाओं में से एक में अवरोध था। 310–360 गीगाहर्ट्ज़ की सीमा में किए गए माप सिमुलेशन के परिणामों से काफी हद तक मेल खाते थे। उच्च गति डेटा परीक्षणों में दोहरे अवरोध वाले और ओमेगा आकार वाले उपकरणों ने क्रमशः 48 और 60 गीगाबिट प्रति सेकंड की गति से डेटा संचारित किया, और स्प्लिटर ने क्यूएएम-32 मॉड्यूलेशन का उपयोग करते हुए 100 गीगाबिट प्रति सेकंड की गति को समर्थन दिया। एडवांस्ड मैटेरियल्स पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन का नेतृत्व जेएनसीएएसआर के सहायक प्रोफेसर डॉ. अभिषेक कुमार ने किया, जो वहां मेटा ऑप्टिक्स प्रयोगशाला (MetoLab) के प्रमुख हैं; जेएनसीएएसआर की समीना मुल्ला और संग्राम कुमार साधु इसके संयुक्त प्रथम लेखक हैं। रिलीज़ के चित्र-विवरणों में इस प्रभाव को फोटोनिक क्लाइन टनलिंग (photonic Klein tunnelling) कहा गया है। टीम की अगली योजना अवरोधों को विद्युत, तापीय या यांत्रिक तरीके से नियंत्रित करने की है, जिससे किसी उपकरण के लिए आवश्यकता के अनुसार सिग्नलों को अलग-अलग मार्गों की ओर मोड़ना संभव हो सकता है।
ऊपर दी गई PIB की आधिकारिक विज्ञप्ति से AI की सहायता से तैयार, और AI की दूसरी जाँच में उसी विज्ञप्ति से मिलाया गया। किसी व्यक्ति ने इसका पंक्ति-दर-पंक्ति संपादन नहीं किया है।
पढ़ाई के लिए संदर्भ
3 जुलाई 2023 को दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने भारत 6जी अलायंस (बी6जीए) के गठन की घोषणा की थी - सार्वजनिक और निजी कंपनियों, शिक्षाविदों, अनुसंधान संस्थानों और मानक विकास संगठनों का एक सहयोगी मंच; यह घोषणा केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने की थी। अलायंस का प्राथमिक उद्देश्य प्रौद्योगिकी आवश्यकताओं से आगे 6जी की व्यावसायिक और सामाजिक जरूरतों को समझना, इन जरूरतों पर आम सहमति को बढ़ावा देना और उच्च प्रभाव वाली मुक्त अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) पहलों को बढ़ावा देना है; यह देश के भीतर मानकों से संबंधित पेटेंट के सृजन में तेजी लाने और 3जीपीपी तथा आईटीयू जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठनों में सक्रिय योगदान देने का भी लक्ष्य रखता है। उसी दिन दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास निधि (टीटीडीएफ) के तहत 240.51 करोड़ रुपये के अनुदान के साथ परियोजनाओं के लिए दो समझौतों पर हस्ताक्षर हुए: एक, समीर (SAMEER), आईआईटी मद्रास, आईआईटी गुवाहाटी और आईआईटी पटना के संघ (कंसोर्टियम) के माध्यम से कक्षीय कोणीय संवेग (ऑर्बिटल एंगुलर मोमेंटम, ओएएम) और मल्टीप्लेक्सिंग के साथ 6जी टीएचज़ेड (टेराहर्ट्ज) टेस्टबेड के लिए, और दूसरा, एडवांस ऑप्टिकल कम्युनिकेशन टेस्ट बेड के लिए। टीटीडीएफ योजना डीओटी/यूएसओएफ ने 1 अक्टूबर 2022 को शुरू की थी, और प्रौद्योगिकियों, उत्पादों और सेवाओं के अनुसंधान एवं विकास के वित्तपोषण के लिए यूएसओएफ के वार्षिक संग्रह का 5 प्रतिशत इस योजना के लिए उपलब्ध होना है।
खुद जाँचें: भारत 6जी अलायंस का गठन कब हुआ, और टीटीडीएफ के तहत वित्तपोषित 6जी टीएचज़ेड टेस्टबेड किस संघ (कंसोर्टियम) के माध्यम से बनना था?
3 जुलाई 2023 को; समीर (SAMEER), आईआईटी मद्रास, आईआईटी गुवाहाटी और आईआईटी पटना के संघ के माध्यम से।
अभ्यास: इस रिलीज़ से संस्थान और उसका मूल विभाग, चिप क्या करती है, उसका फोटोनिक क्रिस्टल किस जालक संरचना की नकल करता है, एक और दो अवरोधों से होने वाली हानि, परीक्षण के तीन उपकरण, मापी गई आवृत्ति सीमा, हासिल की गई डेटा गति, इस्तेमाल किया गया मॉड्यूलेशन, पत्रिका और अध्ययन का नेतृत्व करने वाले शोधकर्ता लिखें; नोट से भारत 6जी अलायंस के गठन की तारीख़ और उद्देश्य, टीटीडीएफ अनुदान और उसकी दोनों परियोजनाएं, और टीटीडीएफ योजना कब शुरू हुई। याद रखें कि रिलीज़ के अनुसार यह चिप 6जी नेटवर्क में सहायक हो सकती है, यह नहीं कि वह पहले से ऐसा कर रही है।
खुद को परखें
किस संस्थान के शोधकर्ताओं ने ऐसी सिलिकॉन चिप का प्रदर्शन किया जो टेराहर्ट्ज तरंगों को एक विशेष रूप से निर्मित अवरोध के पार गुजारते हुए 100 गीगाबिट प्रति सेकंड तक की गति से डेटा ले जाती है, और जिसके बारे में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 4 नवंबर 2026 को कहा कि यह भविष्य के 6जी नेटवर्क में सहायक हो सकती है?
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उत्तर: जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (जेएनसीएएसआर)
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बताया कि डीएसटी के स्वायत्त संस्थान जेएनसीएएसआर के शोधकर्ताओं ने टोपोलॉजिकल फोटोनिक्स के माध्यम से ग्राफीन की मधुमक्खी के छत्ते जैसी जालक संरचना की नकल करने वाला सिलिकॉन फोटोनिक क्रिस्टल डिजाइन किया; एक अवरोध से केवल लगभग 1–2 प्रतिशत हानि हुई, और एक पावर स्प्लिटर ने 100 गीगाबिट प्रति सेकंड की गति को समर्थन दिया। डॉ. अभिषेक कुमार के नेतृत्व में हुआ यह अध्ययन एडवांस्ड मैटेरियल्स पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।