10 में से पाठ 4 · बैंकिंग और वित्तीय जागरूकता

बैंक खाते, NRI जमा, चेक, ऋण और जमा बीमा

AI की सहायता से तैयार किया गया और 28 अक्टूबर 2026 को तथ्यों की जाँच की गई; किसी मानव संपादक ने इसे अभी पंक्ति-दर-पंक्ति नहीं पढ़ा है। कोई गलती दिखे तो हमें बताइए। संपादकीय मानक और सुधार

जमा खाते

जमाराशियाँ दो समूहों में बँटती हैं। मांग जमा, अर्थात बचत और चालू खाते, किसी भी समय निकाली जा सकती हैं; मीयादी जमा, अर्थात सावधि और आवर्ती जमा, एक चुनी हुई अवधि के लिए बँधी रहती हैं और इसलिए अधिक ब्याज कमाती हैं। बचत खाता व्यक्तियों के लिए है; इस पर दैनिक शेष के आधार पर ब्याज मिलता है, और RBI ने 2011 में बचत दर को विनियमन-मुक्त कर दिया, इसलिए हर बैंक अपनी दर स्वयं तय करता है। चालू खाता अधिक लेनदेन वाले व्यवसायों के लिए है; इस पर प्रायः ब्याज नहीं मिलता, पर असीमित लेनदेन और ओवरड्राफ्ट की सुविधा मिलती है। सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉज़िट) निश्चित अवधि और निश्चित दर पर रखी जाती है और समय से पहले निकासी पर दंड लगता है, जबकि आवर्ती जमा में हर महीने एक निश्चित राशि जमा होती है। कुल जमा में चालू और बचत जमा का हिस्सा, यानी CASA अनुपात, बहुत ध्यान से देखा जाता है क्योंकि यह बैंक का सबसे सस्ता धन है।

NRI खाते और KYC

विदेश में रहने वाले भारतीय मुख्यतः तीन खातों का उपयोग करते हैं। NRE (अनिवासी बाह्य) खाता विदेश में कमाए धन के लिए रुपये में खाता है; मूलधन और ब्याज दोनों को स्वतंत्र रूप से विदेश वापस भेजा (प्रत्यावर्तित किया) जा सकता है और ब्याज भारतीय आयकर से मुक्त है। NRO (अनिवासी साधारण) खाता भारत में अर्जित आय, जैसे किराया, पेंशन या लाभांश, के लिए रुपये में खाता है; इससे प्रत्यावर्तन सीमित है और ब्याज कर-योग्य है। FCNR(B) (विदेशी मुद्रा अनिवासी, बैंक) खाता विदेशी मुद्रा में रखी जाने वाली सावधि जमा है, जो जमाकर्ता को विनिमय दर के जोखिम से बचाती है। कोई भी खाता खोलने से पहले बैंक को KYC (अपने ग्राहक को जानिए) पूरा करना होता है, जिसमें पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता पहचान पत्र या आधार जैसे आधिकारिक रूप से वैध दस्तावेज़ों से पहचान और पते का सत्यापन होता है। KYC धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 और RBI के निर्देशों पर आधारित है, और ग्राहक की जोखिम श्रेणी के अनुसार समय-समय पर अद्यतन किया जाता है।

चेक और ड्राफ्ट

परक्राम्य लिखत अधिनियम 1881 की धारा 6 में परिभाषित चेक एक विनिमय बिल है, जो किसी निर्दिष्ट बैंकर पर आहरित होता है और मांग पर देय होता है। चेक लिखने वाला आहर्ता (drawer), बैंक आहार्यी (drawee) और जिसे भुगतान होना है वह आदाता (payee) कहलाता है। वाहक चेक का भुगतान उसे प्रस्तुत करने वाले किसी भी व्यक्ति को होता है; आदेश चेक का भुगतान केवल नामित आदाता को या उस व्यक्ति को होता है जिसके नाम वह इसे पृष्ठांकित करे। दो समानांतर रेखाओं वाला रेखांकित चेक काउंटर पर नहीं भुनाया जा सकता, उसे बैंक खाते में जमा करना होता है; अकाउंट पेयी रेखांकन का अर्थ है कि राशि केवल आदाता के खाते में ही जमा हो सकती है। चेक अपनी तिथि से तीन महीने तक वैध रहता है और उसके बाद बासी (stale) हो जाता है। अपर्याप्त धनराशि के कारण चेक का अनादरण अधिनियम की धारा 138 के अंतर्गत अपराध है। मांग ड्राफ्ट बैंक अग्रिम भुगतान लेकर जारी करता है, इसलिए यह धन की कमी के कारण बाउंस नहीं हो सकता।

चेक ट्रंकेशन और नामांकन

चेक ट्रंकेशन प्रणाली (CTS) चेकों की भौतिक आवाजाही रोकती है; प्रस्तुतकर्ता बैंक समाशोधन के लिए चेक की इलेक्ट्रॉनिक छवि उसके MICR आँकड़ों के साथ भेजता है। यह 2008 में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शुरू हुई और बाद में पूरे देश में फैली, जिसमें CTS-2010 मानक के चेक प्रयोग होते हैं। बैंकिंग विनियमन अधिनियम की धारा 45ZA से 45ZF के अंतर्गत नामांकन की सुविधा से जमाकर्ता किसी व्यक्ति को नामित कर सकता है, जिसे उसकी मृत्यु के बाद बैंक जमाराशि का भुगतान करता है या सुरक्षित अभिरक्षा की वस्तु अथवा लॉकर की सामग्री सौंपता है। नामिती यह धन कानूनी वारिसों के न्यासी के रूप में प्राप्त करता है, इसलिए नामांकन दावों के निपटान को तेज़ करता है पर उत्तराधिकार तय नहीं करता।

ऋण और ब्याज

बैंक समान मासिक किस्तों (EMI) में चुकाए जाने वाले सावधि ऋण देते हैं, और नकद साख तथा ओवरड्राफ्ट जैसी कार्यशील पूँजी सुविधाएँ भी, जिनमें उधारकर्ता एक सीमा तक धन निकालता है और केवल प्रयुक्त राशि पर ब्याज देता है। ब्याज या तो स्थिर होता है, जो पूरी अवधि में एक-सा रहता है, या परिवर्ती (फ्लोटिंग), जो किसी बेंचमार्क के साथ बदलता है। बेंचमार्क समय के साथ बदले हैं: बेंचमार्क मूल उधार दर (2003) की जगह आधार दर (जुलाई 2010) आई और फिर निधियों की सीमांत लागत आधारित उधार दर, MCLR (अप्रैल 2016), जो बैंक की निधियों की सीमांत लागत, CRR रखने की लागत, परिचालन लागत और अवधि प्रीमियम को दर्शाती है। 1 अक्टूबर 2019 से व्यक्तियों तथा सूक्ष्म और लघु उद्यमों को दिए जाने वाले नए परिवर्ती दर ऋणों को किसी बाहरी बेंचमार्क, जैसे RBI की रेपो दर या ट्रेज़री बिल प्रतिफल, से जोड़ना अनिवार्य है, ताकि नीतिगत बदलाव उधारकर्ताओं तक जल्दी पहुँचें।

क्रेडिट ब्यूरो और जमा बीमा

ऋण सूचना कंपनी (विनियमन) अधिनियम 2005 के अंतर्गत लाइसेंस प्राप्त ऋण सूचना कंपनियाँ ऋणदाताओं से चुकौती का रिकॉर्ड इकट्ठा करती हैं और हर उधारकर्ता को क्रेडिट रिपोर्ट और स्कोर देती हैं। 2000 में स्थापित ट्रांसयूनियन सिबिल (CIBIL) सबसे प्रसिद्ध है; इक्विफैक्स, एक्सपीरियन और क्रिफ हाई मार्क अन्य हैं। सिबिल स्कोर 300 से 900 तक होता है; जितना ऊँचा, उतना अच्छा। जमाराशियों की सुरक्षा RBI की अनुषंगी निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम (DICGC) करता है; भारत में जमा बीमा 1962 में शुरू हुआ। यह वाणिज्यिक बैंकों (विदेशी बैंकों की शाखाओं, लघु वित्त बैंकों और भुगतान बैंकों सहित), क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकों की बचत, चालू, सावधि और आवर्ती जमाओं को, मूलधन और ब्याज मिलाकर, प्रत्येक बैंक में प्रति जमाकर्ता एक निर्धारित सीमा तक कवर करता है। प्रीमियम बैंक देते हैं, जमाकर्ता नहीं, और सरकारों तथा अन्य बैंकों की जमाराशियाँ इसमें कवर नहीं होतीं।

मुख्य तथ्य

  • मांग जमा: बचत और चालू खाते; मीयादी जमा: सावधि और आवर्ती जमा; CASA = चालू और बचत जमा, बैंक का सबसे सस्ता धन।
  • बचत खाते पर ब्याज दैनिक शेष पर गिना जाता है और RBI ने 2011 में इस दर को विनियमन-मुक्त किया; चालू खातों पर प्रायः ब्याज नहीं मिलता।
  • NRE: विदेशी कमाई के लिए रुपया खाता, पूरी तरह प्रत्यावर्तनीय, ब्याज कर-मुक्त; NRO: भारत में अर्जित आय, सीमित प्रत्यावर्तन, कर-योग्य; FCNR(B): विदेशी मुद्रा में सावधि जमा।
  • KYC धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 और RBI के निर्देशों पर आधारित है; आधिकारिक रूप से वैध दस्तावेज़ों में पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता पहचान पत्र और आधार शामिल हैं।
  • चेक: परक्राम्य लिखत अधिनियम 1881 की धारा 6; आहर्ता इसे लिखता है, आहार्यी बैंक भुगतान करता है, आदाता राशि प्राप्त करता है; तिथि से तीन महीने तक वैध।
  • अकाउंट पेयी रेखांकन: राशि केवल आदाता के खाते में जमा हो सकती है; अपर्याप्त धन के कारण अनादरण परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के अंतर्गत अपराध है।
  • CTS कागज़ के बजाय चेक की छवि भेजती है; इसकी शुरुआत 2008 में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हुई।
  • उधार बेंचमार्क: BPLR (2003), आधार दर (जुलाई 2010), MCLR (अप्रैल 2016), नए परिवर्ती खुदरा और MSE ऋणों के लिए बाहरी बेंचमार्क (1 अक्टूबर 2019)।
  • ऋण सूचना कंपनी (विनियमन) अधिनियम 2005; ट्रांसयूनियन सिबिल (2000) का स्कोर 300 से 900 तक होता है।
  • RBI की अनुषंगी DICGC प्रत्येक बैंक में प्रति जमाकर्ता एक निर्धारित सीमा तक जमा का बीमा करती है; प्रीमियम बैंक देते हैं; जमा बीमा 1962 में शुरू हुआ।

एक नज़र में दोहराव

मांग जमा (बचत, चालू) बनाम मीयादी जमा (सावधि, आवर्ती); बचत दर 2011 में विनियमन-मुक्त; NRE (प्रत्यावर्तनीय, कर-मुक्त), NRO (भारतीय आय), FCNR(B) (विदेशी मुद्रा); KYC धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 के अंतर्गत; चेक = परक्राम्य लिखत अधिनियम 1881 की धारा 6, तीन महीने वैध, अनादरण = धारा 138; CTS 2008 से NCR में; नामांकन BR अधिनियम धारा 45ZA-45ZF; BPLR 2003, आधार दर 2010, MCLR 2016, बाहरी बेंचमार्क 1 अक्टूबर 2019; ऋण सूचना कंपनी अधिनियम 2005, सिबिल 300-900; DICGC जमा बीमा, 1962 से।

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