10 में से पाठ 8 · बिहार सामान्य ज्ञान
बिहार की कृषि, उद्योग और भौगोलिक संकेतक (GI) उत्पाद
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कृषि-प्रधान राज्य
2000 के बाद बिहार के पास उपजाऊ मैदान तो रहे, पर उसके अधिकांश खनिज और भारी उद्योग झारखंड में चले गए, इसलिए कृषि और पशुपालन व मत्स्यपालन जैसे संबद्ध कार्य यहाँ के अधिकांश कामगारों को रोज़गार देते हैं। अधिकांश जोतें छोटी या सीमांत हैं, और उत्तर की बाढ़ तथा दक्षिण का सूखा अनेक फसलों का भाग्य तय करते हैं। कृषि वर्ष के चार मौसम हैं: भदई (शरद की फसलें, जैसे अगेती धान और मक्का, जो अगस्त-सितंबर में कटती हैं), अगहनी (मुख्य जाड़े का धान, जो अगहन मास में कटता है), रबी (गेहूँ, दलहन, तिलहन और जाड़े का मक्का) और गरमा (मूँग और सब्ज़ियों जैसी गर्मी की फसलें)। राज्य चार कृषि-जलवायु क्षेत्रों में बँटा है: I (उत्तर-पश्चिमी जलोढ़ मैदान), II (उत्तर-पूर्वी जलोढ़ मैदान), III-A (दक्षिण-पूर्वी जलोढ़ मैदान) और III-B (दक्षिण-पश्चिमी जलोढ़ मैदान)।
खाद्य फसलें
क्षेत्रफल की दृष्टि से धान मुख्य फसल है; सोन नहरों से सिंचित पुराना शाहाबाद क्षेत्र, विशेषकर रोहतास और कैमूर, बिहार का धान का कटोरा कहलाता है। गेहूँ मुख्य रबी फसल है। बिहार मक्का के लिए विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जो सभी मौसमों में और खासकर पूर्णिया, कटिहार और खगड़िया के आसपास कोसी-सीमांचल पट्टी में रबी फसल के रूप में उगाया जाता है। मोकामा और बाढ़ के बीच की टाल भूमि मसूर और चने के लिए जानी जाती है। गन्ना उत्तर-पश्चिम (पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सिवान) में और जूट उत्तर-पूर्व (पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, अररिया) में केंद्रित है, तथा भागलपुर और बाँका के सुगंधित कतरनी चावल को अपना GI टैग प्राप्त है।
लीची, मखाना और पान
बिहार लीची और मखाने के लिए सबसे अधिक जाना जाता है, और भारत का अधिकांश मखाना यहीं उगाया जाता है। मुज़फ़्फ़रपुर की शाही लीची को GI टैग प्राप्त है, और मुज़फ़्फ़रपुर में लीची का एक राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र कार्यरत है। मखाना (फॉक्स नट, जलीय पौधे यूरियल फेरॉक्स से) मिथिला और सीमांचल, विशेषकर दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया और कटिहार के तालाबों और आर्द्रभूमियों में उगाया जाता है, और दरभंगा में मखाने का एक ICAR अनुसंधान केंद्र कार्यरत है। मगध क्षेत्र (नवादा, गया, औरंगाबाद, नालंदा) का मगही पान और भागलपुर का जर्दालु आम भी GI टैग वाले हैं।
अनुसंधान और डेयरी
समस्तीपुर के पूसा में 1905 से कृषि अनुसंधान संस्थान था, जो आज के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) का पूर्ववर्ती है; 1934 के भूकंप में हुई क्षति के बाद 1936 में इसे नई दिल्ली ले जाया गया; आज पूसा में डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय है, और बिहार कृषि विश्वविद्यालय भागलपुर के निकट सबौर में है। डेयरी क्षेत्र में राज्य का दुग्ध सहकारी संघ कॉम्फेड (COMFED) ग्राम सहकारी समितियों के आनंद पैटर्न पर सुधा ब्रांड से दूध और दुग्ध उत्पाद बेचता है।
उद्योग
बेगूसराय के बरौनी में सोवियत सहायता से बनी और 1964 में चालू हुई तेल रिफ़ाइनरी है, साथ ही एक ताप विद्युत केंद्र और एक उर्वरक कारखाना भी है, इसीलिए बेगूसराय को बिहार की औद्योगिक राजधानी कहा जाता है। मुंगेर के जमालपुर में 1862 में स्थापित रेल कारखाना है, जो भारत का सबसे पुराना पूर्ण विकसित रेल कारखाना है, और मुंगेर बंदूक-निर्माण तथा एक सिगरेट कारखाने के लिए भी जाना जाता है। रोहतास का डालमियानगर कभी विशाल रोहतास इंडस्ट्रीज़ समूह (सीमेंट, कागज़ और चीनी) का केंद्र था, जो अब बंद है। नई इकाइयों में मधेपुरा का इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव कारखाना और सारण के मढ़ौरा का डीज़ल लोकोमोटिव कारखाना शामिल हैं, और NTPC कहलगाँव (भागलपुर) और बाढ़ (पटना) में बड़े ताप विद्युत संयंत्र चलाता है। चीनी मिलें उत्तर-पश्चिम की गन्ना पट्टी में केंद्रित हैं। बिहार के पास बचे खनिज सीमित हैं: रोहतास के अमझोर में पाइराइट, कैमूर और रोहतास में चूना-पत्थर, और नवादा-जमुई क्षेत्र में अभ्रक।
हस्तशिल्प और GI उत्पाद
मधुबनी या मिथिला चित्रकला सबसे प्रसिद्ध है। रेशम नगरी भागलपुर तसर रेशम बुनता है, जो भागलपुरी सिल्क के नाम से जाना जाता है। सिक्की शिल्प में उत्तर बिहार की आर्द्रभूमियों की सुनहरी सिक्की घास से टोकरियाँ, डिब्बे और आकृतियाँ बनाई जाती हैं, अधिकतर मधुबनी, दरभंगा और सीतामढ़ी की महिलाओं द्वारा। भागलपुर की मंजूषा कला, जिसे अंगिका कला भी कहते हैं, बिहुला और बिषहरी की कथा को मंदिर के आकार की पेटियों (मंजूषा) पर गुलाबी, हरे और पीले रंगों में चित्रित करती है। सुजनी कढ़ाई मुज़फ़्फ़रपुर से, एप्लिक (खटवा) कार्य पटना और वैशाली से, टिकुली कला पटना से और पत्थर की नक्काशी गया के पत्थरकट्टी से आती है। खाद्य पदार्थों में नालंदा जिले के सिलाव का खाजा GI टैग प्राप्त है।
मुख्य तथ्य
- बिहार के चार फसल मौसम: भदई (शरद), अगहनी (जाड़े का धान, अगहन में कटाई), रबी (जाड़ा) और गरमा (गर्मी)।
- कृषि-जलवायु क्षेत्र: I (उत्तर-पश्चिमी जलोढ़ मैदान), II (उत्तर-पूर्वी जलोढ़ मैदान), III-A (दक्षिण-पूर्वी) और III-B (दक्षिण-पश्चिमी)।
- बिहार का धान का कटोरा: सोन नहरों से सिंचित रोहतास और कैमूर (पुराना शाहाबाद); मोकामा-बाढ़ टाल मसूर और चने के लिए प्रसिद्ध है।
- GI टैग वाली उपज: शाही लीची (मुज़फ़्फ़रपुर), जर्दालु आम (भागलपुर), कतरनी चावल (भागलपुर-बाँका), मगही पान (मगध) और सिलाव खाजा (नालंदा)।
- मखाना (फॉक्स नट, यूरियल फेरॉक्स) मिथिला और सीमांचल के तालाबों में उगता है; मखाने (दरभंगा) और लीची (मुज़फ़्फ़रपुर) के अनुसंधान केंद्र।
- पूसा (समस्तीपुर): 1905 से कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI का पूर्ववर्ती), जो 1934 के भूकंप के बाद 1936 में नई दिल्ली गया; अब डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय।
- बरौनी रिफ़ाइनरी (बेगूसराय): सोवियत सहायता से बनी, 1964 में चालू; बेगूसराय को बिहार की औद्योगिक राजधानी कहते हैं।
- जमालपुर (मुंगेर): 1862 का रेल कारखाना; मधेपुरा (इलेक्ट्रिक) और मढ़ौरा (डीज़ल) में लोकोमोटिव कारखाने; कहलगाँव और बाढ़ में NTPC संयंत्र।
- मंजूषा कला (भागलपुर) गुलाबी, हरे और पीले रंगों में बिहुला-बिषहरी की कथा कहती है; सिक्की शिल्प में सुनहरी घास; सुजनी कढ़ाई मुज़फ़्फ़रपुर की है।
- बिहार के पास बचे खनिज: अमझोर (रोहतास) में पाइराइट, कैमूर-रोहतास में चूना-पत्थर, नवादा-जमुई में अभ्रक।
एक नज़र में दोहराव
मौसम भदई, अगहनी, रबी, गरमा; कृषि-जलवायु क्षेत्र I, II, III-A, III-B; धान का कटोरा रोहतास-कैमूर; कोसी-सीमांचल में मक्का; मोकामा टाल में दलहन; GI: शाही लीची, जर्दालु, कतरनी, मगही पान, सिलाव खाजा; मिथिला में मखाना; पूसा संस्थान 1905; बरौनी रिफ़ाइनरी 1964 (सोवियत सहायता); जमालपुर कारखाना 1862; मधेपुरा और मढ़ौरा लोकोमोटिव कारखाने; कहलगाँव और बाढ़ में NTPC; अमझोर में पाइराइट; भागलपुरी सिल्क, सिक्की, मंजूषा, सुजनी।