10 में से पाठ 4 · बिहार सामान्य ज्ञान
बिहार का गठन, विधानमंडल और प्रशासन
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राज्य का स्वरूप कैसे बना
बिहार की वर्तमान सीमाएँ तीन विभाजनों और एक हस्तांतरण का परिणाम हैं। 22 मार्च 1912 को बंगाल प्रेसीडेंसी से अलग करके बिहार और उड़ीसा प्रांत बनाया गया, इसीलिए 22 मार्च को बिहार दिवस मनाया जाता है। 1 अप्रैल 1936 को उड़ीसा अलग प्रांत बना। स्वतंत्रता के बाद संविधान के अंतर्गत बिहार भाग क का राज्य बना, और 1956 के पुनर्गठन में बिहार और पश्चिम बंगाल (राज्यक्षेत्र अंतरण) अधिनियम 1956 के तहत मानभूम जिले का पुरुलिया क्षेत्र और पूर्णिया जिले का एक भाग पश्चिम बंगाल को दे दिया गया। अंततः बिहार पुनर्गठन अधिनियम 2000 द्वारा 15 नवंबर 2000 को, बिरसा मुंडा की जयंती पर, छोटानागपुर और संथाल परगना क्षेत्रों से झारखंड राज्य बनाया गया।
झारखंड के अलग होने से क्या बदला
झारखंड अपने साथ बिहार के अधिकांश खनिज, वन, भारी उद्योग और पठारी भूमि ले गया, जिससे बिहार लगभग पूरी तरह मैदानी, कृषि-प्रधान और घनी आबादी वाला राज्य रह गया। विधानसभा की सीटें 324 से घटकर 243, बिहार की लोकसभा सीटें 54 से 40 और राज्यसभा सीटें 22 से 16 रह गईं। परीक्षाओं में ये पहले और बाद की संख्याएँ अक्सर पूछी जाती हैं, साथ ही यह तथ्य भी कि कभी प्रांत की ग्रीष्मकालीन राजधानी रहा राँची झारखंड में चला गया।
द्विसदनीय विधानमंडल
बिहार उन गिने-चुने राज्यों में है जिनके विधानमंडल में दो सदन हैं, और अनुच्छेद 168 ऐसे राज्यों में इसका नाम गिनाता है। विधानसभा में 243 निर्वाचित सदस्य हैं, जिनमें परिसीमन आदेश 2008 के अनुसार 38 सीटें अनुसूचित जातियों और 2 सीटें अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं; इसका सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष है। विधान परिषद में 75 सदस्य हैं। अनुच्छेद 171 के अनुसार विधान परिषद के सदस्यों की संख्या विधानसभा की सदस्य संख्या के एक-तिहाई से अधिक और 40 से कम नहीं हो सकती; इसके लगभग एक-तिहाई सदस्य विधायकों द्वारा, लगभग एक-तिहाई स्थानीय निकायों द्वारा, एक-बारहवाँ भाग स्नातकों द्वारा और एक-बारहवाँ भाग शिक्षकों द्वारा चुने जाते हैं, तथा शेष को राज्यपाल साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारी आंदोलन और समाज सेवा का विशेष ज्ञान रखने वाले व्यक्तियों में से नामित करते हैं। विधान परिषद एक स्थायी सदन है: इसके एक-तिहाई सदस्य हर दूसरे वर्ष सेवानिवृत्त होते हैं। भारत शासन अधिनियम 1935 के अंतर्गत भी बिहार में द्विसदनीय विधानमंडल था।
संसद में प्रतिनिधित्व
बिहार लोकसभा में 40 सदस्य भेजता है, जिनमें 6 सीटें अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित हैं और अनुसूचित जनजातियों के लिए कोई नहीं; केवल उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की सीटें इससे अधिक हैं। राज्यसभा में बिहार के 16 सदस्य हैं, जिन्हें विधानसभा के सदस्य एकल संक्रमणीय मत द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति से चुनते हैं।
कार्यपालिका और उच्च न्यायालय
हर राज्य की तरह बिहार में भी कार्यपालिका शक्ति औपचारिक रूप से राज्यपाल (अनुच्छेद 154) में और व्यवहार में मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद (अनुच्छेद 163 और 164) में निहित है। 91वें संशोधन (2003) के बाद से मंत्रिपरिषद का आकार विधानसभा की सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता, अर्थात बिहार में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 36 मंत्री हो सकते हैं। पटना उच्च न्यायालय की स्थापना 1916 में हुई; यह उड़ीसा का भी काम देखता था, जब तक कि 1948 में उड़ीसा को अपना उच्च न्यायालय नहीं मिल गया। बिहार केसरी श्रीकृष्ण सिन्हा 1946 से 1961 में अपने निधन तक सरकार के प्रमुख रहे और पहले मुख्यमंत्री के रूप में याद किए जाते हैं, जबकि जयरामदास दौलतराम स्वतंत्रता के बाद के पहले राज्यपाल थे।
स्थानीय शासन
बिहार के जिले प्रमंडलों में समूहित हैं और अनुमंडलों तथा प्रखंडों में बँटे हैं, जिनका संचालन जिलाधिकारी (समाहर्ता), अनुमंडल पदाधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी करते हैं। ग्रामीण स्वशासन 73वें संशोधन (1992) के त्रिस्तरीय ढाँचे पर आधारित है: ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद। बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006 के साथ बिहार पंचायतों की 50 प्रतिशत सीटें और पद महिलाओं के लिए आरक्षित करने वाला पहला राज्य बना; इसी अधिनियम ने ग्राम कचहरी भी बनाई, जो सरपंच की अध्यक्षता वाला निर्वाचित ग्राम न्यायालय है और छोटे दीवानी व फौजदारी विवाद निपटाता है। नगरों का शासन बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 के अंतर्गत नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों द्वारा होता है।
राजकीय प्रतीक और भाषा
राज्य के प्रतीक-चिह्न में बोधि वृक्ष है, जो बोधगया की याद दिलाता है। राजकीय पक्षी गौरैया और राजकीय वृक्ष पीपल है। हिंदी राज्य की राजभाषा है और उर्दू द्वितीय राजभाषा।
मुख्य तथ्य
- बिहार दिवस: 22 मार्च, जो 1912 में बिहार और उड़ीसा प्रांत के गठन की याद में मनाया जाता है।
- झारखंड का गठन 15 नवंबर 2000 को, बिरसा मुंडा की जयंती पर, बिहार पुनर्गठन अधिनियम 2000 द्वारा हुआ।
- 2000 से पहले और बाद: विधानसभा 324 से 243 सीटें, लोकसभा 54 से 40, राज्यसभा 22 से 16।
- बिहार विधानसभा: 243 सीटें, जिनमें 38 अनुसूचित जातियों और 2 अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित (परिसीमन आदेश 2008); विधान परिषद: 75 सदस्य।
- अनुच्छेद 171: विधान परिषद में अधिकतम विधानसभा के एक-तिहाई और न्यूनतम 40 सदस्य हो सकते हैं; इसके एक-तिहाई सदस्य हर दूसरे वर्ष सेवानिवृत्त होते हैं।
- लोकसभा: बिहार से 40 सीटें (6 अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लिए कोई नहीं), उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के बाद चौथा स्थान; राज्यसभा: 16 सीटें।
- पटना उच्च न्यायालय: 1916; 1948 में उड़ीसा उच्च न्यायालय बनने तक यह उड़ीसा का भी काम देखता था।
- 91वाँ संशोधन (2003): मंत्रियों की संख्या विधानसभा के 15 प्रतिशत तक सीमित, अतः बिहार में अधिकतम 36।
- बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006: पंचायतों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण (ऐसा करने वाला पहला राज्य) और ग्राम कचहरी।
- 1956: बिहार और पश्चिम बंगाल (राज्यक्षेत्र अंतरण) अधिनियम के तहत पुरुलिया और पूर्णिया का एक भाग बिहार से पश्चिम बंगाल में गया।
एक नज़र में दोहराव
बिहार दिवस 22 मार्च (1912); उड़ीसा अलग 1 अप्रैल 1936; पुरुलिया पश्चिम बंगाल को 1956; झारखंड 15 नवंबर 2000; विधानसभा 324 से 243 (38 अनुसूचित जाति, 2 अनुसूचित जनजाति), लोकसभा 54 से 40 (6 अनुसूचित जाति), राज्यसभा 22 से 16; विधान परिषद 75 (अनुच्छेद 171 की सीमाएँ); पटना उच्च न्यायालय 1916; अधिकतम 36 मंत्री (15 प्रतिशत, 91वाँ संशोधन); पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिन्हा; पंचायत राज अधिनियम 2006, महिलाओं को 50 प्रतिशत, ग्राम कचहरी; राजकीय पक्षी गौरैया, वृक्ष पीपल।