10 में से पाठ 3 · बिहार सामान्य ज्ञान

आधुनिक बिहार और स्वतंत्रता संग्राम: 1857 से जेपी आंदोलन तक

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बिहार में 1857 का विद्रोह

जुलाई 1857 में पटना में असंतोष भड़का, जब पुस्तक-विक्रेता पीर अली ने विद्रोह किया; कमिश्नर विलियम टेलर ने 7 जुलाई को पीर अली को फाँसी दिलवा दी। 25 जुलाई को दानापुर छावनी में तीन रेजिमेंटों के सिपाहियों ने विद्रोह किया और आरा की ओर कूच किया, जहाँ जगदीशपुर के जमींदार बाबू कुँवर सिंह ने, जो उस समय लगभग 80 वर्ष के थे, नेतृत्व सँभाला। उन्होंने आरा के एक छोटे किलेबंद मकान को घेर लिया, जिसकी रक्षा मुट्ठी भर अंग्रेज़ और सिख सैनिक कर रहे थे। इसके बाद कुँवर सिंह मध्य भारत, अवध और पूर्वी उत्तर प्रदेश में लड़ते रहे और 1858 में आज़मगढ़ पर अधिकार किया। घर लौटते समय गंगा पार करते हुए उनकी बाँह में गोली लगी, और कहा जाता है कि उन्होंने वह बाँह काटकर गंगा को अर्पित कर दी। 23 अप्रैल 1858 को उन्होंने जगदीशपुर के निकट एक अंग्रेज़ सेना को हराया और 26 अप्रैल 1858 को उनका निधन हो गया; उनके भाई अमर सिंह ने संघर्ष जारी रखा।

वहाबी आंदोलन

रायबरेली के सैयद अहमद से प्रेरित वहाबी आंदोलन का उद्देश्य धार्मिक सुधार और सशस्त्र संघर्ष था। भारत में इसका मुख्य केंद्र पटना था, जहाँ सादिकपुर परिवार के विलायत अली और इनायत अली इसका संचालन करते थे; वे उत्तर-पश्चिमी सीमांत पर पहले सिखों और बाद में अंग्रेज़ों के विरुद्ध लड़ने के लिए जन और धन भेजते थे। सरकार ने षड्यंत्र के मुकदमों की एक शृंखला से, विशेषकर 1864 के अंबाला मुकदमे और 1865 के पटना मुकदमे से, इसे कुचल दिया, और इसके नेताओं को अंडमान भेज दिया गया।

अलग प्रांत

एक शताब्दी से अधिक समय तक बिहार का शासन बंगाल प्रेसीडेंसी के अंग के रूप में होता रहा। 1890 के दशक से सच्चिदानंद सिन्हा और महेश नारायण जैसे शिक्षित बिहारियों ने बिहार टाइम्स जैसे पत्रों के माध्यम से अलग प्रांत की माँग उठाई। दिसंबर 1911 के दिल्ली दरबार में बंगाल विभाजन रद्द होने के बाद 22 मार्च 1912 को बिहार और उड़ीसा प्रांत बना, जिसकी राजधानी पटना थी और पहले लेफ्टिनेंट-गवर्नर सर चार्ल्स स्टुअर्ट बेली थे। इसके बाद 1916 में पटना उच्च न्यायालय और 1917 में पटना विश्वविद्यालय स्थापित हुए। 1920 में लॉर्ड सत्येंद्र प्रसन्न सिन्हा प्रांत के गवर्नर बने, जो किसी प्रांत के प्रमुख बनने वाले पहले भारतीय थे। 1 अप्रैल 1936 को उड़ीसा अलग प्रांत बन गया। बिहार क्रांतिकारियों की भूमि भी रहा: 30 अप्रैल 1908 को खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी ने मुज़फ़्फ़रपुर में जज किंग्सफोर्ड को निशाना बनाकर बम फेंका, और खुदीराम को मुज़फ़्फ़रपुर में फाँसी दी गई।

चंपारण और गांधीवादी आंदोलन

राजकुमार शुक्ल दिसंबर 1916 के लखनऊ कांग्रेस अधिवेशन में गांधीजी से मिले और उन्हें तिनकठिया प्रथा में बँधे नील किसानों की दुर्दशा देखने के लिए राज़ी किया; इस प्रथा में किसानों को हर 20 कट्ठे में से 3 कट्ठे पर नील उगाना पड़ता था। अप्रैल 1917 में गांधीजी मोतिहारी पहुँचे, जिला छोड़ने के आदेश की अवहेलना की, और उनके विरुद्ध मुकदमा वापस ले लिया गया। राजेंद्र प्रसाद, ब्रजकिशोर प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिन्हा, मज़हरुल हक, जे.बी. कृपलानी और महादेव देसाई के साथ उन्होंने हज़ारों किसानों के बयान दर्ज किए, और चंपारण कृषि अधिनियम 1918 ने यह प्रथा समाप्त कर दी। असहयोग आंदोलन के दौरान गांधीजी ने 6 फरवरी 1921 को पटना में बिहार विद्यापीठ का उद्घाटन किया, और मज़हरुल हक ने सदाकत आश्रम की स्थापना की, जो बाद में बिहार कांग्रेस का मुख्यालय बना। किसान आंदोलन में स्वामी सहजानंद सरस्वती ने 1929 में बिहार प्रांतीय किसान सभा की स्थापना की और 1936 में अखिल भारतीय किसान सभा के पहले अध्यक्ष बने।

भारत छोड़ो आंदोलन और पटना सचिवालय के शहीद

9 अगस्त 1942 को राष्ट्रीय नेताओं की गिरफ़्तारी के बाद बिहार में देश के सबसे उग्र विद्रोहों में से एक हुआ; रेल और तार की लाइनें काट दी गईं और थानों पर हमले हुए। 11 अगस्त 1942 को पटना सचिवालय पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए बढ़ रहे विद्यार्थियों पर गोली चलाई गई, जिसमें उनमें से सात मारे गए; सचिवालय के सामने स्थित शहीद स्मारक उनकी स्मृति में है। जयप्रकाश नारायण नवंबर 1942 में दीपावली की रात रामनंदन मिश्र और योगेंद्र शुक्ल जैसे साथियों के साथ हज़ारीबाग केंद्रीय कारागार से निकल भागे और नेपाल की तराई में प्रशिक्षित आज़ाद दस्तों सहित भूमिगत प्रतिरोध संगठित किया।

राजेंद्र प्रसाद और अन्य नेता

3 दिसंबर 1884 को जीरादेई (सिवान) में जन्मे डॉ. राजेंद्र प्रसाद चंपारण में गांधीजी से जुड़े, एक से अधिक बार कांग्रेस के अध्यक्ष रहे, 11 दिसंबर 1946 को संविधान सभा के अध्यक्ष चुने गए, और 1950 से 1962 तक भारत के पहले राष्ट्रपति रहे; उन्हें 1962 में भारत रत्न मिला। सच्चिदानंद सिन्हा ने 9 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक की अध्यक्षता अंतरिम अध्यक्ष के रूप में की। श्रीकृष्ण सिन्हा (बिहार केसरी) और अनुग्रह नारायण सिन्हा (बिहार विभूति) ने 1937 में बने कांग्रेस मंत्रिमंडल का नेतृत्व किया, और भोजपुर के जगजीवन राम दलित वर्गों के राष्ट्रीय नेता बने।

जयप्रकाश नारायण और जेपी आंदोलन

11 अक्टूबर 1902 को सिताबदियारा में जन्मे जेपी ने 1934 में कांग्रेस समाजवादी पार्टी की स्थापना में भूमिका निभाई और बाद में विनोबा भावे के भूदान आंदोलन से जुड़े। 1974 में भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और महँगाई के विरुद्ध बिहार छात्र संघर्ष समिति के नेतृत्व में चल रहे छात्र आंदोलन ने उनसे नेतृत्व करने का आग्रह किया। 5 जून 1974 को पटना के गांधी मैदान की विशाल सभा में उन्होंने संपूर्ण क्रांति का आह्वान किया। आंदोलन पूरे देश में फैल गया, 25 जून 1975 को आपातकाल घोषित हुआ, और 1977 के चुनाव में जनता पार्टी विजयी हुई। लोकनायक के रूप में सम्मानित जेपी का 1979 में निधन हुआ और 1999 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न दिया गया।

मुख्य तथ्य

  • पटना के पुस्तक-विक्रेता पीर अली ने जुलाई 1857 में पटना में विद्रोह का नेतृत्व किया और कमिश्नर विलियम टेलर के आदेश पर 7 जुलाई 1857 को उन्हें फाँसी दी गई।
  • दानापुर विद्रोह: 25 जुलाई 1857; जगदीशपुर के कुँवर सिंह (लगभग 80 वर्ष) ने विद्रोहियों का नेतृत्व किया, 23 अप्रैल 1858 को जगदीशपुर के निकट अंतिम लड़ाई जीती और 26 अप्रैल 1858 को उनका निधन हुआ।
  • वहाबी आंदोलन: रायबरेली के सैयद अहमद से प्रेरित; पटना (सादिकपुर परिवार, विलायत अली और इनायत अली) इसका भारतीय केंद्र; अंबाला मुकदमा 1864, पटना मुकदमा 1865।
  • बिहार और उड़ीसा प्रांत: 22 मार्च 1912, पहले लेफ्टिनेंट-गवर्नर चार्ल्स स्टुअर्ट बेली; लॉर्ड एस.पी. सिन्हा 1920 में इसके गवर्नर बने; उड़ीसा 1 अप्रैल 1936 को अलग हुआ।
  • मुज़फ़्फ़रपुर बम कांड, 30 अप्रैल 1908: खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी के निशाने पर किंग्सफोर्ड था; खुदीराम को मुज़फ़्फ़रपुर में फाँसी दी गई।
  • चंपारण सत्याग्रह 1917: राजकुमार शुक्ल के निमंत्रण पर; तिनकठिया यानी हर 20 कट्ठे में से 3 कट्ठे पर नील; चंपारण कृषि अधिनियम 1918 से समाप्त।
  • बिहार विद्यापीठ का उद्घाटन गांधीजी ने 6 फरवरी 1921 को किया; मज़हरुल हक द्वारा स्थापित सदाकत आश्रम बिहार कांग्रेस का मुख्यालय बना।
  • स्वामी सहजानंद सरस्वती ने बिहार प्रांतीय किसान सभा (1929) की स्थापना की और वे अखिल भारतीय किसान सभा (1936) के पहले अध्यक्ष बने।
  • 11 अगस्त 1942: पटना सचिवालय पर तिरंगा फहराने का प्रयास करते सात विद्यार्थी गोली से शहीद हुए; शहीद स्मारक उनकी स्मृति में है।
  • जेपी: जन्म सिताबदियारा में 11 अक्टूबर 1902; 5 जून 1974 को गांधी मैदान से संपूर्ण क्रांति का आह्वान; 1999 में भारत रत्न (मरणोपरांत)।

एक नज़र में दोहराव

पीर अली को फाँसी 7 जुलाई 1857; दानापुर विद्रोह 25 जुलाई 1857; जगदीशपुर के कुँवर सिंह का निधन 26 अप्रैल 1858; सादिकपुर के वहाबी, पटना मुकदमा 1865; बिहार और उड़ीसा 22 मार्च 1912; मुज़फ़्फ़रपुर में खुदीराम 1908; चंपारण 1917, राजकुमार शुक्ल, अधिनियम 1918; बिहार विद्यापीठ 6 फरवरी 1921; सहजानंद, किसान सभा 1929/1936; सचिवालय के शहीद 11 अगस्त 1942; राजेंद्र प्रसाद (जीरादेई) राष्ट्रपति 1950-62; जेपी, संपूर्ण क्रांति 5 जून 1974।

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