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मध्यकालीन बिहार: बख्तियार खिलजी, शेरशाह सूरी और बक्सर का युद्ध

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बख्तियार खिलजी और बिहार नाम की उत्पत्ति

लगभग 1200 ई. में गोरी की विजयों से जुड़े तुर्क सेनापति इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने दक्षिण बिहार पर धावा बोला। मिनहाज-उस-सिराज की तबकात-ए-नासिरी बताती है कि उसके सैनिकों ने जिसे किला समझकर हमला किया, वहाँ के मुंडित सिर वाले निवासियों को मार डाला, और बाद में पता चला कि वह एक विहार, अर्थात बौद्ध मठ, था, जिसे सामान्यतः ओदंतपुरी माना जाता है। इस क्षेत्र में विहारों की अधिकता के कारण तुर्कों ने इसे बिहार कहा, और आज बिहारशरीफ के नाम से प्रसिद्ध नगर उनका मुख्यालय बना; बाद में यह नाम पूरे प्रांत के लिए प्रयुक्त होने लगा। पारंपरिक विवरण के अनुसार इन्हीं आक्रमणों में नालंदा और विक्रमशिला भी लूटे गए। बख्तियार ने आगे बंगाल के लक्ष्मण सेन से नदिया छीना और लखनौती को अपना केंद्र बनाया, किंतु तिब्बत की ओर विनाशकारी अभियान के बाद 1206 में उसकी मृत्यु हो गई।

दिल्ली और बंगाल के बीच

अगली तीन शताब्दियों तक दक्षिण बिहार दिल्ली के सुल्तानों और बंगाल के शासकों के बीच संघर्ष का सीमांत प्रदेश रहा, जबकि उत्तर में मिथिला (तिरहुत) में अपने हिंदू राजवंश बने रहे। 1097 में नान्यदेव द्वारा स्थापित कर्नाट वंश ने मिथिला पर तब तक शासन किया, जब तक 1324-25 के गयासुद्दीन तुगलक के आक्रमण ने हरिसिंहदेव को नेपाल भागने पर विवश नहीं कर दिया; इसके बाद आए ओइनवार वंश ने कवि विद्यापति को संरक्षण दिया। 15वीं शताब्दी में जौनपुर के शर्की सुल्तानों ने बिहार के कुछ भागों पर अधिकार रखा, जब तक कि लोदियों ने उसे नहीं ले लिया। सूफ़ी मत की जड़ें भी जमीं: फिरदौसी सिलसिले के मखदूम शरफुद्दीन अहमद याह्या मनेरी, जिनके पत्र (मक्तूबात) सूफ़ी साहित्य की श्रेष्ठ कृतियाँ हैं, बिहारशरीफ में रहे और वहीं 1381 में उनका निधन हुआ; पटना के निकट मनेर आज भी एक प्रमुख सूफ़ी केंद्र है।

सासाराम का अफ़गान शेरशाह सूरी

हसन खाँ सूर का पुत्र फरीद अपने पिता की सासाराम और ख्वासपुर की जागीर में पला-बढ़ा। उसने बिहार के अफ़गान शासक बहार खाँ लोहानी की सेवा की, जिसने बाघ मारने पर उसे शेर खाँ की उपाधि दी, और बहार खाँ के अल्पवयस्क पुत्र के संरक्षक के रूप में वह बिहार का वास्तविक शासक बन गया। हुमायूँ की कठिनाइयों का लाभ उठाकर उसने रोहतासगढ़ का मज़बूत पहाड़ी किला हस्तगत किया, 1539 में बक्सर के निकट गंगा तट पर चौसा में हुमायूँ को हराया, स्वयं को शेरशाह घोषित किया, और 1540 में कन्नौज (बिलग्राम) के युद्ध के बाद हुमायूँ को भारत से बाहर खदेड़ दिया। 1545 में कालिंजर के किले की घेराबंदी के दौरान बारूद के विस्फोट से उसकी मृत्यु हुई।

शेरशाह का प्रशासन

केवल पाँच वर्षों में शेरशाह ने ऐसी व्यवस्था दी जिसे मुगलों ने अपनाया। साम्राज्य सरकारों और परगनों में बँटा था; परगने में कानून-व्यवस्था के लिए शिकदार, भू-राजस्व के लिए अमीन, भूमि-अभिलेखों के लिए कानूनगो और खजांची के रूप में फोतदार होता था। भूमि की माप कराई गई और राज्य का हिस्सा उपज का एक-तिहाई तय किया गया, जिसे किसान को दिए गए पट्टे और उसके द्वारा हस्ताक्षरित कबूलियत में दर्ज किया जाता था। उसने चाँदी का रुपया और ताँबे का दाम चलाया, जो आज के रुपये के पूर्वज हैं; बंगाल के सोनारगाँव से उत्तर-पश्चिम तक जाने वाली महान सड़क (बाद की ग्रैंड ट्रंक रोड) का पुनर्निर्माण कराया, नियमित पड़ावों पर सराय बनवाईं और इन सरायों को घुड़सवार डाक की चौकियों के रूप में प्रयोग किया। 1541 में उसने पटना में किला बनवाया और बिहारशरीफ के स्थान पर पटना को प्रांतीय मुख्यालय बनाया। सासाराम में कृत्रिम झील के बीच से उठता उसका अष्टकोणीय लाल बलुआ पत्थर का मकबरा भारतीय-अफ़गान स्थापत्य की उत्कृष्ट कृति है; उसके पिता हसन खाँ का मकबरा भी सासाराम में है।

मुगलों के अधीन बिहार

अकबर ने 1574 में अफ़गान शासक दाऊद खाँ कर्रानी से पटना जीता, और 1580 में अकबर द्वारा साम्राज्य के विभाजन में बिहार मूल बारह सूबों में से एक बना, जिसकी राजधानी पटना थी; राजा मानसिंह इसके सूबेदारों में से एक थे। 1704 में औरंगज़ेब के पोते सूबेदार अज़ीम-उश-शान ने पटना का नाम अज़ीमाबाद रखा। 18वीं शताब्दी में मुगल शक्ति के पतन के साथ बिहार पर बंगाल की नवाबी के अंग के रूप में पटना स्थित नायब नाज़िम (उप-सूबेदार) के माध्यम से शासन होने लगा; अलीवर्दी खाँ 1740 में बंगाल का नवाब बनने से पहले इसी पद पर थे। बंगाल, बिहार और उड़ीसा जैसे प्रचलित पद की उत्पत्ति यहीं से है।

सिख संबंध

गुरु नानक और गुरु तेग बहादुर दोनों इस क्षेत्र में आए, और दसवें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह का जन्म 1666 में पटना में हुआ। तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब उनके जन्मस्थान पर स्थित है और सिख धर्म के पाँच तख्तों, अर्थात धार्मिक सत्ता के आसनों, में से एक है; 1934 के भूकंप में पुराने गुरुद्वारे के क्षतिग्रस्त होने के बाद वर्तमान भवन बनाया गया।

अंग्रेज़ और बक्सर का युद्ध

17वीं शताब्दी में यूरोपीय व्यापारी शोरा (बारूद में प्रयुक्त), अफ़ीम, चीनी और कपड़े के लिए पटना आए; अंग्रेज़ों ने जल्द ही यहाँ अपनी कोठी (फैक्टरी) स्थापित की। प्लासी (1757) के बाद 1760 में बंगाल का नवाब बनाए गए मीर कासिम ने अपनी राजधानी मुर्शिदाबाद से मुंगेर स्थानांतरित की, वहाँ हथियारों का कारखाना लगाया और कंपनी के कर-मुक्त निजी व्यापार को लेकर उससे टकराव मोल लिया। 1763 में पराजित होने पर उसने पटना में अंग्रेज़ बंदियों की हत्या करवाई और अवध भाग गया। 22 अक्टूबर 1764 को बक्सर में मेजर हेक्टर मुनरो ने मीर कासिम, अवध के शुजाउद्दौला और मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेनाओं को हराया। इलाहाबाद की संधि (1765) द्वारा शाह आलम ने कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी, अर्थात राजस्व वसूलने का अधिकार, प्रदान की। क्लाइव के द्वैध शासन में राजा शिताब राय बिहार के नायब दीवान रहे, और 1793 में बिहार कॉर्नवालिस के स्थायी बंदोबस्त के अंतर्गत आ गया।

मुख्य तथ्य

  • बख्तियार खिलजी ने लगभग 1200 ई. में दक्षिण बिहार पर धावा बोला; मिनहाज-उस-सिराज की तबकात-ए-नासिरी में किला समझकर एक विहार पर किए गए उसके हमले का वर्णन है; इस विहार को सामान्यतः ओदंतपुरी माना जाता है।
  • बिहार नाम विहार (बौद्ध मठ) से बना; बिहारशरीफ इस प्रांत में तुर्कों का पहला मुख्यालय था।
  • मिथिला के राजवंश: कर्नाट (1097 में नान्यदेव द्वारा स्थापित, 1324-25 के गयासुद्दीन तुगलक के आक्रमण से समाप्त) और ओइनवार (विद्यापति के संरक्षक)।
  • बिहार के सूफ़ी संत: फिरदौसी सिलसिले के मखदूम शरफुद्दीन अहमद याह्या मनेरी, मक्तूबात के रचयिता, जिनका 1381 में बिहारशरीफ में निधन हुआ।
  • शेरशाह का जीवन-क्रम: बहार खाँ लोहानी से शेर खाँ की उपाधि; रोहतासगढ़ पर अधिकार; चौसा 1539; कन्नौज (बिलग्राम) 1540; कालिंजर में मृत्यु 1545; सासाराम में झील के बीच मकबरा।
  • शेरशाह के सुधार: सरकार और परगना; शिकदार, अमीन, कानूनगो, फोतदार; पट्टा और कबूलियत; चाँदी का रुपया और ताँबे का दाम; सोनारगाँव वाली सड़क (बाद में ग्रैंड ट्रंक रोड) और सराय।
  • पटना: 1541 में शेरशाह ने किला बनवाया; 1580 से मुगल सूबा बिहार की राजधानी; 1704 में औरंगज़ेब के पोते अज़ीम-उश-शान ने इसका नाम अज़ीमाबाद रखा।
  • दसवें सिख गुरु गुरु गोबिंद सिंह का जन्म 1666 में पटना में हुआ; तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब पाँच तख्तों में से एक है।
  • मीर कासिम ने अपनी राजधानी मुर्शिदाबाद से मुंगेर स्थानांतरित की और वहाँ हथियारों का कारखाना लगाया।
  • बक्सर का युद्ध, 22 अक्टूबर 1764: हेक्टर मुनरो ने मीर कासिम, शुजाउद्दौला और शाह आलम द्वितीय को हराया; इलाहाबाद की संधि (1765) से कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी मिली।

एक नज़र में दोहराव

बख्तियार खिलजी लगभग 1200, ओदंतपुरी, तबकात-ए-नासिरी; बिहार नाम विहार से; मिथिला में कर्नाट वंश (नान्यदेव 1097) और ओइनवार; शरफुद्दीन मनेरी (फिरदौसी) का निधन 1381; शेरशाह: रोहतासगढ़, चौसा 1539, कन्नौज 1540, कालिंजर 1545, सासाराम मकबरा, रुपया, पट्टा-कबूलियत, पटना किला 1541; बिहार सूबा 1580; अज़ीमाबाद 1704; गुरु गोबिंद सिंह का जन्म पटना में 1666; मीर कासिम मुंगेर में; बक्सर 22 अक्टूबर 1764; दीवानी 1765।

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