41 में से पाठ 13 · मुहावरे और लोकोक्तियाँ
मुहावरा और लोकोक्ति: परिभाषा, अंतर और प्रयोग के नियम
AI की सहायता से तैयार किया गया और 28 अक्टूबर 2026 को तथ्यों की जाँच की गई; किसी मानव संपादक ने इसे अभी पंक्ति-दर-पंक्ति नहीं पढ़ा है। कोई गलती दिखे तो हमें बताइए। संपादकीय मानक और सुधार
मुहावरा क्या है
‘मुहावरा’ अरबी भाषा का शब्द है। इसके अर्थ के बारे में पुस्तकें एकमत नहीं हैं: कुछ इसका अर्थ ‘बातचीत करना’ या ‘उत्तर देना’ बताती हैं और कुछ ‘अभ्यास’। परिभाषा: जो वाक्यांश अपने शब्दों का सामान्य अर्थ छोड़कर कोई विशेष अर्थ प्रकट करे, उसे मुहावरा कहते हैं। शब्दों का सीधा अर्थ अभिधा शब्द-शक्ति से निकलता है, जबकि मुहावरे का अर्थ लक्षणा (और कहीं-कहीं व्यंजना) से निकलता है, इसलिए उसे लाक्षणिक अर्थ कहते हैं। ‘आँखों में धूल झोंकना’ का शब्दार्थ है आँख में मिट्टी डालना, पर मुहावरे का अर्थ है धोखा देना: ठग ने बातों में उलझाकर दुकानदार की आँखों में धूल झोंक दी। ‘गागर में सागर भरना’ में कोई घड़ा नहीं भरा जाता, अर्थ है थोड़े शब्दों में बहुत बड़ी बात कहना: बिहारी ने अपने दोहों में गागर में सागर भर दिया है। जो बात सीधे कहने में पूरा वाक्य लेती है, वह मुहावरे से दो-तीन शब्दों में और अधिक प्रभाव से कह दी जाती है।
मुहावरे की विशेषताएँ
पहली, मुहावरा अपूर्ण वाक्यांश है, अकेले प्रयोग नहीं होता, वाक्य के भीतर आकर ही पूरा अर्थ देता है। दूसरी, उसका अर्थ लाक्षणिक होता है, शब्दशः नहीं: ‘मक्खी मारना’ का अर्थ बेकार बैठे रहना है। तीसरी, उसके शब्द नहीं बदले जाते, पर्यायवाची रखते ही मुहावरा टूट जाता है: ‘नाक में दम करना’ को ‘नासिका में दम करना’ या ‘पेट में चूहे दौड़ना’ को ‘उदर में चूहे दौड़ना’ नहीं कहेंगे। चौथी, अधिकांश मुहावरे ‘ना’ पर समाप्त होने वाले क्रियार्थक रूप में लिखे जाते हैं (आग बबूला होना, हाथ मलना, कमर कसना), पर कुछ संज्ञा या विशेषण जैसे रूप में भी होते हैं: आँख का तारा (बहुत प्यारा), आस्तीन का साँप (कपटी मित्र), टेढ़ी खीर (कठिन काम), गूलर का फूल (दुर्लभ वस्तु), दाँत काटी रोटी (गहरी मित्रता)। पाँचवीं, मुहावरे का अर्थ उसी रूप में लिखा जाता है जिस रूप में मुहावरा है: ‘हाथ मलना’ का अर्थ ‘पछताना’ लिखेंगे, ‘पछतावा’ नहीं।
लोकोक्ति क्या है
‘लोकोक्ति’ शब्द ‘लोक’ और ‘उक्ति’ से बना है (लोक + उक्ति, गुण संधि), अर्थात् लोक में प्रचलित कथन; इसे कहावत भी कहते हैं। लोकोक्ति लोगों के लंबे अनुभव का निचोड़ है, जो किसी घटना, कहानी या जीवन-सत्य से बनकर पीढ़ियों से चली आ रही है। यह अपने-आप में पूर्ण वाक्य होती है और प्रायः किसी बात के समर्थन, उपदेश या व्यंग्य के लिए ज्यों-की-त्यों बोली जाती है। ‘अंगूर खट्टे हैं’ उस लोमड़ी की कहानी से आई है जो अंगूरों तक न पहुँच पाने पर उन्हें खट्टा बताकर चल दी: चुनाव हारकर नेता जी कहने लगे कि राजनीति अच्छे लोगों के लिए है ही नहीं, यानी अंगूर खट्टे हैं। बहुत-सी लोकोक्तियाँ अवधी, ब्रज या बोलियों के पुराने रूप में ही चलती हैं, जैसे ‘अधजल गगरी छलकत जाय’, ‘थोथा चना बाजे घना’। कई में तुक और लय होती है, जिससे वे याद रह जाती हैं: ‘जैसी करनी वैसी भरनी’, ‘नौ नकद न तेरह उधार’।
मुहावरे और लोकोक्ति में अंतर
पहला अंतर रचना का है, मुहावरा वाक्यांश है और लोकोक्ति पूर्ण वाक्य। दूसरा प्रयोग का है, मुहावरा वाक्य का अंग बनकर आता है और लोकोक्ति स्वतंत्र वाक्य या उद्धरण की तरह। तीसरा रूप का है, मुहावरे की क्रिया वाक्य के अनुसार बदलती है जबकि लोकोक्ति का रूप प्रायः नहीं बदलता। चौथा उद्देश्य का है, मुहावरा वाक्य में चमत्कार और लाक्षणिकता लाता है, लोकोक्ति किसी बात की पुष्टि करती है या अनुभव और उपदेश देती है। एक ही शब्द वाले उदाहरणों से अंतर साफ़ होता है: ‘दाल न गलना’ (युक्ति सफल न होना) मुहावरा है, सेठ के आगे ठग की दाल नहीं गली; ‘घर की मुर्गी दाल बराबर’ (घर की वस्तु या व्यक्ति का आदर न होना) लोकोक्ति है। इसी तरह ‘अंधे की लकड़ी’ (एकमात्र सहारा) मुहावरा है, जबकि ‘अंधों में काना राजा’ (अज्ञानियों में थोड़ा जानने वाला भी श्रेष्ठ माना जाता है) लोकोक्ति है।
वाक्य में मुहावरा कैसे बदलता है
मुहावरे का संज्ञा वाला भाग स्थिर रहता है और क्रिया वाक्य के काल, लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार बदलती है। काल: ‘नौ-दो ग्यारह होना’ से पुलिस को देखते ही चोर नौ-दो ग्यारह हो गया (भूतकाल), घंटी बजते ही बच्चे नौ-दो ग्यारह हो जाएँगे (भविष्यत् काल)। लिंग और वचन: ‘फूला न समाना’ से बेटा फूला न समाया, माँ फूली न समाई, दादाजी फूले न समाए (आदर के लिए बहुवचन)। ‘ने’ वाले वाक्य में क्रिया कर्ता से नहीं, मुहावरे के कर्म से मेल खाती है: ठग ने सेठ की आँखों में धूल झोंकी (धूल स्त्रीलिंग), उसने मुझे अँगूठा दिखाया (अँगूठा पुल्लिंग), माता-पिता ने बेटी के हाथ पीले कर दिए (हाथ बहुवचन)। मुहावरे के बीच संबंध बताने वाले शब्द भी जुड़ सकते हैं: इस शरारती बच्चे ने सबकी नाक में दम कर रखा है; इतना समझाया, पर उसके कान पर जूँ तक नहीं रेंगी। इनमें ‘नाक’, ‘दम’, ‘कान’, ‘जूँ’ जैसे मूल शब्द ज्यों-के-त्यों रहते हैं।
वाक्य बनाने के नियम
‘मुहावरे का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए’ वाले प्रश्न में वाक्य ऐसा हो जिससे अर्थ अपने-आप खुल जाए। ‘वह आग बबूला हो गया’ अधूरा है; ‘बेटे का झूठ पकड़कर पिताजी आग बबूला हो गए’ ठीक है, क्योंकि कारण से क्रोध स्पष्ट है। मुहावरे का प्रयोग शब्दशः अर्थ में न कीजिए: ‘उसने अखबार से मक्खी मारी’ साधारण वाक्य है, जबकि ‘ग्राहक न आने से दुकानदार दिन भर मक्खियाँ मारता रहा’ में मुहावरा है। वाक्य में अर्थ दोबारा न लिखिए: ‘वह आग बबूला अर्थात् क्रोधित हो गया’ गलत शैली है। लोकोक्ति को प्रायः किसी स्थिति के निष्कर्ष की तरह वाक्य के अंत में रखते हैं: जो सबसे कम जानता है, वही सबसे अधिक बोल रहा है; सच है, अधजल गगरी छलकत जाय। उसे ‘छलकती जाती है’ जैसे आधुनिक रूप में नहीं बदलना चाहिए।
मुहावरा या लोकोक्ति कैसे पहचानें
‘निम्नलिखित में लोकोक्ति कौन-सी है?’ जैसे प्रश्नों में केवल ‘ना’ वाला अंत देखना पर्याप्त नहीं; सही परख यह है कि वह अपने-आप में पूरी बात कहता है या नहीं। ‘आम के आम गुठलियों के दाम’, ‘एक पंथ दो काज’, ‘ऊँची दुकान फीका पकवान’ में क्रिया नहीं दिखती, फिर भी ये पूरी बात कहती हैं, इसलिए लोकोक्तियाँ हैं। ‘आँख का तारा’ और ‘टेढ़ी खीर’ वाक्य का अंग बनकर ही अर्थ देते हैं (वह माँ की आँखों का तारा है), इसलिए मुहावरे हैं। कुछ लोकोक्तियों से मुहावरे भी बन गए हैं: ‘अंगूर खट्टे हैं’ लोकोक्ति है, पर ‘अंगूर खट्टे होना’ मुहावरे की तरह भी चलता है। इसी कारण कुछ उदाहरणों का वर्गीकरण पुस्तकों में अलग मिलता है: ‘ऊँट के मुँह में जीरा’ (आवश्यकता से बहुत कम) को कुछ पुस्तकें मुहावरा और कुछ लोकोक्ति मानती हैं; ऐसे प्रश्न में विकल्पों में से सबसे स्पष्ट उदाहरण चुनिए।
मुख्य तथ्य
- मुहावरा अरबी भाषा का शब्द है (अर्थ ‘बातचीत’ या ‘अभ्यास’, पुस्तकों में दोनों मिलते हैं); लोकोक्ति = लोक + उक्ति (गुण संधि), जिसे कहावत भी कहते हैं।
- मुहावरा वाक्यांश है और वाक्य का अंग बनता है: ‘आँखें बिछाना’ → गाँव वालों ने अतिथियों के स्वागत में आँखें बिछा दीं।
- लोकोक्ति पूरा वाक्य है और ज्यों-की-त्यों आती है: तुम्हारी शेखी सुनकर यही लगता है कि थोथा चना बाजे घना।
- ‘ने’ वाले वाक्य में क्रिया मुहावरे के कर्म से मिलती है: ठग ने सेठ की आँखों में धूल झोंकी (धूल स्त्रीलिंग); माता-पिता ने बेटी के हाथ पीले कर दिए (हाथ बहुवचन)।
- मुहावरे के शब्द नहीं बदलते: ‘नाक में दम करना’ सही, ‘नासिका में दम करना’ गलत; ‘आँख का तारा’ सही, ‘आँख का सितारा’ गलत।
- कौन लोकोक्ति है? अंधे की लकड़ी / अंधों में काना राजा / आँख का तारा / हाथ मलना → अंधों में काना राजा; बाकी तीनों मुहावरे हैं।
- ‘ना’ वाली परख अधूरी है: आँख का तारा, टेढ़ी खीर, आस्तीन का साँप मुहावरे हैं; आम के आम गुठलियों के दाम, एक पंथ दो काज लोकोक्तियाँ हैं।
- वाक्य ऐसा बनाएँ कि अर्थ खुले: ‘बेटे का झूठ पकड़कर पिताजी आग बबूला हो गए’ ठीक; ‘वह आग बबूला हो गया’ अधूरा।
- शब्दशः प्रयोग मुहावरा नहीं: ‘उसने अखबार से मक्खी मारी’ साधारण वाक्य; ‘ग्राहक न आने से दुकानदार दिन भर मक्खियाँ मारता रहा’ मुहावरा।
एक नज़र में दोहराव
मुहावरा अरबी शब्द (अर्थ ‘बातचीत’ या ‘अभ्यास’), वाक्यांश, अर्थ लाक्षणिक (लक्षणा), शब्द नहीं बदलते, क्रिया काल-लिंग-वचन से बदलती है, ‘ने’ के साथ क्रिया कर्म से मिलती है (धूल झोंकी, हाथ पीले कर दिए); लोकोक्ति = लोक + उक्ति, कहावत, पूर्ण वाक्य, अनुभव का निचोड़, रूप नहीं बदलता; ‘ना’ की परख अधूरी: आँख का तारा मुहावरा, आम के आम गुठलियों के दाम लोकोक्ति; अंधे की लकड़ी मुहावरा, अंधों में काना राजा लोकोक्ति; ऊँट के मुँह में जीरा का वर्गीकरण पुस्तकों में भिन्न।