41 में से पाठ 14 · मुहावरे और लोकोक्तियाँ

शरीर के अंगों से जुड़े मुहावरे: अर्थ और वाक्य-प्रयोग

AI की सहायता से तैयार किया गया और 28 अक्टूबर 2026 को तथ्यों की जाँच की गई; किसी मानव संपादक ने इसे अभी पंक्ति-दर-पंक्ति नहीं पढ़ा है। कोई गलती दिखे तो हमें बताइए। संपादकीय मानक और सुधार

आँख से जुड़े मुहावरे

शरीर के अंगों वाले मुहावरे परीक्षा में सबसे अधिक आते हैं; एक ही अंग से दर्जनों मुहावरे बनते हैं, इसलिए इन्हें अंग के अनुसार याद कीजिए। आँख का तारा (बहुत प्यारा): इकलौता होने के कारण मोहन अपनी दादी की आँखों का तारा है। आँख लगना (नींद आना): रात भर जागने के बाद भोर में जाकर उसकी आँख लगी। आँखें खुलना (सच्चाई का पता चलना, सचेत होना): व्यापार में घाटा होने पर उसकी आँखें खुलीं। आँख दिखाना (क्रोध से देखकर डराना): पिताजी के आँख दिखाते ही बच्चा चुप हो गया। आँखें फेर लेना (पहले जैसा प्रेम न रखना, उपेक्षा करना): धनी होते ही उसने पुराने मित्रों से आँखें फेर लीं। आँख का काँटा (बहुत खटकने वाला व्यक्ति): ईमानदार अफ़सर भ्रष्ट कर्मचारियों की आँख का काँटा बन गया। आँखों पर पर्दा पड़ना (सच दिखाई न देना): बेटे के मोह में माँ की आँखों पर पर्दा पड़ा था, उसे उसकी कोई बुराई नहीं दिखती थी।

नाक और कान के मुहावरे

नाक प्रतिष्ठा का प्रतीक है। नाक कटना (प्रतिष्ठा नष्ट होना): बेटे के चोरी में पकड़े जाने से पूरे परिवार की नाक कट गई। नाक रखना (प्रतिष्ठा बचाना): अंतिम गेंद पर छक्का मारकर कप्तान ने टीम की नाक रख ली। नाक का बाल (बहुत प्रिय और विश्वासपात्र व्यक्ति): मुनीम जी सेठ जी की नाक के बाल हैं। नाक-भौं सिकोड़ना (अप्रसन्नता या घृणा प्रकट करना): सादा भोजन देखकर वह नाक-भौं सिकोड़ने लगा। नाकों चने चबवाना (बहुत तंग करना): रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेज़ों को नाकों चने चबवा दिए। कान खड़े होना (सावधान हो जाना): आधी रात को आहट सुनकर चौकीदार के कान खड़े हो गए। कान खाना (बकबक या शोर से परेशान करना): चुप भी रहो, सुबह से कान खा रहे हो। कान का कच्चा (बिना परखे दूसरों की बात मान लेने वाला): कान के कच्चे राजा ने चुगलखोरों के कहने पर ईमानदार मंत्री को निकाल दिया। कानों-कान खबर न होना (किसी को पता न चलना): चोर सारा सामान ले गए और किसी को कानों-कान खबर न हुई।

मुँह और दाँत के मुहावरे

मुँह की खाना (बुरी तरह हारना): डींग मारने वाला पहलवान पहले ही दाँव में मुँह की खा गया। मुँह फुलाना (रूठना): खिलौना न मिलने पर मुन्नी मुँह फुलाकर बैठ गई। मुँह ताकना (सहायता की आशा में दूसरों पर निर्भर रहना): आलसी व्यक्ति सदा दूसरों का मुँह ताकता है। मुँहतोड़ जवाब देना (ऐसा करारा उत्तर देना कि सामने वाला चुप हो जाए): सेना ने घुसपैठियों को मुँहतोड़ जवाब दिया। मुँह में पानी आना (लालच आना): गरम जलेबियाँ देखकर बच्चों के मुँह में पानी आ गया। दाँत खट्टे करना (बुरी तरह हराना): शिवाजी ने मुगल सेना के दाँत खट्टे कर दिए। दाँत काटी रोटी (गहरी मित्रता): राम और श्याम में दाँत काटी रोटी है। दाँत पीसना (बहुत क्रोध करना): अपमान याद आते ही वह दाँत पीसने लगा। दाँतों तले उँगली दबाना (आश्चर्यचकित होना): नन्हे बालक को बड़े-बड़े जोड़ मन में करते देखकर सबने दाँतों तले उँगली दबा ली।

हाथ और पैर के मुहावरे

हाथ मलना (पछताना): जो विद्यार्थी समय पर नहीं पढ़ते, वे परिणाम आने पर हाथ मलते रह जाते हैं। हाथ धोकर पीछे पड़ना (पूरी शक्ति से किसी के पीछे लग जाना): पुलिस उस गिरोह के पीछे हाथ धोकर पड़ गई है। हाथ खींचना (सहायता या साथ देना बंद करना): घाटा होते ही साझेदार ने व्यापार से हाथ खींच लिया। हाथ साफ़ करना (चुरा लेना): भीड़ में किसी ने उसकी जेब पर हाथ साफ़ कर दिया। बाएँ हाथ का खेल (बहुत सरल काम): कुशल कारीगर के लिए यह मरम्मत बाएँ हाथ का खेल है। हाथ-पाँव फूलना (घबरा जाना): सामने साँप देखकर उसके हाथ-पाँव फूल गए। पैरों तले ज़मीन खिसकना (होश उड़ जाना): दुर्घटना का समाचार सुनकर उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। पाँव उखड़ना (टिक न पाना, हारकर भागना): भारी गोलाबारी से शत्रु सेना के पाँव उखड़ गए। एड़ी-चोटी का ज़ोर लगाना (पूरी शक्ति लगा देना): प्रथम आने के लिए उसने एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा दिया।

सिर के मुहावरे

सिर पर कफ़न बाँधना (मरने को तैयार रहना): देश की रक्षा के लिए सैनिक सिर पर कफ़न बाँधकर निकल पड़े। सिर आँखों पर रखना (आदर से स्वीकार करना): शिष्य ने गुरु की आज्ञा को सिर आँखों पर रखा। सिर उठाना (विद्रोह करना): लगान बढ़ने पर किसानों ने सिर उठाया। सिर नीचा होना (लज्जित होना): बेटे की करतूत से पिता का सिर नीचा हो गया। सिर धुनना (पछताना, शोक करना): सब कुछ जुए में हारकर वह सिर धुनने लगा।

दिल और कलेजे के मुहावरे

ये प्रायः दुख, भय, साहस और प्रसन्नता बताते हैं। कलेजा मुँह को आना (बहुत दुखी या व्याकुल होना): बाढ़ पीड़ितों की दशा देखकर कलेजा मुँह को आ गया। कलेजे पर पत्थर रखना (दुख सहने के लिए मन कड़ा करना): माँ ने कलेजे पर पत्थर रखकर बेटे को सीमा पर भेजा। कलेजा ठंडा होना (मन को संतोष मिलना): हत्यारे को दंड मिलने पर पीड़ित परिवार का कलेजा ठंडा हुआ। कलेजा फटना (असहनीय दुख होना): बेटे की मृत्यु का समाचार सुनकर माँ का कलेजा फट गया। दिल बाग-बाग होना (बहुत प्रसन्न होना): वर्षों बाद पुराने मित्र को देखकर उसका दिल बाग-बाग हो गया।

पेट और छाती के मुहावरे

पेट काटना (भूखे रहकर या बहुत कम खर्च करके बचत करना): किसान ने पेट काटकर बेटे को पढ़ाया। पेट में दाढ़ी होना (कम आयु में बहुत चतुर होना): यह छोटा-सा लड़का बड़ों को बातों में हरा देता है, इसके पेट में दाढ़ी है। पेट में बात न पचना (कोई बात छिपा न पाना): उसके पेट में कोई बात नहीं पचती, तुरंत सबको बता देता है। छाती पर साँप लोटना (ईर्ष्या से जलना): पड़ोसी की उन्नति देखकर उसकी छाती पर साँप लोटने लगा। छाती पर मूँग दलना (पास रहकर दुख देना): निकम्मा बेटा घर बैठे माँ-बाप की छाती पर मूँग दल रहा है। छाती फूलना (गर्व होना): बेटी के पदक जीतने पर पिता की छाती फूल गई।

मिलते-जुलते मुहावरों के जाल

एक ही अंग के मुहावरों में क्रिया बदलते ही अर्थ उलट सकता है, इसलिए जोड़े बनाकर याद कीजिए। नाक कटना (प्रतिष्ठा जाना) और नाक रखना (प्रतिष्ठा बचाना) उलटे हैं। मुँह की खाना में कर्ता स्वयं हारता है, दाँत खट्टे करना में कर्ता दूसरे को हराता है: ‘शत्रु ने मुँह की खाई’ और ‘हमने शत्रु के दाँत खट्टे किए’ एक ही घटना बताते हैं। कान भरना (चुगली करना), कान खाना (बकबक से तंग करना), कान खड़े होना (सावधान होना) और कान पकड़ना (भूल मानकर फिर न करने का प्रण करना) चारों अलग हैं। सिर उठाना (विद्रोह) और सिर नीचा होना (लज्जा) भी भिन्न हैं। घबराहट के लिए कई मुहावरे हैं: हाथ-पाँव फूलना, पैरों तले ज़मीन खिसकना, दिन में तारे दिखाई देना। टेढ़ी खीर (कठिन काम) का उलटा बाएँ हाथ का खेल (सरल काम) है।

मुख्य तथ्य

  • आँख लगना = नींद आना; आँखें खुलना = सच्चाई का पता चलना; आँखें फेर लेना = उपेक्षा करना; आँख का काँटा = बहुत खटकने वाला व्यक्ति।
  • नाक कटना = प्रतिष्ठा जाना, नाक रखना = प्रतिष्ठा बचाना (उलटे अर्थ); नाक का बाल = बहुत प्रिय व्यक्ति; नाकों चने चबवाना = बहुत तंग करना।
  • कान भरना = चुगली करना; कान खाना = बकबक से तंग करना; कान खड़े होना = सावधान होना; कान का कच्चा = बिना परखे बात मानने वाला।
  • ‘डींग मारने वाला पहलवान पहले ही दाँव में ___।’ → मुँह की खा गया (स्वयं हारना); दाँत खट्टे करना का अर्थ दूसरे को हराना है।
  • दाँत काटी रोटी = गहरी मित्रता; दाँत पीसना = बहुत क्रोध करना; दाँतों तले उँगली दबाना = आश्चर्यचकित होना; मुँह फुलाना = रूठना।
  • हाथ मलना = पछताना; हाथ खींचना = सहायता बंद करना; हाथ साफ़ करना = चुरा लेना; बाएँ हाथ का खेल = बहुत सरल काम (टेढ़ी खीर का उलटा)।
  • ‘सामने साँप देखकर उसके ___ गए।’ → हाथ-पाँव फूल (घबराना); पैरों तले ज़मीन खिसकना का अर्थ भी होश उड़ जाना है।
  • सिर पर कफ़न बाँधना = मरने को तैयार रहना; सिर उठाना = विद्रोह करना; सिर नीचा होना = लज्जित होना; सिर धुनना = पछताना।
  • कलेजा मुँह को आना = बहुत दुखी या व्याकुल होना; कलेजे पर पत्थर रखना = मन कड़ा करना; पेट में दाढ़ी होना = कम आयु में बहुत चतुर होना; छाती पर मूँग दलना = पास रहकर दुख देना।
  • अन्य अंग: उँगली उठाना = दोष लगाना; घुटने टेकना = हार मान लेना; तलवे चाटना = चापलूसी करना; बाल बाँका न होना = कोई हानि न होना; खून खौलना = बहुत क्रोध आना।

एक नज़र में दोहराव

आँख लगना नींद, आँखें खुलना सचेत होना, आँखें फेरना उपेक्षा, आँख का काँटा खटकने वाला; नाक कटना/रखना प्रतिष्ठा जाना/बचाना, नाक का बाल प्रिय; कान खड़े होना सावधान, कान खाना तंग करना, कान का कच्चा; मुँह की खाना हारना, दाँत खट्टे करना हराना, दाँत काटी रोटी मित्रता; हाथ मलना पछताना, बाएँ हाथ का खेल सरल, हाथ-पाँव फूलना घबराना; सिर उठाना विद्रोह, सिर नीचा होना लज्जा; कलेजा ठंडा होना संतोष; पेट में दाढ़ी चतुर; छाती पर साँप लोटना ईर्ष्या, छाती पर मूँग दलना पास रहकर दुख देना।

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