41 में से पाठ 33 · पर्यायवाची और विलोम शब्द

पर्यायवाची शब्द (2): देवता, पशु-पक्षी और मानव

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देवताओं के नाम कैसे बने हैं

देवताओं के अधिकतर पर्याय उनकी किसी विशेषता से बने सामासिक शब्द हैं, और व्याकरण में इन्हें बहुव्रीहि समास के उदाहरण के रूप में भी पढ़ाया जाता है। ‘चक्रपाणि’ का अर्थ है जिसके हाथ (पाणि) में चक्र है, अर्थात विष्णु; ‘नीलकंठ’ जिसका कंठ नीला है, अर्थात शिव; ‘लंबोदर’ जिसका उदर लंबा (बड़ा) है, अर्थात गणेश। इसलिए नाम पढ़ते ही पूछिए कि इसमें कौन-सा अस्त्र, वाहन, पत्नी या अंग छिपा है। हाथ में शस्त्र या वाद्य: चक्रपाणि (विष्णु), शूलपाणि (शिव), वज्रपाणि और वज्रधर (इंद्र), वीणापाणि (सरस्वती)। मुख (आनन) की संख्या या रूप: चतुरानन (ब्रह्मा), पंचानन (शिव), षडानन (कार्तिकेय), गजानन (गणेश), दशानन (रावण)। पत्नी के नाम से पति: उमापति (शिव), रमापति और लक्ष्मीपति (विष्णु), शचीपति (इंद्र)।

ईश्वर, विष्णु और शिव

ईश्वर के पर्याय हैं: परमेश्वर, परमात्मा, प्रभु, भगवान, ईश, जगदीश, जगदीश्वर, सर्वेश्वर, अंतर्यामी और जगन्नाथ। विष्णु के पर्याय हैं: नारायण, हरि, चक्रपाणि, चक्रधर, लक्ष्मीपति, रमापति, रमेश, कमलापति, पीतांबर, चतुर्भुज, जनार्दन, केशव, माधव, अच्युत, मुकुंद, उपेंद्र और गरुड़ध्वज; केशव, माधव जैसे कई नाम कृष्ण के लिए भी आते हैं, क्योंकि कृष्ण विष्णु के अवतार माने जाते हैं। शिव के पर्याय हैं: शंकर, शंभु, महादेव, महेश, महेश्वर, रुद्र, हर, भोलेनाथ, पशुपति, नीलकंठ, त्रिलोचन, त्रिनेत्र, चंद्रशेखर, गंगाधर, कैलाशपति, उमापति, गिरीश, आशुतोष, त्रिपुरारि और विश्वनाथ। ध्यान दें कि ‘उपेंद्र’ (वामन अवतार में इंद्र के छोटे भाई) विष्णु हैं, इंद्र नहीं; ‘चंद्रशेखर’ (जिसके सिर पर चंद्रमा है) शिव हैं, चंद्रमा नहीं; ‘गिरीश’ (पर्वत के स्वामी) शिव हैं, जबकि ‘गिरिजा’ (पर्वत की पुत्री) पार्वती हैं और ‘गिरिधर’ (गोवर्धन पर्वत धारण करने वाले) कृष्ण।

ब्रह्मा, इंद्र और गणेश

ब्रह्मा के पर्याय हैं: विधाता, विधि, चतुरानन, चतुर्मुख, प्रजापति, पितामह, स्वयंभू, विरंचि, कमलासन, हंसवाहन, स्रष्टा और लोकेश। इंद्र के पर्याय हैं: सुरेश, सुरेंद्र, सुरपति, देवराज, देवेंद्र, शचीपति, पुरंदर, शक्र, वासव, मघवा, वज्रधर और सहस्राक्ष। गणेश के पर्याय हैं: गणपति, गणनायक, गजानन, गजवदन, विनायक, लंबोदर, एकदंत, विघ्नेश, विघ्नहर्ता, मूषकवाहन, गौरीनंदन और हेरंब। ‘सुर’ देवता हैं, इसलिए सुरों के स्वामी (सुरेश, सुरपति, सुरेंद्र) इंद्र हैं। ‘सहस्राक्ष’ (हजार आँखों वाला) इंद्र है, जबकि ‘सहस्रांशु’ (हजार किरणों वाला) सूर्य; परीक्षक दोनों को एक ही प्रश्न में रखना पसंद करते हैं। ‘षडानन’ या ‘षण्मुख’ गणेश के भाई कार्तिकेय हैं, गणेश नहीं। ‘विधि’ अनेकार्थी है: ब्रह्मा, तरीका और भाग्य।

सरस्वती और लक्ष्मी

सरस्वती के पर्याय हैं: शारदा, वाणी, गिरा, भारती, वीणापाणि, वीणावादिनी, हंसवाहिनी, वागीश्वरी, महाश्वेता और ब्राह्मी। लक्ष्मी के पर्याय हैं: कमला, पद्मा, रमा, श्री, इंदिरा, हरिप्रिया, विष्णुप्रिया, सिंधुसुता और चंचला। लिंग पर ध्यान दीजिए: ‘हंसवाहन’ (पुल्लिंग) ब्रह्मा हैं और ‘हंसवाहिनी’ (स्त्रीलिंग) सरस्वती। ‘रमा’ और ‘कमला’ लक्ष्मी हैं, पर ‘रमेश’, ‘रमापति’ और ‘कमलापति’ उनके पति विष्णु। ‘सिंधुसुता’ (समुद्र की पुत्री) लक्ष्मी हैं, क्योंकि कथा के अनुसार वे समुद्र-मंथन से निकलीं; यह शब्द नदी या समुद्र का पर्याय नहीं है। ‘चंचला’ बिजली के लिए भी आता है, और ‘वाणी’ व ‘गिरा’ का सामान्य अर्थ बोली भी है, इसलिए ये अनेकार्थी हैं।

पशु-पक्षी

हाथी के पर्याय हैं: गज, हस्ती, कुंजर, करी, द्विप, द्विरद, दंती, मतंग, नाग, वारण, गयंद और सिंधुर; ‘करी’ (कर अर्थात सूँड़ वाला) और ‘दंती’ (दाँत वाला) नाम स्वयं अर्थ बताते हैं। घोड़ा: अश्व, हय, तुरंग, तुरंगम, घोटक, वाजि (बाजि) और सैंधव। सिंह: शेर, केसरी, केहरि, मृगराज, मृगेंद्र, मृगपति, वनराज, नाहर, पंचानन और हरि; ‘शार्दूल’ को कुछ पुस्तकें सिंह का और कुछ बाघ का पर्याय मानती हैं; अमरकोश में यह व्याघ्र (बाघ) का पर्याय है। सर्प: साँप, नाग, भुजंग, भुजंगम, भुजग, उरग, पन्नग, व्याल, अहि, फणी, विषधर और द्विजिह्व; ‘उरग’ का अर्थ है छाती (उर) के बल चलने वाला। हंस: मराल, कलहंस और सितपक्ष। कोयल: कोकिल, कोकिला, पिक, श्यामा, कलकंठ, वसंतदूत और परभृत; ‘परभृत’ का अर्थ है दूसरे द्वारा पाली गई, क्योंकि कोयल अपने अंडे कौए के घोंसले में देती है। मोर: मयूर, शिखी, केकी, कलापी, शिखंडी, सारंग और नीलकंठ; ‘केकी’ मोर की बोली ‘केका’ से बना है। ‘नाग’ हाथी और साँप दोनों है, ‘सैंधव’ घोड़ा और सेंधा नमक दोनों, और ‘नीलकंठ’ शिव भी है, मोर भी और एक अलग पक्षी भी।

राजा, स्त्री, पुत्र, मित्र और शत्रु

राजा के पर्याय हैं: नृप, नृपति, भूप, भूपति, भूपाल, महीप, महीपति, नरेश, नरेंद्र, नरपति, सम्राट और राव; पृथ्वी या मनुष्य के वाचक शब्द के साथ ‘प’, ‘पति’, ‘पाल’ या ‘ईश’ जुड़ा हो तो अर्थ राजा होता है। जाल यह है कि ‘भूप’ और ‘महीप’ राजा हैं, पर ‘भूधर’ और ‘महीधर’ पर्वत। स्त्री के पर्याय हैं: नारी, महिला, औरत, वनिता, ललना, कामिनी, रमणी, कांता, वामा, अंगना, भामिनी और अबला। पुत्र के पर्याय हैं: बेटा, सुत, तनय, तनुज, आत्मज, अंगज, नंदन, वत्स और पूत; पुत्री के पर्याय हैं: बेटी, सुता, तनया, तनुजा, आत्मजा, दुहिता और नंदिनी। ‘तनुज’ (शरीर से जन्मा) पुत्र है, पर ‘अनुज’ (बाद में जन्मा) छोटा भाई है और ‘अग्रज’ बड़ा भाई। मित्र के पर्याय हैं: सखा, सहचर, सुहृद, बंधु, मीत, साथी और दोस्त; ‘मित्र’ का एक अर्थ सूर्य भी है। शत्रु के पर्याय हैं: रिपु, अरि, अराति, बैरी, वैरी, दुश्मन, अमित्र और विपक्षी; ‘अरि’ से ही ‘त्रिपुरारि’ (त्रिपुर का शत्रु, शिव) और ‘मुरारि’ (मुर का शत्रु, कृष्ण) बने हैं।

आँख, हाथ और शरीर

आँख के पर्याय हैं: नेत्र, नयन, लोचन, चक्षु, दृग, अक्षि और विलोचन। हाथ के पर्याय हैं: कर, हस्त, पाणि, बाहु और भुजा; सूक्ष्म अर्थ में बाहु और भुजा बाँह हैं, पर परीक्षा की सूचियाँ इन्हें हाथ में गिनती हैं। शरीर के पर्याय हैं: देह, तन, तनु, काया, कलेवर, गात, गात्र, वपु, बदन और जिस्म। ‘पाणि’ (हाथ) को ‘पानी’ (जल) न समझें; ‘पाणिग्रहण’ का अर्थ है हाथ पकड़ना, अर्थात विवाह। ‘तनु’ अनेकार्थी है: शरीर भी और पतला भी, जैसे ‘तनु अम्ल’। ‘कर’ के अर्थ हाथ, किरण, टैक्स और सूँड़ हैं, इसीलिए ‘करी’ हाथी है। आँख वाले शब्द देवताओं के नामों में भी आते हैं: त्रिलोचन और त्रिनेत्र शिव हैं, सहस्राक्ष इंद्र, और कमलनयन या राजीवलोचन राम और विष्णु के विशेषण हैं।

मुख्य तथ्य

  • विष्णु: नारायण, हरि, चक्रपाणि, लक्ष्मीपति, रमापति, रमेश, कमलापति, पीतांबर, चतुर्भुज, जनार्दन, केशव, माधव, अच्युत, उपेंद्र, गरुड़ध्वज।
  • शिव: शंकर, शंभु, महादेव, महेश, रुद्र, हर, पशुपति, नीलकंठ, त्रिलोचन, चंद्रशेखर, गंगाधर, उमापति, गिरीश, आशुतोष, त्रिपुरारि।
  • ब्रह्मा: विधाता, विधि, चतुरानन, प्रजापति, पितामह, स्वयंभू, विरंचि, कमलासन, हंसवाहन; इंद्र: सुरेश, सुरपति, देवराज, शचीपति, पुरंदर, शक्र, वासव, मघवा, सहस्राक्ष।
  • आनन (मुख) वाले नाम: चतुरानन ब्रह्मा, पंचानन शिव (और सिंह), षडानन कार्तिकेय, गजानन गणेश, दशानन रावण।
  • सरस्वती: शारदा, वाणी, गिरा, भारती, वीणापाणि, हंसवाहिनी, वागीश्वरी; लक्ष्मी: कमला, पद्मा, रमा, श्री, इंदिरा, हरिप्रिया, सिंधुसुता, चंचला।
  • हाथी: गज, हस्ती, कुंजर, करी, द्विप, दंती, मतंग, नाग; घोड़ा: अश्व, हय, तुरंग, घोटक, वाजि, सैंधव; सिंह: केसरी, मृगराज, मृगेंद्र, वनराज, पंचानन, हरि।
  • सर्प: भुजंग, उरग, पन्नग, व्याल, अहि, फणी, विषधर; हंस: मराल; कोयल: कोकिल, पिक, श्यामा, परभृत; मोर: मयूर, शिखी, केकी, कलापी, सारंग।
  • राजा: नृप, भूप, भूपाल, महीप, नरेश, नरपति (भूप राजा, भूधर पर्वत); स्त्री: नारी, वनिता, ललना, कामिनी, रमणी, अंगना, भामिनी।
  • पुत्र: सुत, तनय, तनुज, आत्मज; पुत्री: सुता, तनया, दुहिता, आत्मजा; अनुज छोटा भाई, अग्रज बड़ा भाई; मित्र: सखा, सुहृद; शत्रु: रिपु, अरि, अराति।
  • आँख: नेत्र, नयन, लोचन, चक्षु, दृग, अक्षि; हाथ: कर, हस्त, पाणि; शरीर: देह, तन, काया, कलेवर, गात, वपु; पाणि हाथ है, पानी नहीं।

एक नज़र में दोहराव

देवताओं के अधिकतर नाम विशेषता से बने बहुव्रीहि हैं: चक्रपाणि विष्णु, नीलकंठ, चंद्रशेखर, गंगाधर शिव, लंबोदर, गजानन गणेश; आनन: चतुरानन ब्रह्मा, षडानन कार्तिकेय, दशानन रावण; उमापति शिव, रमापति विष्णु, शचीपति इंद्र; उपेंद्र विष्णु; सहस्राक्ष इंद्र, सहस्रांशु सूर्य; हंसवाहन ब्रह्मा, हंसवाहिनी सरस्वती; सिंधुसुता लक्ष्मी; नाग हाथी और साँप; सैंधव घोड़ा और नमक; पंचानन, हरि सिंह भी; भूप राजा, भूधर पर्वत; तनुज पुत्र, अनुज छोटा भाई; पाणि हाथ।

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