41 में से पाठ 34 · पर्यायवाची और विलोम शब्द

पर्यायवाची शब्दों की पहचान: तत्सम पर्याय, भ्रामक विकल्प और अनेकार्थी शब्द

AI की सहायता से तैयार किया गया और 28 अक्टूबर 2026 को तथ्यों की जाँच की गई; किसी मानव संपादक ने इसे अभी पंक्ति-दर-पंक्ति नहीं पढ़ा है। कोई गलती दिखे तो हमें बताइए। संपादकीय मानक और सुधार

तीन तरह के शब्द

पर्यायवाची (समानार्थी) शब्दों में कई शब्दों का एक अर्थ होता है, जैसे कमल के लिए पंकज, जलज और सरोज। अनेकार्थी शब्द इसका उलटा है: एक शब्द के कई अर्थ, जैसे ‘कर’ के अर्थ हाथ, किरण, टैक्स और सूँड़। तीसरी श्रेणी श्रुतिसम-भिन्नार्थक शब्दों की है, जिन्हें कुछ पुस्तकें युग्म-शब्द या समोच्चरित शब्द कहती हैं: सुनने और लिखने में लगभग एक जैसे, पर अर्थ अलग, जैसे अनल (आग) और अनिल (हवा), कुल (वंश) और कूल (किनारा), दिन और दीन (गरीब), सुत (पुत्र) और सूत (धागा, सारथी)। पर्यायवाची के प्रश्नों में यही तीनों आपस में मिलाकर जाल बनाए जाते हैं: विकल्प में आया अनेकार्थी शब्द सही पर्याय हो सकता है, जबकि मिलता-जुलता श्रुतिसम शब्द प्रायः पर्याय नहीं होता, केवल भ्रम के लिए रखा जाता है।

तत्सम पर्याय कैसे बनते हैं

परीक्षा के कठिन पर्याय प्रायः तत्सम सामासिक शब्द होते हैं, जिनमें एक मूल शब्द और एक अंतिम पद होता है, और कुछ अंतिम पद बार-बार आते हैं। ‘ज’ या ‘जा’ (जन्मा, जन्मी): जलज, पंकज (कमल), तनुज (पुत्र), अनुज (छोटा भाई), गिरिजा (पार्वती), भूमिजा (सीता)। ‘द’ (देने वाला): जलद, नीरद, पयोद (बादल)। ‘धि’ या ‘निधि’ (भंडार): जलधि, उदधि (समुद्र), कलानिधि (चंद्रमा)। ‘धर’ (धारण करने वाला): जलधर (बादल), भूधर (पर्वत), विषधर (साँप), गंगाधर (शिव), गिरिधर (कृष्ण), वज्रधर (इंद्र), चक्रधर (विष्णु)। ‘प’ (पालक), ‘पति’, ‘ईश’, ‘नाथ’ (स्वामी): भूप, नृपति, नरेश (राजा), रजनीश (चंद्रमा), दिनेश (सूर्य), नदीश (समुद्र), कैलाशपति (शिव)। ‘चर’ (चलने वाला): खेचर और नभचर (पक्षी), जलचर (जल-जीव), निशाचर (राक्षस)। ‘कर’ या ‘आकर’ (करने वाला या खान): दिनकर (सूर्य), निशाकर (चंद्रमा), रत्नाकर (समुद्र), कुसुमाकर (वसंत)। कोई अपरिचित विकल्प दिखे, तो उसे इन दो पदों में तोड़िए और पूछिए कि यह किसका वर्णन है।

तत्सम, तद्भव और आगत शब्द साथ-साथ

एक ही अर्थ के लिए विकल्प में तत्सम, तद्भव, देशज और अरबी-फारसी से आए (आगत) शब्द एक साथ आ सकते हैं, और अर्थ एक हो तो सब सही पर्याय हैं। सूर्य-सूरज, चंद्र-चाँद, अग्नि-आग, रात्रि-रात, हस्ती-हाथी, घोटक-घोड़ा, सर्प-साँप, मयूर-मोर, कोकिल-कोयल, पुत्र-पूत, मित्र-मीत, वैरी-बैरी, हस्त-हाथ और अक्षि-आँख तत्सम और उनके तद्भव रूप हैं; आसमान, दरिया, दुश्मन, दोस्त, औरत, बदन और गुल आगत शब्द हैं। इसलिए ‘पर्यायवाची नहीं है’ वाले प्रश्न का उत्तर अर्थ से तय होता है, स्रोत से नहीं: ‘अग्नि’ के विकल्प ‘आग, अनल, पावक, समीर’ हों, तो ‘आग’ तद्भव होते हुए भी सही पर्याय है, और उत्तर ‘समीर’ (हवा) है। हाँ, यदि प्रश्न में स्पष्ट लिखा हो कि तत्सम पर्याय चुनिए, तब तद्भव रूप हटाने होंगे। एक बारीकी यह भी है कि एक ही रूप के दो स्रोत हो सकते हैं: संस्कृत का ‘हस्ती’ हाथी है, पर उर्दू का ‘हस्ती’ अस्तित्व या प्रतिष्ठित व्यक्ति।

एक जैसे दिखने वाले पर उत्तर न बनने वाले विकल्प

परीक्षक जानबूझकर ऐसा शब्द रखते हैं जो रूप या ध्वनि में सही उत्तर से बहुत मिलता-जुलता हो, कई बार केवल एक मात्रा या एक अक्षर भर अलग। इन जोड़ों को साथ-साथ याद कीजिए: अनिल हवा, अनल आग; अंबु जल, अंबर आकाश; जलज कमल, जलद बादल; धराधर पर्वत, धाराधर बादल; भूप राजा, भूधर पर्वत; सहस्रांशु सूर्य, सहस्राक्ष इंद्र; हंसवाहन ब्रह्मा, हंसवाहिनी सरस्वती; अचल पर्वत, अचला पृथ्वी; यामिनी रात, दामिनी बिजली, कामिनी स्त्री; मारुत हवा, मारुति हनुमान; तनुज पुत्र, अनुज छोटा भाई; काक कौआ, कोकिल कोयल; सरोज कमल, सरोवर तालाब। दूसरी तरह का जाल संबंध वाले नामों का है, जिनमें किसी वस्तु का शब्द हो पर अर्थ उससे जुड़े व्यक्ति का हो: ‘गिरिजा’ पार्वती है, पर्वत नहीं; ‘भूमिजा’ और ‘महीसुता’ सीता हैं, पृथ्वी नहीं; ‘सिंधुसुता’ लक्ष्मी है, समुद्र नहीं; ‘चंद्रशेखर’ शिव है, चंद्रमा नहीं।

अनेकार्थी शब्द और उनका अंतर

अनेकार्थी शब्द पर्यायवाची प्रश्न में दो तरह से आता है। पहला, वह सही उत्तर में हो सकता है: ‘सिंह’ के पर्यायों में ‘हरि’ सही है, भले ही आप हरि को विष्णु के रूप में जानते हों। दूसरा, प्रश्न सीधे पूछ सकता है कि किसी शब्द का कौन-सा अर्थ नहीं है। कनक के अर्थ सोना और धतूरा हैं, और बिहारी के दोहे की पंक्ति ‘कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय’ इसी पर टिकी है; कुछ पुस्तकें कनक का अर्थ गेहूँ और पलाश भी गिनाती हैं। अंबर के अर्थ आकाश और वस्त्र हैं; ‘पीतांबर’ (पीला वस्त्र) और ‘दिगंबर’ (दिशाएँ ही जिसके वस्त्र हों) में अंबर वस्त्र है। हरि के अर्थ बहुत हैं; अमरकोश में संज्ञा (पुल्लिंग) के रूप में इसके ये 13 अर्थ हैं: विष्णु, इंद्र, सिंह, घोड़ा, बंदर, साँप, मेंढक, तोता, सूर्य, चंद्रमा, पवन, किरण और यम, और विशेषण के रूप में यह कपिल (भूरा-पीला) रंग है; कुछ हिंदी पुस्तकें इनमें और अर्थ भी जोड़ती हैं। अर्थ के अर्थ हैं मतलब, धन (अर्थशास्त्र), प्रयोजन या हेतु, और ‘के लिए’ (परीक्षार्थ, धर्मार्थ)।

और भी अनेकार्थी शब्द

कर (हाथ, किरण, टैक्स, सूँड़), घन (बादल, हथौड़ा, घना, और गणित में किसी संख्या का घन), पय (दूध, जल), द्विज (ब्राह्मण, पक्षी, दाँत), नाग (साँप, हाथी), पतंग (सूर्य, पक्षी, कागज की पतंग, पतंगा), गुरु (शिक्षक, भारी, बृहस्पति), तात (पिता, भाई, पूज्य व्यक्ति, प्रिय संबोधन), वर्ण (अक्षर, रंग, जाति), पत्र (चिट्ठी, पत्ता), कल (बीता या आने वाला दिन, मशीन, चैन), काल (समय, मृत्यु, यमराज), जीवन (जिंदगी, जल), हंस (पक्षी, सूर्य, आत्मा), मित्र (दोस्त, सूर्य), सारंग (मोर, हिरन, बादल, साँप, भौंरा आदि), गो (गाय, इंद्रिय, किरण, वाणी, पृथ्वी), विधि (तरीका, ब्रह्मा, भाग्य, कानून), सिंधु (समुद्र, सिंधु नदी), नग (पर्वत, रत्न) और धूमकेतु (अग्नि, पुच्छल तारा)। अनेकार्थी शब्द का एक अर्थ अकेले याद करने के बजाय उसकी पूरी अर्थ-सूची एक साथ याद कीजिए।

पर्याय जैसे दिखने वाले, पर अलग अर्थ वाले शब्द

कुछ शब्द रोज की बोली में एक-दूसरे की जगह बोले जाते हैं, पर व्याकरण की पुस्तकें उनमें अंतर करती हैं। अस्त्र वह हथियार है जो फेंककर चलाया जाए (बाण), शस्त्र वह जो हाथ में पकड़कर चलाया जाए (तलवार)। आधि मानसिक कष्ट है, व्याधि शारीरिक रोग। प्रेम बराबर वालों से, स्नेह छोटों से, श्रद्धा बड़ों से और भक्ति ईश्वर के प्रति होती है। अपराध कानून के विरुद्ध काम है, पाप धर्म या नैतिकता के विरुद्ध। ईर्ष्या दूसरे की उन्नति देखकर होने वाली जलन है, द्वेष शत्रुता का भाव। ऐसे शब्द पूर्ण पर्याय नहीं माने जाते।

प्रश्न हल करने का क्रम

पहला उदाहरण लीजिए, ‘समुद्र’ का पर्यायवाची कौन-सा नहीं है: जलधि, रत्नाकर, जलद, पयोधि? हर शब्द तोड़िए: जलधि और पयोधि जल के भंडार हैं, रत्नाकर रत्नों की खान, ये तीनों समुद्र हैं, पर जलद (जल देने वाला) बादल है, इसलिए उत्तर जलद है। दूसरा, ‘सिंह’ का पर्यायवाची चुनिए: हरि, हय, हस्ती, हंस? हय घोड़ा है, हस्ती हाथी, हंस पक्षी, और हरि अनेकार्थी होने से सिंह भी है, इसलिए उत्तर हरि। तीसरा, ‘कमल’ के पर्यायों का सही समूह चुनिए: पंकज-जलज-नीरद, सरोज-राजीव-अरविंद, नीरज-अंबुज-अंबुद, जलज-पयोद-सरसिज? पहले, तीसरे और चौथे समूह में एक-एक बादल (नीरद, अंबुद, पयोद) छिपा है, इसलिए सही समूह सरोज-राजीव-अरविंद है।

मुख्य तथ्य

  • पर्यायवाची: कई शब्द, एक अर्थ (पंकज, जलज, सरोज = कमल); अनेकार्थी: एक शब्द, कई अर्थ (कर = हाथ, किरण, टैक्स, सूँड़)।
  • श्रुतिसम-भिन्नार्थक: अनल (आग) और अनिल (हवा), कुल (वंश) और कूल (किनारा), दिन और दीन (गरीब), सुत (पुत्र) और सूत (धागा, सारथी)।
  • अंतिम पद पहचानें: ज = जन्मा (जलज, तनुज), द = देने वाला (जलद), धि = भंडार (जलधि), धर = धारण करने वाला (भूधर, विषधर, गंगाधर), चर = चलने वाला (नभचर, निशाचर)।
  • तद्भव और आगत रूप भी सही पर्याय हैं: आग (अग्नि), सूरज (सूर्य), हाथी (हस्ती), आसमान, दरिया; उत्तर अर्थ से तय होता है, स्रोत से नहीं।
  • संबंध वाले नाम पर्याय नहीं: गिरिजा पार्वती (पर्वत नहीं), भूमिजा सीता (पृथ्वी नहीं), सिंधुसुता लक्ष्मी (समुद्र नहीं), चंद्रशेखर शिव (चंद्रमा नहीं)।
  • कनक: सोना, धतूरा (कुछ पुस्तकें गेहूँ, पलाश भी); अंबर: आकाश, वस्त्र (पीतांबर, दिगंबर); अर्थ: मतलब, धन, प्रयोजन, के लिए (परीक्षार्थ)।
  • हरि (अमरकोश में संज्ञा के 13 अर्थ): विष्णु, इंद्र, सिंह, घोड़ा, बंदर, साँप, मेंढक, तोता, सूर्य, चंद्रमा, पवन, किरण, यम; इसलिए सिंह के पर्यायों में हरि सही है।
  • और अनेकार्थी: घन (बादल, हथौड़ा, घना), पय (दूध, जल), द्विज (ब्राह्मण, पक्षी, दाँत), नाग (साँप, हाथी), पतंग (सूर्य, पक्षी), तात (पिता, पूज्य)।
  • पर्याय जैसे पर भिन्न: अस्त्र फेंककर, शस्त्र हाथ में; आधि मानसिक, व्याधि शारीरिक; प्रेम बराबर वालों से, स्नेह छोटों से, श्रद्धा बड़ों से, भक्ति ईश्वर से।
  • ‘समुद्र’ का पर्याय नहीं: जलधि, रत्नाकर, जलद, पयोधि में से जलद (बादल); ‘सिंह’ का पर्याय: हरि, हय, हस्ती, हंस में से हरि।

एक नज़र में दोहराव

पर्यायवाची = कई शब्द, एक अर्थ; अनेकार्थी = एक शब्द, कई अर्थ; श्रुतिसम = मिलते-जुलते रूप, भिन्न अर्थ; अंतिम पद पहचानें: ज जन्मा, द देने वाला, धि भंडार, धर धारण करने वाला, प पालक, पति और ईश स्वामी, चर चलने वाला; तद्भव और आगत रूप भी पर्याय हैं; गिरिजा, भूमिजा, सिंधुसुता, चंद्रशेखर संबंध वाले नाम हैं; कनक सोना और धतूरा, अंबर आकाश और वस्त्र, हरि विष्णु, सिंह, घोड़ा, बंदर आदि, अर्थ मतलब, धन, प्रयोजन; अस्त्र-शस्त्र, आधि-व्याधि पूर्ण पर्याय नहीं।

इस विषय का अभ्यास करें

सामान्य हिंदी के सभी 41 पाठ