41 में से पाठ 15 · मुहावरे और लोकोक्तियाँ

पशु-पक्षी, खान-पान, रंग, संख्या और प्रकृति से जुड़े मुहावरे

AI की सहायता से तैयार किया गया और 28 अक्टूबर 2026 को तथ्यों की जाँच की गई; किसी मानव संपादक ने इसे अभी पंक्ति-दर-पंक्ति नहीं पढ़ा है। कोई गलती दिखे तो हमें बताइए। संपादकीय मानक और सुधार

पशुओं से जुड़े मुहावरे

शरीर के अंगों के बाद पशु-पक्षियों से जुड़े मुहावरों का समूह बहुत बड़ा है, क्योंकि उनके स्वभाव लोकजीवन में सब जानते थे, जैसे बिल्ली का सहमना, बगुले का ध्यान लगाना, गीदड़ का डरपोकपन। भीगी बिल्ली बनना (डर से सहम जाना): पिताजी के आते ही शोर मचाने वाला राजू भीगी बिल्ली बन गया। गीदड़ भभकी (झूठी धमकी): उसकी गीदड़ भभकी से कोई नहीं डरता। कोल्हू का बैल (बिना रुके कठोर परिश्रम करने वाला): वह दिन-रात कोल्हू के बैल की तरह काम में जुटा रहता है। घोड़े बेचकर सोना (निश्चिंत होकर गहरी नींद सोना): परीक्षा समाप्त होते ही वह घोड़े बेचकर सो गया। साँप सूँघ जाना (डर से चुप या स्तब्ध हो जाना): प्रधानाचार्य को सामने देखकर सबको साँप सूँघ गया। घड़ियाली आँसू बहाना (दिखावटी दुख या झूठी सहानुभूति प्रकट करना): ज़मींदार किसानों की बदहाली पर घड़ियाली आँसू बहा रहा था। भैंस के आगे बीन बजाना (मूर्ख के आगे ज्ञान की बात करना व्यर्थ होना): उसे शास्त्रीय संगीत समझाना भैंस के आगे बीन बजाना है।

पक्षियों और कीड़ों से जुड़े मुहावरे

उल्लू बनाना (मूर्ख बनाना): दुकानदार ने नकली घड़ी बेचकर ग्राहक को उल्लू बना दिया। हाथों के तोते उड़ जाना (अचानक बहुत घबरा जाना): सूची में अपना नाम न देखकर उसके हाथों के तोते उड़ गए। बगुला भगत (ऊपर से साधु, भीतर से कपटी): वह बगुला भगत है, माला जपता है पर दूसरों का धन हड़पता है। सोने की चिड़िया (बहुत धनी और समृद्ध): प्राचीन काल में भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था। मक्खी पर मक्खी मारना (बिना समझे ज्यों-की-त्यों नकल करना): उसने मित्र की कॉपी से मक्खी पर मक्खी मार दी, गलतियाँ भी वैसी ही उतार लीं। किताबी कीड़ा (हर समय पढ़ने में लगा रहने वाला): रमेश किताबी कीड़ा है, खेलने कभी नहीं जाता।

खाने-पीने की चीज़ों से जुड़े मुहावरे

दाल में काला होना (संदेह की बात होना): अजनबी का रोज़ रात घर के चक्कर लगाना बताता है कि दाल में कुछ काला है। गुड़ गोबर करना (बना-बनाया काम बिगाड़ देना): अंतिम क्षण की एक भूल ने सारा गुड़ गोबर कर दिया। खिचड़ी पकाना (गुप्त रूप से योजना बनाना): दोनों भाई मिलकर कोई खिचड़ी पका रहे हैं। ख्याली पुलाव पकाना (मन-ही-मन असंभव कल्पनाएँ करना): काम कुछ करता नहीं, बस करोड़पति बनने के ख्याली पुलाव पकाता है। पापड़ बेलना (बहुत कष्ट उठाना, तरह-तरह के काम करना): इस नौकरी के लिए उसे बहुत पापड़ बेलने पड़े। चने के झाड़ पर चढ़ाना (झूठी प्रशंसा करके फुला देना): चापलूसों ने उसे चने के झाड़ पर चढ़ा दिया। घी के दीये जलाना (बहुत खुशी मनाना): राम के अयोध्या लौटने पर लोगों ने घी के दीये जलाए। दूध का दूध और पानी का पानी करना (ठीक-ठीक न्याय करना): पंचायत ने दोनों पक्षों को सुनकर दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया। नमक हराम (कृतघ्न): जिस मालिक ने पाला, उसी को लूटकर नौकर नमक हराम निकला।

रंगों से जुड़े मुहावरे

लाल-पीला होना (बहुत क्रोधित होना): नौकर की लापरवाही पर मालिक लाल-पीला हो गया। रंग उड़ना (डर या लज्जा से चेहरा फीका पड़ जाना): चोरी पकड़ी जाते ही उसके चेहरे का रंग उड़ गया। रंग जमाना (प्रभाव जमाना): युवा कवि ने पहली ही कविता से सम्मेलन में रंग जमा दिया। रंग में भंग पड़ना (आनंद में बाधा पड़ना): विवाह के बीच आँधी आने से रंग में भंग पड़ गया। सफ़ेद झूठ (सरासर झूठ): यह कहना सफ़ेद झूठ है कि मैं उस दिन वहाँ था। सब्ज़ बाग दिखाना (झूठी आशाएँ देना): ठग ने दुगुने लाभ के सब्ज़ बाग दिखाकर लोगों का धन हड़प लिया। रंगा सियार (ढोंगी, धोखेबाज़): समाजसेवा का नाटक करने वाला वह रंगा सियार निकला।

संख्याओं से जुड़े मुहावरे

इनमें गिनती का अर्थ नहीं लिया जाता, यही परीक्षा का सबसे बड़ा जाल है। तीन-तेरह होना (तितर-बितर हो जाना): पिता के मरते ही परिवार तीन-तेरह हो गया। तीन-पाँच करना (टालमटोल करना, इधर-उधर की बातें या व्यर्थ बहस करना): ज़्यादा तीन-पाँच मत करो, चुपचाप काम पूरा करो। छत्तीस का आँकड़ा होना (विरोध या शत्रुता होना): दोनों पड़ोसियों में छत्तीस का आँकड़ा है। उन्नीस-बीस का अंतर (बहुत थोड़ा अंतर): दोनों खिलाड़ियों में उन्नीस-बीस का ही अंतर है। छक्के छुड़ाना (बुरी तरह हराना): भारतीय सैनिकों ने शत्रु के छक्के छुड़ा दिए। चार चाँद लगाना (शोभा बढ़ाना): मुख्य अतिथि के आगमन ने समारोह में चार चाँद लगा दिए। छठी का दूध याद आना (बहुत कठिनाई का अनुभव होना): खड़ी चढ़ाई चढ़ते-चढ़ते छठी का दूध याद आ गया। आठ-आठ आँसू रोना (बहुत अधिक रोना या पछताना): बेटे के परदेस जाने पर माँ आठ-आठ आँसू रोई। निन्यानबे के फेर में पड़ना (धन जोड़ने की चिंता में पड़ना): निन्यानबे के फेर में पड़कर सेठ जी का चैन चला गया।

प्रकृति से जुड़े मुहावरे

आसमान सिर पर उठाना (बहुत शोर मचाना): छुट्टी की घंटी बजते ही बच्चों ने आसमान सिर पर उठा लिया। आकाश-पाताल एक करना (बहुत प्रयत्न करना): खोए बेटे को ढूँढ़ने के लिए पिता ने आकाश-पाताल एक कर दिया। ज़मीन-आसमान का अंतर (बहुत अधिक अंतर): दोनों भाइयों के स्वभाव में ज़मीन-आसमान का अंतर है। हवा से बातें करना (बहुत तेज़ दौड़ना): महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक हवा से बातें करता था। आग में घी डालना (क्रोध या झगड़े को और भड़काना): उसकी कड़वी बात ने आग में घी डालने का काम किया। पत्थर की लकीर (कभी न बदलने वाली बात): भीष्म की प्रतिज्ञा पत्थर की लकीर थी। मिट्टी में मिलाना (नष्ट कर देना): जुए की लत ने पुरखों की प्रतिष्ठा मिट्टी में मिला दी। घाट-घाट का पानी पीना (बहुत अनुभवी होना): वह घाट-घाट का पानी पिए हुए है, उसे कोई नहीं ठग सकता। सूरज को दीपक दिखाना (महान व्यक्ति के आगे तुच्छ प्रयास करना): तुलसीदास की प्रशंसा मैं करूँ, यह सूरज को दीपक दिखाना है। गूलर का फूल (दुर्लभ वस्तु): आजकल ऐसा निःस्वार्थ व्यक्ति गूलर का फूल हो गया है।

मिलते-जुलते मुहावरों का अंतर

उन्नीस-बीस का अंतर (बहुत थोड़ा) और ज़मीन-आसमान का अंतर (बहुत अधिक) उलटे हैं। तीन-तेरह होना (बिखर जाना), नौ-दो ग्यारह होना (भाग जाना) और तीन-पाँच करना (बहस या टालमटोल) को गिनती से न जोड़ें। उल्लू बनाना (दूसरे को मूर्ख बनाना) और अपना उल्लू सीधा करना (अपना स्वार्थ साधना) अलग हैं। गीदड़ भभकी में धमकाने वाला खोखला है, भीगी बिल्ली बनने में डरने वाला सहमा हुआ है। चार चाँद लगाना (शोभा बढ़ाना) और ईद का चाँद होना (बहुत दिनों बाद दिखाई देना) में चाँद एक है, अर्थ अलग। घी के दीये जलाना खुशी है, गुड़ गोबर करना काम बिगाड़ना। ख्याली पुलाव पकाना और हवाई किले बनाना, दोनों का अर्थ कोरी कल्पनाएँ करना है। ‘तीन-पाँच करना’ के अर्थ शब्दकोशों में एक से अधिक मिलते हैं (टालमटोल, इधर-उधर की बातें, झगड़ा, हेरा-फेरी), इसलिए वाक्य का प्रसंग देखकर अर्थ चुनिए।

मुख्य तथ्य

  • भीगी बिल्ली बनना = डर से सहम जाना; गीदड़ भभकी = झूठी धमकी; घोड़े बेचकर सोना = निश्चिंत होकर सोना; साँप सूँघ जाना = डर से स्तब्ध हो जाना।
  • हाथों के तोते उड़ जाना = अचानक बहुत घबरा जाना; बगुला भगत = ढोंगी; सोने की चिड़िया = बहुत समृद्ध; किताबी कीड़ा = हर समय पढ़ने वाला।
  • दाल में काला होना = संदेह की बात; दाल न गलना = युक्ति सफल न होना; गुड़ गोबर करना = बना काम बिगाड़ना; खिचड़ी पकाना = गुप्त योजना बनाना।
  • ‘पंचायत ने दोनों पक्षों को सुनकर ___ कर दिया।’ → दूध का दूध और पानी का पानी (ठीक-ठीक न्याय)।
  • लाल-पीला होना = बहुत क्रोधित होना; रंग उड़ना = डर से चेहरा फीका पड़ना; रंग जमाना = प्रभाव जमाना; सब्ज़ बाग दिखाना = झूठी आशा देना; सफ़ेद झूठ = सरासर झूठ।
  • छत्तीस का आँकड़ा होना = विरोध या शत्रुता होना; उन्नीस-बीस का अंतर = बहुत थोड़ा अंतर; तीन-तेरह होना = बिखर जाना; छक्के छुड़ाना = बुरी तरह हराना।
  • चार चाँद लगाना = शोभा बढ़ाना; छठी का दूध याद आना = बहुत कठिनाई होना; आठ-आठ आँसू रोना = बहुत रोना; निन्यानबे के फेर में पड़ना = धन जोड़ने की चिंता में पड़ना।
  • ‘महाराणा प्रताप का चेतक ___ करता था।’ → हवा से बातें (बहुत तेज़ दौड़ना); आसमान से बातें करना = बहुत ऊँचा होना।
  • आग में घी डालना = झगड़ा और भड़काना; पत्थर की लकीर = अटल बात; घाट-घाट का पानी पीना = बहुत अनुभवी होना; गूलर का फूल = दुर्लभ वस्तु।
  • उल्लू बनाना = दूसरे को मूर्ख बनाना, पर अपना उल्लू सीधा करना = अपना स्वार्थ साधना; दोनों में उल्लू है, अर्थ अलग।

एक नज़र में दोहराव

भीगी बिल्ली सहमना, गीदड़ भभकी झूठी धमकी, कोल्हू का बैल कठोर परिश्रमी, घड़ियाली आँसू दिखावटी दुख; हाथों के तोते उड़ना घबराना, बगुला भगत ढोंगी; दाल में काला संदेह, गुड़ गोबर काम बिगाड़ना, खिचड़ी पकाना गुप्त योजना, पापड़ बेलना कष्ट उठाना; लाल-पीला क्रोध, रंग उड़ना घबराना, सब्ज़ बाग झूठी आशा; छत्तीस का आँकड़ा विरोध, उन्नीस-बीस थोड़ा अंतर, तीन-तेरह बिखरना, चार चाँद शोभा, छठी का दूध कठिनाई; आकाश-पाताल एक करना प्रयत्न, ज़मीन-आसमान का अंतर बहुत अंतर, पत्थर की लकीर अटल, गूलर का फूल दुर्लभ।

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