12 में से पाठ 10 · सामान्य विज्ञान (भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान)
कोशिका, ऊतक और सजीवों का वर्गीकरण
AI की सहायता से तैयार किया गया और 28 अक्टूबर 2026 को तथ्यों की जाँच की गई; किसी मानव संपादक ने इसे अभी पंक्ति-दर-पंक्ति नहीं पढ़ा है। कोई गलती दिखे तो हमें बताइए। संपादकीय मानक और सुधार
खोज और कोशिका सिद्धांत
रॉबर्ट हुक (1665) ने अपने सूक्ष्मदर्शी से कॉर्क की पतली काट में डिब्बे जैसे कोष्ठ देखे और उन्हें कोशिका (सेल) नाम दिया। ऐंटनी वॉन ल्यूवेनहॉक (1674) ने अपने उन्नत सूक्ष्मदर्शी से पहली बार तालाब के जल में स्वतंत्र रूप से जीवित कोशिकाएँ देखीं, और कुछ वर्ष बाद जीवाणु भी देखे। रॉबर्ट ब्राउन ने 1831 में केंद्रक की खोज की, और पुरकिंजे ने 1839 में 'जीवद्रव्य' (प्रोटोप्लाज्म) शब्द दिया। मैथियास श्लाइडेन (1838) और थियोडोर श्वान (1839) ने कोशिका सिद्धांत दिया कि सभी पौधे और जंतु कोशिकाओं से बने हैं और कोशिका जीवन की मूल इकाई है; रुडोल्फ विरशॉ (1855) ने जोड़ा कि सभी कोशिकाएँ पूर्ववर्ती कोशिकाओं से ही बनती हैं। शुतुरमुर्ग का अंडा सबसे बड़ी एकल कोशिका है, तंत्रिका कोशिका मानव शरीर की सबसे लंबी कोशिका, और माइकोप्लाज्मा (PPLO) सबसे छोटी ज्ञात कोशिका।
प्रोकैरियोट, यूकैरियोट और कोशिका झिल्ली
प्रोकैरियोटी कोशिकाओं (जीवाणु और नील-हरित शैवाल) में केंद्रक झिल्ली नहीं होती, उनका DNA केंद्रकाभ (न्यूक्लिऑइड) नामक क्षेत्र में रहता है, और झिल्ली से घिरे कोशिकांग भी नहीं होते। यूकैरियोटी कोशिकाओं (प्रोटिस्ट, कवक, पौधे और जंतु) में वास्तविक केंद्रक और झिल्ली से घिरे कोशिकांग होते हैं। लिपिड और प्रोटीन से बनी प्लैज्मा झिल्ली चयनात्मक पारगम्य होती है। जल इसके पार परासरण (osmosis) द्वारा तनु विलयन से सांद्र विलयन की ओर जाता है, इसीलिए किशमिश पानी में फूल जाती है और नमक तथा चीनी अचार और जैम को सुरक्षित रखते हैं; सांद्र लवण विलयन में रखी पादप कोशिका जल खो देती है और उसकी सामग्री भित्ति से सिकुड़कर अलग हो जाती है (जीवद्रव्यकुंचन, plasmolysis)।
कोशिकांग
केंद्रक नियंत्रण केंद्र है और इसमें DNA तथा प्रोटीन से बने गुणसूत्र होते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका के ऊर्जा घर हैं, जहाँ वायवीय श्वसन से ऊर्जा ATP के रूप में मुक्त होती है; हरितलवक की तरह इनका भी अपना DNA और राइबोसोम होता है। लवक (plastids) केवल पादप कोशिकाओं में होते हैं: हरितलवक (chloroplast) में प्रकाश संश्लेषण के लिए क्लोरोफिल होता है, वर्णीलवक फूलों और फलों को रंग देते हैं, और अवर्णीलवक मंड, तेल और प्रोटीन संचित करते हैं। राइबोसोम, जिन पर कोई झिल्ली नहीं होती, प्रोटीन बनाते हैं; खुरदरी अंतर्द्रव्यी जालिका पर राइबोसोम लगे होते हैं, जबकि चिकनी अंतर्द्रव्यी जालिका लिपिड बनाती है और यकृत कोशिकाओं में दवाओं तथा विषों को निर्विषीकृत करती है। कैमिलो गॉल्जी के नाम पर रखा गया गॉल्जी उपकरण पदार्थों को पैक करके भेजता है और लयनकाय (लाइसोसोम) बनाता है, जिन्हें आत्मघाती थैलियाँ कहते हैं क्योंकि उनके एंजाइम स्वयं कोशिका को पचा सकते हैं। रसधानियाँ रस और अपशिष्ट संचित करती हैं, और तारककेंद्र जंतु कोशिकाओं के विभाजन में सहायक होते हैं।
पादप और जंतु कोशिका
पादप कोशिका में सेलुलोज की दृढ़ कोशिका भित्ति, लवक और एक बड़ी केंद्रीय रसधानी होती है जो उसे स्फीत रखती है, और प्रायः तारककेंद्र नहीं होता; जंतु कोशिका में कोशिका भित्ति और लवक नहीं होते, रसधानियाँ छोटी होती हैं और तारककेंद्र होता है। पौधे भोजन मंड (स्टार्च) के रूप में और जंतु ग्लाइकोजन के रूप में संचित करते हैं। कवकों की कोशिका भित्ति काइटिन की बनी होती है। स्तनधारियों की परिपक्व लाल रक्त कोशिकाओं में केंद्रक नहीं होता।
कोशिका विभाजन
समसूत्री विभाजन (mitosis) शरीर की कोशिकाओं में वृद्धि और मरम्मत के लिए होता है: एक विभाजन से जनक कोशिका जितनी गुणसूत्र संख्या वाली दो संतति कोशिकाएँ बनती हैं, जो पूर्वावस्था, मध्यावस्था, पश्चावस्था और अंत्यावस्था से होकर गुजरती हैं। अर्धसूत्री विभाजन (meiosis) जनन अंगों में युग्मक बनाने के लिए होता है: दो क्रमिक विभाजनों से चार कोशिकाएँ बनती हैं, प्रत्येक में आधी गुणसूत्र संख्या होती है, और इस दौरान होने वाला जीन विनिमय (क्रॉसिंग ओवर) विविधता लाता है। मानव शरीर की कोशिकाओं में 46 गुणसूत्र (23 जोड़े) और युग्मकों में 23 होते हैं, इसलिए निषेचन से संख्या फिर 46 हो जाती है। अनियंत्रित कोशिका विभाजन से कैंसर होता है।
ऊतक
एक ही कार्य करने वाली समान कोशिकाओं का समूह ऊतक है। पौधों में विभज्योतक (meristem) विभाजित होते हैं: जड़ और तने के शीर्ष पर शीर्षस्थ विभज्योतक लंबाई बढ़ाता है, पार्श्व विभज्योतक (एधा या कैंबियम) मोटाई बढ़ाता है, और पत्तियों के आधार पर अंतर्वेशी विभज्योतक घास को चरे जाने के बाद फिर से बढ़ने देता है। स्थायी पादप ऊतकों में पैरेन्काइमा (भोजन संचय), कोलेन्काइमा (लचीलापन), स्क्लेरेन्काइमा (कठोर, मृत कोशिकाएँ, जैसे नारियल के छिलके और जूट में), जाइलम (जल और खनिज ले जाता है) और फ्लोएम (भोजन ले जाता है) आते हैं। जंतु ऊतक हैं: उपकला (आवरण और अस्तर), संयोजी (अस्थि, उपास्थि, वसा, रक्त जो एक तरल संयोजी ऊतक है, पेशी को अस्थि से जोड़ने वाले कंडरा और अस्थि को अस्थि से जोड़ने वाले स्नायु), पेशीय (रेखित ऐच्छिक, अरेखित अनैच्छिक, और हृद पेशी जो रेखित होते हुए भी अनैच्छिक है) तथा तंत्रिका ऊतक।
पाँच जगत
आर. एच. व्हिटेकर (1969) ने पौधों और जंतुओं वाली पुरानी द्वि-जगत प्रणाली के स्थान पर कोशिका के प्रकार, शरीर संगठन और पोषण की विधि के आधार पर पाँच जगत प्रस्तावित किए। मोनेरा प्रोकैरियोट हैं (जीवाणु, सायनोबैक्टीरिया, माइकोप्लाज्मा); प्रोटिस्टा एककोशिकीय यूकैरियोट हैं (अमीबा, पैरामीशियम, यूग्लीना, प्लाज्मोडियम); कवक विषमपोषी हैं, अधिकतर मृतजीवी, जिनकी भित्ति काइटिन की होती है (यीस्ट, मशरूम, पेनिसिलियम, ब्रेड का फफूँद); प्लांटी बहुकोशिकीय स्वपोषी हैं, शैवाल (स्पाइरोगायरा) और ब्रायोफाइटा (मॉस, जिन्हें पादप जगत के उभयचर कहते हैं) से लेकर टेरिडोफाइटा (फर्न), नग्न बीज वाले जिम्नोस्पर्म (चीड़, साइकस, देवदार) और फलों के भीतर बीज वाले एंजियोस्पर्म तक; ऐनिमेलिया बिना कोशिका भित्ति वाले बहुकोशिकीय विषमपोषी हैं, स्पंज से लेकर स्तनधारियों तक। लाइकेन, यानी शैवाल और कवक की साझेदारी, सल्फर डाइऑक्साइड से होने वाले वायु प्रदूषण के संवेदनशील सूचक हैं।
नामकरण, विषाणु और जीवाणु
वर्गिकी (taxonomy) के जनक कैरोलस लिनियस ने द्विनाम पद्धति (binomial nomenclature) को लोकप्रिय बनाया: बड़े अक्षर से शुरू होने वाला वंश नाम और उसके बाद छोटे अक्षरों में जाति नाम, तिरछे अक्षरों (इटैलिक) में छपा हुआ, जैसे Homo sapiens (मानव), Panthera tigris (बाघ), Panthera leo (शेर), Mangifera indica (आम) और Pavo cristatus (मोर)। वर्गीकरण के पद हैं: जगत, संघ, वर्ग, गण, कुल, वंश और जाति। विषाणु पाँचों जगतों में से किसी में नहीं आते: वे प्रोटीन आवरण में बंद DNA या RNA हैं, उनके क्रिस्टल बनाए जा सकते हैं, और वे केवल जीवित कोशिकाओं के भीतर ही प्रजनन करते हैं; दिमित्री इवानोव्स्की (1892) ने पहली बार एक विषाणु, तंबाकू मोज़ेक वायरस, का पता लगाया, और प्रतिजैविक (एंटीबायोटिक) विषाणुओं पर काम नहीं करते। जीवाणु गोलाकार (कोकस), दंडाकार (बैसिलस), सर्पिल (स्पाइरिलम) या कॉमा के आकार के (विब्रियो) होते हैं; लैक्टोबैसिलस दूध को दही में जमाता है और राइज़ोबियम दलहनी पौधों की जड़ ग्रंथिकाओं में नाइट्रोजन स्थिर करता है।
मुख्य तथ्य
- हुक ने कोशिका नाम दिया (1665, कॉर्क); ल्यूवेनहॉक ने जीवित कोशिकाएँ देखीं (1674); ब्राउन ने केंद्रक खोजा (1831); श्लाइडेन (1838) और श्वान (1839) ने कोशिका सिद्धांत दिया; विरशॉ (1855): सभी कोशिकाएँ कोशिकाओं से बनती हैं।
- प्रोकैरियोट (जीवाणु, नील-हरित शैवाल) में केंद्रक झिल्ली नहीं होती; यूकैरियोट में वास्तविक केंद्रक और झिल्लीयुक्त कोशिकांग होते हैं।
- माइटोकॉन्ड्रिया: ऊर्जा घर (ATP, अपना DNA); राइबोसोम: प्रोटीन संश्लेषण; लयनकाय: आत्मघाती थैली; गॉल्जी: पैकेजिंग; हरितलवक: प्रकाश संश्लेषण; चिकनी अंतर्द्रव्यी जालिका: निर्विषीकरण।
- पादप कोशिका: सेलुलोज भित्ति, लवक, बड़ी रसधानी, तारककेंद्र नहीं; जंतु कोशिका: भित्ति नहीं, छोटी रसधानियाँ, तारककेंद्र; कवक की भित्ति: काइटिन।
- समसूत्री विभाजन: शरीर की कोशिकाएँ, 2 समान कोशिकाएँ, वृद्धि और मरम्मत; अर्धसूत्री विभाजन: युग्मक, आधे गुणसूत्रों वाली 4 कोशिकाएँ (मनुष्य में 46 से 23)।
- कंडरा (tendon) पेशी को अस्थि से, स्नायु (ligament) अस्थि को अस्थि से जोड़ता है; रक्त तरल संयोजी ऊतक है; हृद पेशी रेखित पर अनैच्छिक है।
- व्हिटेकर (1969): मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक, प्लांटी, ऐनिमेलिया; ब्रायोफाइटा पादप जगत के उभयचर हैं; जिम्नोस्पर्म में नग्न बीज होते हैं।
- द्विनाम: Homo sapiens (मानव), Panthera tigris (बाघ), Panthera leo (शेर), Mangifera indica (आम), Pavo cristatus (मोर), Oryza sativa (धान)।
- विषाणु: प्रोटीन आवरण में न्यूक्लिक अम्ल, केवल जीवित कोशिकाओं में गुणन, पाँचों में से किसी जगत में नहीं; तंबाकू मोज़ेक वायरस इवानोव्स्की ने खोजा (1892); प्रतिजैविक विषाणुओं पर असर नहीं करते।
- जीवाणुओं के आकार: कोकस, बैसिलस, स्पाइरिलम, विब्रियो; लैक्टोबैसिलस दही जमाता है; राइज़ोबियम दलहनी पौधों की जड़ ग्रंथिकाओं में नाइट्रोजन स्थिर करता है।
एक नज़र में दोहराव
हुक 1665 ने कोशिका नाम दिया; ल्यूवेनहॉक 1674; ब्राउन ने केंद्रक 1831 में खोजा; श्लाइडेन और श्वान का कोशिका सिद्धांत; विरशॉ 1855; प्रोकैरियोट में केंद्रक झिल्ली नहीं; माइटोकॉन्ड्रिया ऊर्जा घर; लयनकाय आत्मघाती थैली; राइबोसोम प्रोटीन बनाता है; पादप भित्ति सेलुलोज, कवक भित्ति काइटिन; समसूत्री से 2 समान कोशिकाएँ, अर्धसूत्री से आधे गुणसूत्रों वाली 4 कोशिकाएँ; 46 गुणसूत्र; कंडरा पेशी-अस्थि, स्नायु अस्थि-अस्थि; व्हिटेकर 1969 पाँच जगत; ब्रायोफाइटा पादपों के उभयचर; Homo sapiens; TMV इवानोव्स्की 1892।