12 में से पाठ 8 · सामान्य विज्ञान (भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान)
रासायनिक अभिक्रियाएँ, अम्ल, क्षारक और लवण
AI की सहायता से तैयार किया गया और 28 अक्टूबर 2026 को तथ्यों की जाँच की गई; किसी मानव संपादक ने इसे अभी पंक्ति-दर-पंक्ति नहीं पढ़ा है। कोई गलती दिखे तो हमें बताइए। संपादकीय मानक और सुधार
भौतिक और रासायनिक परिवर्तन
भौतिक परिवर्तन केवल रूप या अवस्था बदलता है और कोई नया पदार्थ नहीं बनाता (बर्फ का पिघलना, चीनी का घुलना); रासायनिक परिवर्तन नए पदार्थ बनाता है (जलना, जंग लगना, दूध का फटना, पाचन, खाना पकाना)। रंग या अवस्था में परिवर्तन, गैस का निकलना, ताप में परिवर्तन या अवक्षेप का बनना इसके लक्षण हैं। रासायनिक समीकरण को संतुलित किया जाता है क्योंकि द्रव्यमान न तो उत्पन्न होता है और न नष्ट (लेवोज़िए का द्रव्यमान संरक्षण का नियम): 2H2 + O2 से 2H2O बनता है।
अभिक्रियाओं के प्रकार
संयोजन (combination) में दो या अधिक पदार्थ मिलकर एक पदार्थ बनाते हैं, जैसे बिना बुझा चूना जल से तीव्र अभिक्रिया करके बुझा चूना बनाता है (CaO + H2O से Ca(OH)2), जो सफेदी में प्रयुक्त होता है। वियोजन (decomposition) में एक पदार्थ टूटता है: ऊष्मा से (चूना पत्थर, CaCO3, से CaO और CO2), विद्युत से (जल के विद्युत अपघटन से आयतन के अनुसार 2:1 अनुपात में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन) या प्रकाश से (सिल्वर क्लोराइड धूप में धूसर हो जाता है, जो श्वेत-श्याम फोटोग्राफी का आधार है)। विस्थापन (displacement) में अधिक क्रियाशील धातु कम क्रियाशील धातु को उसके लवण विलयन से बाहर कर देती है: लोहे की कील कॉपर सल्फेट के नीले विलयन को हरा कर देती है और उस पर ताँबे की भूरी परत चढ़ जाती है। द्विविस्थापन (double displacement) में आयनों का आदान-प्रदान होता है और प्रायः अवक्षेप बनता है, जैसे बेरियम क्लोराइड और सोडियम सल्फेट से बेरियम सल्फेट का श्वेत अवक्षेप; उदासीनीकरण भी इसी प्रकार की अभिक्रिया है। ऊष्मा मुक्त करने वाली अभिक्रियाएँ ऊष्माक्षेपी (exothermic) हैं (दहन, श्वसन); ऊष्मा अवशोषित करने वाली ऊष्माशोषी (endothermic) हैं (अधिकांश वियोजन, प्रकाश संश्लेषण)।
ऑक्सीकरण, अपचयन, संक्षारण और विकृतगंधिता
ऑक्सीजन का जुड़ना या हाइड्रोजन का निकलना (इलेक्ट्रॉनों का त्याग) ऑक्सीकरण (oxidation) है; ऑक्सीजन का निकलना या हाइड्रोजन का जुड़ना (इलेक्ट्रॉनों की प्राप्ति) अपचयन (reduction) है। ये दोनों रेडॉक्स (उपचयन-अपचयन) अभिक्रियाओं में साथ-साथ होते हैं: CuO + H2 से Cu + H2O बनने में कॉपर ऑक्साइड अपचयित और हाइड्रोजन ऑक्सीकृत होता है। संक्षारण (corrosion) धातुओं को धीरे-धीरे खा जाता है: लोहे पर लाल-भूरा जलयोजित आयरन(III) ऑक्साइड, यानी जंग, लगता है, जिसके लिए वायु और नमी दोनों आवश्यक हैं; चाँदी काली पड़ जाती है (सिल्वर सल्फाइड) और ताँबे पर हरी परत चढ़ती है (क्षारकीय कॉपर कार्बोनेट)। पेंट करना, तेल लगाना, जस्ते से यशदलेपन (galvanisation), क्रोम लेपन और मिश्रधातु बनाना जंग से बचाते हैं। भोजन में वसा और तेलों का ऑक्सीकरण विकृतगंधिता (rancidity) है, जो उसकी गंध और स्वाद बिगाड़ देता है; प्रतिऑक्सीकारक, वायुरोधी पात्र, प्रशीतन और चिप्स के पैकेटों में नाइट्रोजन भरना इसे धीमा करते हैं।
अम्ल और क्षारक
अम्ल स्वाद में खट्टे होते हैं, नीले लिटमस को लाल करते हैं और जल में H+ आयन देते हैं; क्षारक (base) स्वाद में कड़वे और छूने में साबुन जैसे होते हैं, लाल लिटमस को नीला करते हैं और जल में OH- आयन देते हैं। जल में घुलनशील क्षारक क्षार (alkali) कहलाते हैं (सोडियम, पोटैशियम और कैल्शियम के हाइड्रॉक्साइड), इसलिए हर क्षार क्षारक है पर हर क्षारक क्षार नहीं। प्राकृतिक अम्ल: सिरका (ऐसीटिक), नींबू और संतरा (सिट्रिक), इमली (टार्टरिक), टमाटर (ऑक्जैलिक), दही (लैक्टिक), चींटी और बिच्छू-बूटी (नेटल) का डंक (मेथेनॉइक या फॉर्मिक) और हमारा आमाशय (हाइड्रोक्लोरिक)। अम्लराज (ऐक्वा रेजिया), यानी 3 भाग सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और 1 भाग सांद्र नाइट्रिक अम्ल, सोना और प्लैटिनम घोल देता है। अम्ल धातुओं से हाइड्रोजन देते हैं, जो 'पॉप' ध्वनि के साथ जलती है, और कार्बोनेटों से कार्बन डाइऑक्साइड देते हैं, जो चूने के पानी को दूधिया कर देती है। अम्ल को सदैव धीरे-धीरे जल में मिलाया जाता है, जल को अम्ल में कभी नहीं, क्योंकि मिलाने पर बहुत अधिक ऊष्मा निकलती है।
सूचक
लाइकेन से प्राप्त लिटमस अम्ल में लाल और क्षारक में नीला होता है। हल्दी क्षारक में लाल-भूरी हो जाती है, इसलिए हल्दी का दाग साबुन से धोने पर लाल हो जाता है; लाल पत्तागोभी और कुछ फूलों की पंखुड़ियाँ भी प्राकृतिक सूचक हैं। फिनॉल्फ्थेलीन अम्ल में रंगहीन और क्षारक में गुलाबी होता है, तथा मेथिल ऑरेंज अम्ल में लाल और क्षारक में पीला। गंधीय सूचकों (olfactory indicators) की गंध बदल जाती है: क्षारकीय विलयन में प्याज, वनीला और लौंग के तेल की गंध पता नहीं चलती। सार्वत्रिक सूचक कई रंग दिखाकर pH बताता है।
pH स्केल
एस. पी. एल. सोरेनसन द्वारा 1909 में प्रस्तुत pH स्केल 0 से 14 के पैमाने पर हाइड्रोजन आयन की सांद्रता मापता है: 7 उदासीन है, 7 से कम अम्लीय और 7 से अधिक क्षारकीय, और हर एक इकाई का अंतर दस गुना परिवर्तन दर्शाता है। लगभग मान: जठर रस 1.2, नींबू का रस 2.2, शुद्ध जल 7, रक्त 7.4, मिल्क ऑफ मैग्नीशिया 10 और सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन 14। NCERT के अनुसार हमारा शरीर 7.0 से 7.8 pH के बीच कार्य करता है; रक्त का pH लगभग 7.4 पर बना रहता है। मुँह का pH 5.5 से कम होने पर दाँतों का क्षय शुरू होता है, इसीलिए टूथपेस्ट क्षारकीय होते हैं, और 5.6 से कम pH वाली वर्षा अम्ल वर्षा कहलाती है। मिल्क ऑफ मैग्नीशिया और खाने का सोडा जैसे प्रतिअम्ल (एंटासिड) अम्लता से राहत देते हैं, खाने का सोडा मधुमक्खी के अम्लीय डंक की जलन शांत करता है, और चूना अम्लीय मिट्टी को सुधारता है।
प्रमुख लवण
अम्ल द्वारा क्षारक के उदासीनीकरण से लवण बनता है। लवण-जल (साधारण नमक के विलयन) का विद्युत अपघटन, यानी क्लोर-क्षार प्रक्रिया, सोडियम हाइड्रॉक्साइड, क्लोरीन और हाइड्रोजन देता है। खाने का सोडा (NaHCO3) गर्म करने पर कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ता है और केक को मुलायम तथा स्पंजी बनाता है; बेकिंग पाउडर खाने के सोडे और टार्टरिक अम्ल जैसे हल्के खाद्य अम्ल का मिश्रण है; खाने का सोडा प्रतिअम्ल भी है और सोडा-अम्ल अग्निशामक में प्रयुक्त होता है। धोने का सोडा (Na2CO3.10H2O) जल की स्थायी कठोरता दूर करता है और काँच, साबुन तथा कागज बनाने में प्रयुक्त होता है। विरंजक चूर्ण (CaOCl2), जो शुष्क बुझे चूने पर क्लोरीन प्रवाहित करके बनता है, सूती कपड़े और लकड़ी की लुगदी को विरंजित करता है और पेयजल को रोगाणुमुक्त करता है। प्लास्टर ऑफ पेरिस (CaSO4.1/2H2O), जो जिप्सम (CaSO4.2H2O) को 373 K पर गर्म करके बनता है, जल मिलाने पर कठोर हो जाता है और टूटी हड्डियों पर प्लास्टर चढ़ाने, मूर्तियाँ बनाने और चिकनी छतों में प्रयुक्त होता है। नीले कॉपर सल्फेट क्रिस्टल (CuSO4.5H2O) गर्म करने पर क्रिस्टलन का जल खोकर सफेद हो जाते हैं।
मुख्य तथ्य
- संयोजन: CaO + H2O से Ca(OH)2 (सफेदी, ऊष्माक्षेपी); तापीय वियोजन: CaCO3 से CaO + CO2; जल का विद्युत अपघटन आयतन के अनुसार 2:1 अनुपात में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन देता है।
- सिल्वर क्लोराइड धूप में धूसर हो जाता है (प्रकाश द्वारा वियोजन, श्वेत-श्याम फोटोग्राफी); लोहे की कील कॉपर सल्फेट विलयन को नीले से हरा कर देती है (विस्थापन)।
- ऑक्सीकरण: ऑक्सीजन का जुड़ना, हाइड्रोजन का निकलना या इलेक्ट्रॉनों का त्याग; अपचयन: इसका उलटा; CuO + H2 से Cu + H2O एक रेडॉक्स अभिक्रिया है।
- जंग जलयोजित आयरन(III) ऑक्साइड है; चाँदी काली पड़ती है (सिल्वर सल्फाइड); ताँबा हरा पड़ता है (क्षारकीय कॉपर कार्बोनेट); विकृतगंधिता रोकने के लिए चिप्स के पैकेटों में नाइट्रोजन भरी जाती है।
- प्राकृतिक अम्ल: सिरका - ऐसीटिक; नींबू, संतरा - सिट्रिक; इमली - टार्टरिक; टमाटर - ऑक्जैलिक; दही - लैक्टिक; चींटी और बिच्छू-बूटी का डंक - मेथेनॉइक (फॉर्मिक); आमाशय - हाइड्रोक्लोरिक।
- लिटमस (लाइकेन से): अम्ल में लाल, क्षारक में नीला; फिनॉल्फ्थेलीन: अम्ल में रंगहीन, क्षारक में गुलाबी; मेथिल ऑरेंज: अम्ल में लाल, क्षारक में पीला; हल्दी: क्षारक में लाल-भूरी।
- pH: जठर रस लगभग 1.2, नींबू का रस लगभग 2.2, शुद्ध जल 7, रक्त लगभग 7.4, मिल्क ऑफ मैग्नीशिया लगभग 10; 5.5 से नीचे दाँतों का क्षय; 5.6 से नीचे अम्ल वर्षा।
- अम्लराज = 3 भाग सांद्र HCl + 1 भाग सांद्र HNO3; यह सोना और प्लैटिनम घोल देता है।
- खाने का सोडा NaHCO3 (केक, प्रतिअम्ल, अग्निशामक); धोने का सोडा Na2CO3.10H2O (कठोर जल, काँच); विरंजक चूर्ण CaOCl2 (पेयजल रोगाणुमुक्त करना); प्लास्टर ऑफ पेरिस CaSO4.1/2H2O (अस्थिभंग, मूर्तियाँ)।
एक नज़र में दोहराव
संयोजन, वियोजन, विस्थापन, द्विविस्थापन; जल का विद्युत अपघटन H2 और O2 को 2:1 में देता है; श्वसन ऊष्माक्षेपी, प्रकाश संश्लेषण ऊष्माशोषी; ऑक्सीकरण = ऑक्सीजन का जुड़ना या इलेक्ट्रॉनों का त्याग; जंग जलयोजित आयरन ऑक्साइड; चिप्स के पैकेट में नाइट्रोजन विकृतगंधिता रोकती है; क्षार घुलनशील क्षारक हैं; टमाटर ऑक्जैलिक, दही लैक्टिक, चींटी का डंक फॉर्मिक; फिनॉल्फ्थेलीन क्षारक में गुलाबी; pH 7 उदासीन, रक्त 7.4, अम्ल वर्षा 5.6 से नीचे; अम्लराज 3 HCl : 1 HNO3; खाने का सोडा NaHCO3; विरंजक चूर्ण CaOCl2; जिप्सम को 373 K पर गर्म करने से प्लास्टर ऑफ पेरिस।