12 में से पाठ 7 · सामान्य विज्ञान (भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान)

द्रव्य, परमाणु संरचना और आवर्त सारणी

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द्रव्य की अवस्थाएँ

द्रव्य वह है जिसमें द्रव्यमान हो और जो स्थान घेरे; यह अत्यंत छोटे कणों से बना है जिनके बीच रिक्त स्थान होता है, जो लगातार गति करते हैं और एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। ठोस का आकार और आयतन दोनों निश्चित होते हैं, द्रव का केवल आयतन, और गैस का दोनों में से कोई नहीं, इसलिए गैसें अत्यधिक संपीड्य होती हैं। प्लाज्मा, यानी सूर्य, तारों, फ्लोरोसेंट ट्यूबों और नियॉन साइन में पाई जाने वाली आयनित गैस, चौथी अवस्था है; बोस-आइंस्टीन संघनित, जो सत्येंद्र नाथ बोस और अल्बर्ट आइंस्टीन के कार्य पर आधारित है और 1995 में पहली बार प्रयोगशाला में बनाया गया, पाँचवीं अवस्था है, जो परम शून्य के निकट बनती है। ऊर्ध्वपातन में कपूर, नैफ्थलीन, आयोडीन, अमोनियम क्लोराइड या शुष्क बर्फ जैसा ठोस सीधे वाष्प में बदल जाता है।

तत्व, यौगिक और मिश्रण

तत्व एक ही प्रकार के परमाणुओं से बना होता है और रासायनिक विधियों से सरल पदार्थों में नहीं तोड़ा जा सकता; तत्व धातु, अधातु या बोरॉन, सिलिकॉन और जर्मेनियम जैसे उपधातु (metalloids) होते हैं। जब तत्व द्रव्यमान के निश्चित अनुपात में रासायनिक रूप से जुड़ते हैं तो यौगिक बनता है, और उसके गुण अपने तत्वों से भिन्न होते हैं: हाइड्रोजन जलती है और ऑक्सीजन जलने में सहायक है, पर जल आग बुझाता है। मिश्रण के घटक किसी भी अनुपात में होते हैं, अपने गुण बनाए रखते हैं और भौतिक विधियों से अलग किए जा सकते हैं। नमक का पानी, वायु और मिश्रधातुएँ जैसे विलयन समांगी मिश्रण हैं; पानी में रेत विषमांगी मिश्रण है। दूध, कोहरा और धुआँ जैसे कोलॉइड एकसमान दिखते हैं, पर प्रकाश-पुंज को प्रकीर्णित करते हैं (टिंडल प्रभाव)।

पृथक्करण की विधियाँ

समुद्री जल से नमक वाष्पन द्वारा, दूध से क्रीम अपकेंद्रण (centrifugation) द्वारा, स्याही के रंग वर्णलेखन (क्रोमैटोग्राफी) द्वारा, जल से तेल पृथक्कारी कीप द्वारा, नमक से कपूर या अमोनियम क्लोराइड ऊर्ध्वपातन द्वारा, और शुद्ध कॉपर सल्फेट क्रिस्टलीकरण द्वारा प्राप्त किया जाता है। आसवन उन मिश्रणीय द्रवों को अलग करता है जिनके क्वथनांकों में बड़ा अंतर हो; जब क्वथनांकों का अंतर 25 K से कम हो तो प्रभाजी आसवन (fractional distillation) प्रयुक्त होता है, जैसे पेट्रोलियम के शोधन में और द्रव वायु से नाइट्रोजन, ऑक्सीजन तथा आर्गन प्राप्त करने में। फिटकरी पानी की मिट्टी को नीचे बैठा देती है।

परमाणु के भीतर

जॉन डाल्टन (1808) ने बताया कि द्रव्य अविभाज्य परमाणुओं से बना है। जे. जे. थॉमसन ने 1897 में कैथोड किरणों से इलेक्ट्रॉन की खोज की और प्लम पुडिंग मॉडल प्रस्तुत किया। ई. गोल्डस्टीन की कैनाल किरणों (1886) ने धनावेशित कणों का पहला संकेत दिया, और अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने प्रोटॉन की पहचान की तथा उसे यह नाम दिया। पतली स्वर्ण पन्नी से अल्फा कणों के प्रकीर्णन ने रदरफोर्ड को 1911 में नाभिकीय मॉडल तक पहुँचाया: परमाणु अधिकांशतः रिक्त है और उसमें एक अत्यंत छोटा, सघन, धनावेशित नाभिक है। नील्स बोर (1913) ने इलेक्ट्रॉनों को निश्चित कोशों (K, L, M, N) में रखा, और जेम्स चैडविक ने 1932 में न्यूट्रॉन खोजा, जिस पर कोई आवेश नहीं होता और जिसका द्रव्यमान लगभग प्रोटॉन के बराबर होता है। किसी कोश में अधिकतम 2n^2 इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं (K में 2, L में 8, M में 18), और सबसे बाहरी कोश में अधिकतम 8।

परमाणु संख्या, द्रव्यमान संख्या, समस्थानिक और समभारिक

परमाणु संख्या (Z) प्रोटॉनों की संख्या है, जो उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है और तत्व की पहचान तय करती है; द्रव्यमान संख्या (A) प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों का योग है। सोडियम में Z = 11 और A = 23 है, इसलिए उसमें 12 न्यूट्रॉन हैं और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 1 है। समस्थानिकों (isotopes) की परमाणु संख्या समान पर द्रव्यमान संख्या भिन्न होती है और रासायनिक गुण समान होते हैं: हाइड्रोजन के समस्थानिक हैं प्रोटियम (कोई न्यूट्रॉन नहीं), ड्यूटीरियम (एक न्यूट्रॉन; भारी जल, D2O, नाभिकीय रिएक्टरों में न्यूट्रॉनों को धीमा करता है) और रेडियोधर्मी ट्रिटियम (दो न्यूट्रॉन)। कार्बन-14 जीवाश्मों की आयु बताता है, कोबाल्ट-60 से कैंसर का उपचार होता है, आयोडीन-131 से थायरॉइड के रोगों, जैसे अतिसक्रिय थायरॉइड और थायरॉइड कैंसर, का उपचार होता है (NCERT इसे घेंघा यानी गॉइटर का उपचार कहती है) और यूरेनियम-235 नाभिकीय रिएक्टरों का ईंधन है। समभारिकों (isobars) की द्रव्यमान संख्या समान पर परमाणु संख्या भिन्न होती है, जैसे कैल्शियम-40 और आर्गन-40।

संयोजकता

किसी तत्व की संयोजन क्षमता संयोजकता (valency) है, यानी अपना बाहरी अष्टक (हाइड्रोजन और हीलियम के लिए द्विक) पूरा करने के लिए परमाणु जितने इलेक्ट्रॉन खोता, ग्रहण करता या साझा करता है। सोडियम और क्लोरीन की संयोजकता 1, मैग्नीशियम और ऑक्सीजन की 2, ऐलुमिनियम और नाइट्रोजन की 3, कार्बन की 4 और उत्कृष्ट गैसों की 0 है। संयोजकताओं को आपस में बदलकर (क्रॉस करके) Al2O3 और CaCl2 जैसे सूत्र प्राप्त होते हैं।

आवर्त सारणी की ओर

डॉबेराइनर (1817) ने समान गुणों वाले तत्वों को त्रिकों में रखा, जैसे लीथियम, सोडियम और पोटैशियम, जिनमें बीच वाले तत्व का परमाणु द्रव्यमान बाकी दोनों के औसत के लगभग बराबर होता है। न्यूलैंड्स (1866) ने पाया कि हर आठवाँ तत्व पहले तत्व जैसा होता है, जैसे संगीत के स्वर (अष्टक का नियम), पर यह केवल कैल्शियम तक ही लागू हुआ। दिमित्री मेंडलीफ (1869) ने उस समय ज्ञात 63 तत्वों को बढ़ते परमाणु द्रव्यमान और समान गुणों के आधार पर व्यवस्थित किया, रिक्त स्थान छोड़े और एका-ऐलुमिनियम तथा एका-सिलिकॉन की भविष्यवाणी की, जो बाद में गैलियम और जर्मेनियम के रूप में मिले। हेनरी मोसले ने दिखाया कि परमाणु संख्या अधिक मौलिक गुण है, और आधुनिक आवर्त नियम कहता है कि तत्वों के गुण उनकी परमाणु संख्याओं के आवर्ती फलन हैं।

समूह और आवर्त

आधुनिक सारणी में 18 समूह (groups, स्तंभ) और 7 आवर्त (periods, पंक्तियाँ) हैं। एक समूह के तत्वों में संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान और गुण मिलते-जुलते होते हैं, तथा आवर्त संख्या कोशों की संख्या के बराबर होती है। आवर्त 1 में 2 तत्व हैं, आवर्त 2 और 3 में 8-8, आवर्त 4 और 5 में 18-18, तथा आवर्त 6 और 7 में 32-32। समूह 1 में क्षार धातुएँ, समूह 2 में क्षारीय मृदा धातुएँ, समूह 3 से 12 में संक्रमण धातुएँ, समूह 17 में हैलोजन (फ्लोरीन सबसे अधिक क्रियाशील अधातु है) और समूह 18 में उत्कृष्ट गैसें हैं। आवर्त में बाएँ से दाएँ परमाणु आकार और धात्विक गुण घटते हैं; समूह में ऊपर से नीचे ये बढ़ते हैं।

मुख्य तथ्य

  • प्लाज्मा (सूर्य, तारे, नियॉन साइन) द्रव्य की चौथी अवस्था है; बोस-आइंस्टीन संघनित (एस. एन. बोस और आइंस्टीन के कार्य पर आधारित, पहली बार 1995 में बना) पाँचवीं।
  • ऊर्ध्वपातन: कपूर, नैफ्थलीन, आयोडीन, अमोनियम क्लोराइड, शुष्क बर्फ। टिंडल प्रभाव कोलॉइड (दूध, कोहरा, धुआँ) में दिखता है, वास्तविक विलयन में नहीं।
  • पृथक्करण: दूध से क्रीम - अपकेंद्रण; स्याही के रंग - वर्णलेखन; पेट्रोलियम और द्रव वायु - प्रभाजी आसवन; तेल और पानी - पृथक्कारी कीप; शुद्ध कॉपर सल्फेट - क्रिस्टलीकरण।
  • खोजकर्ता: इलेक्ट्रॉन - जे. जे. थॉमसन (1897); कैनाल किरणें - गोल्डस्टीन (1886); प्रोटॉन - रदरफोर्ड; नाभिक - रदरफोर्ड (1911); कोश - बोर (1913); न्यूट्रॉन - चैडविक (1932)।
  • सोडियम: Z = 11, A = 23, अतः 12 न्यूट्रॉन; इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 1; संयोजकता 1।
  • हाइड्रोजन के समस्थानिक: प्रोटियम, ड्यूटीरियम (भारी जल D2O, मंदक) और रेडियोधर्मी ट्रिटियम; C-14 से आयु निर्धारण, Co-60 से कैंसर उपचार, I-131 से थायरॉइड रोगों का उपचार (NCERT: घेंघा), U-235 नाभिकीय ईंधन।
  • समस्थानिक: परमाणु संख्या समान, द्रव्यमान संख्या भिन्न; समभारिक: द्रव्यमान संख्या समान, परमाणु संख्या भिन्न (कैल्शियम-40 और आर्गन-40)।
  • डॉबेराइनर के त्रिक (1817), न्यूलैंड्स के अष्टक (1866), मेंडलीफ (1869: परमाणु द्रव्यमान, 63 तत्व, गैलियम और जर्मेनियम के लिए रिक्त स्थान), मोसले (परमाणु संख्या)।
  • आधुनिक सारणी: 18 समूह, 7 आवर्त; समूह 1 क्षार धातुएँ, 2 क्षारीय मृदा धातुएँ, 3 से 12 संक्रमण धातुएँ, 17 हैलोजन, 18 उत्कृष्ट गैसें; परमाणु आकार आवर्त में घटता और समूह में बढ़ता है।

एक नज़र में दोहराव

प्लाज्मा चौथी अवस्था, बोस-आइंस्टीन संघनित पाँचवीं; कपूर ऊर्ध्वपातित होता है; यौगिक में निश्चित अनुपात, मिश्रण में कोई भी अनुपात; क्रीम अपकेंद्रण से, रंग वर्णलेखन से, पेट्रोलियम प्रभाजी आसवन से; इलेक्ट्रॉन थॉमसन 1897, नाभिक रदरफोर्ड 1911, बोर के कोश 1913, न्यूट्रॉन चैडविक 1932; Z = प्रोटॉन, A = प्रोटॉन + न्यूट्रॉन; समस्थानिक समान Z, समभारिक समान A; भारी जल मंदक; मेंडलीफ 1869 परमाणु द्रव्यमान से; आधुनिक नियम परमाणु संख्या से; 18 समूह, 7 आवर्त; 17 हैलोजन, 18 उत्कृष्ट गैसें।

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