10 में से पाठ 4 · भारतीय राजव्यवस्था और संविधान

राज्य के नीति निदेशक तत्व और मौलिक कर्तव्य

AI की सहायता से तैयार किया गया और 28 अक्टूबर 2026 को तथ्यों की जाँच की गई; किसी मानव संपादक ने इसे अभी पंक्ति-दर-पंक्ति नहीं पढ़ा है। कोई गलती दिखे तो हमें बताइए। संपादकीय मानक और सुधार

निदेशक तत्वों का स्वरूप

भाग IV (अनुच्छेद 36 से 51) में राज्य के नीति निदेशक तत्व हैं, जो आयरलैंड के संविधान से लिए गए हैं। अनुच्छेद 37 कहता है कि ये किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, किंतु देश के शासन में मूलभूत हैं, और कानून बनाते समय इन्हें लागू करना राज्य का कर्तव्य है। ग्रेनविल ऑस्टिन ने मौलिक अधिकारों और निदेशक तत्वों को मिलाकर संविधान की अंतरात्मा कहा। ये 1935 के अधिनियम के 'अनुदेश-पत्र' (Instrument of Instructions) जैसे हैं। संविधान इनका वर्गीकरण नहीं करता, पर लेखक इन्हें समाजवादी, गांधीवादी और उदार-बौद्धिक समूहों में बाँटते हैं।

समाजवादी सिद्धांत

अनुच्छेद 38 राज्य से सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय पर आधारित सामाजिक व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहता है, और 44वें संशोधन (1978) द्वारा जोड़े गए खंड 38(2) के तहत आय की असमानताओं को कम करने को भी। अनुच्छेद 39 में सभी के लिए जीविका के पर्याप्त साधन, सामूहिक हित के लिए भौतिक संसाधनों का वितरण (39b), धन के संकेंद्रण की रोकथाम (39c), पुरुषों और स्त्रियों को समान कार्य के लिए समान वेतन (39d) और बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसर (39f) शामिल हैं। अनुच्छेद 39A समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता का उपबंध करता है। अनुच्छेद 41 काम, शिक्षा और बेकारी, बुढ़ापे, बीमारी तथा निःशक्तता की दशा में लोक सहायता के अधिकार से; अनुच्छेद 42 काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाओं तथा प्रसूति सहायता से; अनुच्छेद 43 निर्वाह मजदूरी से; अनुच्छेद 43A उद्योगों के प्रबंध में कर्मकारों की भागीदारी से; और अनुच्छेद 47 पोषाहार, जीवन स्तर और लोक स्वास्थ्य से संबंधित है।

गांधीवादी और उदार-बौद्धिक सिद्धांत

गांधीवादी समूह में अनुच्छेद 40 (ग्राम पंचायतों का संगठन), अनुच्छेद 43 (ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योगों को बढ़ावा), अनुच्छेद 43B (सहकारी समितियों को बढ़ावा), अनुच्छेद 46 (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और दुर्बल वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की अभिवृद्धि), अनुच्छेद 47 (स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मादक पेयों और औषधियों का प्रतिषेध) और अनुच्छेद 48 (गायों, बछड़ों और अन्य दुधारू तथा वाहक पशुओं के वध का प्रतिषेध) आते हैं। उदार-बौद्धिक समूह में अनुच्छेद 44 (समान नागरिक संहिता), अनुच्छेद 45 (6 वर्ष तक के सभी बच्चों की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा), अनुच्छेद 48 (कृषि और पशुपालन का आधुनिक वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठन), अनुच्छेद 48A (पर्यावरण, वन और वन्यजीवों की रक्षा), अनुच्छेद 49 (राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों का संरक्षण), अनुच्छेद 50 (कार्यपालिका से न्यायपालिका का पृथक्करण) और अनुच्छेद 51 (अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि) आते हैं।

भाग IV में संशोधन

42वें संशोधन (1976) ने चार निदेशक तत्व जोड़े: अनुच्छेद 39(f), अनुच्छेद 39A, अनुच्छेद 43A और अनुच्छेद 48A। 44वें संशोधन (1978) ने अनुच्छेद 38(2) जोड़ा। 86वें संशोधन (2002) ने अनुच्छेद 45 को नए रूप में लिखा: मूल रूप से यह 14 वर्ष तक के सभी बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा की बात करता था, और जब यह अनुच्छेद 21A के तहत मौलिक अधिकार बन गया, तब अनुच्छेद 45 को 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा से जोड़ दिया गया। 97वें संशोधन (2011) ने अनुच्छेद 43B जोड़ा।

मौलिक अधिकारों से टकराव

चंपकम दोरैराजन (1951) में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि निदेशक तत्व मौलिक अधिकारों के अधीन रहेंगे। गोलकनाथ (1967) में न्यायालय ने कहा कि संसद निदेशक तत्वों को लागू करने के लिए भी मौलिक अधिकारों में संशोधन नहीं कर सकती। 24वें संशोधन (1971) ने संसद की संशोधन शक्ति को पुनः स्थापित किया, और 25वें संशोधन (1971) ने अनुच्छेद 31C जोड़ा, जिसके अनुसार अनुच्छेद 39(b) और (c) को लागू करने वाले कानूनों को अनुच्छेद 14, 19 और 31 के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती थी। केशवानंद भारती (1973) ने इसे वैध माना, पर वह अंश रद्द कर दिया जो न्यायालयों को यह जाँचने से रोकता था कि कोई कानून वास्तव में उन तत्वों को लागू करता है या नहीं। 42वें संशोधन (1976) ने अनुच्छेद 31C को सभी निदेशक तत्वों तक बढ़ाया, पर मिनर्वा मिल्स (1980) ने यह विस्तार रद्द कर दिया और कहा कि मौलिक अधिकारों और निदेशक तत्वों के बीच सामंजस्य और संतुलन मूल ढाँचे का भाग है। अतः मौलिक अधिकार प्रधान हैं, सिवाय इसके कि अनुच्छेद 39(b) और (c) को लागू करने वाले कानूनों को अनुच्छेद 14 और 19 के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती।

व्यवहार में निदेशक तत्व

निदेशक तत्वों को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों में भूमि सुधार कानून, पंचायतों पर 73वाँ संशोधन (अनुच्छेद 40), विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 (अनुच्छेद 39A), पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 (अनुच्छेद 48A) और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 (अनुच्छेद 41) शामिल हैं; दंड प्रक्रिया संहिता 1973 (जिसका स्थान 1 जुलाई 2024 से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 ने ले लिया है) ने राज्य की लोक सेवाओं में न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग किया (अनुच्छेद 50)।

मौलिक कर्तव्य

केवल अनुच्छेद 51A वाला भाग IVA 42वें संशोधन (1976) द्वारा स्वर्ण सिंह समिति (1976) की सिफारिश पर जोड़ा गया; यह विचार पूर्व सोवियत संघ से लिया गया। समिति ने 8 कर्तव्य सुझाए थे, पर 10 जोड़े गए; 11वाँ कर्तव्य 86वें संशोधन (2002) से आया। नागरिकों को संविधान का पालन करना चाहिए और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का आदर करना चाहिए; स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों को संजोना चाहिए; भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करनी चाहिए; देश की रक्षा और आह्वान पर राष्ट्र की सेवा करनी चाहिए; समरसता बढ़ानी चाहिए और स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध प्रथाओं का त्याग करना चाहिए; हमारी सामासिक संस्कृति की विरासत को बचाना चाहिए; प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए और प्राणिमात्र के प्रति दया रखनी चाहिए; वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना विकसित करनी चाहिए; सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करनी चाहिए और हिंसा से दूर रहना चाहिए; हर क्षेत्र में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का प्रयास करना चाहिए; और माता-पिता या संरक्षक के रूप में 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा के अवसर देने चाहिए। ये कर्तव्य केवल नागरिकों पर लागू होते हैं और सीधे प्रवर्तनीय नहीं हैं, यद्यपि राष्ट्र गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 जैसे कानून इनमें से कुछ को लागू करते हैं, जैसा वर्मा समिति (1999) ने बताया।

मुख्य तथ्य

  • अनुच्छेद 37: नीति निदेशक तत्व किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं, किंतु देश के शासन में मूलभूत हैं।
  • 42वें संशोधन (1976) ने चार निदेशक तत्व जोड़े: 39(f) बच्चों का स्वस्थ विकास, 39A निःशुल्क विधिक सहायता, 43A प्रबंध में कर्मकारों की भागीदारी, 48A पर्यावरण, वन और वन्यजीव।
  • अनुच्छेद 40 ग्राम पंचायत, अनुच्छेद 44 समान नागरिक संहिता, अनुच्छेद 48 पशुधन और आधुनिक कृषि, अनुच्छेद 50 कार्यपालिका से न्यायपालिका का पृथक्करण, अनुच्छेद 51 अंतरराष्ट्रीय शांति।
  • 86वें संशोधन (2002) के बाद अनुच्छेद 45: 6 वर्ष तक प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा; 6-14 वर्ष की शिक्षा अनुच्छेद 21A में चली गई।
  • 97वाँ संशोधन (2011): अनुच्छेद 43B (सहकारी समितियों को बढ़ावा) और साथ ही अनुच्छेद 19 में सहकारी समितियाँ बनाने की स्वतंत्रता।
  • मिनर्वा मिल्स (1980): मौलिक अधिकारों और निदेशक तत्वों के बीच सामंजस्य और संतुलन मूल विशेषता है; 42वें संशोधन द्वारा किया गया अनुच्छेद 31C का विस्तार रद्द।
  • भाग IV के बाहर निदेशक तत्व: अनुच्छेद 335 (सेवाओं में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के दावे), अनुच्छेद 350A (प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा), अनुच्छेद 351 (हिंदी भाषा का विकास)।
  • मौलिक कर्तव्य: भाग IVA में अनुच्छेद 51A, स्वर्ण सिंह समिति की सलाह पर 1976 में जोड़ा गया; मूल रूप से 10, 11वाँ कर्तव्य (6-14 वर्ष के बच्चों की शिक्षा) 2002 में जुड़ा।
  • कर्तव्य (g): वनों, झीलों, नदियों और वन्यजीवों सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा; कर्तव्य (h): वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास।
  • स्रोत: नीति निदेशक तत्व आयरलैंड से; मौलिक कर्तव्य पूर्व सोवियत संघ से; मौलिक कर्तव्य केवल नागरिकों पर लागू होते हैं।

एक नज़र में दोहराव

नीति निदेशक तत्व भाग IV अनु. 36-51, आयरलैंड से, अनु. 37 न्यायालय में अप्रवर्तनीय; समाजवादी (38, 39, 39A, 41, 42, 43, 43A, 47), गांधीवादी (40, 43, 43B, 46, 47, 48), उदार-बौद्धिक (44, 45, 48, 48A, 49, 50, 51); 42वें संशोधन ने 39(f), 39A, 43A, 48A जोड़े; चंपकम 1951, गोलकनाथ 1967, केशवानंद 1973, मिनर्वा मिल्स 1980; मौलिक कर्तव्य अनु. 51A, स्वर्ण सिंह समिति 1976, 11वाँ कर्तव्य 86वें संशोधन 2002 से।

इस विषय का अभ्यास करें

भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के सभी 10 पाठ