10 में से पाठ 1 · भारतीय राजव्यवस्था और संविधान
संविधान का निर्माण: संविधान सभा, समितियाँ और स्रोत
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माँग से सभा तक
भारत के लिए संविधान सभा का विचार सबसे पहले 1934 में एम.एन. रॉय ने रखा था, और कांग्रेस ने 1935 में औपचारिक रूप से संविधान सभा की माँग की। अंग्रेजों ने 1940 के अगस्त प्रस्ताव में इस माँग को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार किया, पर सभा का गठन अंततः 1946 की कैबिनेट मिशन योजना के अंतर्गत हुआ। इसमें 389 सदस्य होने थे: 296 ब्रिटिश भारत से और 93 देसी रियासतों से, यानी लगभग हर दस लाख की आबादी पर एक सीट। प्रांतों के सदस्य प्रांतीय विधान सभाओं द्वारा एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति से अप्रत्यक्ष रूप से चुने गए। जुलाई-अगस्त 1946 के चुनावों में कांग्रेस ने 208 और मुस्लिम लीग ने 73 सीटें जीतीं।
सत्र और समय-रेखा
सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई, जिसमें 211 सदस्य उपस्थित थे, क्योंकि मुस्लिम लीग ने इसका बहिष्कार किया। सबसे वयोवृद्ध सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा अस्थायी अध्यक्ष बने और 11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्थायी अध्यक्ष चुने गए; एच.सी. मुखर्जी उपाध्यक्ष और बी.एन. राव संवैधानिक सलाहकार रहे। जवाहरलाल नेहरू ने 13 दिसंबर 1946 को उद्देश्य प्रस्ताव पेश किया, जिसे 22 जनवरी 1947 को स्वीकार किया गया। भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 ने सभा को पूर्ण संप्रभु निकाय बना दिया और यह स्वतंत्र भारत की पहली संसद भी बनी; विधायिका के रूप में बैठने पर इसकी अध्यक्षता जी.वी. मावलंकर करते थे। विभाजन के बाद इसकी सदस्य संख्या घटकर 299 रह गई। सभा ने 22 जुलाई 1947 को राष्ट्रीय ध्वज अपनाया, और 24 जनवरी 1950 को राष्ट्रगान तथा राष्ट्रीय गीत अपनाए और डॉ. राजेंद्र प्रसाद को प्रथम राष्ट्रपति चुना।
पाठ का प्रारूपण
29 अगस्त 1947 को गठित प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. बी.आर. अंबेडकर थे। इसके अन्य छह सदस्य थे: एन. गोपालस्वामी आयंगर, अल्लादि कृष्णास्वामी अय्यर, के.एम. मुंशी, सैयद मोहम्मद सादुल्ला, एन. माधव राव (जिन्होंने बी.एल. मित्तर का स्थान लिया) और टी.टी. कृष्णमाचारी (जिन्होंने 1948 में डी.पी. खेतान के निधन के बाद उनका स्थान लिया)। पहला प्रारूप फरवरी 1948 में प्रकाशित हुआ, और तीन वाचनों के बाद संविधान 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत किया गया; 24 जनवरी 1950 को 284 सदस्यों ने इस पर हस्ताक्षर किए। 11 सत्रों में सभा को लगभग तीन वर्ष लगे: अधिकतर परीक्षा पुस्तकों के अनुसार 2 वर्ष, 11 माह और 18 दिन, जिनमें पहला और अंतिम दोनों दिन गिने जाते हैं (अन्यथा 17 दिन), और इसने प्रारूप पर 114 दिन विचार किया। अंबेडकर को भारतीय संविधान का जनक कहा जाता है, और प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा ने इसका मूल अंग्रेज़ी पाठ हाथ से लिखा।
अन्य प्रमुख समितियाँ और उनके अध्यक्ष
जवाहरलाल नेहरू संघ शक्ति समिति, संघ संविधान समिति और देसी रियासतों से वार्ता के लिए बनी राज्य समिति के अध्यक्ष थे। सरदार वल्लभभाई पटेल प्रांतीय संविधान समिति तथा मौलिक अधिकारों, अल्पसंख्यकों और जनजातीय एवं अपवर्जित क्षेत्रों संबंधी सलाहकार समिति के अध्यक्ष थे; इसके अधीन जे.बी. कृपलानी मौलिक अधिकार उप-समिति और एच.सी. मुखर्जी अल्पसंख्यक उप-समिति के प्रमुख थे। डॉ. राजेंद्र प्रसाद प्रक्रिया नियम समिति, संचालन समिति और राष्ट्रीय ध्वज संबंधी तदर्थ समिति के अध्यक्ष थे, तथा के.एम. मुंशी कार्यसूची समिति (Order of Business Committee) के अध्यक्ष थे।
संविधान का प्रारंभ
नागरिकता और निर्वाचन जैसे कुछ उपबंध 26 नवंबर 1949 को ही लागू हो गए; यह तिथि 2015 से संविधान दिवस के रूप में मनाई जाती है। शेष संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ, क्योंकि 1930 में इसी दिन कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज दिवस मनाया था। अनुच्छेद 395 ने भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 और भारत शासन अधिनियम 1935 को निरसित किया।
देशवार स्रोत
सबसे बड़ा एकल स्रोत भारत शासन अधिनियम 1935 था: संघीय योजना, राज्यपाल का पद, न्यायपालिका, लोक सेवा आयोग और आपातकालीन उपबंध। ब्रिटेन से संसदीय शासन, विधि का शासन, एकल नागरिकता, मंत्रिमंडल प्रणाली, परमाधिकार रिट और द्विसदनीय व्यवस्था मिली। अमेरिका से मौलिक अधिकार, न्यायिक पुनर्विलोकन, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, राष्ट्रपति पर महाभियोग, न्यायाधीशों को हटाने की व्यवस्था और उपराष्ट्रपति का पद लिया गया। आयरलैंड से राज्य के नीति निदेशक तत्व, राष्ट्रपति की निर्वाचन पद्धति और राज्य सभा में मनोनयन आए। कनाडा से सशक्त केंद्र वाला संघ, केंद्र में अवशिष्ट शक्तियाँ, केंद्र द्वारा राज्यपालों की नियुक्ति और सर्वोच्च न्यायालय का परामर्शी क्षेत्राधिकार लिया गया। ऑस्ट्रेलिया से समवर्ती सूची, व्यापार और वाणिज्य की स्वतंत्रता तथा संयुक्त बैठक आई। जर्मनी के वाइमर संविधान से आपातकाल में मौलिक अधिकारों का निलंबन, पूर्व सोवियत संघ से मौलिक कर्तव्य, फ्रांस से गणतंत्र तथा स्वतंत्रता, समता और बंधुता के आदर्श, दक्षिण अफ्रीका से संविधान संशोधन की प्रक्रिया और जापान से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया ली गई।
भाग और अनुसूचियाँ
मूल संविधान में एक उद्देशिका, 22 भागों में 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियाँ थीं। नए अनुच्छेद अक्षर जोड़कर (21A, 51A, 243A) डाले जाते हैं, इसलिए अंतिम अनुच्छेद आज भी 395 ही है; भाग भी जोड़े और हटाए गए हैं, और 97वें संशोधन (2011) के बाद भागों की संख्या 25 हो गई। चार अनुसूचियाँ बाद में जोड़ी गईं: नौवीं (पहला संशोधन, 1951, चुनौती से संरक्षित कानून), दसवीं (52वाँ संशोधन, 1985, दल-बदल विरोधी), ग्यारहवीं (73वाँ संशोधन, 1992, पंचायतें) और बारहवीं (74वाँ संशोधन, 1992, नगरपालिकाएँ)। पहली अनुसूची में राज्य और संघ राज्यक्षेत्र हैं, दूसरी में उच्च पदधारियों की परिलब्धियाँ, तीसरी में शपथ के प्रारूप, चौथी में राज्य सभा की सीटों का आवंटन, पाँचवीं और छठी में अनुसूचित क्षेत्रों और जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन (छठी असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम के लिए), सातवीं में तीनों सूचियाँ और आठवीं में भाषाएँ।
मुख्य तथ्य
- कैबिनेट मिशन योजना 1946 के अंतर्गत संविधान सभा: 389 सीटें (ब्रिटिश भारत 296, देसी रियासतें 93); विभाजन के बाद सदस्य संख्या 299 रह गई।
- पहली बैठक 9 दिसंबर 1946, 211 सदस्य उपस्थित, अस्थायी अध्यक्ष सच्चिदानंद सिन्हा; 11 दिसंबर 1946 को राजेंद्र प्रसाद स्थायी अध्यक्ष चुने गए।
- उद्देश्य प्रस्ताव: नेहरू ने 13 दिसंबर 1946 को पेश किया, 22 जनवरी 1947 को स्वीकृत; यही उद्देशिका का आधार बना।
- प्रारूप समिति: 29 अगस्त 1947 को गठित, सात सदस्य, अध्यक्ष बी.आर. अंबेडकर; बी.एन. राव सभा के संवैधानिक सलाहकार थे।
- समितियों के अध्यक्ष: नेहरू - संघ शक्ति, संघ संविधान और राज्य समिति; पटेल - प्रांतीय संविधान और सलाहकार समिति; राजेंद्र प्रसाद - प्रक्रिया नियम और संचालन समिति।
- 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत (2015 से संविधान दिवस); 24 जनवरी 1950 को 284 सदस्यों के हस्ताक्षर; 26 जनवरी 1950 को लागू; कुल 11 सत्र।
- उधार लिए गए प्रावधान: अमेरिका - मौलिक अधिकार, न्यायिक पुनर्विलोकन; आयरलैंड - नीति निदेशक तत्व; कनाडा - केंद्र में अवशिष्ट शक्तियाँ; ऑस्ट्रेलिया - समवर्ती सूची; वाइमर जर्मनी - आपातकाल में अधिकारों का निलंबन; दक्षिण अफ्रीका - संशोधन प्रक्रिया।
- बाद में जुड़ी अनुसूचियाँ: नौवीं (1951, पहला संशोधन), दसवीं (1985, दल-बदल विरोधी), ग्यारहवीं (1992, पंचायतें, 29 विषय), बारहवीं (1992, नगरपालिकाएँ, 18 विषय)।
- विधायिका (डोमिनियन संसद) के रूप में सभा की अध्यक्षता जी.वी. मावलंकर ने की; सभा ने 22 जुलाई 1947 को राष्ट्रीय ध्वज अपनाया।
- प्रमुख भाग: III मौलिक अधिकार, IV नीति निदेशक तत्व, IVA मौलिक कर्तव्य, V संघ, VI राज्य, IX पंचायतें, IXA नगरपालिकाएँ, XVIII आपात उपबंध, XX संविधान संशोधन (अनुच्छेद 368)।
एक नज़र में दोहराव
विचार: एम.एन. रॉय 1934; कैबिनेट मिशन 1946, 389 सीटें; पहली बैठक 9 दिसंबर 1946; राजेंद्र प्रसाद अध्यक्ष; उद्देश्य प्रस्ताव 13 दिसंबर 1946; प्रारूप समिति 29 अगस्त 1947, अध्यक्ष अंबेडकर; 11 सत्र; 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत, 26 जनवरी 1950 को लागू; मूल रूप से 395 अनुच्छेद, 22 भाग, 8 अनुसूचियाँ; भारत शासन अधिनियम 1935 सबसे बड़ा स्रोत; मौलिक अधिकार अमेरिका, नीति निदेशक तत्व आयरलैंड, समवर्ती सूची ऑस्ट्रेलिया, अवशिष्ट शक्तियाँ कनाडा से।