10 में से पाठ 2 · भारतीय राजव्यवस्था और संविधान
उद्देशिका, संघ और उसका राज्यक्षेत्र (अनुच्छेद 1-4) तथा नागरिकता (अनुच्छेद 5-11)
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उद्देशिका क्या कहती है
उद्देशिका 'हम, भारत के लोग' शब्दों से आरंभ होती है, जो दर्शाता है कि संविधान का अधिकार-स्रोत जनता है। यह भारत को संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य घोषित करती है और सभी नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय; विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता; प्रतिष्ठा और अवसर की समता; तथा व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता का वचन देती है। इसके अंत में अंगीकरण की तिथि 26 नवंबर 1949 दी गई है। न्याय का आदर्श रूसी क्रांति से और स्वतंत्रता, समता तथा बंधुता के आदर्श फ्रांसीसी क्रांति से लिए गए।
इसकी स्थिति और एकमात्र संशोधन
उद्देशिका नेहरू के उद्देश्य प्रस्ताव पर आधारित है। बेरुबारी संघ संदर्भ (1960) में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि यह संविधान का भाग नहीं है, पर केशवानंद भारती (1973) में न्यायालय ने इसे संविधान का भाग माना, अतः मूल ढाँचे को छुए बिना अनुच्छेद 368 के तहत इसमें संशोधन हो सकता है। इसमें केवल एक बार संशोधन हुआ है, 42वें संशोधन (1976) द्वारा, जिसने समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता शब्द जोड़े। यह न्यायालय में प्रवर्तनीय नहीं है और न शक्ति का स्रोत है, न शक्ति पर प्रतिबंध, किंतु किसी अनुच्छेद के अस्पष्ट होने पर यह व्याख्या में मार्गदर्शन करती है। के.एम. मुंशी ने इसे संविधान की राजनीतिक जन्मकुंडली कहा।
राज्यों का संघ
अनुच्छेद 1 कहता है कि भारत, अर्थात् इंडिया, राज्यों का संघ होगा। अंबेडकर ने स्पष्ट किया कि 'संघ' शब्द का अर्थ है कि यह संघ राज्यों के किसी समझौते से नहीं बना और कोई राज्य इससे अलग नहीं हो सकता। अनुच्छेद 2 संसद को नए राज्यों को संघ में प्रवेश देने या उनकी स्थापना करने की शक्ति देता है; सिक्किम 35वें संशोधन (1974) से सहयोगी राज्य और 36वें संशोधन (1975) से पूर्ण राज्य बना। अनुच्छेद 3 के तहत संसद साधारण बहुमत से कानून बनाकर नया राज्य बना सकती है या किसी राज्य का क्षेत्र, सीमाएँ या नाम बदल सकती है; ऐसे विधेयक के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश आवश्यक है, और राष्ट्रपति उसे संबंधित राज्य विधानमंडल के पास राय के लिए भेजते हैं, जो बाध्यकारी नहीं होती। अनुच्छेद 4 कहता है कि ऐसे कानून अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संविधान संशोधन नहीं माने जाएँगे। परंतु भारतीय क्षेत्र किसी विदेशी देश को सौंपने के लिए संविधान संशोधन आवश्यक है (बेरुबारी, 1960), इसीलिए 9वाँ संशोधन (1960) और बांग्लादेश के साथ भूमि सीमा समझौते पर 100वाँ संशोधन (2015) पारित किए गए।
राज्यों का पुनर्गठन
1950 में संविधान लागू होने के समय राज्य भाग A, B, C और D श्रेणियों में बँटे थे। एस.के. धर आयोग (1948) ने भाषा के बजाय प्रशासनिक सुविधा को प्राथमिकता दी, और जवाहरलाल नेहरू, वल्लभभाई पटेल और पट्टाभि सीतारमैया की जेवीपी समिति ने भी 1949 में भाषा को आधार मानने से इनकार किया। दिसंबर 1952 में आमरण अनशन के दौरान पोट्टि श्रीरामुलु की मृत्यु के बाद 1 अक्टूबर 1953 को आंध्र राज्य पहले भाषायी राज्य के रूप में बना। दिसंबर 1953 में फज़ल अली की अध्यक्षता में राज्य पुनर्गठन आयोग बना, जिसके सदस्य के.एम. पणिक्कर और एच.एन. कुंजरू थे; 1955 में इसने भाषा को व्यापक आधार माना, पर 'एक भाषा, एक राज्य' के सिद्धांत को अस्वीकार किया। राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 और 7वें संशोधन (1956) ने चारों श्रेणियाँ समाप्त कर 1 नवंबर 1956 से 14 राज्य और 6 संघ राज्यक्षेत्र बनाए।
संविधान में नागरिकता
भाग II (अनुच्छेद 5 से 11) केवल यह बताता है कि 26 जनवरी 1950 को कौन नागरिक बना: भारत में अधिवास रखने वाले व्यक्ति (अनुच्छेद 5), पाकिस्तान से आए प्रवासी (अनुच्छेद 6), पाकिस्तान जाकर पुनर्वास परमिट पर लौटे व्यक्ति (अनुच्छेद 7) और विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्ति (अनुच्छेद 8)। अनुच्छेद 9 के अनुसार स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता लेने पर भारतीय नागरिकता समाप्त हो जाती है, और अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता के नियमन की पूर्ण शक्ति देता है। भारत में ब्रिटेन से ली गई एकल नागरिकता है, और कुछ अधिकार केवल नागरिकों को प्राप्त हैं, जैसे अनुच्छेद 15, 16, 19, 29 और 30 के अधिकार।
1955 के अधिनियम के तहत नागरिकता प्राप्त करना
नागरिकता अधिनियम 1955 पाँच तरीके बताता है। जन्म द्वारा: 26 जनवरी 1950 से 30 जून 1987 तक भारत में जन्मा व्यक्ति, माता-पिता की राष्ट्रीयता चाहे जो हो, नागरिक है; 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 तक जन्मा व्यक्ति तब, जब माता-पिता में से कोई एक नागरिक हो; और 3 दिसंबर 2004 को या उसके बाद जन्मा व्यक्ति तब, जब माता-पिता दोनों नागरिक हों, या एक नागरिक हो और दूसरा अवैध प्रवासी न हो। वंश द्वारा: विदेश में भारतीय माता या पिता से जन्म, पंजीकरण की शर्त के साथ। पंजीकरण द्वारा: भारतीय मूल के व्यक्ति, नागरिकों के पति या पत्नी और ऐसी ही अन्य श्रेणियाँ। देशीकरण द्वारा: ऐसा विदेशी जो आवेदन से ठीक पहले 12 महीने और उससे पहले के 14 वर्षों में से 11 वर्ष भारत में रहा हो; नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019 यह उपबंध करता है कि अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई प्रवासियों को अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा, और उनके लिए 11 वर्ष की यह अवधि घटाकर 5 वर्ष करता है। क्षेत्र के समावेश द्वारा, जैसे गोवा के भारत का भाग बनने पर।
नागरिकता की समाप्ति
परित्याग स्वैच्छिक है: वयस्क नागरिक घोषणा करता है, और उसकी अवयस्क संतान भी नागरिकता खो देती है, पर 18 वर्ष की होने के एक वर्ष के भीतर उसे पुनः प्राप्त कर सकती है। पर्यवसान स्वतः होता है, जब कोई नागरिक स्वेच्छा से दूसरे देश की नागरिकता ले लेता है, सिवाय उस युद्ध के दौरान जिसमें भारत संलग्न हो। वंचन का अर्थ है पंजीकरण या देशीकरण से प्राप्त नागरिकता को केंद्र सरकार द्वारा अनिवार्य रूप से समाप्त करना, जिसके कारण हैं: धोखाधड़ी, संविधान के प्रति निष्ठाहीनता, युद्ध में शत्रु की सहायता, पंजीकरण या देशीकरण के 5 वर्ष के भीतर 2 वर्ष का कारावास, या लगातार 7 वर्ष तक विदेश में निवास।
मुख्य तथ्य
- उद्देशिका में केवल एक बार संशोधन: 42वें संशोधन (1976) ने समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता शब्द जोड़े।
- क्या उद्देशिका संविधान का भाग है? बेरुबारी संघ 1960 - नहीं; केशवानंद भारती 1973 और एलआईसी ऑफ इंडिया 1995 - हाँ।
- अनुच्छेद 1: भारत, अर्थात् इंडिया, राज्यों का संघ होगा; 'संघ' इसलिए कि कोई राज्य अलग नहीं हो सकता और यह संघ राज्यों के समझौते से नहीं बना।
- अनुच्छेद 3 का कानून (नया राज्य, क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन): साधारण बहुमत, राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश, राज्य विधानमंडल की राय बाध्यकारी नहीं; अनुच्छेद 4: यह अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन नहीं।
- पहला भाषायी राज्य: आंध्र राज्य, 1 अक्टूबर 1953, दिसंबर 1952 में आमरण अनशन के दौरान पोट्टि श्रीरामुलु की मृत्यु के बाद।
- राज्य पुनर्गठन आयोग (1953-55): फज़ल अली, के.एम. पणिक्कर, एच.एन. कुंजरू; 1956 के अधिनियम और 7वें संशोधन से 1 नवंबर 1956 को 14 राज्य और 6 संघ राज्यक्षेत्र बने।
- बाद में बने राज्य: महाराष्ट्र और गुजरात 1960, नागालैंड 1963, हरियाणा 1966, हिमाचल प्रदेश 1971, मणिपुर, त्रिपुरा और मेघालय 1972, सिक्किम 1975, मिज़ोरम, अरुणाचल प्रदेश और गोवा 1987, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और झारखंड 2000, तेलंगाना 2014।
- नागरिकता अधिनियम 1955: प्राप्त करने के पाँच तरीके (जन्म, वंश, पंजीकरण, देशीकरण, क्षेत्र का समावेश) और खोने के तीन तरीके (परित्याग, पर्यवसान, वंचन)।
- केवल नागरिकों के अधिकार: अनुच्छेद 15, 16, 19, 29 और 30; अनुच्छेद 9: स्वेच्छा से विदेशी नागरिकता लेने पर भारतीय नागरिकता समाप्त; भारत की प्रवासी नागरिकता (OCI, 2005) दोहरी नागरिकता नहीं है।
- जन्म द्वारा नागरिकता की सीमा-तिथियाँ: 26 जनवरी 1950 से 30 जून 1987 तक भारत में जन्म - माता-पिता की राष्ट्रीयता चाहे जो हो, नागरिक; 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 तक - माता-पिता में से कोई एक नागरिक हो; 3 दिसंबर 2004 या उसके बाद - माता-पिता दोनों नागरिक, या एक नागरिक और दूसरा अवैध प्रवासी नहीं।
एक नज़र में दोहराव
उद्देशिका: संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य; न्याय, स्वतंत्रता, समता, बंधुता; 42वाँ संशोधन 1976 इसका एकमात्र संशोधन; केशवानंद 1973: संविधान का भाग; अनु. 1 राज्यों का संघ; अनु. 3 नए राज्य साधारण बहुमत से, अनु. 4 अनु. 368 का संशोधन नहीं; आंध्र 1953 पहला भाषायी राज्य; राज्य पुनर्गठन आयोग फज़ल अली 1953-55; 1 नवंबर 1956 को 14 राज्य, 6 संघ राज्यक्षेत्र; अनु. 5-11 नागरिकता; 1955 अधिनियम: प्राप्ति के 5, समाप्ति के 3 तरीके।