10 में से पाठ 10 · भारतीय राजव्यवस्था और संविधान
पंचायतें, नगरपालिकाएँ तथा संवैधानिक और गैर-संवैधानिक निकाय
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73वाँ संशोधन, ढाँचा
73वाँ संशोधन अधिनियम 1992, 24 अप्रैल 1993 को लागू हुआ; यह तिथि राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के रूप में मनाई जाती है। इसने भाग IX, 'पंचायतें' (अनुच्छेद 243 से 243O), और 29 विषयों वाली ग्यारहवीं अनुसूची (अनुच्छेद 243G) जोड़ी, जिससे एल.एम. सिंघवी समिति (1986) की सिफारिश के अनुसार पंचायतों को संवैधानिक दर्जा मिला। गाँव के सभी पंजीकृत मतदाताओं की ग्राम सभा इसका आधार है (अनुच्छेद 243A)। ग्राम, मध्यवर्ती और जिला, ये तीन स्तर अनिवार्य हैं, पर 20 लाख से अधिक जनसंख्या न रखने वाला राज्य मध्यवर्ती स्तर छोड़ सकता है (अनुच्छेद 243B)। सभी सदस्य प्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं, मध्यवर्ती और जिला स्तर के अध्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से, और चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु 21 वर्ष है।
आरक्षण, कार्यकाल और सहायक निकाय
अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें आरक्षित हैं, और सभी सीटों तथा अध्यक्ष पदों में से कम से कम एक-तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षित हैं (अनुच्छेद 243D); पिछड़े वर्गों का आरक्षण राज्यों पर छोड़ा गया है। प्रत्येक पंचायत का कार्यकाल 5 वर्ष है, और समय से पहले विघटन होने पर 6 महीने के भीतर चुनाव कराने होते हैं (अनुच्छेद 243E)। राज्यपाल द्वारा नियुक्त और केवल उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की तरह हटाया जा सकने वाला राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कराता है (अनुच्छेद 243K), और हर 5 वर्ष पर गठित राज्य वित्त आयोग पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है (अनुच्छेद 243I)। भाग IX नागालैंड, मेघालय, मिज़ोरम और अनुसूचित तथा जनजातीय क्षेत्रों पर लागू नहीं होता, पर PESA अधिनियम 1996 ने इसे संशोधनों के साथ पाँचवीं अनुसूची के क्षेत्रों तक बढ़ाया। 29 विषयों में कृषि, पेयजल, ग्रामीण सड़कें, प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा, तथा स्वास्थ्य और स्वच्छता शामिल हैं।
74वाँ संशोधन, शहरी निकाय
74वाँ संशोधन अधिनियम 1992, 1 जून 1993 को लागू हुआ और इसने भाग IXA, 'नगरपालिकाएँ' (अनुच्छेद 243P से 243ZG), और 18 विषयों वाली बारहवीं अनुसूची (अनुच्छेद 243W) जोड़ी। अनुच्छेद 243Q ग्रामीण से शहरी में बदल रहे क्षेत्र के लिए नगर पंचायत, छोटे शहरी क्षेत्र के लिए नगरपालिका परिषद और बड़े शहरी क्षेत्र के लिए नगर निगम का उपबंध करता है। 3 लाख या अधिक जनसंख्या वाली नगरपालिकाओं में वार्ड समितियाँ अनिवार्य हैं (अनुच्छेद 243S)। आरक्षण, 5 वर्ष का कार्यकाल, राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य वित्त आयोग पंचायतों की तरह ही लागू होते हैं। अनुच्छेद 243ZD जिला योजना समिति का और अनुच्छेद 243ZE 10 लाख या अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों के लिए महानगर योजना समिति का उपबंध करता है। 18 विषयों में नगर नियोजन, जल आपूर्ति, अग्निशमन सेवाएँ, गंदी बस्तियों का सुधार, और जन्म तथा मृत्यु का पंजीकरण शामिल हैं।
निर्वाचन आयोग और लोक सेवा आयोग
25 जनवरी 1950 को स्थापित निर्वाचन आयोग (अनुच्छेद 324), जिसका स्थापना दिवस अब राष्ट्रीय मतदाता दिवस है, संसद, राज्य विधानमंडलों और राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति के पदों के चुनाव कराता है, पर स्थानीय निकायों के नहीं। 1989 तक यह एक-सदस्यीय निकाय था, 1989-90 में थोड़े समय के लिए इसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त के अलावा दो निर्वाचन आयुक्त रहे, और 1993 से यह तीन-सदस्यीय निकाय (एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो निर्वाचन आयुक्त) है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त को केवल सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की तरह हटाया जा सकता है, और अन्य निर्वाचन आयुक्तों को केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश पर; इनका कार्यकाल संविधान नहीं, बल्कि कानून तय करता है: 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले पूरी हो। सुकुमार सेन प्रथम मुख्य निर्वाचन आयुक्त थे। संघ लोक सेवा आयोग (अनुच्छेद 315 से 323) अखिल भारतीय और केंद्रीय सेवाओं की परीक्षाएँ कराता है और भर्ती, पदोन्नति तथा अनुशासन पर सलाह देता है; इसके सदस्य राष्ट्रपति द्वारा 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक के लिए नियुक्त होते हैं और कदाचार के आधार पर केवल सर्वोच्च न्यायालय की जाँच के बाद हटाए जा सकते हैं (अनुच्छेद 317)। राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्य राज्यपाल द्वारा नियुक्त होते हैं, पर केवल राष्ट्रपति उन्हें हटा सकते हैं, और वे 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु तक सेवा करते हैं।
CAG और राष्ट्रीय आयोग
भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (अनुच्छेद 148 से 151) की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं, उन्हें केवल सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की तरह हटाया जा सकता है, और CAG अधिनियम 1971 के तहत वे 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक पद पर रहते हैं; पद छोड़ने के बाद वे कोई सरकारी पद नहीं ले सकते। CAG संघ और राज्यों के लेखाओं की लेखापरीक्षा करते हैं और संघ की रिपोर्ट राष्ट्रपति को देते हैं, जो उन्हें संसद के समक्ष रखवाते हैं, तथा राज्यों की रिपोर्ट राज्यपालों को (अनुच्छेद 151); लोक लेखा समिति इन रिपोर्टों की जाँच करती है, इसलिए CAG को उसका मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक कहा जाता है। 65वें संशोधन (1990) ने अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए एक संयुक्त राष्ट्रीय आयोग बनाया, जिसे 89वें संशोधन (2003) ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (अनुच्छेद 338) और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (अनुच्छेद 338A) में बाँट दिया। 102वें संशोधन (2018) ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया (अनुच्छेद 338B)।
सांविधिक और कार्यकारी निकाय
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 के तहत 12 अक्टूबर 1993 को हुई; इसके अध्यक्ष भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश या, अधिनियम में 2019 के संशोधन के बाद से, सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश होते हैं, इसे सिविल न्यायालय की शक्तियाँ प्राप्त हैं, पर इसकी सिफारिशें बाध्यकारी नहीं हैं। केंद्रीय सतर्कता आयोग 1964 में संथानम समिति की सलाह पर एक कार्यकारी संकल्प से बना और CVC अधिनियम 2003 से सांविधिक बना। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) 1963 में गृह मंत्रालय के संकल्प से बना; यह सांविधिक निकाय नहीं है और अपनी शक्तियाँ दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम 1946 से प्राप्त करता है। लोकपाल का गठन लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 2013 से हुआ, जो 16 जनवरी 2014 से लागू है; इसमें एक अध्यक्ष और अधिकतम 8 सदस्य होते हैं, जिनमें आधे न्यायिक सदस्य होते हैं; प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग ने 1966 में लोकपाल का प्रस्ताव किया था, और महाराष्ट्र अपने 1971 के अधिनियम के तहत लोकायुक्त स्थापित करने वाला पहला राज्य बना (ओडिशा ने ऐसा कानून 1970 में ही पारित कर दिया था, पर वह 1983 में ही लागू हो सका)।
मुख्य तथ्य
- 73वाँ संशोधन: 24 अप्रैल 1993 से लागू (राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस); भाग IX, अनुच्छेद 243-243O; ग्यारहवीं अनुसूची, 29 विषय।
- 74वाँ संशोधन: 1 जून 1993 से लागू; भाग IXA, अनुच्छेद 243P-243ZG; बारहवीं अनुसूची, 18 विषय।
- पंचायत नियम: तीन स्तर (20 लाख या कम जनसंख्या वाले राज्य में मध्यवर्ती स्तर वैकल्पिक), न्यूनतम आयु 21, एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए, कार्यकाल 5 वर्ष, विघटन के 6 महीने के भीतर चुनाव।
- राज्य निर्वाचन आयोग (अनुच्छेद 243K) और राज्य वित्त आयोग (अनुच्छेद 243I) पंचायतों और नगरपालिकाओं दोनों के लिए कार्य करते हैं; वित्त आयोग (अनुच्छेद 280) भी इनकी निधि बढ़ाने के उपाय सुझाता है।
- शहरी निकाय: नगर पंचायत (संक्रमणशील क्षेत्र), नगरपालिका परिषद (छोटा शहरी क्षेत्र), नगर निगम (बड़ा शहरी क्षेत्र); वार्ड समितियाँ 3 लाख पर, महानगर योजना समिति 10 लाख जनसंख्या पर।
- निर्वाचन आयोग: अनुच्छेद 324, 25 जनवरी 1950 को स्थापित (राष्ट्रीय मतदाता दिवस); मुख्य निर्वाचन आयुक्त को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की तरह हटाया जाता है; प्रथम मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुकुमार सेन।
- संघ लोक सेवा आयोग (अनुच्छेद 315): कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु; राज्य लोक सेवा आयोग: 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु, सदस्य राज्यपाल द्वारा नियुक्त पर केवल राष्ट्रपति द्वारा हटाए जा सकते हैं।
- CAG (अनुच्छेद 148): 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की तरह हटाए जाते हैं; रिपोर्ट अनुच्छेद 151 के तहत; लोक लेखा समिति के मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक।
- राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग अनुच्छेद 338, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग अनुच्छेद 338A (89वें संशोधन, 2003 से अलग); राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग अनुच्छेद 338B (102वाँ संशोधन, 2018)।
- गैर-संवैधानिक निकाय: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (1993 अधिनियम), केंद्रीय सतर्कता आयोग (1964, 2003 से सांविधिक), CBI (1963, शक्तियाँ DSPE अधिनियम 1946 से), लोकपाल (2013 अधिनियम), नीति आयोग (2015)।
एक नज़र में दोहराव
73वाँ संशोधन 1992 (24 अप्रैल 1993 से लागू): भाग IX, अनु. 243-243O, ग्यारहवीं अनुसूची 29 विषय; 74वाँ (1 जून 1993): भाग IXA, अनु. 243P-243ZG, बारहवीं अनुसूची 18 विषय; महिलाओं को एक-तिहाई; राज्य निर्वाचन आयोग 243K, राज्य वित्त आयोग 243I; निर्वाचन आयोग अनु. 324; संघ लोक सेवा आयोग अनु. 315-323; CAG अनु. 148-151; अनुसूचित जाति आयोग 338, अनुसूचित जनजाति आयोग 338A; मानवाधिकार आयोग 1993, केंद्रीय सतर्कता आयोग 1964 (2003 से सांविधिक), CBI 1963, लोकपाल 2013 अधिनियम।